ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) ने महत्वपूर्ण आम चुनावों में स्पष्ट बहुमत हासिल कर करीब 20 वर्षों बाद सत्ता में वापसी का रास्ता साफ कर लिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, BNP और उसके सहयोगियों (BNP+) ने 211 सीटों पर जीत दर्ज की है। गुरुवार देर रात तक चली मतगणना के बाद तस्वीर लगभग साफ हो गई कि देश की अगली सरकार BNP के नेतृत्व में बनेगी।
अवामी लीग की अनुपस्थिति में बदला राजनीतिक समीकरण
अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद बनी अंतरिम सरकार ने इन चुनावों का आयोजन कराया। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग इस चुनावी मुकाबले में शामिल नहीं थी, जिससे राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए।
इस बार का चुनाव मुख्य रूप से BNP और उसके पूर्व सहयोगी जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधा मुकाबला बन गया। हालांकि जमात-ए-इस्लामी और अन्य कट्टरपंथी दलों को अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिल सका।
खालिदा जिया की विरासत और BNP की वापसी
BNP की यह जीत पार्टी की दिवंगत नेता और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया की राजनीतिक विरासत की बड़ी पुनर्स्थापना मानी जा रही है। करीब दो दशकों तक सत्ता से दूर रहने के बाद BNP ने संगठनात्मक मजबूती और विपक्षी एकजुटता के सहारे यह सफलता हासिल की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अवामी लीग की गैर-मौजूदगी ने चुनाव को द्विध्रुवीय बना दिया, जिससे BNP को स्पष्ट बढ़त लेने का अवसर मिला।
मतदाताओं का संदेश: स्थिरता और बदलाव की चाह
इन चुनावों को बांग्लादेश में स्थिरता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंतरिम सरकार के कार्यकाल के बाद हुए इस मतदान में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने हिस्सा लिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, जनता ने आर्थिक चुनौतियों, राजनीतिक अस्थिरता और शासन के मुद्दों पर स्पष्ट जनादेश दिया है। कट्टरपंथी ताकतों को सीमित समर्थन मिलना इस बात का संकेत है कि मतदाता मध्यमार्गी और मुख्यधारा की राजनीति को प्राथमिकता देना चाहते हैं।
BNP के सामने अब कई अहम चुनौतियां होंगी—
- राजनीतिक स्थिरता कायम रखना
- अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संतुलित करना
- आर्थिक सुधारों को गति देना
- विपक्षी दलों के साथ संवाद स्थापित करना
दो दशक बाद सत्ता में लौट रही BNP के लिए यह अवसर भी है और परीक्षा भी। आने वाले दिनों में नई सरकार की नीतियां यह तय करेंगी कि बांग्लादेश किस दिशा में आगे बढ़ेगा।