फर्जी आईएएस को मिला ‘राष्ट्रीय प्रेरणा दूत अवार्ड’, छपरा में संस्थाओं की साख पर सवाल

छपरा। खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) का अधिकारी बताकर लंबे समय तक सामाजिक और सार्वजनिक मंचों पर सक्रिय रहने वाले रितेश कुमार को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस व्यक्ति पर फर्जी पहचान के सहारे लोगों को गुमराह करने का आरोप है, उसे “राष्ट्रीय प्रेरणा दूत अवार्ड” जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाज़ा गया। इस खुलासे के बाद अब मामला केवल एक व्यक्ति की कथित धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सम्मान देने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्य अतिथि से ‘प्रेरणा दूत’ तक का सफर सूत्रों के अनुसार रितेश कुमार छपरा स्थित फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया संस्था से जुड़े कई कार्यक्रमों में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होता रहा। मंच से उसे आईएएस अधिकारी के रूप में परिचय कराया गया और युवाओं के लिए “प्रेरणास्रोत” बताया गया। यही नहीं, संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में उसकी मौजूदगी को विशेष उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया। किस आधार पर मिला राष्ट्रीय सम्मान? सबसे बड़ा सवाल यही है कि— “राष्ट्रीय प्रेरणा दूत अवार्ड” देने के लिए कौन-से मापदंड तय किए गए थे? रितेश कुमार ने ऐसा कौन-सा उल्लेखनीय सामाजिक या राष्ट्रीय योगदान दिया, जिसके चलते उसे यह सम्मान दिया गया? क्या अवार्ड से पहले उसके दस्तावेज़, प्रशासनिक सेवा से जुड़े दावे और पहचान की किसी स्तर पर जांच की गई? यदि बिना सत्यापन के किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय स्तर का सम्मान दे दिया गया, तो यह न केवल लापरवाही है, बल्कि समाज के साथ विश्वासघात भी माना जाएगा। संस्थाओं की भूमिका भी कटघरे में विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में दोष केवल फर्जी पहचान रखने वाले व्यक्ति का नहीं होता। सम्मान देने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है। जब जांच-पड़ताल के बजाय प्रभाव, पहचान या प्रचार के आधार पर अवार्ड दिए जाते हैं, तो सम्मान की गरिमा और उद्देश्य दोनों पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया से जवाब की अपेक्षा मामले के सामने आने के बाद अब फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया संस्था से पारदर्शिता की उम्मीद की जा रही है। संस्था को यह स्पष्ट करना चाहिए कि— अवार्ड चयन की पूरी प्रक्रिया क्या थी किन प्रमाणों और मानकों के आधार पर रितेश कुमार को चुना गया भविष्य में इस तरह की चूक न हो, इसके लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे मुद्दा सिर्फ फर्जी आईएएस का नहीं यह प्रकरण सिर्फ एक व्यक्ति के फर्जी होने का मामला नहीं है। यह सवाल है सम्मान की विश्वसनीयता, सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारी और जनता को गुमराह किए जाने की उस व्यवस्था का, जिस पर अब गंभीर मंथन ज़रूरी हो गया है। जब तक इन सवालों के ठोस और पारदर्शी जवाब नहीं मिलते, तब तक यह मामला केवल एक खबर नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी बना रहेगा।

3.47 लाख करोड़ का महाबजट: बिहार को ‘विकसित राज्य’ बनाने की नीतीश सरकार की बड़ी तैयारी

