T20 World Cup 2026: सुरक्षा पर ICC का भरोसा बरकरार, भारत से बाहर मैच कराने की BCB की मांग नामंजूर

डिजिटल डेस्क | खेल: टी20 विश्व कप 2026 को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की भारत से बाहर मैच शिफ्ट कराने की मांग को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने खारिज कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईसीसी ने स्पष्ट किया है कि भारत में टूर्नामेंट के आयोजन को लेकर सुरक्षा का कोई ‘रेड फ्लैग’ नहीं है और मौजूदा हालात में वेन्यू बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। सूत्रों के अनुसार, BCB ने हालिया घटनाक्रम और खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए यह अनुरोध किया था कि बांग्लादेश के मुकाबले किसी तटस्थ देश में कराए जाएं। हालांकि, आईसीसी की आंतरिक समीक्षा और सुरक्षा आकलन के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि भारत में टी20 विश्व कप के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा मानक पूरे किए जा रहे हैं। ICC का रुख: सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त आईसीसी के करीबी सूत्रों का कहना है कि टूर्नामेंट से पहले और दौरान केंद्र व राज्य सरकारों के साथ समन्वय, सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती, और वेन्यू-स्तरीय प्रोटोकॉल पहले से तय हैं। इसी आधार पर आईसीसी ने BCB की मांग को अस्वीकार करते हुए शेड्यूल और वेन्यू यथावत रखने का फैसला लिया। BCB की चिंता क्या थी? बताया जा रहा है कि BCB ने खिलाड़ियों की आवाजाही, अभ्यास सत्रों और मैच डे सुरक्षा को लेकर आशंका जताई थी। साथ ही, हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव और कुछ विवादों को देखते हुए बोर्ड अतिरिक्त सावधानी बरतना चाहता था। लेकिन आईसीसी ने इन आशंकाओं को पर्याप्त ठोस आधार के बिना माना। BCCI की तैयारियां भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) पहले ही टी20 विश्व कप 2026 की मेजबानी को लेकर व्यापक तैयारियों में जुटा है। प्रमुख शहरों में वेन्यू अपग्रेड, भीड़ प्रबंधन, ट्रैवल लॉजिस्टिक्स और टीम सुरक्षा के लिए अलग-अलग नोडल एजेंसियों की नियुक्ति की जा चुकी है। आगे क्या? आईसीसी के फैसले के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि बांग्लादेश के मुकाबले निर्धारित भारतीय वेन्यू पर ही खेले जाएंगे। हालांकि, आईसीसी ने यह भी संकेत दिया है कि टूर्नामेंट से पहले सुरक्षा स्थिति की निरंतर समीक्षा जारी रहेगी और किसी असाधारण परिस्थिति में ही बदलाव पर विचार होगा। कुल मिलाकर, आईसीसी के इस फैसले से यह संदेश साफ है कि टी20 विश्व कप 2026 के आयोजन को लेकर भारत पर भरोसा कायम है और सुरक्षा के मोर्चे पर किसी तरह का ‘रेड फ्लैग’ नहीं देखा गया है।

आधी रात चला बुलडोजर, तुर्कमान गेट पर हाई कोर्ट के आदेश से अवैध निर्माण ध्वस्त; पथराव में 5 पुलिसकर्मी घायल

दिल्ली :दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद राजधानी के तुर्कमान गेट इलाके में आधी रात को बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई। नगर निगम दिल्ली (MCD) ने फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास किए गए अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई रामलीला मैदान के नजदीक की गई, जहां पहले से ही अतिक्रमण को लेकर विवाद चल रहा था। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई थी। बावजूद इसके, देर रात कुछ असामाजिक तत्वों ने पुलिस और निगम की टीम पर पथराव शुरू कर दिया। इस घटना में पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। हाई कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई सूत्रों के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट ने इलाके में लंबे समय से बने अवैध ढांचों को हटाने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि सार्वजनिक भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी आदेश के अनुपालन में MCD ने पुलिस प्रशासन के सहयोग से यह अभियान चलाया। तनावपूर्ण रहा माहौल बुलडोजर कार्रवाई के दौरान इलाके में तनाव का माहौल बना रहा। पथराव के बाद कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई, हालांकि पुलिस ने हालात को काबू में लेते हुए अतिरिक्त बल बुलाया और कार्रवाई को पूरा किया। सुरक्षा के मद्देनज़र पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई और आने-जाने पर अस्थायी रोक लगाई गई। प्रशासन का बयान दिल्ली पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कानून-व्यवस्था भंग करने वालों की पहचान की जा रही है। CCTV फुटेज और वीडियो के आधार पर पथराव करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, MCD अधिकारियों ने कहा कि आगे भी कोर्ट के आदेशों के तहत अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी रहेगा।  इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा घटना के बाद तुर्कमान गेट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। यह कार्रवाई एक बार फिर राजधानी में अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर सख्त रुख का संकेत मानी जा रही है।

