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नई दिल्ली में एआई का महाकुंभ: ‘सर्वजन हिताय’ थीम के साथ शुरू हुआ इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026

नई दिल्ली, 17 फरवरी 2026। राष्ट्रीय राजधानी इस सप्ताह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की वैश्विक हलचल का केंद्र बनी हुई है। सोमवार से शुक्रवार (16–20 फरवरी) तक आयोजित हो रहा इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 न केवल तकनीकी दुनिया के दिग्गजों को एक मंच पर ला रहा है, बल्कि नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत और आम नागरिकों के बीच संवाद का सेतु भी बना रहा है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय तथा इंडिया एआई मिशन की पहल पर आयोजित यह पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की थीम के साथ एआई को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।  ग्लोबल साउथ की पहली बड़ी एआई पहल सरकार इस समिट को ग्लोबल साउथ में आयोजित पहली बड़ी वैश्विक एआई शिखर बैठक के रूप में प्रस्तुत कर रही है। यहां चर्चा केवल एआई के संभावित खतरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी केंद्रित है कि कैसे एआई के लाभ गरीब और मध्यम वर्ग तक पहुंचाए जाएं। सरकार का मानना है कि यह पहल “एआई डिवाइड” यानी तकनीक-संपन्न और तकनीक-वंचित वर्गों के बीच की खाई को पाटने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस समिट में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। 20 देशों के प्रधानमंत्री/राष्ट्रपति अनेक देशों के मंत्री वैश्विक कंपनियों के 50 से अधिक सीईओ एआई इकोसिस्टम से जुड़े लगभग 500 विशेषज्ञ, जिनमें इनोवेटर्स, रिसर्चर और सीटीओ शामिल भारत की ओर से उद्योग जगत के कई बड़े नाम संभावित रूप से भाग ले रहे हैं, जिनमें मुकेश अंबानी (आरआईएल) नटराजन चंद्रशेखरन (टाटा संस) नंदन नीलेकणी (इंफोसिस) सुनील भारती मित्तल (भारती समूह) के कृतिवासन (टीसीएस) रोशनी नादर (एचसीएल टेक) सलिल पारेख (इंफोसिस) जैसे दिग्गज शामिल हो सकते हैं। 300 से अधिक एआई प्रोजेक्ट्स की प्रदर्शनी एक्सपो में 300 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स प्रदर्शित किए जा रहे हैं। यहां आम लोग और विशेषज्ञ यह जान सकेंगे कि एआई में वर्तमान में क्या नई प्रगति हो रही है और भविष्य में कौन से बड़े बदलाव संभावित हैं। नीति, रिसर्च और इंडस्ट्री का संगम यह समिट केवल तकनीकी प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इसमें नीति-निर्माण, रिसर्च सहयोग, औद्योगिक साझेदारी और सार्वजनिक सहभागिता को जोड़ने का प्रयास किया गया है। विशेषज्ञ एआई से जुड़ी नैतिकता, डेटा सुरक्षा, जवाबदेही और मानव निगरानी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा कर रहे हैं। चुनौतियों पर खुली बहस एआई से जुड़े जोखिम, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और रोजगार पर प्रभाव जैसे विषयों पर विस्तृत विमर्श हो रहा है। उद्देश्य है—एआई को सुरक्षित, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना। वैश्विक पृष्ठभूमि: कैसे आगे बढ़ा एआई विमर्श? यूनाइटेड किंगडम (2023): पहली एआई समिट, जिसमें गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और जवाबदेही पर जोर दिया गया। दक्षिण कोरिया (मई 2024): एआई जोखिम के वैज्ञानिक आकलन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता रेखांकित की गई। पेरिस (फरवरी 2025): एआई को सार्वजनिक हित और टिकाऊ विकास से जोड़ने पर बल दिया गया। दिल्ली समिट इन सभी चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए एआई को सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के औजार के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। आम नागरिकों के लिए क्या मायने? विशेषज्ञों का मानना है कि एआई अब केवल बड़ी कंपनियों की तकनीक नहीं रह गई है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, छोटे व्यवसाय और सरकारी सेवाओं में इसका उपयोग आम लोगों के जीवन को आसान बना सकता है। यदि नीति और तकनीक का संतुलित उपयोग हुआ, तो यह समिट भारत को एआई नवाचार और जिम्मेदार तकनीकी नेतृत्व के वैश्विक मानचित्र पर मजबूत स्थान दिला सकता है।

