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छठ पूजा के बजट में कमी से समितियां नाराज, प्रशासन पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 18 नवंबर: राजधानी दिल्ली में एक बार जहां छठ पर्व को लेकर दिल्ली सरकार छठ घाटों की संख्या में बढ़ोतरी का दावा तो कर रही है, वहीं छठ कार्यक्रम करने वाली समितियां का कहना है कि समान और बजट में की गई कटौती से व्यवस्था बिगड़ रही है.नरेला रामलीला ग्राउंड छठ पूजा घाट की तैयारियों को लेकर प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं.

बजट में अचानक की गई कई गुना कटौती : नरेला इलाके में 2002 से लगातार छठ पूजा कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है. लेकिन इस बार प्रशासन की तरफ से सामान देने और बजट में अचानक की गई कई गुना कटौती से समिति के लोगों में मायूसी है. समिति के पदाधिकारी का कहना है कि बिना किसी से बातचीत के प्रशासन की तरफ से समान में और बजट में कटौती कर देने से व्यवस्था बिगड़ती नजर आ रही है.

छठ पूजा समितियां बेहद नाराज : शनिवार 19 नवंबर को छठ का महापर्व है कल डूबते हुए सूरज को अर्घ दिया जाएगा और फिर उसके बाद अगले दिन उगते हुए सूरज को अर्घ देकर छठ पर्व का त्योहार पूरा होगा और व्रतधारी और पूजा करने वाले लोग छठी मैया का आशीर्वाद लेंगे. लेकिन बावजूद उसके प्रशासन की तरफ से कोई तैयारी समय पर पूरी नहीं हुई. इससे छठ पूजा समितियां बेहद नाराज है.

नरेला की जनहित पूर्वांचल सोसाइटी ने भी प्रशासन के रवैये पर काफी नाराजगी जताई है. समिति के पदाधिकारी विनीत कुमार ने बताया कि 2002 से लेकर 2022 तक जो सरकार से सुविधा मिल रही थी और जो घाट पर व्यवस्थाएं हो रही थी अचानक से उनमें काफी कटौती कर दी गई और उसके लिए समिति से विचार विमर्श भी नहीं किया गया. इस बात से अकेली यही समिति नहीं बल्कि दूसरे घाटों के लोग भी नाराज है.

दिल्ली सरकार के मंत्री बेहतर व्यवस्था का कर रहे दावा : हर घाट पर लगभग ऐसी स्थिति नजर आ रही है. दिल्ली सरकार के मंत्री दावा कर रहे हैं कि इस बार छठ पूजा को लेकर के पहले से भी ज्यादा अच्छे इंतजामत किए गए हैं पहले 800 के करीब घाट थे जिनकी संख्या को बड़ा करके हजार से ज्यादा कर दिया गया है यानी अब करीब 200 घाटों को बढ़ा दिया गया है जहां पर छठ पूजा का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा

दूर से आनेवाले श्रद्धालु घाट पर ही गुजारतेंं हैं रात : वहीं दूसरी तरफ कार्यक्रम को आयोजित करने वाली समितियां का कहना है कि उन्हें जो सामग्री कई सालों से मिल रही थी उसमें कटौती कर दी गई. नरेला के DDA ग्राउंड में बने इस घाट पर करीब 25 किलोमीटर दूर-दूर से भी श्रद्धालु आते हैं. दूर के श्रद्धालु शाम को सूर्य को अर्ध्य देने के बाद घर वापस नहीं जा पाते हैं उन्हें वहीं पर रुकना होता है.

किसी तरीके से इंतजाम पहले की तरह करने की कोशिश: ये सब व्यवस्थाएं अचानक से बंद कर देने से यहां की समितियां बेहद परेशान है.हजारों लोगों के रुकने, पूजा करने और फिर उसके बाद उगते हुए सूरज को अर्घ देने की व्यवस्था कैसे होगी इसकी चिंता उन्हें सता रही है .लेकिन समिति अभी भी पुरजोर कोशिश कर रही है कि किसी तरीके से इंतजाम पहले की तरह कर दिए जाएं जिससे छठ पर्व में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े.

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