धार (मध्य प्रदेश), विशेष रिपोर्ट |मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में वसंत पंचमी के अवसर पर शुक्रवार को एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। लगभग 10 वर्षों के अंतराल के बाद पहली बार एक ही दिन मां वाग्देवी की पूजा और मुस्लिम समुदाय की नमाज शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। यह सब सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के तहत संभव हो सका। सुबह तड़के सूर्योदय के साथ ही भोजशाला परिसर में हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा मां वाग्देवी का विधिवत पूजन शुरू हुआ। ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। वहीं प्रशासन ने मुस्लिम समुदाय के लिए नमाज अदा करने हेतु अलग स्थान निर्धारित किया, जिससे दोनों समुदाय अपने-अपने धार्मिक अनुष्ठान बिना किसी टकराव के कर सकें। संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किए। पूरे धार जिले में करीब 8000 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं। भोजशाला परिसर और उसके आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से पल-पल की निगरानी की जा रही है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी विशेष नजर रखी जा रही है ताकि अफवाहों और भड़काऊ संदेशों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। भोजशाला में पूजा और नमाज का एक ही दिन आयोजन न सिर्फ कानूनी आदेशों का पालन है, बल्कि यह धार्मिक सह-अस्तित्व और आपसी सौहार्द की एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में भी देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर जिम्मेदारी निभाएं, तो ऐसे संवेदनशील मुद्दों को भी शांति से सुलझाया जा सकता है। भोजशाला का यह दिन इतिहास के पन्नों में संतुलन, संयम और संविधान की जीत के रूप में दर्ज होता दिख रहा है।
डिजिटल इंडिया की ओर बड़ा कदम: 2027 की जनगणना पूरी तरह ऑनलाइन, 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा पहला चरण
नई दिल्ली। भारत सरकार ने देश की अगली जनगणना को लेकर ऐतिहासिक फैसला लेते हुए डिजिटल जनगणना–2027 का विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है। गुरुवार को केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, जनगणना का पहला चरण (हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेंसस)1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। इस चरण में देशभर के प्रत्येक घर से *ल33 अहम सवाल पूछे जाएंगे, जो पूरी तरह डिजिटल माध्यम से दर्ज किए जाएंगे। यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप, टैबलेट और सुरक्षित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए आंकड़े जुटाए जाएंगे। पहला चरण: घर और सुविधाओं की होगी पूरी गणना जनगणना का पहला चरण हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन कहलाता है। इसमें नागरिकों की व्यक्तिगत पहचान नहीं, बल्कि घर, आवासीय स्थिति और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी। इन 33 सवालों में मुख्य रूप से शामिल होंगे— घर पक्का है या कच्चा मकान का उपयोग (रिहायशी/व्यावसायिक) घर में कितने कमरे हैं पीने के पानी की सुविधा शौचालय और नालियों की स्थिति बिजली, एलपीजी, इंटरनेट की उपलब्धता वाहन, टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर जैसी सुविधाएं सरकार का उद्देश्य इन सवालों के जरिए देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और जीवन स्तर की वास्तविक तस्वीर सामने लाना है। डिजिटल जनगणना से क्या बदलेगा? इस बार की जनगणना कई मायनों में खास मानी जा रही है पेपरलेस प्रक्रिया: कागज़ी फॉर्म की जगह डिजिटल एंट्री तेज़ और सटीक डेटा: रियल-टाइम अपलोड से गलती की संभावना कम डेटा सुरक्षा: एन्क्रिप्टेड सिस्टम, जानकारी पूरी तरह गोपनीय स्वयं-गणना का विकल्प: नागरिक चाहें तो खुद भी ऑनलाइन जानकारी भर सकेंगे सरकार का दावा है कि इससे न केवल समय और लागत बचेगी, बल्कि नीतिगत फैसलों के लिए अधिक भरोसेमंद आंकड़े उपलब्ध होंगे। दूसरा चरण: जनसंख्या गणना 2027 में पहले चरण के बाद दूसरा और सबसे अहम चरण वर्ष 2027 में होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक जानकारी दर्ज की जाएगी। इसी चरण को वास्तविक जनसंख्या जनगणना माना जाता है। इस डेटा का उपयोग— संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन सरकारी योजनाओं की रूपरेखा आरक्षण और सामाजिक नीतियों शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार नीति जैसे बड़े फैसलों में किया जाएगा। 10 साल बाद हो रही है जनगणना गौरतलब है कि भारत में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टल गई थी। ऐसे में 2027 की जनगणना 16 साल बाद देश की जनसंख्या और सामाजिक संरचना का अद्यतन चित्र पेश करेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जनगणना में दी गई हर जानकारी कानूनी रूप से गोपनीय रहेगी और इसका इस्तेमाल केवल सांख्यिकीय व नीतिगत उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