मुस्तफिजुर विवाद का असर: BCB का बड़ा फैसला, भारत में टी20 विश्व कप मैच नहीं खेलेगा बांग्लादेश!

डिजिटल डेस्क: मुस्तफिजुर रहमान को लेकर उठे विवाद के बीच बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया है। BCB ने पुष्टि की है कि बांग्लादेश की टीम 2026 टी20 विश्व कप के तहत भारत में अपने मैच खेलने नहीं जाएगी। यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है, जब इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 से पहले मुस्तफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) की टीम से बाहर किए जाने पर दोनों क्रिकेट बोर्डों के बीच तनाव की स्थिति बन गई है।  क्या है पूरा मामला मुस्तफिजुर रहमान लंबे समय से आईपीएल में बांग्लादेश के प्रमुख खिलाड़ियों में गिने जाते रहे हैं। लेकिन आईपीएल 2026 से पहले BCCI की ओर से विदेशी खिलाड़ियों की उपलब्धता और राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को लेकर जारी दिशानिर्देशों के बाद KKR ने मुस्तफिजुर को टीम से रिलीज कर दिया। इस फैसले को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने नाराजगी जताई और इसे अपने खिलाड़ी के साथ “अनुचित व्यवहार” करार दिया। BCB का कहना है कि बिना बोर्ड से औपचारिक चर्चा के इस तरह का कदम उठाना खेल भावना और द्विपक्षीय रिश्तों के खिलाफ है। इसी नाराजगी के बीच अब यह बड़ा फैसला लिया गया है कि बांग्लादेश भारत में होने वाले 2026 टी20 विश्व कप के मैचों के लिए यात्रा नहीं करेगा। BCB की आधिकारिक प्रतिक्रिया BCB के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम अपने खिलाड़ियों के सम्मान और अधिकारों से कोई समझौता नहीं कर सकते। मुस्तफिजुर का मामला सिर्फ एक खिलाड़ी का नहीं, बल्कि पूरे बांग्लादेश क्रिकेट का है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए भारत में मैच खेलने को लेकर पुनर्विचार किया गया है।” हालांकि BCB ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह ICC के संपर्क में है और विश्व कप में बांग्लादेश की भागीदारी को लेकर वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर चर्चा चल रही है। ICC और BCCI की भूमिका इस फैसले के बाद अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की भूमिका अहम हो गई है। ICC को मेजबान देश, शेड्यूल और टीमों की भागीदारी को लेकर समाधान निकालना होगा। वहीं, BCCI की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।  क्रिकेट जगत में हलचल BCB के इस फैसले से क्रिकेट जगत में हलचल मच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह विवाद लंबा खिंचता है, तो इसका असर न सिर्फ टी20 विश्व कप बल्कि भारत-बांग्लादेश के क्रिकेट संबंधों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें ICC की अगली बैठक और इस पूरे विवाद पर आने वाले आधिकारिक फैसले पर टिकी हुई हैं।

मनरेगा पर कांग्रेस का बड़ा आंदोलन: बिहार में 47 दिन तक ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’, विधानसभा घेराव से केंद्र को घेरने की तैयारी

