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समय की पाबंदी या सुरक्षा से समझौता? गोपालगंज के व्हीएम इंटर कॉलेज में दीवार फांदकर परीक्षा देने पहुंचीं छात्राएं

गोपालगंज (बिहार)। मैट्रिक परीक्षा के पहले दिन गोपालगंज से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने परीक्षा व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के व्हीएम इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय के बाद पहुंचीं कुछ छात्राओं को गेट से प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद छात्राओं ने जान जोखिम में डालते हुए केंद्र की दीवार फांदकर अंदर जाने का प्रयास किया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार, परीक्षा शुरू होने से पूर्व बोर्ड के दिशा-निर्देशों के तहत केंद्र का मुख्य द्वार निर्धारित समय पर बंद कर दिया गया। इसी दौरान कुछ परीक्षार्थी देरी से केंद्र पहुंचे। नियमों का हवाला देते हुए केंद्र प्रशासन ने उन्हें प्रवेश देने से इनकार कर दिया। गेट बंद देख कुछ छात्राएं व्याकुल हो उठीं और पास की दीवार पर चढ़कर अंदर जाने की कोशिश करने लगीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दीवार काफी ऊंची थी और उसे पार करते समय गिरने का जोखिम था। छात्राओं द्वारा इस तरह दीवार फांदना न केवल नियमों की मजबूरी को दर्शाता है, बल्कि सुरक्षा इंतजामों की गंभीर कमी की ओर भी इशारा करता है। मौके पर मौजूद अभिभावकों ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि कोई दुर्घटना हो जाती तो जिम्मेदारी किसकी होती? कुछ परीक्षार्थियों और उनके परिजनों का कहना है कि वे दूर-दराज के क्षेत्रों से आए थे और रास्ते में ट्रैफिक जाम के कारण देरी हो गई। उनका आरोप है कि कुछ मिनट की देरी के कारण भविष्य दांव पर लग गया। वहीं, परीक्षा केंद्र प्रशासन का कहना है कि बिहार बोर्ड के सख्त निर्देशों के तहत निर्धारित समय के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सारण की बेटियों को सशक्तिकरण की सौगात: 83,103 महिलाओं के खातों में पहुँची 10-10 हजार की पहली किस्त

छपरा, 16 फरवरी 2026: मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत आज बिहार की महिलाओं के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कर-कमलों से राज्य की 25 लाख महिलाओं के खातों में स्वरोजगार के लिए 10,000 रुपये की प्रथम किस्त का डायरेक्ट अंतरण किया गया। इस पहल ने आत्मनिर्भर बिहार के संकल्प को और मजबूती दी है। सारण की 83,103 महिलाओं को मिला सीधा लाभ इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सारण जिले की 83,103 महिलाएं भी लाभान्वित हुईं। अब तक जिले की कुल 5,62,562 महिलाएं इस योजना के माध्यम से आर्थिक संबल प्राप्त कर चुकी हैं। यह आँकड़ा दर्शाता है कि जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर और प्रभावी कार्य हो रहा है। जिला मुख्यालय में लाइव प्रसारण, महिलाओं की उत्साही भागीदारी मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम का बेबकास्टिंग (वेबकास्टिंग) के माध्यम से जिला मुख्यालय में सीधा प्रसारण किया गया। सैकड़ों महिलाएं इस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनीं और कार्यक्रम से सीधे जुड़ीं। महिलाओं में विशेष उत्साह और आत्मविश्वास देखने को मिला। समाहरणालय सभागार, छपरा में जिला स्तरीय कार्यक्रम छपरा के समाहरणालय सभागार में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जीविका दीदियों ने भाग लिया और योजना की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। स्वरोजगार के लिए दी गई यह राशि महिलाओं को छोटे व्यवसाय, हस्तशिल्प, कृषि आधारित कार्य एवं अन्य उद्यम शुरू करने में सहायक होगी। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से राशि सीधे खातों में भेजे जाने से पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है और लाभार्थियों को बिना किसी बिचौलिये के सीधा लाभ मिला है।

