21 दिसंबर : एशिया कप 2025 के फाइनल में पाकिस्तान ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम को एकतरफा मुकाबले में हराकर पहली बार खिताब अपने नाम कर लिया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी पाकिस्तान की टीम ने 50 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 347 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में 348 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम 26.2 ओवर में मात्र 156 रन पर सिमट गई। पाकिस्तान की जीत के नायक रहे समीर मिन्हास, जिन्होंने फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में शानदार शतक जड़ा। उन्होंने 172 रनों की दमदार पारी खेलकर भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। उनके अलावा अहमद हुसैन ने 56 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली और टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। भारतीय गेंदबाजों ने बीच-बीच में विकेट जरूर निकाले, लेकिन रन गति पर अंकुश नहीं लगा सके। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। शुरुआती ओवरों में लगातार विकेट गिरने से टीम दबाव में आ गई। पाकिस्तान के गेंदबाजों ने अनुशासित लाइन-लेंथ के साथ आक्रामक गेंदबाजी की और भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। पूरी टीम 26.2 ओवर में 156 रन पर ऑलआउट हो गई, जिससे मुकाबला पूरी तरह एकतरफा साबित हुआ। गौरतलब है कि ग्रुप स्टेज में भारत ने पाकिस्तान को हराया था, लेकिन फाइनल में पाकिस्तान ने शानदार वापसी करते हुए भारत से उस हार का बदला भी ले लिया। इस जीत के साथ पाकिस्तान ने न सिर्फ पहली बार एशिया कप का खिताब जीता, बल्कि क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय भी जोड़ दिया। फाइनल जीतते ही पाकिस्तानी खिलाड़ियों और प्रशंसकों में जश्न का माहौल देखने को मिला, जबकि भारतीय टीम को बड़े मंच पर मिली इस हार से निराशा हाथ लगी। एशिया कप 2025 का फाइनल लंबे समय तक क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना रहेगा।
अरावली पर SC के आदेश से मचा बवाल, सड़कों पर उतरे लोग; सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा #SaveAravalli
नई दिल्ली, 21 दिसंबर: सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद अरावली पहाड़ियों को लेकर देशभर में नई बहस छिड़ गई है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को स्वतः ‘जंगल’ नहीं माना जाएगा। इस टिप्पणी के सामने आते ही पर्यावरण कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों में गहरी चिंता देखने को मिल रही है। कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए, वहीं सोशल मीडिया पर #SaveAravalli ट्रेंड करने लगा। क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश? सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि किसी क्षेत्र को ‘वन भूमि’ घोषित करने के लिए केवल उसकी भौगोलिक संरचना या ऊंचाई ही एकमात्र आधार नहीं हो सकती। अदालत ने माना कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अपने आप जंगल मान लेना उचित नहीं है, बल्कि इसके लिए सरकारी रिकॉर्ड, अधिसूचना और कानूनी मानदंडों को देखना जरूरी है। क्यों बढ़ी चिंता? पर्यावरणविदों का कहना है कि यह आदेश अरावली जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र के लिए खतरा बन सकता है। उनका तर्क है कि अरावली सिर्फ पहाड़ियों का समूह नहीं, बल्कि उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन की रीढ़ है। यह क्षेत्र * भूजल स्तर बनाए रखने * रेगिस्तान के विस्तार को रोकने * प्रदूषण और धूल भरी आंधियों से बचाव में अहम भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों को आशंका है कि इस फैसले की आड़ में खनन, रियल एस्टेट और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे अरावली की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचेगा। सड़कों से सोशल मीडिया तक विरोध फैसले के बाद दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और राजस्थान में कई जगह लोगों ने प्रदर्शन किए। पर्यावरण संगठनों ने सरकार से अरावली को विशेष संरक्षण देने की मांग की। वहीं ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर #SaveAravalli के जरिए लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पुनः समीक्षा की मांग कर रहे हैं। सरकार और आगे की राह सरकारी पक्ष का कहना है कि अदालत के आदेश का गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए और अरावली के संरक्षण से जुड़े कानून पहले की तरह लागू रहेंगे। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अब केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर अरावली संरक्षण के लिए स्पष्ट और मजबूत नीति बनानी होगी, ताकि किसी भी तरह के पर्यावरणीय नुकसान को रोका जा सके। अरावली को लेकर यह बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है, क्योंकि यह मुद्दा सिर्फ पहाड़ियों का नहीं, बल्कि पर्यावरण और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़ा हुआ है।
रेलवे ने यात्रियों को दिया झटका, मेल-एक्सप्रेस और एसी ट्रेनों का किराया बढ़ा
नई दिल्ली, 21 दिसंबर : भारतीय रेलवे ने नए साल से पहले यात्रियों को बड़ा झटका देते हुए किराया बढ़ाने का ऐलान किया है। रेलवे के अनुसार जनरल, मेल/एक्सप्रेस और एसी श्रेणियों की ट्रेनों के टिकट महंगे होंगे। बढ़ी हुई दरें 26 दिसंबर 2025 से प्रभावी होंगी। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि किराया वृद्धि का फैसला परिचालन लागत, रखरखाव और यात्री सुविधाओं में सुधार को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हालांकि, यात्रियों को राहत देते हुए लोकल ट्रेनों और मासिक सीजन टिकट (एमएसटी) के दामों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, किराया बढ़ोतरी का असर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों पर अधिक पड़ेगा, खासकर मेल/एक्सप्रेस और एसी कोच में सफर करने वालों पर। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई दरें 26 दिसंबर से बुक होने वाले टिकटों पर लागू होंगी। रेलवे के इस फैसले के बाद यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है, जबकि त्योहारों और छुट्टियों के मौसम में यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को अब अपनी यात्रा लागत दोबारा आंकनी होगी।