पटना। बिहार विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट ने साफ कर दिया है कि नीतीश सरकार विकास की रफ्तार को और तेज करने के मूड में है। राज्य के वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने सदन में कुल 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया, जो चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के 3.17 लाख करोड़ रुपये के बजट से कहीं अधिक है। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार का लक्ष्य बिहार को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल करना है और इसके लिए बुनियादी ढांचे, आवास, सड़क और रोजगार को प्राथमिकता दी जा रही है। लाल बैग के साथ विधानसभा पहुंचे वित्त मंत्री बजट सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित रहने के बाद दोबारा शुरू हुई। इसके बाद वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव लाल रंग का बजट बैग लेकर विधानसभा पहुंचे और सदन में बजट भाषण पढ़ना शुरू किया। उन्होंने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में बिहार ने विकास की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है और अब राज्य एक नए आर्थिक दौर में प्रवेश कर रहा है। किफायती आवास पर सरकार का बड़ा फोकस इस बजट में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सस्ते आवास की योजनाओं को विशेष महत्व दिया गया है। सरकार का मानना है कि किफायती मकान उपलब्ध होने से निम्न और मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी। आवास योजनाओं से न केवल लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि निर्माण क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी और इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 5 नए एक्सप्रेस-वे से बदलेगा बिहार का रोड मैप बजट का एक बड़ा आकर्षण राज्य में 5 नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण की घोषणा रही। सरकार ने बेहतर सड़क नेटवर्क को आर्थिक विकास की रीढ़ बताया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इन एक्सप्रेस-वे के बनने से यातायात व्यवस्था सुगम होगी, यात्रा का समय कम होगा और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इससे बिहार की आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और राज्य निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनेगा। विकास और विश्वास का बजट कुल मिलाकर 2026-27 का यह बजट विकास, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह बजट बिहार को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ-साथ आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा।

“अमृत उद्यान” आज से आम नागरिकों के लिए खुला — प्रवेश नियम और समय विस्तार से

नई दिल्ली, 3 फरवरी 2026 — राष्ट्रपति भवन परिसर का प्रतिष्ठित अमृत उद्यान (पहले मुगल गार्डन) आज से आम जनता के लिए खुल गया है। इस खूबसूरत बगीचे को इस बार “विंटर एनुअल्स एडिशन 2026” के रूप में 3 फरवरी से 31 मार्च 2026 तक जनता के लिए खोला गया है, ताकि लोग प्राकृतिक हरियाली, फूलों की विविधता और शांत वातावरण का आनंद ले सकें। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसका औपचारिक उद्घाटन किया। प्रवेश की तारीखें एवं समय खुलने की तिथि: 3 फरवरी 2026 समाप्ति तिथि: 31 मार्च 2026 समय: सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक अंतिम प्रवेश: 5:15 बजे तक बंद रहेगा: हर सोमवार (रखरखाव के लिए) और 4 मार्च (होली) के दिन सप्ताह में 6 दिन उद्यान जनता के लिए खुला रहेगा (सोमवार को बंद) प्रवेश नियम और टिकट प्रवेश पूर्णतया मुफ्त (Free) है। ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य: सभी आगंतुकों को अपनी स्लॉट पहले से ऑनलाइन बुक करनी होगी — visit.rashtrapatibhavan.gov.in पर। स्पॉट टिकट/ऑन-द-डेट प्रवेश उपलब्ध नहीं होगा, इसलिए पहले से बुकिंग करना ज़रूरी है। मोबाइल नंबर आवश्यक: ऑनलाइन बुकिंग में मोबाइल नंबर का उपयोग होता है और हर मोबाइल क्रमांक से एक ही स्लॉट बुक हो सकता है। वॉक-इन विज़िटर्स: अगर कोई पहले से ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाता है तो उद्यान प्रवेश के पास बने Self-Service Kiosks पर जाकर पंजीकरण कर सकता है (स्लॉट उपलब्ध होने पर)। प्रवेश द्वार: Gate No. 35 (राष्ट्रपति भवन के North Avenue Road के पास) विशेष नियम और सुझाव QR कोड से जानकारी: उद्यान के विभिन्न हिस्सों में QR कोड लगे हैं, जिन्हें स्कैन कर फूलों/पौधों के बारे में जानकारी ली जा सकती है, जिससे यह यात्रा शिक्षाप्रद भी बन जाती है। शटल सेवा: Central Secretariat Metro Station से Gate No. 35 तक शटल बस सेवा भी उपलब्ध है (लगभग हर 30 मिनट पर) जिससे पहुँच और अधिक सुविधाजनक होती है।सप्ताहांत और छुट्टियों पर भीड़ हो सकती है, इसलिए अगर संभव हो तो सप्ताह के मध्य आने की योजना बनाएं। मुख्य आकर्षण अमृत उद्यान में इस बार 140 से अधिक गुलाबों की किस्में, ट्यूलिप और अन्य शानदार प्रकार के फूल सजाए गए हैं, जो इसे प्रकृति प्रेमियों और परिवार के साथ घूमने वालों के लिये एक अद्भुत स्थल बनाते हैं। अगर आप दिल्ली में हैं या बाहर से घूमने आ रहे हैं, तो यह अवसर प्राकृतिक सौंदर्य और शांति का आनंद लेने का शानदार मौका है — यात्रियों से अनुरोध है कि वे पहले से स्लॉट बुक कर अपना समय सुनिश्चित करें।