मुजफ्फरपुर में सेना भर्ती का दायरा बढ़ा: अब 15 जिलों के युवा बनेंगे अग्निवीर, 17 से 28 फरवरी तक रैली

मुजफ्फरपुर। सेना क्षेत्रीय भर्ती मुख्यालय मुजफ्फरपुर (बिहार एवं झारखंड) ने इस वर्ष भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब तक जहां केवल आठ जिलों के अभ्यर्थियों की भर्ती ली जाती थी, वहीं इस बार 15 जिलों के युवाओं को मौका दिया जाएगा। इस निर्णय से सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्र के हजारों युवाओं में उत्साह का माहौल है। सेना भर्ती बोर्ड, मुजफ्फरपुर के अध्यक्ष कर्नल जाधव एसआरडी ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि 17 फरवरी से 28 फरवरी तक चक्कर मैदान में भर्ती रैली आयोजित की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में होगी और सभी तैयारियां—बैरिकेडिंग से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक—पूरी कर ली गई हैं। पांच पदों पर होगी भर्ती इस बार अग्निवीर योजना के तहत कुल पांच श्रेणियों में भर्ती की जाएगी: अग्निवीर जनरल ड्यूटी (जीडी) – 10वीं पास अग्निवीर टेक्निकल – 12वीं पास (PCM) अग्निवीर क्लर्क/स्टोर कीपर टेक्निकल – 12वीं पास अग्निवीर ट्रेड्समैन – 8वीं/10वीं पास अग्निवीर नर्सिंग असिस्टेंट (सिपाही फार्मा) कुल 7046 अभ्यर्थियों को ही भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। सभी अभ्यर्थियों का चयन शॉर्टलिस्टिंग के आधार पर किया गया है।  एक रैली, एक मेडिकल – अंतिम विकल्प बाद में कर्नल जाधव ने स्पष्ट किया कि यदि किसी अभ्यर्थी ने दो अलग-अलग श्रेणियों के लिए आवेदन किया है, तब भी उसे केवल एक ही भर्ती रैली और एक मेडिकल टेस्ट से गुजरना होगा। भर्ती रैली पूर्ण होने के बाद उम्मीदवार से अंतिम विकल्प पूछा जाएगा कि वह किस श्रेणी में शामिल होना चाहता है। इससे प्रक्रिया पारदर्शी और सुगम बनेगी।  इन 15 जिलों के युवाओं को मिलेगा मौका भर्ती रैली में जिन जिलों के अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, वे हैं: पश्चिमी चंपारण (बेतिया), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, बक्सर, भोजपुर, सिवान, पटना, सारण, वैशाली और गोपालगंज। रैली केवल पुरुष उम्मीदवारों के लिए 17 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित की जाएगी। भर्ती महानिदेशालय के निर्देशानुसार सेना भर्ती कार्यालय, मुजफ्फरपुर द्वारा विभिन्न आउटरीच कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य के युवाओं को देश सेवा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जाकर युवाओं को भर्ती प्रक्रिया, पात्रता मानदंड और तैयारी से जुड़ी जानकारी दी जा रही है। भर्ती स्थल चक्कर मैदान में प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए प्रवेश और निकास मार्ग अलग-अलग बनाए गए हैं। मेडिकल जांच, दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक परीक्षण के लिए अलग-अलग काउंटर स्थापित किए गए हैं, ताकि प्रक्रिया सुचारु रूप से संचालित हो सके।

नीतीश कुमार का सख्त संदेश: गुणवत्ता और समयबद्धता से पूरा हो कुर्जी-आनंदपुरी नाला प्रोजेक्ट