बिहार: केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में किए जा रहे कथित बदलावों के खिलाफ कांग्रेस ने बिहार में व्यापक आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी ने इसे ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए 10 जनवरी से 25 फरवरी तक 47 दिनों के ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की घोषणा की है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार मनरेगा की मूल भावना को कमजोर कर रही है। बजट में कटौती, काम के दिनों में कमी, भुगतान में देरी और नियमों को जटिल बनाकर गरीबों को रोजगार से वंचित किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि इससे गांवों में बेरोजगारी और पलायन की समस्या और गंभीर होगी। आंदोलन की रूपरेखा कांग्रेस द्वारा घोषित कार्यक्रम के तहत आंदोलन को चरणबद्ध और व्यापक बनाया जाएगा। इसमें राज्य से लेकर पंचायत स्तर तक गतिविधियां होंगी। * जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की नीतियों को उजागर किया जाएगा। * उपवास और धरना-प्रदर्शन के जरिए विरोध दर्ज कराया जाएगा। * पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान, चौपालें और नुक्कड़ सभाएं आयोजित होंगी। * ग्रामीण इलाकों में कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर संपर्क कर मनरेगा के महत्व और सरकार की नीतियों से होने वाले नुकसान की जानकारी दी जाएगी। * आंदोलन के अंतिम चरण में विधानसभा घेराव और अखिल भारतीय रैलियों का आयोजन किया जाएगा। कांग्रेस का आरोप कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा है। यह न सिर्फ रोजगार देता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है। पार्टी का दावा है कि केंद्र सरकार निजीकरण और खर्च में कटौती की नीति के चलते इस योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है। राजनीतिक संदेश इस आंदोलन के जरिए कांग्रेस बिहार में ग्रामीण मुद्दों को केंद्र में लाकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का मानना है कि मनरेगा जैसे मुद्दे पर जनआंदोलन खड़ा कर वह ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर सकती है। कुल मिलाकर, ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के जरिए कांग्रेस ने केंद्र सरकार को सीधे चुनौती दी है। आने वाले 47 दिन बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं।

कौन हैं डेल्सी रोड्रिग्ज? सत्ता के केंद्र में पहुंचीं मादुरो की करीबी, वेनेजुएला में सियासी भूचाल

काराकस।अमेरिका की ओर से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के दावे के बाद देश में अभूतपूर्व राजनीतिक उथल-पुथल मच गई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त करने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम के साथ ही वेनेजुएला की सत्ता का केंद्र अचानक बदल गया है और पूरी दुनिया की निगाहें अब डेल्सी रोड्रिग्ज पर टिक गई हैं। कौन हैं डेल्सी रोड्रिग्ज डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज गोमेज वेनेजुएला की सबसे प्रभावशाली और अनुभवी राजनेताओं में शुमार की जाती हैं। वे लंबे समय से राष्ट्रपति मादुरो की भरोसेमंद सहयोगी रही हैं और सरकार के कई अहम फैसलों में उनकी निर्णायक भूमिका रही है। * डेल्सी रोड्रिग्ज इससे पहले विदेश मंत्री और बाद में उपराष्ट्रपति के पद पर रह चुकी हैं। * अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वे वेनेजुएला का मुखर पक्ष रखने के लिए जानी जाती हैं, खासकर अमेरिका और पश्चिमी देशों की नीतियों के खिलाफ उनके सख्त बयानों ने उन्हें पहचान दिलाई। * वे देश के दिवंगत नेता जॉर्ज रोड्रिग्ज की बेटी और नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिग्ज की बहन हैं, जिससे उनका राजनीतिक प्रभाव और भी मजबूत माना जाता है। अंतरिम राष्ट्रपति बनने का रास्ता मादुरो की गिरफ्तारी के दावे के बाद शासन व्यवस्था में उत्पन्न संवैधानिक शून्य को भरने के लिए शीर्ष अदालत ने आपात बैठक बुलाई। इसके बाद डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त करने की घोषणा की गई। अदालत का तर्क है कि मौजूदा हालात में प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। ट्रंप का समर्थन और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी सामने आ रहा है। ट्रंप खेमे से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, डेल्सी रोड्रिग्ज के नेतृत्व में सत्ता परिवर्तन को अमेरिका का “सशर्त समर्थन” बताया जा रहा है। हालांकि, वेनेजुएला के विपक्षी दल और कुछ लैटिन अमेरिकी देश इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं और इसे बाहरी हस्तक्षेप से जोड़कर देख रहे हैं। देश में हालात तनावपूर्ण काराकस समेत कई बड़े शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। समर्थक और विरोधी गुटों के बीच टकराव की आशंका को देखते हुए सेना और पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है। आर्थिक संकट, महंगाई और प्रतिबंधों से पहले ही जूझ रहे वेनेजुएला के लिए यह सत्ता परिवर्तन एक नया मोड़ साबित हो सकता है। आगे क्या? डेल्सी रोड्रिग्ज ने अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर पहला संदेश जारी करते हुए “संवैधानिक व्यवस्था, शांति और राष्ट्रीय संप्रभुता” बनाए रखने की बात कही है। अब सबकी नजर इस पर है कि वे अंतरिम दौर में चुनाव की घोषणा करती हैं या मौजूदा सत्ता संरचना को आगे बढ़ाती हैं। वेनेजुएला के इतिहास में यह अध्याय कितना लंबा और निर्णायक होगा, इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आएगा।