डेटा प्राइवेसी पर सुप्रीम सख्त, मेटा-व्हाट्सएप से मांगा लिखित आश्वासन; हलफनामा नहीं तो याचिका खारिज

नई दिल्ली। डेटा प्राइवेसी के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया दिग्गज मेटा और उसकी सहयोगी कंपनी व्हाट्सएप को बड़ा झटका दिया है। राहत की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा कि अदालत को सिर्फ मौखिक दलीलों से संतोष नहीं होगा। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मेटा और व्हाट्सएप को हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करना होगा कि वे किसी भी परिस्थिति में यूजर्स का डेटा साझा नहीं करेंगे। कोर्ट का सख्त रुख सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी केवल तकनीकी सुविधा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों यूजर्स की निजता की रक्षा करना भी उनकी संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि कंपनियां इस संबंध में लिखित आश्वासन देने से बचती हैं, तो उनकी याचिका पर आगे सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रहेगा। हलफनामा अनिवार्य सुप्रीम कोर्ट ने मेटा और व्हाट्सएप को निर्देश दिया है कि वे हलफनामे में यह बात स्पष्ट रूप से दर्ज करें कि न तो वे थर्ड पार्टी के साथ डेटा साझा करेंगे और न ही किसी अन्य व्यावसायिक उद्देश्य के लिए यूजर्स की निजी जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर ऐसा हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो मामला सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाएगा। प्राइवेसी बनाम टेक कंपनियां यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब देश और दुनिया में डेटा सुरक्षा और डिजिटल निजता को लेकर बहस तेज है। भारत में डेटा प्रोटेक्शन कानून को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट का यह रुख टेक कंपनियों के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि यूजर्स की निजता से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब सभी की नजर मेटा और व्हाट्सएप की अगली रणनीति पर टिकी है। यदि कंपनियां अदालत की शर्तों के अनुसार हलफनामा दाखिल करती हैं, तो मामले में आगे सुनवाई की संभावना बनेगी। वहीं, हलफनामा देने से इनकार करने की स्थिति में उन्हें कानूनी मोर्चे पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न केवल मेटा और व्हाट्सएप के लिए अहम है, बल्कि देश में काम कर रही अन्य टेक कंपनियों के लिए भी एक नजीर साबित हो सकता है।

मिशन 2027 से पहले भाजपा में मंथन या महाभारत?

