“7 अक्टूबर की त्रासदी पर भारत इज़राइल के साथ मजबूती से खड़ा है”
यरूशलम। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इज़राइल की संसद Knesset को संबोधित करते हुए भारत-इज़राइल संबंधों को ऐतिहासिक और भावनात्मक बताया। अपने भाषण में उन्होंने 7 अक्टूबर को हुए हमले में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और आतंकवाद के खिलाफ इज़राइल के साथ भारत की एकजुटता दोहराई।
प्रधानमंत्री ने कहा, “मेरा जन्म उसी दिन हुआ था जिस दिन भारत ने इज़राइल को आधिकारिक मान्यता दी थी—17 सितंबर 1950। यह संयोग दोनों देशों के रिश्तों की गहराई को दर्शाता है।” उन्होंने कहा कि भारत और इज़राइल के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और पारस्परिक विश्वास पर आधारित हैं।
प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर को हुए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दिन की त्रासदी ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। उन्होंने कहा, “मैं भारत के लोगों की ओर से हर उस जान और हर उस परिवार के लिए गहरी संवेदनाएं प्रकट करता हूं जिनकी दुनिया उस बेरहम आतंकवादी हमले में तबाह हो गई। हम आपका दर्द समझते हैं, हम आपके दुख में शामिल हैं।”
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत आतंकवाद के हर रूप और अभिव्यक्ति की कड़ी निंदा करता है और इस कठिन समय में इज़राइल के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, नवाचार और स्टार्ट-अप जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत-इज़राइल रणनीतिक साझेदारी और सुदृढ़ हुई है तथा दोनों देश मिलकर तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोज रहे हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत और इज़राइल को प्राचीन सभ्यताओं और मजबूत लोकतांत्रिक परंपराओं वाला देश बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने अनेक चुनौतियों के बावजूद लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा की है।
अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-इज़राइल संबंध आने वाले वर्षों में और अधिक ऊंचाइयों को छुएंगे तथा दोनों देश शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए मिलकर कार्य करते रहेंगे।