‘कई दिनों की गुप्त योजना के बाद कार्रवाई’, ट्रंप का दावा—अमेरिकी सेना ने मादुरो को पकड़ा; तेल समझौतों पर भी बड़ा बयान

वॉशिंगटन/काराकस।अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने एक सुनियोजित और गुप्त अभियान के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को “दबोच” लिया है। ट्रंप ने इस कथित कार्रवाई की पूरी टाइमलाइन साझा करते हुए इसे अमेरिका की रणनीतिक और सैन्य क्षमता का उदाहरण बताया। हालांकि, वेनेजुएला सरकार की ओर से इस दावे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है और आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। कई दिनों से चल रही थी तैयारी ट्रंप के अनुसार, इस ऑपरेशन की योजना कई दिनों पहले बनाई गई थी। पहला चरण: अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने वेनेजुएला की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति पर बारीकी से निगरानी शुरू की। दूसरा चरण: क्षेत्र में मौजूद सहयोगी देशों और एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया। तीसरा चरण: सीमित और सटीक सैन्य कार्रवाई के जरिए ऑपरेशन को अंजाम दिया गया, ताकि किसी तरह का व्यापक टकराव न हो। ट्रंप ने कहा कि यह पूरी कार्रवाई “बिना शोर-शराबे के” की गई और इसका उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिकी हितों की सुरक्षा था। तेल उद्योग पर ट्रंप का बड़ा बयान मीडिया बातचीत के दौरान ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल उद्योग को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में अमेरिकी ऊर्जा कंपनियां वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाएंगी। ट्रंप के शब्दों में, “अमेरिका की तेल कंपनियां दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे बेहतरीन हैं। अगर उन्हें मौका मिलता है, तो वेनेजुएला के तेल उद्योग को नई दिशा दे सकती हैं।” वेनेजुएला की प्रतिक्रिया ट्रंप के इस बयान के बाद वेनेजुएला में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सरकार समर्थक नेताओं ने इसे “झूठा और भड़काऊ दावा” बताया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तथ्यों की पुष्टि करने की अपील की है। वहीं विपक्षी खेमे में इस बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल ट्रंप के दावे के बाद अमेरिका–वेनेजुएला संबंधों में और तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है, खासकर तेल और ऊर्जा संसाधनों को लेकर। फिलहाल, ट्रंप के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। लेकिन इतना तय है कि इस बयान ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन तैयार, जींद–सोनीपत रूट पर इस महीने से दौड़ेगी; 140 किमी/घंटा की रफ्तार, न शोर न प्रदूषण

