ईशान का तूफान, भारत का ताज: 271 रन बनाकर टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को रौंदा

नई दिल्ली। ग्रीनफील्ड स्टेडियम में शनिवार की रात भारतीय क्रिकेट के नाम एक और यादगार अध्याय जुड़ गया। पांचवें और अंतिम टी-20 मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को 46 रन से हराकर न सिर्फ मैच जीता, बल्कि पांच मैचों की सीरीज भी 4-1 से अपने नाम कर ली। यह जीत ईशान किशन के नाम रही, जिनकी विस्फोटक शतकीय पारी ने मुकाबले को एकतरफा बना दिया। घरेलू दर्शक जहां अपने चहेते संजू सैमसन से बड़ी पारी की उम्मीद लगाए बैठे थे, वहीं मंच पर चमके ईशान किशन, जिनके बल्ले से निकले छक्कों-चौकों ने कीवी गेंदबाजों की रणनीति तहस-नहस कर दी। टॉस के बाद बदली मैच की कहानी भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। शुरुआत हालांकि भारत के पक्ष में नहीं रही। अभिषेक शर्मा ने 16 गेंदों पर 30 रन बनाकर तेज शुरुआत दी, लेकिन लॉकी फर्ग्यूसन की अतिरिक्त रफ्तार के सामने ज्यादा देर नहीं टिक सके। संजू सैमसन एक बार फिर नाकाम रहे और महज 6 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। यह सीरीज में उनका लगातार पांचवां असफल प्रदर्शन रहा, जिसने उनके टी-20 विश्व कप के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। पावरप्ले के बाद भारत का स्कोर 54 रन पर 2 विकेट था और मुकाबला संतुलन में नजर आ रहा था। किशन–सूर्यकुमार की साझेदारी ने उड़ाए होश इसके बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव और ईशान किशन ने पारी की दिशा ही बदल दी। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए हुई 137 रनों की साझेदारी न्यूजीलैंड के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। किशन ने तेज हाथों, शानदार फुटवर्क और बेखौफ अंदाज से मैदान के हर कोने में शॉट लगाए। चोट के कारण चौथा टी-20 नहीं खेल पाने वाले किशन ने इस मैच में किसी भी तरह की झिझक नहीं दिखाई। उन्होंने महज 28 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया। वहीं सूर्यकुमार यादव ने अपने ट्रेडमार्क अंदाज में 30 गेंदों पर 63 रन ठोके, जिसमें चार चौके और छह छक्के शामिल थे। इसी दौरान उन्होंने टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 3000 रन भी पूरे किए। सूर्यकुमार के आउट होने के बाद भी ईशान का तूफान थमा नहीं। लेग स्पिनर ईश सोढ़ी के एक ओवर में उन्होंने 29 रन बटोर लिए। 42 गेंदों में शतक, रिकॉर्डों की बरसात ईशान किशन ने महज 42 गेंदों में अपने टी-20 अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला शतक पूरा किया। 97 रन पर पहुंचने के बाद लगातार दो छक्कों ने उन्हें तीन अंकों तक पहुंचाया। शतक पूरा करते ही उनका जोशीला जश्न और डगआउट में हार्दिक पांड्या की गले लगाकर दी गई बधाई इस पारी की खास तस्वीर बन गई। किशन 43 गेंदों पर 103 रन बनाकर आउट हुए। उनकी पारी में छह चौके और दस छक्के शामिल थे। अंत में हार्दिक पांड्या ने 17 गेंदों पर 42 रन की ताबड़तोड़ पारी खेली, जिससे भारत ने 20 ओवर में 5 विकेट पर 271 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। यह भारत के टी-20 अंतरराष्ट्रीय इतिहास में चौथी बार था जब टीम ने 250 से अधिक रन बनाए। लक्ष्य का पीछा और अर्शदीप का कहर 272 रन के पहाड़ जैसे लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड को अर्शदीप सिंह ने पहले ही ओवर में झटका दे दिया। टिम सीफर्ट (5) सस्ते में आउट हो गए। इसके बाद फिन एलन और रचिन रवींद्र ने तेजी से रन बटोरते हुए दूसरे विकेट के लिए 100 रन जोड़ दिए। फिन एलन ने 38 गेंदों पर 80 रन की विस्फोटक पारी खेली, लेकिन अक्षर पटेल ने इस साझेदारी को तोड़कर भारत को राहत दिलाई। इसके बाद कीवी पारी लड़खड़ा गई। महज 20 रन के भीतर तीन विकेट गिर गए और मैच भारत की पकड़ में आ गया। गेंदबाजों ने कसा शिकंजा अर्शदीप सिंह ने शानदार गेंदबाजी करते हुए टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना पहला पांच विकेट हॉल पूरा किया। उन्होंने 4 ओवर में 51 रन देकर 5 विकेट चटकाए। अक्षर पटेल ने 3 विकेट लिए, जबकि वरुण चक्रवर्ती और रिंकू सिंह को एक-एक सफलता मिली। हालांकि जसप्रीत बुमराह का दिन अच्छा नहीं रहा और वह 4 ओवर में 58 रन देकर विकेट लेने में नाकाम रहे। सीरीज पर भारत की मुहर आखिरकार न्यूजीलैंड की पूरी टीम 19.4 ओवर में 225 रन पर सिमट गई और भारत ने मुकाबला 46 रन से जीत लिया। इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने सीरीज 4-1 से अपने नाम कर ली। ग्रीनफील्ड स्टेडियम की यह रात ईशान किशन के नाम रही—एक ऐसी पारी, जिसने न सिर्फ रिकॉर्ड बुक बदली, बल्कि भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को लंबे समय तक याद रहने वाला जश्न भी दे दिया।