मैक्रों का भारत दौरा: रक्षा से इनोवेशन तक, नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ती भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी

नई दिल्ली। Emmanuel Macron अपने तीन दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंच चुके हैं। 17 से 19 फरवरी तक चलने वाली यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और France के बीच रक्षा सहयोग अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, दशकों तक भारत के सबसे भरोसेमंद रक्षा साझेदार रहे Russia की तरह अब फ्रांस भी दीर्घकालिक और उच्च तकनीकी रक्षा सहयोग के प्रमुख स्तंभ के रूप में उभर रहा है। रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा और विस्तार इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें भारत-फ्रांस सामरिक साझेदारी की प्रगति की व्यापक समीक्षा की जाएगी। दोनों नेता रक्षा, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, समुद्री सुरक्षा और हरित ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने पर विचार करेंगे। मंगलवार शाम को दोनों नेता संयुक्त रूप से ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ का उद्घाटन करेंगे। यह पहल तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप सहयोग, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में साझेदारी को मजबूती देगी। मैक्रों की यह भारत की चौथी और मुंबई की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो भारत के आर्थिक और तकनीकी केंद्र के रूप में मुंबई के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित करती है। बेंगलुरु में रक्षा वार्ता, अहम समझौतों की संभावना 17 फरवरी को बेंगलुरु में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की अगुवाई में भविष्य की रक्षा रूपरेखा पर महत्वपूर्ण चर्चा होगी। भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh और फ्रांस की रक्षा मंत्री Catherine Vautrin की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में कई महत्वपूर्ण रक्षा सौदों को मंजूरी मिलने की संभावना है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच मौजूदा रक्षा सहयोग समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए नवीनीकृत किया जा सकता है। इसके साथ ही ‘हैमर’ मिसाइलों के संयुक्त विनिर्माण के लिए एक संयुक्त उद्यम पर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर संभावित हैं। यह कदम भारत की ‘मेक इन इंडिया’ नीति और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राफेल सौदा: साझेदारी को नई ऊंचाई हाल ही में भारत सरकार की रक्षा खरीद परिषद द्वारा फ्रांस से 100 से अधिक Dassault Rafale लड़ाकू विमानों की खरीद के निर्णय ने इस रणनीतिक रिश्ते को नई मजबूती दी है। यह सौदा भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता, त्वरित प्रतिक्रिया और तकनीकी श्रेष्ठता को सुदृढ़ करेगा। राफेल विमानों की खरीद केवल एक रक्षा अनुबंध भर नहीं है, बल्कि इसमें दीर्घकालिक रखरखाव, प्रशिक्षण, स्पेयर पार्ट्स आपूर्ति और तकनीकी सहयोग भी शामिल है। इससे दोनों देशों के बीच संबंध पारंपरिक खरीददार-विक्रेता मॉडल से आगे बढ़कर सह-विकास और सह-उत्पादन के चरण में प्रवेश कर रहे हैं। ‘नया रूस’ की धारणा क्यों? विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की रक्षा आवश्यकताओं में फ्रांस की बढ़ती भागीदारी और तकनीकी हस्तांतरण की खुली नीति ने उसे एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित किया है। जिस प्रकार शीत युद्ध काल से रूस ने भारत के रक्षा आधुनिकीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाई, उसी तरह अब फ्रांस उच्च तकनीक, रणनीतिक स्वायत्तता और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला के कारण प्रमुख भूमिका में दिखाई दे रहा है। फ्रांस की स्वतंत्र विदेश नीति और भारत के साथ दीर्घकालिक सामरिक दृष्टिकोण इस साझेदारी को और मजबूत बनाते हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और वैश्विक मंचों पर साझा दृष्टिकोण भी इस रिश्ते को व्यापक आयाम देते हैं।  रक्षा से परे व्यापक सहयोग यह यात्रा केवल रक्षा तक सीमित नहीं है। ऊर्जा परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला, अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल अर्थव्यवस्था और शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग का विस्तार हो रहा है। ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ इस बहुआयामी साझेदारी का प्रतीक है। राष्ट्रपति मैक्रों की यह यात्रा भारत-फ्रांस संबंधों के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है। रक्षा सौदों से लेकर नवाचार और प्रौद्योगिकी तक, दोनों देश एक ऐसी साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं जो न केवल सामरिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक और वैश्विक स्तर पर भी दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ सकती है। भारत के रक्षा आधुनिकीकरण के इस नए अध्याय में फ्रांस की भूमिका कितनी व्यापक होगी, यह आने वाला समय तय करेगा, लेकिन फिलहाल संकेत स्पष्ट हैं—भारत और फ्रांस की दोस्ती अब नए शिखर की ओर अग्रसर है।