जींद।भारतीय रेलवे के हरित परिवहन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद पहुंच चुकी है और इसके जींद–सोनीपत रूट पर इसी महीने से संचालन की तैयारी है। यह अत्याधुनिक ट्रेन चेन्नई में निर्मित की गई है, जो 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम है। खास बात यह है कि यह ट्रेन बिना शोर और बिना प्रदूषण के चलेगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिलेगी। पर्यावरण के अनुकूल तकनीक हाइड्रोजन ट्रेन में पारंपरिक डीज़ल या बिजली के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया गया है। इस तकनीक में ऊर्जा उत्पादन के दौरान कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है और केवल जलवाष्प (वॉटर वेपर) निकलती है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह ट्रेन पर्यावरणीय प्रभाव को काफी हद तक कम करेगी और भविष्य में ग्रीन ट्रांसपोर्ट का मजबूत विकल्प बनेगी। यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं यह ट्रेन एक साथ 2638 यात्रियों को सफर कराने की क्षमता रखती है। इसमें आधुनिक कोच, बेहतर वेंटिलेशन, आरामदायक सीटें और उन्नत सुरक्षा मानक शामिल किए गए हैं। कम शोर के कारण यात्रियों को शांत और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। जींद–सोनीपत रूट पर होगा ट्रायल और संचालन रेलवे सूत्रों के मुताबिक, जींद–सोनीपत सेक्शन को हाइड्रोजन ट्रेन के लिए चुना गया है, जहां पहले चरण में ट्रायल रन किए जाएंगे। ट्रायल सफल रहने पर नियमित संचालन शुरू किया जाएगा। यह रूट उत्तर भारत में हरित रेलवे परियोजना का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा चेन्नई में निर्मित इस ट्रेन को मेक इन इंडिया पहल के तहत विकसित किया गया है। इससे देश में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में ऐसी ट्रेनों के निर्माण की राह आसान होगी। रेलवे का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अन्य चुनिंदा रूटों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का विस्तार करना है। भविष्य की रेल यात्रा की झलक विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें भारतीय रेलवे के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती हैं। बढ़ती ईंधन लागत और पर्यावरणीय चिंताओं के बीच यह तकनीक टिकाऊ और किफायती समाधान के रूप में उभर रही है।

ट्रंप के सनसनीखेज दावे से अंतरराष्ट्रीय हलचल: ‘मादुरो गिरफ्तार’ कहने पर वेनेजुएला ने मांगा ‘प्रूफ ऑफ लाइफ’

काराकस/वॉशिंगटन। वेनेजुएला की राजधानी काराकस में हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने दावा किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर अमेरिकी हमले की भी पुष्टि करने का दावा किया। ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद वेनेजुएला सरकार ने कड़ा ऐतराज जताया और इसे “झूठा, भड़काऊ और असत्यापित” बताया। काराकस में जारी आधिकारिक बयान में सरकार ने अमेरिकी पक्ष से मादुरो के “प्रूफ ऑफ लाइफ” यानी उनके जीवित और सुरक्षित होने के प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग की है। वेनेजुएला का कहना है कि इस तरह के दावे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश हैं। धमाकों के बाद बढ़ा तनाव काराकस में धमाकों की पुष्टि स्थानीय अधिकारियों ने की है, हालांकि हताहतों और नुकसान के सटीक आंकड़ों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियों ने शहर के कई इलाकों में अलर्ट बढ़ा दिया है और संवेदनशील ठिकानों की कड़ी निगरानी की जा रही है। वेनेजुएला का खंडन वेनेजुएला के उपराष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि राष्ट्रपति मादुरो देश में ही हैं और सरकार सामान्य रूप से काम कर रही है। अधिकारियों ने ट्रंप के दावे को “राजनीतिक प्रचार” बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें। अमेरिकी दावे पर सवाल अमेरिकी प्रशासन की ओर से अभी तक ट्रंप के दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज, तस्वीर या वीडियो जारी नहीं किया गया है। इसी कारण वेनेजुएला ने ‘प्रूफ ऑफ लाइफ’ की मांग को दोहराया है। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि बिना ठोस सबूतों के ऐसे बयान वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया लैटिन अमेरिका के कई देशों और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े सूत्रों ने संयम बरतने और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की सलाह दी है। कुछ देशों ने काराकस में अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श भी जारी किए हैं। आगे क्या? स्थिति तेजी से बदल रही है। एक ओर अमेरिका के दावे हैं, तो दूसरी ओर वेनेजुएला का सख्त खंडन। आने वाले घंटों में अगर किसी पक्ष की ओर से ठोस सबूत या आधिकारिक घोषणा सामने आती है, तो क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें काराकस और वॉशिंगटन पर टिकी हुई हैं।