संगठन–सरकार की खींचतान से सड़क तक पहुंचा सत्ता का तनाव लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सत्ता में लगातार दूसरी बार काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने 2027 का विधानसभा चुनाव जितना नज़दीक आ रहा है, उतनी ही तेज़ी से पार्टी के भीतर अंतर्विरोध उभरकर सामने आने लगे हैं। बंद कमरों में सुलग रहा असंतोष अब खुले मंचों, मीडिया बयानों और यहां तक कि सड़कों तक पहुंच गया है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच टकराव, सरकार और संगठन के बीच समन्वय की कमी और लोकसभा चुनाव 2024 के बाद उठे सवालों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। जनप्रतिनिधि बनाम अधिकारी: सत्ता के गलियारों में टकराव बीते कुछ महीनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां भाजपा विधायक और सांसद सीधे तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों से भिड़ते नजर आए। महोबा का मामला इसका ताज़ा उदाहरण है, जहां एक भाजपा विधायक ने खुलेआम अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और अनदेखी के आरोप लगाए। यह पहला मौका नहीं है जब सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि अपनी ही सरकार के सिस्टम पर सवाल उठा रहे हों। इससे यह संकेत मिल रहा है कि ज़मीनी स्तर पर संवाद और विश्वास की कमी गहराती जा रही है। दिनेश खटीक का इस्तीफा और उसके मायने जलशक्ति राज्य मंत्री दिनेश खटीक का इस्तीफा पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना गया। उन्होंने अधिकारियों पर दलित जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए पद छोड़ दिया था। हालांकि बाद में मामला संभाल लिया गया, लेकिन यह घटना भाजपा के उस सामाजिक संतुलन पर सवाल खड़े कर गई, जिसे पार्टी अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती रही है। अंदरखाने चर्चा है कि कई अन्य विधायक और नेता भी इसी तरह की नाराज़गी महसूस कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद बढ़ी तल्खी लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश में अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन ने पार्टी के भीतर आत्ममंथन की बजाय आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू कर दिया। संगठन के कुछ नेताओं ने सरकार की नीतियों और कार्यशैली को जिम्मेदार ठहराया, तो वहीं सरकार समर्थक खेमे ने संगठन पर ज़मीनी फीडबैक में कमी का आरोप लगाया। यह खींचतान अब साफ तौर पर “सरकार बनाम संगठन” के रूप में दिखने लगी है। संगठन–सरकार समन्वय पर सवाल भाजपा की पहचान हमेशा मजबूत संगठन और अनुशासित कार्यशैली रही है, लेकिन मौजूदा हालात में यही मॉडल दबाव में नजर आ रहा है। कई जिलों में संगठन पदाधिकारी खुद को हाशिये पर महसूस कर रहे हैं, जबकि जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि उनकी बात शासन स्तर पर नहीं सुनी जा रही। इस असंतुलन का सीधा असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ रहा है। 2027 की राह आसान नहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा ने समय रहते इन अंदरूनी मतभेदों को नहीं सुलझाया, तो विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना सकता है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पहले से ही “भाजपा की अंदरूनी कलह” को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में हैं। नेतृत्व के सामने बड़ी चुनौती अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व—चाहे वह दिल्ली हो या लखनऊ—इस बढ़ते आक्रोश को कैसे नियंत्रित करता है। क्या यह असंतोष केवल चुनावी दबाव का नतीजा है या फिर सत्ता के लंबे समय तक रहने से पैदा हुई स्वाभाविक थकान? जवाब आने वाले महीनों में मिलेगा, लेकिन इतना तय है कि मिशन 2027 से पहले भाजपा के लिए सबसे बड़ी लड़ाई विपक्ष से नहीं, बल्कि अपने भीतर से ही है।

भारत पर अमेरिकी टैरिफ में बड़ी कटौती, रूस से तेल खरीद पर भी बड़ा संकेत

नई दिल्ली/वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए उच्चस्तरीय समझौते के बाद अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ में बड़ी राहत दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर लगने वाला टैरिफ 25 फीसदी से घटाकर सीधे 18 फीसदी करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक टैरिफ अब केवल 18 फीसदी रह गया है, जिसे द्विपक्षीय व्यापार संबंधों के लिहाज से एक अहम कदम माना जा रहा है। भारतीय निर्यातकों को मिलेगी बड़ी राहत टैरिफ में इस कटौती से भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। खासकर टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स और आईटी से जुड़े उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार और ज्यादा अनुकूल हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत-अमेरिका व्यापार में तेजी आएगी और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। रूस से तेल खरीद पर ट्रंप का दावा इस समझौते के साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बड़ा दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक, भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और भू-राजनीतिक तनाव लगातार चर्चा में हैं। अगर यह दावा जमीन पर उतरता है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और भारत की ऊर्जा नीति पर भी दिख सकता है। रणनीतिक साझेदारी को नई धार राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करता है। टैरिफ में कटौती और ऊर्जा नीति को लेकर दिए गए संकेत यह बताते हैं कि दोनों देश वैश्विक मंच पर एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह समझौता कब और कैसे पूरी तरह लागू होता है। टैरिफ में कमी और ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसलों का असर आने वाले महीनों में व्यापार आंकड़ों और कूटनीतिक रिश्तों में साफ तौर पर दिख सकता है। फिलहाल, मोदी–ट्रंप बातचीत को भारत-अमेरिका संबंधों में एक बड़े ब्रेकथ्रू के तौर पर देखा जा रहा है।