पटना। राजधानी में जलजमाव की पुरानी समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में राज्य सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज आशियाना-दीघा रोड स्थित राजीव नगर के पास निर्माणाधीन कुर्जी नाला (राजीव नगर नाला) निर्माण योजना तथा आनंदपुरी नाला का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि दोनों परियोजनाओं को उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ निर्धारित समय सीमा में हर हाल में पूरा किया जाए। निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की प्रगति, तकनीकी मानकों, जल निकासी क्षमता और सुरक्षा उपायों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि राजधानी पटना में हर वर्ष बरसात के दौरान जलजमाव से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नाला निर्माण की ये योजनाएं शहर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इनकी गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। जलजमाव से राहत की बड़ी उम्मीद कुर्जी नाला और आनंदपुरी नाला परियोजनाएं शहर के उन इलाकों को सीधे राहत देंगी, जहां मानसून के समय पानी भर जाने से यातायात और जनजीवन प्रभावित होता है। अधिकारियों के अनुसार, नालों की चौड़ाई और गहराई को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि तेज बारिश की स्थिति में भी जल निकासी सुचारु रूप से हो सके। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि परियोजना पूर्ण होने के बाद न केवल जलजमाव की समस्या से निजात मिलेगी, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता और स्वास्थ्य की स्थिति में भी सुधार आएगा। जल निकासी व्यवस्था सुदृढ़ होने से सड़कों की क्षति भी कम होगी और रखरखाव का खर्च घटेगा। इस परियोजना की एक खास विशेषता यह है कि नाले के ऊपर टू-लेन सड़क का निर्माण भी किया जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों को वैकल्पिक और सुगम यातायात मार्ग उपलब्ध होगा। आशियाना-दीघा रोड और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक दबाव को कम करने में यह सड़क महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर के विकास कार्यों में समन्वय और दीर्घकालिक सोच जरूरी है। नाला और सड़क—दोनों को एकीकृत योजना के रूप में विकसित किया जा रहा है ताकि बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पटना को साफ-सुथरा, सुव्यवस्थित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है। नाला निर्माण, सड़क विस्तार और जल निकासी व्यवस्था में सुधार जैसे कदम उसी दिशा में प्रयास हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए और स्थानीय नागरिकों को कम से कम असुविधा हो। साथ ही, निर्माण कार्य की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को भी कहा गया। राजधानी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही इन परियोजनाओं से आने वाले समय में जलजमाव की समस्या में कमी आने की उम्मीद है। यदि योजनाएं तय समय पर पूर्ण होती हैं, तो यह पटना के शहरी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

सारण में मछुआरों को बड़ी सौगात: मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना के तहत 37 मत्स्य शिकार व विपणन किट का वितरण

छपरा, 14 फरवरी। जिले के मछुआ समुदाय की आजीविका सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला पदाधिकारी, सारण श्री वैभव श्रीवास्तव ने आज मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना के अंतर्गत 37 लाभुकों के बीच मत्स्य शिकार एवं विपणन किट का वितरण किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों एवं लाभार्थियों के बीच उत्साह का वातावरण देखा गया। मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना का उद्देश्य जिले के मछुआरों और मत्स्य विक्रेताओं को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराकर उनके कार्य को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और हाइजीनिक बनाना है। योजना के तहत मत्स्य शिकारमाही करने तथा मछली के विपणन के लिए आवश्यक उपकरणों को एक पैकेज के रूप में उपलब्ध कराया जाता है, ताकि जल स्रोतों से बाजार तक मछली की गुणवत्ता और स्वच्छता बनी रहे। क्या-क्या मिला किट में लाभार्थियों को फेंका जाल, गिल नेट, हांडी, तराजू तथा इंसुलेटेड आइस बॉक्स सहित अन्य आवश्यक सामग्री एक संपूर्ण किट के रूप में प्रदान की गई। इन सामग्रियों की मदद से मछुआरे मछली को सुरक्षित तरीके से संग्रहित कर बाजार तक पहुंचा सकेंगे। विशेष रूप से इंसुलेटेड आइस बॉक्स के उपयोग से मछली ताजी एवं स्वच्छ अवस्था में उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी। शत-प्रतिशत अनुदान का लाभ इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि लाभार्थियों को किट पूर्णतः शत-प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराई जाती है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मछुआरों और मत्स्य विक्रेताओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ता।  आय में वृद्धि और बेहतर बाजार व्यवस्था जिला पदाधिकारी ने कहा कि इस पहल से मछुआरों को आजीविका का एक अतिरिक्त एवं सशक्त साधन प्राप्त होगा, जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि होगी। साथ ही उपभोक्ताओं को भी ताजी, सुरक्षित और उचित मूल्य पर मछली उपलब्ध हो सकेगी। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सड़क किनारे, चौक-चौराहों और हाट-बाजारों में मत्स्य विपणन करने वाले मछुआरों एवं वेंडरों को चिन्हित कर योजना का लाभ दिया जा रहा है। यह पहल न केवल मछुआ समुदाय की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि जिले में मत्स्य विपणन की व्यवस्था को भी अधिक सुव्यवस्थित और स्वच्छ बनाएगी। कार्यक्रम में उप मत्स्य निदेशक सारण परिक्षेत्र, छपरा श्री सुमन कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी छपरा श्री प्रदीप कुमार सहित श्रीमती अमृता रंजन, श्री राजू कुमार, श्रीमती चंचला, श्रीमती आस्था मिश्रा एवं अन्य मत्स्य विकास पदाधिकारी उपस्थित रहे।