बिहार के बुजुर्गों को बड़ी राहत: अब घर बैठे मिलेगी इलाज की सुविधा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की नई योजना की घोषणा

पटना। बिहार सरकार ने राज्य के बुजुर्ग नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए उनके लिए घर पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की नई योजना की घोषणा की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान करते हुए कहा कि अब बुजुर्गों को इलाज के लिए बार-बार अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह योजना सरकार के ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम का अहम हिस्सा होगी। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि इस योजना को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द लागू किया जाए। योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को उनके घर पर ही बुनियादी और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि समय पर इलाज संभव हो सके और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार आए। घर पर मिलेंगी ये स्वास्थ्य सेवाएं सरकार की इस योजना के तहत बुजुर्गों को निम्नलिखित सुविधाएं घर पर ही प्रदान की जाएंगी— * प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की सेवा * पैथोलॉजी जांच (खून, शुगर, अन्य जरूरी टेस्ट) * ब्लड प्रेशर (BP) और ईसीजी जांच * फिजियोथेरेपी की सुविधा * अचानक तबीयत बिगड़ने की स्थिति में आपातकालीन सहायता * ग्रामीण इलाकों पर विशेष फोकस सरकार का विशेष जोर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों पर रहेगा, जहां बुजुर्गों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को इस योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि सेवाएं समय पर और प्रभावी ढंग से मिल सकें। मुख्यमंत्री का बयान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा,“बुजुर्ग हमारे समाज की धरोहर हैं। उनकी देखभाल सरकार की जिम्मेदारी है। यह योजना बुजुर्गों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” स्वास्थ्य विभाग करेगा निगरानी स्वास्थ्य विभाग को योजना की निगरानी और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित समीक्षा भी की जाएगी। सरकार की इस पहल से बिहार के लाखों बुजुर्गों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है और यह योजना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

KKR को बड़ा झटका! मुस्तफिजुर रहमान पर BCCI की रोक, शाहरुख खान की टीम की रणनीति बदली

डिजिटल डेस्क: कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को आईपीएल सीज़न से पहले बड़ा झटका लगा है। बांग्लादेश के स्टार तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, BCCI ने KKR को मुस्तफिजुर को टीम से बाहर रखने का निर्देश दिया है, जिससे फ्रेंचाइजी की योजनाओं पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। क्या है पूरा मामला? सूत्रों के अनुसार, BCCI ने विदेशी खिलाड़ियों की उपलब्धता और नियमों से जुड़े कारणों के चलते कोलकाता नाइट राइडर्स को मुस्तफिजुर रहमान को टीम में शामिल न करने की सलाह/निर्देश दिया है। हालांकि इस पर अब तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरखाने इसे लगभग तय माना जा रहा है। KKR को क्यों लगा बड़ा झटका? मुस्तफिजुर रहमान को KKR ने 9.20 करोड़ रुपये की बड़ी रकम देकर खरीदा था। उनकी कटर और डेथ ओवरों में प्रभावी गेंदबाजी टीम की बड़ी ताकत मानी जा रही थी। ऐसे में उनका बाहर होना टीम मैनेजमेंट के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। शाहरुख खान की टीम पर क्या होगा असर? मुस्तफिजुर के बाहर होने से KKR की गेंदबाजी रणनीति पर सीधा असर पड़ सकता है। खासकर अहम मुकाबलों से पहले टीम संतुलन बिगड़ने की आशंका है। डेथ ओवर्स में अनुभवी विदेशी गेंदबाज की कमी KKR को भारी पड़ सकती है।  आगे क्या विकल्प? अब KKR को या तो किसी अन्य विदेशी तेज गेंदबाज को मौका देना होगा या भारतीय गेंदबाजों पर भरोसा बढ़ाना पड़ेगा। टीम मैनेजमेंट जल्द ही इस फैसले पर अंतिम रणनीति तय कर सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें BCCI और KKR की ओर से आने वाले आधिकारिक बयान पर टिकी हुई हैं, जो इस पूरे मामले पर स्थिति साफ करेगा।