चीन पर टकराव, सदन में संग्राम

राहुल गांधी के बयान से लोकसभा में सियासी भूचाल, बार-बार स्थगित हुई कार्यवाही नई दिल्ली। केंद्रीय बजट के बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान सोमवार को लोकसभा का माहौल अचानक गरमा गया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण ने सदन की कार्यवाही को उस दिशा में मोड़ दिया, जहां चर्चा बजट और नीतियों से हटकर भारत-चीन संबंधों, सेना और सरकार की मंशा पर केंद्रित हो गई। नतीजा—दिनभर हंगामा, तीखी बहस और बार-बार स्थगित होती लोकसभा। राहुल गांधी का आक्रामक रुख अपनी बारी आने पर राहुल गांधी ने चर्चा से इतर पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला देते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि किताब में चीनी सेना की ओर से भारतीय सीमा में घुसपैठ का ज़िक्र है और सरकार ने जानबूझकर इसे प्रकाशित होने से रोका। राहुल गांधी ने सत्तापक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि जब बीजेपी सांसद विपक्ष की देशभक्ति पर सवाल उठाते हैं, तो ऐसे तथ्यों पर बात करना जरूरी हो जाता है। रक्षा मंत्री का पलटवार राहुल गांधी के आरोपों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जिस किताब का ज़िक्र किया जा रहा है, वह अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है। अगर उसमें तथ्यात्मक सच्चाई होती, तो उसके प्रकाशन पर कोई रोक नहीं लगती। राजनाथ सिंह ने यह भी जोड़ा कि यदि पूर्व आर्मी चीफ को लगता कि सरकार ने गलत तरीके से हस्तक्षेप किया है, तो उनके पास न्यायालय जाने का विकल्प मौजूद था। स्पीकर और राहुल के बीच तीखी नोक-झोंक हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को विषय पर ही बोलने और सदन की मर्यादा बनाए रखने की नसीहत दी। लेकिन राहुल गांधी अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने स्पीकर से कहा, “मुझे बोलने नहीं दिया जा रहा है। मेरी बात चीन से ज्यादा प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के कैरेक्टर को लेकर है। आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या बोलना है।” इस पर स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी के सलाहकार नहीं हैं, बल्कि उनका कर्तव्य है कि सदन नियम और प्रक्रिया के अनुसार चले। अखिलेश यादव का समर्थन समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राहुल गांधी के पक्ष में खड़े होते हुए कहा कि चीन का मुद्दा बेहद संवेदनशील है और नेता प्रतिपक्ष की पूरी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर खुली और गंभीर चर्चा हो। केसी वेणुगोपाल को स्पीकर की फटकार राहुल गांधी के भाषण के दौरान कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल के खड़े होकर तालियां बजाने पर स्पीकर ने नाराज़गी जताई। ओम बिरला ने कहा, “यह तरीका बिल्कुल ठीक नहीं है। आप वरिष्ठ नेता हैं। क्या आप नेता प्रतिपक्ष के वकील हैं?” अमित शाह का हस्तक्षेप गृह मंत्री अमित शाह ने बहस में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सत्तापक्ष के किसी भी सांसद ने विपक्ष की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने सदन के नियमों का उल्लंघन किया और चर्चा को भटकाया। बार-बार स्थगित होती कार्यवाही लगातार हंगामे के चलते लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर, फिर शाम चार बजे तक और अंततः मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सियासी संदेश साफ इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साफ कर दिया कि चीन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव कितना गहरा है। जहां विपक्ष सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सदन की मर्यादा से जोड़कर देख रही है। सवाल अब यही है—क्या आने वाले सत्रों में चीन पर ठोस चर्चा हो पाएगी, या यह मुद्दा सियासी शोर में ही दबकर रह जाएगा?