जयपुर से किसानों को डिजिटल शक्ति: “भारत-VISTAAR” बनेगा देश का पहला वॉयस-फर्स्ट एआई कृषि सलाहकार

जयपुर, 16 फरवरी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक दौड़ के बीच भारत ने कृषि क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। देशभर के किसानों के लिए एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म “भारत-VISTAAR” का 17 फरवरी को शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा जयपुर में किया जाएगा। यह मंच किसानों के लिए मौसम, मंडीभाव, कीट-रोग प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, फसल सलाह और सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराएगा। लॉन्च समारोह सुबह 10 बजे स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर मैनेजमेंट, दुर्गापुरा, जयपुर में आयोजित होगा। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा, कृषि मंत्रालय के सचिव डा. देवेश चतुर्वेदी, सांसद-विधायक और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहेंगे। क्या है भारत-VISTAAR? “भारत-VISTAAR” भारत सरकार का किसान-केंद्रित, एआई-संचालित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है। इसे “प्लग-एंड-प्ले” मॉडल पर विकसित किया गया है, जिससे अलग-अलग सरकारी, वैज्ञानिक और बाज़ार प्रणालियों को एक साथ जोड़ा जा सके। यह प्लेटफॉर्म किसानों को निम्नलिखित सुविधाएं देगा: मौसम की सटीक जानकारी (IMD डेटा के आधार पर) मंडी भाव (AgMarkNet से) कीट एवं रोग प्रबंधन (NPSS के माध्यम से) मृदा स्वास्थ्य एवं सॉइल हेल्थ कार्ड आधारित सलाह  फसल प्रबंधन व ICAR के “पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज” कम से कम 10 प्रमुख केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी आवेदन की स्थिति, लाभ ट्रैकिंग और शिकायत निवारण इसका उद्देश्य किसानों को बार-बार अलग-अलग पोर्टल या दफ्तरों के चक्कर से बचाना है। वॉयस-फर्स्ट एआई: फीचर फोन से भी मिलेगा लाभ भारत-VISTAAR को खासतौर पर “वॉयस-फर्स्ट एआई” के रूप में तैयार किया गया है। यानी साधारण फीचर फोन रखने वाला किसान भी सिर्फ कॉल करके जानकारी प्राप्त कर सकेगा। टेलीफोनी हेल्पलाइन 155261 को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इसके अलावा: वॉयस इनपुट-आउटपुट सुविधा  वेबसाइट व मोबाइल साइट चैटबॉट एंड्रॉयड ऐप (जल्द लॉन्च) फेज-1 में यह सुविधा हिंदी और अंग्रेज़ी में उपलब्ध होगी। किन राज्यों से होगी शुरुआत? पहले चरण में महाराष्ट्र, बिहार और गुजरात सहित कई राज्यों के लाखों किसानों को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। आगे चलकर इसे अन्य राज्यों और भारतीय भाषाओं तक विस्तार देने की योजना है, जिससे यह राष्ट्रीय स्तर का कृषि डिजिटल नेटवर्क बन सके। “AI फॉर एग्रीकल्चर रोडमैप” और एआई हैकथॉन लॉन्च समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा “AI फॉर एग्रीकल्चर रोडमैप” भी जारी किया जाएगा। साथ ही “AI हैकथॉन” और “एग्रीकोष” की घोषणा भी की जाएगी, ताकि कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिल सके। डिजिटल सलाहकार बनेगा भारत-VISTAAR इस मंच में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिक सुझाव, फसल प्रबंधन तकनीक और क्षेत्र-विशेष मृदा सलाह को शामिल किया गया है। इससे यह प्लेटफॉर्म सिर्फ सूचना देने वाला माध्यम नहीं रहेगा, बल्कि एक “डिजिटल कृषि सलाहकार” की भूमिका निभाएगा, जो किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करेगा। आज जब एआई उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को बदल रहा है, तब कृषि में इसका उपयोग ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल सकता है। सही समय पर सही सलाह मिलने से उत्पादन बढ़ेगा, लागत घटेगी और किसानों की आय में सुधार होगा। भारत-VISTAAR का उद्देश्य तकनीक को गांव-गांव तक पहुंचाकर किसानों को सशक्त बनाना है—ताकि डिजिटल इंडिया का लाभ खेतों तक पहुंचे और कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में नई उड़ान भर सके।

