लेह/नई दिल्ली। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल कवींद्र गुप्ता ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके अचानक दिए गए त्यागपत्र के बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि कवींद्र गुप्ता ने अपने इस्तीफे के पीछे की वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की है और अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान भी जारी नहीं किया गया है।
बताया जा रहा है कि कवींद्र गुप्ता ने अपना इस्तीफा केंद्र सरकार को भेज दिया है। उनके त्यागपत्र की खबर सामने आते ही राजनीतिक विश्लेषक और स्थानीय नेता इसके पीछे के कारणों को लेकर अलग-अलग कयास लगा रहे हैं।
गौरतलब है कि कवींद्र गुप्ता ने 18 जुलाई 2025 को लद्दाख के तीसरे उपराज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था। जम्मू के निवासी कवींद्र गुप्ता लंबे समय से सक्रिय राजनीति में रहे हैं। वे पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य में उपमुख्यमंत्री और विधानसभा के स्पीकर के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उस समय लद्दाख, जम्मू कश्मीर राज्य का ही हिस्सा हुआ करता था, जिसे वर्ष जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के बाद अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था।
आंदोलन और विवादों के बीच रहा कार्यकाल
लद्दाख के उपराज्यपाल के रूप में कवींद्र गुप्ता का कार्यकाल कई राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों के बीच बीता। उनके लगभग आठ महीने के कार्यकाल के दौरान लद्दाख में छठे शेड्यूल का दर्जा, विधानसभा के गठन और स्थानीय लोगों के लिए जमीन तथा नौकरियों में अधिकार सुनिश्चित करने की मांग को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन हुए।
इन प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। प्रशासन को हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल का सहारा लेना पड़ा। झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि लगभग चार दर्जन लोग घायल हुए थे। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी भवनों में तोड़फोड़ की और एक स्थान पर भाजपा कार्यालय में आगजनी की घटना भी सामने आई थी।
इस्तीफे के पीछे क्या वजह?
कवींद्र गुप्ता के इस्तीफे के पीछे असली कारण अभी स्पष्ट नहीं है। हालांकि राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी उन्हें जल्द ही कोई नई और बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया है।
वहीं कुछ जानकारों का मानना है कि लद्दाख में जारी आंदोलन और स्थानीय असंतोष को पूरी तरह समाप्त करने में प्रशासन की सीमित सफलता भी इस फैसले की एक वजह हो सकती है।
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से नए उपराज्यपाल की नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में लद्दाख की राजनीतिक स्थिति किस दिशा में जाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।