भारत-पाक टक्कर पर विराम: T20 वर्ल्ड कप 2026 में नहीं होगा महामुकाबला, पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच से खींचे कदम

नई दिल्ली/कोलंबो। T20 वर्ल्ड कप 2026 से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को बड़ा झटका लगा है। दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा देखे जाने वाले मुकाबले — भारत बनाम पाकिस्तान — पर एक बार फिर राजनीति की छाया पड़ गई है। पाकिस्तान सरकार ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि उनकी क्रिकेट टीम टूर्नामेंट में हिस्सा तो लेगी, लेकिन 15 फरवरी 2026 को कोलंबो में भारत के खिलाफ होने वाले ग्रुप स्टेज मैच में मैदान पर नहीं उतरेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ICC को इस वर्ल्ड कप से रिकॉर्ड व्यूअरशिप और कमाई की उम्मीद थी। भारत-पाक मुकाबला न सिर्फ क्रिकेट फैंस के लिए भावनात्मक जुड़ाव रखता है, बल्कि यह टूर्नामेंट की आर्थिक रीढ़ भी माना जाता है। सरकार का फैसला, टीम को मिली आंशिक मंजूरी पाकिस्तान सरकार ने अपनी आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर बयान जारी करते हुए कहा— “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान की सरकार ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम को ICC वर्ल्ड T20 2026 में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी है, लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट टीम 15 फरवरी 2026 को भारत के खिलाफ होने वाले मैच में भाग नहीं लेगी।” हालांकि पाकिस्तान टीम को श्रीलंका जाने की इजाजत मिल चुकी है और वह ग्रुप A के अपने सभी अन्य मुकाबले श्रीलंका में ही खेलेगी। न्यूट्रल वेन्यू भी नहीं सुलझा पाया विवाद गौरतलब है कि पाकिस्तान ने पहले ही भारत में मैच खेलने से इनकार कर दिया था। इसी कारण ICC ने भारत-पाक मैच को न्यूट्रल वेन्यू — कोलंबो — शिफ्ट किया था। उम्मीद की जा रही थी कि इससे रास्ता साफ होगा, लेकिन अब पाकिस्तान ने केवल भारत के खिलाफ मैच का ही बहिष्कार करने का फैसला लिया है। इस कदम से साफ है कि पाकिस्तान टूर्नामेंट से बाहर नहीं होना चाहता, लेकिन भारत के खिलाफ खेलना मौजूदा राजनीतिक हालात में स्वीकार्य नहीं मान रहा। भारत को बिना खेले मिलेंगे 2 पॉइंट ICC के नियमों के मुताबिक, यदि कोई टीम मैच नहीं खेलती है तो उसे फॉरफिट माना जाता है। इसका सीधा फायदा भारत को मिलेगा — भारत को 2 पॉइंट्स बिना खेले मिलेंगे पाकिस्तान को ग्रुप स्टेज में बड़ा झटका लगेगा नेट रन रेट और सेमीफाइनल समीकरण भी प्रभावित होंगे हालांकि खेल के लिहाज़ से यह भारत के लिए फायदा है, लेकिन फैंस के लिए यह किसी हार से कम नहीं। ICC और पाकिस्तान — दोनों को होगा भारी नुकसान भारत-पाक मुकाबला ICC के लिए सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि— सबसे ज्यादा देखे जाने वाला मुकाबला सबसे ज्यादा विज्ञापन रेवेन्यू ब्रॉडकास्टर्स का प्राइम स्लॉट इस मैच के रद्द होने से ICC को करोड़ों के नुकसान की आशंका है। वहीं पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को भी आर्थिक और ब्रांड वैल्यू के स्तर पर बड़ा झटका लग सकता है। बांग्लादेश विवाद की कड़ी से जुड़ा फैसला यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब हाल ही में बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया था। बांग्लादेश ने भारत में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए खेलने से मना कर दिया था, जिसके बाद ICC ने उन्हें प्रतियोगिता से हटा दिया। पाकिस्तान ने पहले बांग्लादेश के समर्थन में पूरे टूर्नामेंट से हटने की धमकी दी थी, लेकिन अंततः उन्होंने आधा कदम पीछे हटते हुए सिर्फ भारत मैच का बहिष्कार चुना। क्रिकेट हार गया, राजनीति जीत गई भारत-पाक मुकाबला सिर्फ क्रिकेट नहीं होता — यह जुनून, इतिहास और करोड़ों दिलों की धड़कन होता है। T20 वर्ल्ड कप 2026 में इस महामुकाबले का न होना एक बार फिर यह दिखाता है कि उपमहाद्वीप में खेल कितनी आसानी से राजनीति की भेंट चढ़ जाता है।

आर्थिक अनुशासन से लेकर सामाजिक सशक्तिकरण तक, निर्मला सीतारमण का 9वां बजट विकास का रोडमैप