शाह का राहुल पर पलटवार: “किसानों को गुमराह करना बंद करें, हर ट्रेड डील में डेयरी पूरी तरह सुरक्षित”

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे देश के किसानों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के नाम पर गुमराह कर रहे हैं। शाह ने स्पष्ट किया कि इंग्लैंड, यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हुए सभी मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) में किसानों और विशेषकर डेयरी क्षेत्र के हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जिन भी व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, उनमें देश के कृषि और डेयरी सेक्टर को प्राथमिकता दी गई है। “किसानों को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हर समझौते में स्पष्ट प्रावधान हैं, जिनसे भारतीय डेयरी उद्योग पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा,” उन्होंने कहा। “डेयरी को खत्म करने का झूठा नैरेटिव” गृह मंत्री ने राहुल गांधी के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें कथित तौर पर कहा गया कि ट्रेड डील के कारण भारतीय डेयरी उद्योग को नुकसान होगा। शाह ने इसे “झूठा और भ्रामक” बताते हुए कहा, “हम डेयरी क्षेत्र को समाप्त करने वाले नहीं, बल्कि उसे वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए रास्ता बनाने वाले लोग हैं। सरकार ने हर समझौते में डेयरी सेक्टर को पूर्ण सुरक्षा दी है।” उन्होंने दावा किया कि भारत ने संवेदनशील कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क और गैर-टैरिफ सुरक्षा उपायों को बरकरार रखा है, ताकि देश के छोटे और मध्यम किसानों के हित सुरक्षित रहें। सरकार का कहना है कि इन समझौतों से भारतीय कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार खुलेंगे, निर्यात बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अधूरी जानकारी के आधार पर भ्रम फैला रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल में व्यापार और कृषि नीति एक प्रमुख मुद्दा बन सकती है, खासकर तब जब डेयरी और कृषि क्षेत्र करोड़ों परिवारों की आजीविका से जुड़ा है। इधर कांग्रेस लगातार सरकार से व्यापार समझौतों की शर्तों को सार्वजनिक करने और संसद में विस्तृत चर्चा की मांग कर रही है। वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि भारत की आर्थिक प्रगति और किसानों के हित, दोनों को संतुलित रखते हुए ही निर्णय लिए जा रहे हैं। स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लेकर सियासी घमासान आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, जिसमें किसान हित और डेयरी क्षेत्र केंद्र में रहेंगे।

ढाका या मुंबई? 17 फरवरी को पीएम मोदी के कार्यक्रमों का टकराव, बांग्लादेश शपथ समारोह पर संशय

नई दिल्ली/मुंबई/ढाका। 17 फरवरी को दक्षिण एशिया की कूटनीति में एक दिलचस्प मोड़ देखने को मिल सकता है। बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के अवसर पर होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में भारत के प्रधानमंत्री को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया है। वहीं, उसी दिन मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय बैठक पहले से निर्धारित है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री का ढाका दौरा संभवतः टल सकता है। बांग्लादेश में नई शुरुआत बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के बाद नई सरकार के गठन की तैयारी पूरी हो चुकी है। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे तारिक रहमान ने क्षेत्रीय सहयोग की भावना के तहत कई देशों के नेताओं को आमंत्रित किया है, जिनमें भारत भी शामिल है। भारत और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में शपथ समारोह में भारत की भागीदारी पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। मुंबई में फ्रांस के साथ अहम वार्ता दूसरी ओर, 17 फरवरी को मुंबई में भारत और फ्रांस के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। राष्ट्रपति मैक्रों की इस यात्रा को रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग और निवेश जैसे मुद्दों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक पहले से तय कार्यक्रम का हिस्सा है और इसमें दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा संभव है। सूत्रों के अनुसार, यदि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से ढाका नहीं जा पाते हैं तो भारत की ओर से किसी वरिष्ठ मंत्री या विशेष दूत को शपथ समारोह में भेजा जा सकता है। अतीत में भी ऐसे अवसरों पर भारत ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। कूटनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि भारत किसी भी स्थिति में बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को प्राथमिकता देता है। इसलिए प्रतिनिधित्व के स्तर पर कोई कमी नहीं रखी जाएगी

