नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गुरुवार को कई राज्यों के राज्यपालों और केंद्र शासित प्रदेशों के लेफ्टिनेंट गवर्नरों में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए नई नियुक्तियों की घोषणा की है। इस बदलाव के तहत भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया गया है। वह अब तक इस पद पर कार्यरत विनय कुमार सक्सेना की जगह लेंगे। वहीं, विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का नया लेफ्टिनेंट गवर्नर बनाया गया है।
तरनजीत सिंह संधू लंबे समय तक भारतीय विदेश सेवा में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। उन्होंने फरवरी 2020 में अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला था और जनवरी 2024 तक इस पद पर रहे। अपने कार्यकाल के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सेवानिवृत्ति के बाद संधू ने 2024 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण की थी। इसके बाद पार्टी ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब की अमृतसर सीट से उम्मीदवार भी बनाया था। अब उन्हें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कई राज्यों में राज्यपाल बदले
केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार देश के कई राज्यों में भी राज्यपालों की नियुक्तियों और तबादलों में बदलाव किया गया है।
- हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को अब तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
- तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया है।
- वरिष्ठ भाजपा नेता नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
- भारतीय सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल बनाया गया है।
- तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को अब पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
- केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल बनाया गया है।
- लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से अहम फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा राज्यपालों और लेफ्टिनेंट गवर्नरों में किया गया यह व्यापक फेरबदल प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। खासकर दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में नई नियुक्तियों को आगामी राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
नई नियुक्तियों के बाद संबंधित पदाधिकारी जल्द ही अपने-अपने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पदभार संभालेंगे।