गन्ना किसानों को राहत: बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करेगी सरकार

पटना। बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को लेकर एक बार फिर सरकार ने सक्रिय रुख अपनाया है। विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि राज्य की सभी बंद चीनी मिलों को जल्द से जल्द चालू कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री के इस आदेश को उद्योग और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चीनी मिलों के बंद रहने से न केवल किसानों को नुकसान होता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी प्रभावित होते हैं। ऐसे में सरकार का प्रयास है कि बंद पड़ी मिलों को पुनर्जीवित कर राज्य के आर्थिक विकास को नई गति दी जाए। किन-किन जिलों की चीनी मिलें हैं बंद वर्तमान में राज्य के कई जिलों में चीनी मिलें बंद पड़ी हैं। इनमें प्रमुख रूप से— पश्चिम चम्पारण जिले के चनपटिया पूर्वी चम्पारण जिले के बाराचकिया एवं मोतिहारी गोपालगंज जिले के सासामूसा सारण जिले के मढ़ौरा मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर समस्तीपुर जिले के समस्तीपुर दरभंगा जिले के सकरी एवं रैयाम इन मिलों के बंद रहने से गन्ना उत्पादक किसानों को अपनी उपज दूसरे जिलों या राज्यों में भेजनी पड़ती है, जिससे परिवहन लागत बढ़ती है और समय पर भुगतान में भी कठिनाई आती है। सासामूसा से होगी शुरुआत सरकार की पहल के तहत गोपालगंज जिले की सासामूसा चीनी मिल को जल्द शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसे एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बाकी मिलों के संचालन की दिशा में भी शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसानों और युवाओं को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बंद चीनी मिलें दोबारा चालू होती हैं, तो इससे—  गन्ना किसानों को स्थानीय स्तर पर बाजार उपलब्ध होगा  भुगतान प्रक्रिया में सुधार आएगा  हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी बिहार कभी चीनी उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में गिना जाता था। यदि सरकार की यह पहल सफल होती है, तो राज्य एक बार फिर चीनी उद्योग में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है। सरकार की प्राथमिकता में उद्योग पुनर्जीवन मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक बाधाओं की समीक्षा कर शीघ्र समाधान निकाला जाए। सरकार का लक्ष्य है कि बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित कर राज्य में निवेश और रोजगार का माहौल मजबूत किया जाए। चीनी मिलों को पुनः चालू करने का यह कदम न केवल कृषि आधारित उद्योग को सशक्त करेगा, बल्कि बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

सारण के युवाओं के लिए सुनहरा अवसर: 23 फरवरी को वेदांता प्राइवेट आईटीआई में विशेष नियोजन शिविर