17 फरवरी को तारिक रहमान लेंगे प्रधानमंत्री पद की शपथ, पीएम मोदी को भी भेजा गया न्योता

नई दिल्ली/ढाका। दक्षिण एशिया की राजनीति में 17 फरवरी का दिन ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। यह शपथ ग्रहण समारोह मंगलवार सुबह बांग्लादेश संसद भवन के दक्षिणी प्लाजा में आयोजित किया जाएगा, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। भव्य समारोह की तैयारी, 13 देशों को भेजा गया निमंत्रण सूत्रों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण अवसर के लिए अब तक 13 देशों को औपचारिक निमंत्रण भेजा जा चुका है। इनमें भारत, चीन, सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, मलेशिया, ब्रुनेई, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान शामिल हैं। समारोह को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि दक्षिण एशिया और खाड़ी देशों के कई शीर्ष नेताओं की संभावित उपस्थिति से बांग्लादेश की नई सरकार के वैश्विक संबंधों की दिशा का संकेत मिलेगा। पीएम मोदी को विशेष आमंत्रण बांग्लादेश ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी 17 फरवरी को मुंबई में पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों में व्यस्त रहेंगे। ऐसे में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर या उपराष्ट्रपति द्वारा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले वर्षों में मजबूत होते संबंधों को देखते हुए यह दौरा कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुबह सांसदों की शपथ, शाम को मंत्रिमंडल का गठन बांग्लादेश राष्ट्रीय परिषद (बीएनपी) के प्रवक्ता ने बताया कि 17 फरवरी का दिन देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा। सुबह नव-निर्वाचित सांसद शपथ लेंगे, जबकि शाम को नए मंत्रिमंडल का गठन कर सभी मंत्री शपथ ग्रहण करेंगे। इस दिन ढाका में विशेष सुरक्षा और प्रोटोकॉल व्यवस्था की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों की नई दिशा तय हो सकती है। खासतौर पर भारत, चीन और खाड़ी देशों के साथ संतुलित कूटनीति बनाए रखना नई सरकार की प्राथमिकता होगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 17 फरवरी को कितने दक्षिण एशियाई नेता ढाका पहुंचते हैं और इस ऐतिहासिक अवसर पर कौन-कौन अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। ढाका का यह समारोह न सिर्फ बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के कूटनीतिक समीकरणों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

डिब्रूगढ़ में इतिहास रचा: नेशनल हाईवे पर PM विमान की पहली लैंडिंग, ₹5450 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

डिब्रूगढ़, 14 फरवरी। पूर्वोत्तर भारत के विकास को नई गति देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को असम दौरे के दौरान डिब्रूगढ़ में नेशनल हाईवे पर तैयार की गई आपातकालीन लैंडिंग सुविधा पर अपने विशेष विमान की सफल लैंडिंग कर इतिहास रच दिया। यह पहली बार है जब किसी प्रधानमंत्री का विमान राष्ट्रीय राजमार्ग पर विकसित एयर स्ट्रिप पर उतरा। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री ने ₹5450 करोड़ से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित अत्याधुनिक कुमार भास्कर वर्मा सेतु को राष्ट्र को समर्पित किया, जो क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को नई मजबूती देगा। नेशनल हाईवे पर आपातकालीन लैंडिंग सुविधा का अवलोकन प्रधानमंत्री ने डिब्रूगढ़ में विकसित आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (Emergency Landing Facility) का विस्तृत निरीक्षण किया। यह सुविधा राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर वायुसेना और नागरिक विमानों की सुरक्षित लैंडिंग के लिए यह एयर स्ट्रिप रणनीतिक रूप से तैयार की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की सुविधाएं सीमावर्ती और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्यों में त्वरित सैन्य एवं राहत कार्यों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होंगी। ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ से बढ़ेगी कनेक्टिविटी ब्रह्मपुत्र पर निर्मित ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ अत्याधुनिक तकनीक से बनाया गया है। यह पुल उत्तर और दक्षिण तट के बीच आवागमन को सरल बनाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह सेतु केवल एक पुल नहीं, बल्कि “असम की प्रगति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक” है। ₹5450 करोड़ की विकास परियोजनाओं का शुभारंभ प्रधानमंत्री ने जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया, उनमें सड़क, पुल, ऊर्जा, और आधारभूत संरचना से जुड़ी योजनाएं प्रमुख हैं। इन परियोजनाओं से—  क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा  रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिलेगी उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर को ‘अष्टलक्ष्मी’ मानकर उसके सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। डिब्रूगढ़ पहुंचने पर प्रधानमंत्री का स्वागत असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा सरम ने किया। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने इस ऐतिहासिक क्षण को और भी विशेष बना दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिन असम के विकास इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से राज्य के बुनियादी ढांचे को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल परियोजनाओं के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि पूर्वोत्तर भारत देश के विकास का अभिन्न और प्राथमिक हिस्सा है। डिब्रूगढ़ में नेशनल हाईवे पर विमान की ऐतिहासिक लैंडिंग और विशाल विकास पैकेज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार असम को रणनीतिक, आर्थिक और अवसंरचनात्मक दृष्टि से सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