इतिहास रचती शपथ: भावुक क्षणों में सुनेत्रा पवार बनीं महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब भरी आंखों और दृढ़ संकल्प के साथ सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस शपथ के साथ ही वह महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बन गईं। लोकभवन में आयोजित गरिमामय समारोह में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के दौरान सुनेत्रा पवार की आंखों में भावनाएं साफ झलक रही थीं। यह सिर्फ एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि दशकों के राजनीतिक संघर्ष, सामाजिक प्रतिबद्धता और महिलाओं के बढ़ते नेतृत्व का प्रतीक क्षण था। समारोह में सत्ता और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता, प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।  महिला नेतृत्व को मिला नया आयाम सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री बनना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे महाराष्ट्र की राजनीति में महिला सशक्तिकरण की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। अब तक राज्य की सत्ता में महिलाओं की भागीदारी सीमित रही है, ऐसे में यह नियुक्ति आने वाले समय में नई राजनीतिक धारा तय कर सकती है। अनुभव और विश्वास का मेल राजनीतिक हलकों में सुनेत्रा पवार को एक संतुलित, शांत और जमीनी मुद्दों से जुड़ी नेता के रूप में जाना जाता है। सामाजिक कार्यों से लेकर संगठनात्मक जिम्मेदारियों तक, उनका अनुभव अब राज्य के शीर्ष नेतृत्व में दिखाई देगा। माना जा रहा है कि वह प्रशासनिक फैसलों में समन्वय और संवेदनशीलता को प्राथमिकता देंगी। शपथ के बाद पहला संदेश शपथ लेने के बाद सुनेत्रा पवार ने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जवाबदेही भी है। उन्होंने राज्य की जनता का विश्वास बनाए रखने, महिलाओं, किसानों और युवाओं के हित में काम करने का संकल्प दोहराया। राजनीति में दूरगामी असर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल सत्ता संतुलन को मजबूत करेगा, बल्कि आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी असर डालेगा। खासतौर पर महिला मतदाताओं और युवा वर्ग में इसका सकारात्मक संदेश जाएगा। कुल मिलाकर, सुनेत्रा पवार की यह शपथ महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में एक भावुक और निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज हो गई है—जहां सत्ता के गलियारों में पहली बार महिला नेतृत्व ने उपमुख्यमंत्री पद पर दस्तक दी।