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। यह उनका लगातार नौवां बजट रहा, जिसमें सरकार की आर्थिक स्थिरता, समावेशी विकास और दीर्घकालिक सुधारों की स्पष्ट झलक देखने को मिली। बजट भाषण में उन्होंने आर्थिक अनुशासन, सामाजिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और कर सुधारों पर विशेष जोर दिया। बजट पेश करते समय वित्त मंत्री तमिलनाडु की पारंपरिक पर्पल रंग की ‘कट्टम कांजीवरम सिल्क साड़ी’ में नजर आईं। यह साड़ी भारतीय हैंडलूम और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है। राजनीतिक गलियारों में इसे तमिलनाडु में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र एक सांकेतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। राजकोषीय अनुशासन पर सरकार का फोकस वित्त मंत्री ने बताया कि FY 2027 में राजकोषीय घाटा GDP का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि कर्ज-से-GDP अनुपात 55.6 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है। उन्होंने दोहराया कि सरकार राजकोषीय घाटे को 4.5 प्रतिशत से नीचे लाने के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रही है। यह संकेत देता है कि सरकार विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखना चाहती है। कर सुधार: छोटे करदाताओं को राहत बजट में करदाताओं के लिए बड़ी राहत की घोषणा की गई। वित्त मंत्री ने कहा कि नया आयकर कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, जिससे टैक्स सिस्टम और प्रक्रियाएं सरल, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल बनेंगी। इसके साथ ही आईटी सेवाओं के लिए समान सेफ हार्बर मार्जिन लागू करने और इसकी सीमा 2000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे स्टार्टअप्स और आईटी कंपनियों को अनुपालन में आसानी मिलेगी। विदेशी शिक्षा और इलाज हुआ सस्ता विदेश में पढ़ाई और मेडिकल ट्रीटमेंट कराने वालों के लिए सरकार ने बड़ी राहत दी है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा और मेडिकल खर्च पर लगने वाला TCS 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। इससे मध्यम वर्ग और छात्रों पर वित्तीय बोझ कम होगा। रियल एस्टेट को नई रफ्तार रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बजट में REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) के जरिए एसेट रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की घोषणा की गई। इससे डेवलपर्स और सरकारी संस्थाएं अपनी निष्क्रिय संपत्तियों को मॉनेटाइज कर नई परियोजनाओं में निवेश कर सकेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नकदी प्रवाह सुधरेगा और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बजट में ₹10,000 करोड़ की ‘बायोफार्मा शक्ति योजना’ की घोषणा की गई। इस योजना के तहत कैंसर, डायबिटीज और ऑटो-इम्यून बीमारियों से जुड़ी दवाओं के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत को फार्मा सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाना और इलाज को सस्ता करना है। सामाजिक योजनाएं और ग्रामीण विकास बजट में कई नई और मौजूदा योजनाओं को विस्तार दिया गया, जिनमें शामिल हैं: नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड लखपति दीदी योजना दिव्यांगजन कौशल एवं सहारा योजना पशुधन उद्यमों का आधुनिकीकरण तटीय क्षेत्रों में काजू, नारियल और चंदन उत्पादन को बढ़ावा इन योजनाओं का मकसद ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन को मजबूती देना है। वाराणसी को मिली हाई-स्पीड रेल की सौगात बजट में वाराणसी के लिए एक बड़ी सौगात का ऐलान किया गया। शहर को हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से जोड़ने की घोषणा की गई है। देश में प्रस्तावित **सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में से दो वाराणसी से जुड़े होंगे, जिससे पूर्वांचल और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, बजट 2026-27 को आर्थिक स्थिरता, सामाजिक न्याय और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया बजट माना जा रहा है, जो भारत की विकास यात्रा को अगले चरण में ले जाने का रोडमैप पेश करता है।

बजट 2026 का सीधा असर: दवाएं, मोबाइल और सोलर हुए सस्ते, शराब-तंबाकू और लग्जरी शौक पड़े महंगे