सेवा तीर्थ का लोकार्पण: जनसेवा को समर्पित नए युग की शुरुआत

नई दिल्ली। भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में जनसेवा को सर्वोपरि रखने के संकल्प के साथ आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का लोकार्पण किया। इस अवसर को देश की प्रशासनिक संस्कृति में परिवर्तन और सेवा-आधारित शासन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। 11 वर्षों की सेवा-भावना का प्रतीक ‘सेवा तीर्थ’ केवल एक भवन नहीं, बल्कि पिछले 11 वर्षों से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में संचालित सेवा-भाव से प्रेरित शासन की सोच का मूर्त रूप है। इस परिसर को आधुनिक प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया गया है, ताकि निर्णय-प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और जन-केंद्रित हो सके। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह परिसर “सरकार की शक्ति का नहीं, बल्कि सेवा के संकल्प का प्रतीक” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यहां से लिए जाने वाले हर निर्णय का केंद्रबिंदु देश के 140 करोड़ नागरिक होंगे। औपनिवेशिक सोच से जनसेवा की ओर नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक ब्रिटिश काल में प्रशासनिक नियंत्रण और हुकूमत की सोच के तहत निर्मित किए गए थे। प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में कहा कि स्वतंत्र भारत अब उसी स्थान से सेवा और कर्तव्य की नई संस्कृति को आगे बढ़ा रहा है। इसी क्रम में निर्मित कर्तव्य भवन और ‘सेवा तीर्थ’ जैसे आधुनिक परिसरों को जनता की आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप डिजाइन किया गया है। ये इमारतें शासन की मानसिकता में आए बदलाव—हुकूमत से सेवा की ओर—को दर्शाती हैं। विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम सरकार का मानना है कि ‘सेवा तीर्थ’ से प्रशासनिक कार्यों में समन्वय, तकनीकी दक्षता और निर्णय लेने की गति में सुधार होगा। इसका सीधा लाभ आम नागरिकों तक योजनाओं और जन-कल्याणकारी कार्यक्रमों की बेहतर पहुँच के रूप में दिखाई देगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परिसर विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मील का पत्थर सिद्ध होगा। यहां से लिए गए फैसले किसी विशेष वर्ग या सत्ता के केंद्रित दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि समग्र राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर होंगे।  “अमृत भावना” के साथ समर्पण अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि अमृत काल की भावना के साथ ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ को देश की जनता को समर्पित किया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की सच्ची शक्ति—जनता की अपेक्षाओं और विश्वास—को समर्पित बताया।

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन: BNP की ऐतिहासिक वापसी, दो दशक बाद फिर बनेगी सरकार

ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) ने महत्वपूर्ण आम चुनावों में स्पष्ट बहुमत हासिल कर करीब 20 वर्षों बाद सत्ता में वापसी का रास्ता साफ कर लिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, BNP और उसके सहयोगियों (BNP+) ने 211 सीटों पर जीत दर्ज की है। गुरुवार देर रात तक चली मतगणना के बाद तस्वीर लगभग साफ हो गई कि देश की अगली सरकार BNP के नेतृत्व में बनेगी। अवामी लीग की अनुपस्थिति में बदला राजनीतिक समीकरण अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद बनी अंतरिम सरकार ने इन चुनावों का आयोजन कराया। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग इस चुनावी मुकाबले में शामिल नहीं थी, जिससे राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए। इस बार का चुनाव मुख्य रूप से BNP और उसके पूर्व सहयोगी जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधा मुकाबला बन गया। हालांकि जमात-ए-इस्लामी और अन्य कट्टरपंथी दलों को अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिल सका। खालिदा जिया की विरासत और BNP की वापसी BNP की यह जीत पार्टी की दिवंगत नेता और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया की राजनीतिक विरासत की बड़ी पुनर्स्थापना मानी जा रही है। करीब दो दशकों तक सत्ता से दूर रहने के बाद BNP ने संगठनात्मक मजबूती और विपक्षी एकजुटता के सहारे यह सफलता हासिल की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अवामी लीग की गैर-मौजूदगी ने चुनाव को द्विध्रुवीय बना दिया, जिससे BNP को स्पष्ट बढ़त लेने का अवसर मिला। मतदाताओं का संदेश: स्थिरता और बदलाव की चाह इन चुनावों को बांग्लादेश में स्थिरता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंतरिम सरकार के कार्यकाल के बाद हुए इस मतदान में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों के अनुसार, जनता ने आर्थिक चुनौतियों, राजनीतिक अस्थिरता और शासन के मुद्दों पर स्पष्ट जनादेश दिया है। कट्टरपंथी ताकतों को सीमित समर्थन मिलना इस बात का संकेत है कि मतदाता मध्यमार्गी और मुख्यधारा की राजनीति को प्राथमिकता देना चाहते हैं। BNP के सामने अब कई अहम चुनौतियां होंगी—  राजनीतिक स्थिरता कायम रखना अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संतुलित करना आर्थिक सुधारों को गति देना  विपक्षी दलों के साथ संवाद स्थापित करना दो दशक बाद सत्ता में लौट रही BNP के लिए यह अवसर भी है और परीक्षा भी। आने वाले दिनों में नई सरकार की नीतियां यह तय करेंगी कि बांग्लादेश किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

राहुल गांधी पर कार्रवाई की तलवार? बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दी विशेषाधिकार हनन की नोटिस

इंडिया-US ट्रेड डील और बजट पर उठाए सवालों के बाद बढ़ा विवाद, लोकसभा नियम 380 के तहत की गई शिकायत नई दिल्ली: लोकसभा में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया भाषण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर लोकसभा सचिवालय में नोटिस दाखिल किया है। यह नोटिस उस वक्त दिया गया है जब राहुल गांधी ने सदन में इंडिया-यूएस ट्रेड डील और केंद्र सरकार के यूनियन बजट पर सवाल उठाए थे। बीजेपी सांसद ने अपने नोटिस में आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने बिना ठोस तथ्यों के गंभीर आरोप लगाए और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है। नोटिस लोकसभा की कार्यसूची एवं नियमावली के तहत Rule 380 के अंतर्गत दिया गया है, जिसके तहत अध्यक्ष को यह अधिकार होता है कि वे किसी भी आपत्तिजनक या असंसदीय टिप्पणी को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दे सकते हैं। मार्शल आर्ट वाली टिप्पणी से बढ़ा विवाद लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने राजनीति की तुलना मार्शल आर्ट से करते हुए कहा था कि जैसे खेल में “ग्रिप” और “चोक” होती है, उसी तरह राजनीति में भी नियंत्रण और दबाव की रणनीतियां होती हैं। उनके इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तत्काल आपत्ति जताई और इसे अनुचित करार दिया। बीजेपी का कहना है कि इस प्रकार की तुलना और शब्दों का चयन सदन की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। वहीं कांग्रेस का पक्ष है कि राहुल गांधी ने रूपक (metaphor) के माध्यम से अपनी बात रखी थी और इसमें कोई असंसदीय आशय नहीं था। रिकॉर्ड से हटाने की मांग निशिकांत दुबे द्वारा दायर नोटिस में मांग की गई है कि राहुल गांधी के भाषण के उन हिस्सों को रिकॉर्ड से हटाया जाए, जिनमें कथित रूप से असंसदीय शब्दों और तथ्यों से परे आरोपों का इस्तेमाल किया गया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि ऐसे वक्तव्य सदन की परंपराओं और गरिमा के खिलाफ हैं। यदि विशेषाधिकार हनन का मामला आगे बढ़ता है, तो यह राहुल गांधी के लिए राजनीतिक और संसदीय दोनों स्तरों पर चुनौती बन सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर करेगा। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब संसद में बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस चल रही है। इंडिया-यूएस ट्रेड डील और आर्थिक नीतियों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार विपक्ष पर भ्रामक आरोप लगाने का आरोप लगा रही है। अब निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में आगे कोई औपचारिक कार्रवाई होती है या विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है। (समाचार विश्लेषण जारी…)