छपरा, 13 फरवरी 2026। सारण जिले के युवाओं के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के तत्वावधान में अवर प्रादेशिक नियोजनालय, छपरा द्वारा 23 फरवरी 2026 (सोमवार) को वेदांता प्राइवेट आईटीआई, दुमदुमा, दाउदपुर (सारण) परिसर में विशेष नियोजन शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर पूर्वाह्न 11:00 बजे से अपराह्न 04:00 बजे तक चलेगा। सहायक निदेशक (नियोजन), अवर प्रादेशिक नियोजनालय, छपरा से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस रोजगार शिविर में प्रतिष्ठित कंपनी DISTIL EDUCATION & TECHNOLOGY PVT LTD द्वारा अधिसूचित रिक्तियों पर चयन प्रक्रिया संपन्न की जाएगी। 200 पदों पर होगा चयन इस विशेष नियोजन शिविर में कुल 200 पदों पर बहाली की जाएगी, जो Apprenticeship/Student Trainee के रूप में होंगे। ग्रेटर नोएडा हेतु 100 पद योग्यता: 12वीं अथवा ITI (सभी ट्रेड) उत्तीर्ण आयु सीमा: 18 से 25 वर्ष वेतन: ₹16,000/- (इन हैंड) जॉब लोकेशन: Greater Noida स्थित CNH Industrial (India) Private Limited गाजियाबाद हेतु 100 पद योग्यता: 10वीं, 12वीं अथवा ITI (सभी ट्रेड) उत्तीर्ण आयु सीमा: 18 से 25 वर्ष वेतन: ₹16,000/- (इन हैंड) जॉब लोकेशन: Ghaziabad स्थित Shriram Pistons & Rings Limited “सीखो और कमाओ” योजना का लाभ इस नियोजन शिविर की विशेषता यह है कि चयनित अभ्यर्थियों को “सीखो और कमाओ” योजना के अंतर्गत तीन वर्षों का नि:शुल्क डिप्लोमा करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। साथ ही उच्च मानकों वाली कंपनियों के साथ कार्य करते हुए व्यवहारिक एवं तकनीकी ज्ञान अर्जित करने का सुनहरा अवसर मिलेगा। यह पहल न केवल युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराएगी, बल्कि उन्हें उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष भी बनाएगी। आवश्यक दस्तावेज इच्छुक अभ्यर्थियों को निम्नलिखित दस्तावेजों के साथ उपस्थित होना अनिवार्य है: अद्यतन बायोडाटा 10वीं, 12वीं एवं ITI का प्रमाण पत्र आधार कार्ड पैन कार्ड पासपोर्ट साइज 4 फोटो बैंक पासबुक कैंसिल चेक नियोजनालय द्वारा जिले के अधिक से अधिक योग्य युवाओं से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की गई है। यह शिविर न केवल रोजगार प्राप्ति का माध्यम है, बल्कि कौशल विकास और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। सारण के युवाओं के लिए यह विशेष नियोजन शिविर रोजगार की नई राह खोलने वाला साबित हो सकता है।

फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में बड़ा कदम: 10 से 27 फरवरी तक सर्वजन दवा सेवन अभियान, घर-घर पहुंच रहीं आशा कार्यकर्ता