कोलकाता अग्निकांड पर अमित शाह का ममता सरकार पर तीखा हमला

कोलकाता/नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता के आनंदपुर इलाके में स्थित एक मोमो फैक्ट्री में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। शाह ने इस हादसे को महज दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसे “भ्रष्टाचार और लापरवाही का नतीजा” बताया। उन्होंने सीधे सवाल किया— “आखिर उस मोमो फैक्ट्री में किसका पैसा लगा है, जिसे बचाने की कोशिश की जा रही है?” हादसे की सच्चाई छिपा रही है सरकार अमित शाह ने आरोप लगाया कि इस अग्निकांड में 25 लोगों की मौत हुई, जबकि 27 लोग अब भी लापता हैं, लेकिन राज्य सरकार सच्चे आंकड़े सामने लाने से बच रही है। उन्होंने कहा कि घटना के बाद प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में है और पीड़ित परिवारों को अब तक न्याय नहीं मिला है। बिना अनुमति चल रही थी फैक्ट्री? गृह मंत्री ने सवाल उठाया कि रिहायशी इलाके में इतनी बड़ी फैक्ट्री कैसे चल रही थी। क्या फैक्ट्री के पास फायर सेफ्टी की अनुमति थी? क्या स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी? या फिर सब कुछ जानते हुए आंखें मूंद ली गईं? शाह ने दावा किया कि अगर निष्पक्ष जांच हो, तो यह साफ हो जाएगा कि स्थानीय प्रशासन से लेकर ऊपर तक संरक्षण दिया गया था। “रावण का भी अहंकार टूटा था” अपने भाषण में अमित शाह ने राजनीतिक हमला तेज करते हुए कहा,“इतिहास गवाह है कि रावण का भी अहंकार टूटा था। जो सरकारें खुद को कानून से ऊपर समझती हैं, उनका भी वही हश्र होता है।” उन्होंने कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है, और आम जनता असुरक्षित महसूस कर रही है। भाजपा ने इस मामले में न्यायिक जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई, और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवज़ा देने की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक इस मुद्दे को सड़क से संसद तक उठाया जाएगा। कोलकाता अग्निकांड को लेकर बंगाल की राजनीति गरमा गई है। एक ओर भाजपा इसे भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बता रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस सरकार सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रही है। आने वाले दिनों में यह मामला राज्य की सियासत में और बड़ा तूफान खड़ा कर सकता है।

सिर्फ़ 30 सेकंड का सेल्फ-रिव्यू बदल सकता है आपकी सोच, व्यवहार और आत्मविश्वास

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में हम हर किसी को समझने की कोशिश करते हैं, लेकिन सबसे ज़रूरी इंसान — खुद को — समझने के लिए समय नहीं निकाल पाते। जबकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर इंसान रोज़ सिर्फ़ कुछ सेकंड खुद का ‘सेल्फ-रिव्यू’ करे, तो उसकी पर्सनैलिटी में बड़े और स्थायी बदलाव आ सकते हैं। यह तरीका न तो महंगा है, न ही समय लेने वाला। बस जरूरत है थोड़ी ईमानदारी और रोज़ाना की आदत बनाने की। क्या है ‘सेल्फ-रिव्यू’ या आत्म-विश्लेषण? सेल्फ-रिव्यू का मतलब है दिन खत्म होने से पहले खुद से यह पूछना — आज मैंने क्या सही किया? कहां मुझसे गलती हुई? कल मैं क्या बेहतर कर सकता हूं? यह प्रक्रिया आपको अपने व्यवहार, सोच और भावनाओं को बाहर से देखने में मदद करती है। रोज़ चंद सेकंड का रिव्यू लाएगा पर्सनैलिटी में ये 4 बड़े बदलाव 1. सोच बनेगी ज्यादा पॉजिटिव और साफ़ जब आप रोज़ अपने दिन का विश्लेषण करते हैं, तो नेगेटिव सोच अपने-आप कम होने लगती है। आप समस्याओं को बोझ नहीं, बल्कि सीख के तौर पर देखने लगते हैं। नतीजा: ओवरथिंकिंग कम होती है और दिमाग शांत रहता है। 2. आत्मविश्वास में होगा जबरदस्त इज़ाफा सेल्फ-रिव्यू आपको यह एहसास दिलाता है कि आप हर दिन कुछ न कुछ सही कर रहे हैं। छोटी-छोटी जीतें दिखने लगती हैं, जो आत्मविश्वास को मजबूत बनाती हैं। नतीजा: खुद पर भरोसा बढ़ता है और फैसले लेने की क्षमता मजबूत होती है। 3. रिश्तों में आएगी गहराई और समझदारी जब आप सोचते हैं कि आपने किसी से कैसा व्यवहार किया, तो अगली बार ज्यादा संवेदनशील और समझदार बनते हैं। नतीजा: गुस्सा कम, सहनशीलता ज्यादा और रिश्ते मजबूत। 4. खुद को सुधारने की आदत बनेगी सेल्फ-रिव्यू आपको परफेक्ट बनने का दबाव नहीं देता, बल्कि हर दिन थोड़ा बेहतर बनने की प्रेरणा देता है। नतीजा: पर्सनैलिटी में नैचुरल ग्रोथ और लगातार सुधार। सेल्फ-रिव्यू कैसे करें? (30 सेकंड का आसान तरीका) सोने से पहले या दिन खत्म होने पर मन में बस ये 3 सवाल दोहराएं: आज मैंने क्या अच्छा किया? आज मैं कहां बेहतर हो सकता था? कल मैं कौन-सी एक चीज़ सुधारूंगा? बस इतना ही। न लिखना ज़रूरी, न किसी ऐप की जरूरत। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, रोज़ाना किया गया सेल्फ-रिव्यू दिमाग को ट्रेन करता है कि वह गलतियों से भागे नहीं, बल्कि उनसे सीखे। यही आदत लंबे समय में एक संतुलित और प्रभावशाली पर्सनैलिटी की नींव बनती है। अगर आप अपनी पर्सनैलिटी में बदलाव चाहते हैं, तो किसी मोटिवेशनल किताब या महंगे कोर्स से पहले खुद से बात करना शुरू करें। क्योंकि दिन के सिर्फ़ चंद सेकंड, आपकी ज़िंदगी की दिशा बदल सकते हैं।