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 में आम जनता की रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर भविष्य की अर्थव्यवस्था तक को ध्यान में रखते हुए बड़े फैसले किए गए हैं। इस बजट का मुख्य फोकस घरेलू विनिर्माण (Make in India) को मजबूती देने, स्वास्थ्य सेवाओं को किफायती बनाने और ग्रीन एनर्जी व इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने पर रहा। सरकार ने सीमा शुल्क (Custom Duty) के ढांचे में अहम बदलाव करते हुए कई जरूरी और उपयोगी वस्तुओं को सस्ता किया है, जबकि राजस्व बढ़ाने और सामाजिक नियंत्रण के उद्देश्य से कुछ ‘सिन गुड्स’ और लग्जरी उत्पादों को महंगा किया गया है। आइए, जानते हैं बजट 2026 के बाद आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा। ये चीजें हुईं सस्ती चमड़े के उत्पाद (Leather Products) सरकार ने कच्चे चमड़े और उससे जुड़े इनपुट्स पर आयात शुल्क घटा दिया है। इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा। अब ब्रांडेड जूते, बैग, बेल्ट और लेदर कपड़े पहले की तुलना में सस्ते दामों पर उपलब्ध हो सकते हैं। कैंसर की जीवन रक्षक दवाएं स्वास्थ्य के मोर्चे पर बजट 2026 को बड़ी राहत देने वाला माना जा रहा है। सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 जीवन रक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया है। इससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ काफी कम होगा। स्मार्टफोन और मोबाइल डिवाइसेज़ मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने फोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स और कुछ कैपिटल गुड्स पर टैक्स में राहत दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले महीनों में नए स्मार्टफोन्स की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। सोलर पैनल और रिन्यूएबल एनर्जी ग्रीन एनर्जी मिशन को गति देते हुए सरकार ने सोलर सेल और पैनल्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले इनपुट्स पर ड्यूटी घटा दी है। अब घरों में सोलर सिस्टम लगवाना ज्यादा किफायती हो जाएगा, जिससे बिजली बिल में भी राहत मिलेगी। ईवी बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए लिथियम-आयन सेल्स के कच्चे माल पर टैक्स में छूट दी गई है। इसका असर आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कार और स्कूटर की कीमतों में कमी के रूप में दिख सकता है। स्पोर्ट्स इक्विपमेंट खेलों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने खेल सामग्री पर सीमा शुल्क घटा दिया है। अब क्रिकेट बैट, फुटबॉल, टेनिस रैकेट और अन्य स्पोर्ट्स गियर युवाओं और खिलाड़ियों के लिए अधिक सुलभ होंगे। घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स (Kitchen Appliances) माइक्रोवेव और कुछ अन्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के खास पुर्जों पर आयात शुल्क घटाया गया है। बजट के बाद किचन के आधुनिक उपकरण अपेक्षाकृत सस्ते मिल सकते हैं। ये चीजें हुईं महंगी शराब (Alcohol) राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक नियंत्रण के मकसद से शराब पर टैक्स बढ़ाया गया है। राज्यों की एक्साइज ड्यूटी और केंद्र के रुख के चलते प्रीमियम शराब और इंपोर्टेड वाइन की कीमतों में साफ बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। तंबाकू और पान मसाला बजट 2026 में सिगरेट और पान मसाले पर नई एक्साइज ड्यूटी और सेस लगाया गया है। इसके चलते इन उत्पादों की कीमतों में 20% से 40% तक उछाल आने की आशंका है। लग्जरी घड़ियां शौक और विलासिता की चीजों पर सरकार ने सख्ती दिखाई है। आयातित लग्जरी घड़ियों पर सीमा शुल्क बढ़ा दिया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स अब और महंगे हो जाएंगे। स्टॉक ऑप्शंस और फ्यूचर्स ट्रेडिंग (F&O) डेरिवेटिव बाजार में बढ़ती सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने STT और कैपिटल गेन टैक्स के ढांचे में बदलाव किया है। इससे छोटे निवेशकों के लिए F&O ट्रेडिंग अब ज्यादा खर्चीली हो जाएगी। कुल मिलाकर, बजट 2026 आम आदमी के लिए राहत और संयम का मिश्रण लेकर आया है। जहां एक ओर दवाएं, मोबाइल, सोलर और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे जरूरी व भविष्य के सेक्टर सस्ते हुए हैं, वहीं शराब, तंबाकू और लग्जरी उत्पादों पर महंगाई की मार पड़ी है।