छपरा, 13 फरवरी। जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के संकल्प के साथ स्वास्थ्य विभाग द्वारा 10 फरवरी से 27 फरवरी तक सर्वजन दवा सेवन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिला रही हैं, ताकि इस गंभीर और लाइलाज बीमारी की रोकथाम सुनिश्चित की जा सके। फाइलेरिया एक ऐसी बीमारी है, जो एक बार होने पर व्यक्ति को जीवनभर के लिए अपंग बना सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका इलाज संभव नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। इसी उद्देश्य से यह व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। दवा पूरी तरह सुरक्षित, हल्के लक्षण शुभ संकेत सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हैं। उन्होंने बताया कि दवा सेवन के बाद यदि किसी को हल्की उल्टी, चक्कर या असहजता महसूस होती है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह किसी खतरे का संकेत नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि दवा शरीर में मौजूद माइक्रो-फाइलेरिया परजीवियों पर असर कर रही है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि ऐसे लक्षण दिखने पर अफवाहों पर ध्यान न दें और आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रखंड स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम गठित की गई है, जो तुरंत उपचार उपलब्ध करा रही है। खाली पेट न लें दवा, कुछ वर्गों को छूट स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि फाइलेरिया रोधी दवा खाली पेट नहीं खानी है। साथ ही 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा अत्यंत गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जानी है। इन वर्गों को छोड़कर सभी पात्र नागरिकों से अपील की गई है कि वे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के सामने ही दवा का सेवन करें, जिससे अभियान की पारदर्शिता और सफलता सुनिश्चित हो सके। नगरा प्रखंड की घटना से स्पष्ट हुई तत्परता अभियान के दौरान हाल ही में नगरा प्रखंड में दवा सेवन के बाद तीन बच्चियों को घबराहट और उल्टी की शिकायत हुई थी। सूचना मिलते ही रैपिड रिस्पांस टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर तीनों बच्चियों का उपचार किया। उपचार के बाद वे पूरी तरह स्वस्थ हो गईं। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय और सजग है। सामूहिक भागीदारी से ही संभव है सफलता जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार ने कहा कि फाइलेरिया के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की सहभागिता आवश्यक है। यदि कुछ लोग दवा का सेवन नहीं करेंगे, तो संक्रमण की श्रृंखला बनी रहेगी। स्वास्थ्य विभाग ने पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे आगे आकर लोगों को जागरूक करें। गांव-गांव और टोला-टोला तक सही जानकारी पहुंचाकर ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है। जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब हर नागरिक जिम्मेदारी निभाते हुए दवा का सेवन करेगा और अफवाहों से दूर रहकर स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करेगा।

“जनता के दरबार में जिलाधिकारी”: 103 फरियादियों की सुनी गई समस्याएं, त्वरित कार्रवाई के निर्देश

छपरा, 13 फरवरी। जिले में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से आयोजित “जनता के दरबार में जिलाधिकारी” कार्यक्रम के तहत आज जिलाधिकारी ने कुल 103 लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए। यह कार्यक्रम प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को नियमित रूप से आयोजित किया जा रहा है, जिससे आमजन को अपनी शिकायत सीधे प्रशासन के समक्ष रखने का अवसर मिल रहा है। राजस्व एवं भूमि विवाद के मामले रहे प्रमुख आज के जनता दरबार में प्राप्त आवेदनों में अधिकांश मामले राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े रहे। अमनौर के एक आवेदक ने शिकायत की कि उनकी जमीन का उल्लेख रजिस्टर-2 में दर्ज नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अंचलाधिकारी को तत्काल बुलाकर स्वयं सुनवाई करने का निर्णय लिया। इसी तरह दरियापुर के एक आवेदक ने बताया कि उनका रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया है। इस पर जिलाधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारी को स्थल जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसुआपुर से आए एक अन्य आवेदक ने भी अपने पट्टीदार द्वारा रास्ता बाधित किए जाने की शिकायत दर्ज कराई। जिलाधिकारी ने अंचलाधिकारी एवं थाना प्रभारी को संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण कर त्वरित कार्रवाई करने का आदेश दिया। जनकल्याण योजनाओं में भी सामने आईं शिकायतें परसा के एक आवेदक ने राशन नहीं मिलने की शिकायत की। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित मार्केटिंग ऑफिसर (एमओ) को जांच कर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सोनपुर के एक आवेदक ने बताया कि उनकी निजी जमीन पर ग्रामीण सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस मामले में जिलाधिकारी ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। सेवांत लाभ और सब्सिडी भुगतान पर निर्देश एक सेवानिवृत्त संस्कृत शिक्षक ने अपने सेवांत लाभ से संबंधित बकाया भुगतान न होने की शिकायत की। जिलाधिकारी ने इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी को दूरभाष पर अविलंब बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। वहीं परसा के एक अन्य आवेदक ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के अंतर्गत सब्सिडी राशि का भुगतान लंबित होने की शिकायत की। प्रखंड विकास पदाधिकारी से दूरभाष पर जानकारी लेने पर बताया गया कि आवेदक के सब्सिडी भुगतान की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी कर ली गई है और शीघ्र ही राशि उनके खाते में स्थानांतरित कर दी जाएगी। त्वरित समाधान पर प्रशासन का जोर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि “जनता के दरबार” का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं का त्वरित एवं पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्राप्त आवेदनों पर समयबद्ध कार्रवाई कर प्रतिवेदन उपलब्ध कराएं। अन्य प्राप्त आवेदनों के संबंध में भी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जनता दरबार के माध्यम से प्रशासन और आमजन के बीच संवाद की यह कड़ी लगातार मजबूत हो रही है, जिससे लोगों में भरोसा और पारदर्शिता दोनों बढ़ रहे हैं।