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले– ‘समय सीमा दी है’

वॉशिंगटन / तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तीखी जुबानी जंग के बीच एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान सैन्य टकराव के बजाय समझौते का रास्ता अपनाना चाहता है। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “मैं इतना कह सकता हूं कि वे समझौता करना चाहते हैं।” ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर बातचीत को लेकर डेडलाइन जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्होंने ईरान को उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर बातचीत शुरू करने के लिए कोई समय सीमा तय की है, तो उन्होंने सीधे जवाब दिया, “हां, मैंने दी है।” हालांकि, उन्होंने उस समय सीमा का खुलासा करने से इनकार कर दिया। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ईरान पर कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ईरान की चेतावनी और अमेरिका की ताकत का प्रदर्शन जहां एक ओर ईरान लगातार अमेरिका को हमले को लेकर चेतावनी दे रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने भी अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। अमेरिकी नौसैनिक विमानवाहक पोत समूह का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा,“हमारा एक विशाल नौसैनिक बेड़ा इस समय ईरान की ओर बढ़ रहा है।” इस बयान को अमेरिका की सख्त चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है कि यदि बातचीत विफल होती है, तो सभी विकल्प खुले हैं। ‘उम्मीद है समझौता हो जाएगा’ ट्रंप ने साथ ही सुलह की संभावना भी जताई। उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि हम समझौता कर लेंगे। अगर समझौता हो जाता है तो यह अच्छी बात है। अगर नहीं होता है, तो हम देखेंगे कि आगे क्या होता है।” यह बयान ट्रंप प्रशासन की दोहरी रणनीति को दर्शाता है—एक तरफ बातचीत का प्रस्ताव, दूसरी ओर सैन्य दबाव। मानवाधिकार मुद्दे पर भी संकेत ट्रंप ने ईरान द्वारा प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की प्रक्रिया को रोकने के फैसले का भी जिक्र किया और इसे इस बात का संकेत बताया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार हो सकता है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, हालिया कार्रवाई में ईरान में 6,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हुई थी। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान संबंधों पर टिकी हुई है। क्या दोनों देश बातचीत की मेज पर बैठेंगे या टकराव और गहराएगा—इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा। एक बात तय है: ट्रंप के बयान ने इस वैश्विक संकट में एक नया मोड़ जरूर ला दिया है।

फरवरी में NCP के विलय की अटकलें तेज, सुनेत्रा पवार बन सकती हैं महाराष्ट्र की नई उपमुख्यमंत्री

मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फरवरी महीने में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विलय की संभावनाएं तेज होती नजर आ रही हैं। इसी बीच दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को राज्य की नई उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चा ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को होने वाली राकांपा विधायक दल की अहम बैठक में सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुना जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो उनके उपमुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो जाएगा। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी सहमत हैं और उन्होंने गठबंधन सहयोगियों के साथ इस मुद्दे पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अजीत पवार के निधन के बाद राकांपा को एक मजबूत और स्वीकार्य चेहरे की जरूरत थी, जिसे सुनेत्रा पवार पूरा कर सकती हैं। संगठन में उनकी स्वीकार्यता, पारिवारिक राजनीतिक विरासत और सहानुभूति फैक्टर उन्हें इस पद के लिए मजबूत दावेदार बनाता है। वहीं, फरवरी में प्रस्तावित NCP के विलय को लेकर भी अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं। माना जा रहा है कि पार्टी की एकजुटता और सत्ता में स्थिरता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है। अगर विलय होता है तो महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनेंगे और सरकार की दिशा-दशा पर इसका गहरा असर पड़ेगा। फिलहाल सभी की निगाहें शनिवार की बैठक पर टिकी हैं, जहां सुनेत्रा पवार के राजनीतिक भविष्य और NCP की आगे की रणनीति को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है।

अदाणी ग्रुप की तीन कंपनियों को ग्लोबल रेटिंग, भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ी साख

नई दिल्ली/टोक्यो: जापान की दिग्गज क्रेडिट रेटिंग एजेंसी JCR (Japan Credit Rating Agency) ने अदाणी ग्रुप की तीन प्रमुख कंपनियों—अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ), अदाणी ग्रीन एनर्जी (AGEL) और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस (AESL)—को जो रेटिंग दी है, वह न सिर्फ समूह के लिए बल्कि भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए भी एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है। वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की परियोजनाओं की विश्वसनीयता और फाइनेंशियल स्ट्रेंथ को यह कदम नई पहचान देता है। अदाणी पोर्ट्स का कमाल: सॉवरेन रेटिंग से भी ऊपर इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी उपलब्धि Adani Ports & SEZ Ltd (APSEZ) के नाम रही। JCR ने कंपनी को ‘A-’ (स्टेबल आउटलुक) की रेटिंग दी है। आमतौर पर किसी भी देश की कंपनियों की रेटिंग, उस देश की सॉवरेन रेटिंग से ऊपर नहीं जाती—लेकिन अदाणी पोर्ट्स ने इस परंपरा को तोड़ते हुए भारत की सॉवरेन रेटिंग से एक पायदान ऊपर की रेटिंग हासिल की है। रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, इसके पीछे कंपनी का मजबूत और स्थिर कैश-फ्लो, विशाल एसेट बेस और ग्लोबल पोर्टफोलियो प्रमुख वजहें हैं। अदाणी पोर्ट्स के पास कुल 19 पोर्ट्स का नेटवर्क है—15 भारत में और 4 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर। कंपनी भारत के लगभग 30% कार्गो और 50% कंटेनर वॉल्यूम को संभालती है, जो इसकी ऑपरेशनल मजबूती और बाजार में पकड़ को दर्शाता है। ग्रीन एनर्जी और पावर ट्रांसमिशन में भी भरोसा अदाणी ग्रुप की अन्य दो कंपनियों—अदाणी ग्रीन एनर्जी (AGEL) और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस (AESL)—को भी JCR ने ‘BBB+’ (स्टेबल) रेटिंग दी है, जो भारत की सॉवरेन रेटिंग के बराबर मानी जाती है। रेटिंग एजेंसी ने दोनों कंपनियों के मजबूत EBITDA, दीर्घकालिक पावर परचेज एग्रीमेंट्स, और तेज़ी से हो रहे विस्तार को रेटिंग का आधार बताया है। रिन्यूएबल एनर्जी और पावर ट्रांसमिशन जैसे भविष्य के सेक्टर्स में इन कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी, भारत के ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों को भी मजबूती देती है। निवेशकों के लिए क्या मायने? JCR की यह रेटिंग्स अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत हैं। इससे न केवल अदाणी ग्रुप की फंड जुटाने की क्षमता मजबूत होगी, बल्कि भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में वैश्विक पूंजी का भरोसा भी बढ़ेगा। कुल मिलाकर, जापान की प्रतिष्ठित एजेंसी की यह मुहर बताती है कि भारतीय कंपनियां अब ग्लोबल बेंचमार्क पर खड़ी होकर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं—और अदाणी ग्रुप इस बदलाव की अग्रिम पंक्ति में है।

“लड़कियों की पढ़ाई और सेहत पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला” — स्कूलों में अलग टॉयलेट और मुफ्त सैनिटरी पैड जरूरी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश की छात्राओं के हित में एक बहुत ही अहम और राहत भरा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अब सभी सरकारी और निजी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट और मुफ्त सैनिटरी पैड की सुविधा देना जरूरी होगा। केंद्र और राज्य सरकारों को तीन महीने के भीतर इस आदेश को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। यह मामला स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों को पीरियड्स के समय होने वाली दिक्कतों को लेकर दायर एक याचिका से जुड़ा था। याचिका में बताया गया था कि सुविधाओं की कमी की वजह से कई लड़कियां इन दिनों स्कूल नहीं आ पातीं, जिससे उनकी पढ़ाई पर असर पड़ता है। पीरियड्स से जुड़ा स्वास्थ्य भी जीवन का अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 में दिया गया जीवन का अधिकार, मासिक धर्म से जुड़ी सेहत और साफ-सफाई को भी शामिल करता है। यानी लड़कियों को पीरियड्स के दौरान सुरक्षित और साफ माहौल मिलना उनका हक है। यह फैसला सिर्फ सरकार के लिए नहीं कोर्ट ने कहा कि यह आदेश सिर्फ सरकारों और स्कूल प्रबंधन के लिए नहीं है, बल्कि— उन लड़कियों के लिए है जो मदद मांगने में शर्म महसूस करती हैं। उन शिक्षकों के लिए है जो मदद करना चाहते हैं, लेकिन साधनों की कमी से रुक जाते हैं। उन माता-पिता के लिए है जो इस विषय पर चुप रहते हैं। और समाज के लिए, ताकि लड़कियों के साथ जुड़ी इस प्राकृतिक प्रक्रिया को बोझ न समझा जाए। कोर्ट ने कहा, “कोई भी बच्ची इसलिए स्कूल न छोड़े कि उसके शरीर को बोझ समझा जाता है। इसमें उसकी कोई गलती नहीं है।” कोर्ट ने यह भी कहा कि इस फैसले की सोच और संदेश समाज के हर हिस्से तक पहुंचना चाहिए। लड़कियों की शिक्षा को मजबूती सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लड़कियों की सेहत, सम्मान और पढ़ाई तीनों को मजबूत करेगा। माना जा रहा है कि इससे स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं की संख्या घटेगी और देश में लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

दिल्लीवालों को राहत का तोहफा: पानी बिल माफी योजना की तारीख बढ़ी, अब 15 अगस्त तक मिलेगा मौका