सारण में धान अधिप्राप्ति तेज़: 94,777 एमटी लक्ष्य के मुकाबले 65,447 एमटी खरीद, डीएम ने बढ़ाई रफ्तार

छपरा, 13 फरवरी 2026। खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के अंतर्गत धान अधिप्राप्ति को लेकर सारण जिला प्रशासन ने गति तेज कर दी है। जिलाधिकारी सारण श्री वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में 13 फरवरी 2026 को जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिला सहकारिता पदाधिकारी, डीएम एसएफसी, सभी बीसीओ तथा संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में धान खरीद की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई और शेष अवधि में लक्ष्य प्राप्ति के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। 94,777 एमटी का लक्ष्य, अब तक 65,447 एमटी खरीद जिले के लिए इस वर्ष 94,777 मैट्रिक टन धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 65,447 मैट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जो 9,955 किसानों से क्रय किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि निर्धारित अवधि 1 नवंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक है, जबकि 30 जून 2026 तक सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) लेने की प्रक्रिया जारी रहेगी। 261 पैक्स और 10 व्यापार मंडल सक्रिय इस वर्ष धान अधिप्राप्ति के लिए जिले में 261 पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ) और 10 व्यापार मंडलों का चयन किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों से सीधे धान की खरीद की जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो और किसी प्रकार की असुविधा न हो। गुणवत्ता पर विशेष जोर राज्य खाद्य निगम के सभी सीएमआर गोदामों में गुणवत्ता नियंत्रकों द्वारा जांच सुनिश्चित की जा रही है। निर्धारित मानकों के अनुरूप ही चावल को जमा किया जा रहा है। अब तक 14,819 मैट्रिक टन सीएमआर राज्य खाद्य निगम में प्राप्त किया जा चुका है। लक्ष्य पूरा करने के लिए सख्त निर्देश बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि शेष अवधि में किसानों से बेहतर समन्वय स्थापित कर अधिप्राप्ति की रफ्तार बढ़ाई जाए। सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को 28 फरवरी तक पैक्सवार शेष लक्ष्य हासिल करने हेतु सक्रिय कार्रवाई करने को कहा गया है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जो पैक्स अपना लक्ष्य पूरा करने में सक्षम नहीं होंगे, उनका लक्ष्य बेहतर प्रदर्शन करने वाले पैक्सों को हस्तांतरित किया जाएगा, ताकि जिले का कुल लक्ष्य हर हाल में पूरा हो सके। किसानों के हित में प्रशासन प्रतिबद्ध जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों को उचित मूल्य पर धान की खरीद सुनिश्चित करना है। प्रशासन इस दिशा में पूरी तत्परता से कार्य कर रहा है, ताकि कोई भी किसान वंचित न रहे और जिले का अधिप्राप्ति लक्ष्य समय से पूर्व प्राप्त किया जा सके। सारण जिले में धान अधिप्राप्ति की प्रगति को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।