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राजधानी के लाखों उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए पानी बिल माफी योजना की अंतिम तारीख बढ़ाने का ऐलान किया है। पहले यह योजना 31 जनवरी तक लागू थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 15 अगस्त कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले से उन लोगों को सीधा लाभ मिलेगा, जो किसी कारणवश अब तक योजना का फायदा नहीं उठा सके थे या जिनके बिलों में तकनीकी गड़बड़ियां बनी हुई थीं। क्यों बढ़ाई गई योजना की तारीख सरकारी सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के पास बड़ी संख्या में ऐसे उपभोक्ताओं की शिकायतें आई थीं, जिनके पानी के बिलों में लंबे समय से गलतियां दर्ज थीं। कई उपभोक्ता दस्तावेज़ी दिक्कतों, तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में तय समयसीमा के भीतर आवेदन नहीं कर पाए। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने योजना की अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया। लाखों उपभोक्ताओं को होगा फायदा इस योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के बकाया पानी बिलों पर पूरी या आंशिक माफी दी जा रही है। जिन उपभोक्ताओं के बिल वर्षों से लंबित हैं, उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का अनुमान है कि इस फैसले से लाखों परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी और वे बिना किसी अतिरिक्त बोझ के अपने कनेक्शन को नियमित कर सकेंगे। कैसे मिलेगा योजना का लाभ दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार, उपभोक्ता अपने नजदीकी DJB कार्यालय, अधिकृत केंद्र या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान उपभोक्ताओं को अपने पुराने बिलों की जानकारी, कनेक्शन डिटेल्स और पहचान से जुड़े दस्तावेज़ जमा करने होंगे। जिन मामलों में बिलिंग में गलती पाई जाएगी, वहां सुधार के बाद माफी का लाभ दिया जाएगा। सरकार का संदेश दिल्ली सरकार ने अपील की है कि पात्र उपभोक्ता 15 अगस्त से पहले योजना का लाभ जरूर लें। सरकार का कहना है कि यह कदम सिर्फ आर्थिक राहत नहीं, बल्कि जल सेवाओं को पारदर्शी और उपभोक्ता-हितैषी बनाने की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास है। सरकार संकेत दे चुकी है कि योजना के दौरान मिली शिकायतों और अनुभवों के आधार पर भविष्य में जल बिलिंग सिस्टम को और सरल व डिजिटल बनाया जाएगा, ताकि उपभोक्ताओं को बार-बार ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। कुल मिलाकर, पानी बिल माफी योजना की तारीख बढ़ाना दिल्ली सरकार का एक अहम जनहितैषी फैसला माना जा रहा है, जो सीधे तौर पर आम लोगों की जेब और जीवन दोनों को राहत देगा।

बिहार में सामाजिक न्याय की बड़ी पहल: SC-ST छात्रों की प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति दोगुनी, 33 लाख बच्चों को मिलेगा सीधा लाभ

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की अहम बैठक में कुल 31 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। इन फैसलों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) कल्याण विभाग का वह निर्णय, जिसके तहत प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की दरों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। यह संशोधित दरें वित्तीय वर्ष 2025-26 से लागू होंगी और इसका सीधा लाभ राज्य के लाखों वंचित छात्र-छात्राओं को मिलेगा। 2011 की दरों से राहत, अब महंगाई के अनुरूप सहायता सरकार ने 2011 से चली आ रही पुरानी छात्रवृत्ति दरों को मौजूदा महंगाई और शैक्षणिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लगभग दोगुना कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत: कक्षा 1 से 5: ₹1200 वार्षिक कक्षा 6 से 8: ₹2400 वार्षिक कक्षा 9 से 10: ₹3600 वार्षिक छात्रावास में रहने वाले कक्षा 1 से 10 तक के छात्र: ₹6000 वार्षिक इस योजना का लाभ सरकारी स्कूलों और मान्यता प्राप्त/स्वीकृत संस्थानों में पढ़ने वाले SC-ST छात्र-छात्राओं को मिलेगा। 519.64 करोड़ रुपये का सालाना निवेश राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 519.64 करोड़ रुपये के वार्षिक व्यय को स्वीकृति दी है। अनुमान है कि इससे करीब 27 से 33 लाख छात्र-छात्राएं सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। यह राशि बच्चों को किताबें, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य ड्रॉपआउट दर को कम करना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना है। पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग छात्रावास अनुदान भी दोगुना कैबिनेट बैठक में पिछड़ा वर्ग और अत्यंत पिछड़ा वर्ग छात्रावास अनुदान योजना में भी बड़ी राहत दी गई। अब तक मिलने वाले ₹1000 मासिक अनुदान को बढ़ाकर ₹2000 प्रति माह कर दिया गया है। लाभार्थी: करीब 8150 छात्र-छात्राएं वार्षिक वित्तीय भार: 19.56 करोड़ रुपये लागू होने की तिथि: 1 जनवरी 2026 शिक्षा के जरिए सामाजिक न्याय की मजबूत नींव कैबिनेट ने छात्रवृत्ति संशोधन को तत्काल प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यह फैसला न केवल शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करेगा, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में बिहार सरकार का एक मजबूत संदेश भी है। बैठक में इसके अलावा विकास योजनाओं, प्रशासनिक सुधारों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों से जुड़े अन्य प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।