सुबह की बारिश ने बदला दिल्ली-NCR का मिज़ाज तेज हवाओं और ओलों के अलर्ट के बीच तापमान में आई गिरावट
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार की सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। तड़के हुई हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाओं ने ठंडक बढ़ा दी, जिससे लोगों को पिछले कुछ दिनों से जारी हल्की गर्माहट से राहत मिली। बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई और सुबह-सुबह सड़कों पर ठंडक का अहसास साफ नजर आया। मौसम विभाग (IMD) ने 23 जनवरी को लेकर दिल्ली-एनसीआर के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, आज दिनभर रुक-रुक कर बारिश हो सकती है, साथ ही गरज-चमक, ओलावृष्टि और 40 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। अगले 3 घंटे अहम मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले तीन घंटे खासे संवेदनशील हो सकते हैं। इस दौरान अचानक तेज आंधी चलने, पेड़ गिरने और खुले इलाकों में नुकसान की आशंका जताई गई है। लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। बारिश और तेज हवाओं के असर से अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। सुबह और शाम के समय ठंड और बढ़ने के आसार हैं, जिससे सर्द कपड़ों की जरूरत फिर से महसूस की जा रही है। बारिश के कारण कई इलाकों में ट्रैफिक की रफ्तार धीमी रही। दफ्तर जाने वाले लोगों को जगह-जगह जाम का सामना करना पड़ा। वहीं, तेज हवाओं की वजह से कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की भी आशंका जताई जा रही है।
बिहार की सियासत में सुरक्षा का पुनर्गठन: तेजस्वी यादव की Z से Y+ हुई सुरक्षा, कई नेताओं की कैटेगरी बदली
पटना। बिहार में नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा Z श्रेणी से घटाकर Y+ कर दी गई है। इसके साथ ही राज्य में विभिन्न दलों के कई वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव हुआ है—कुछ को Z श्रेणी प्रदान की गई है, जबकि कुछ नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। यह निर्णय राज्य की सुरक्षा समीक्षा समिति की ताज़ा रिपोर्ट और मौजूदा खतरे के आकलन के आधार पर लिया गया बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, नेताओं की सुरक्षा समय-समय पर खतरे के आकलन (Threat Perception) के अनुसार तय की जाती है। हालिया समीक्षा में: राजनीतिक गतिविधियों की प्रकृति सार्वजनिक कार्यक्रमों की संख्या खुफिया इनपुट बीते समय की घटनाओं जैसे मानकों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा श्रेणियों का पुनर्निर्धारण किया गया। तेजस्वी यादव की सुरक्षा में बदलाव तेजस्वी यादव की सुरक्षा को Z से Y+ किए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इसे रूटीन समीक्षा का हिस्सा बताया जा रहा है। Y+ श्रेणी में भी पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान होते हैं, जिनमें प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी और आवश्यक एस्कॉर्ट शामिल रहते हैं। इस फेरबदल में: बीजेपी और जेडीयू के कुछ वरिष्ठ नेताओं को Z श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। वहीं, कुछ ऐसे नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह हटाई गई है, जिनके लिए खतरे का स्तर न्यूनतम पाया गया। सरकार का कहना है कि सुरक्षा संसाधनों का तर्कसंगत और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सुरक्षा में कटौती और बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी*भी शुरू हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव से जोड़कर देख रहा है, जबकि सरकार इसे निष्पक्ष और पेशेवर प्रक्रिया का परिणाम बता रही है। राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि: सुरक्षा श्रेणी स्थायी नहीं होती। किसी भी समय नए इनपुट मिलने पर फिर से समीक्षा की जा सकती है। नेताओं की व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ-साथ जनहित और संसाधनों का संतुलन जरूरी है।
गंडक दियारा से वाशिंगटन डीसी तक: नीरज कुमार सिंह ने शिक्षा और सामाजिक बदलाव में रचा वैश्विक इतिहास
बिहार के छोटे से गांव का युवा बना अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की आवाज, शिक्षा को बताया सामाजिक परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत छपरा, 22 जनवरी (विशेष रिपोर्ट): बिहार की मिट्टी में जन्मे और सीमित संसाधनों में पले-बढ़े नीरज कुमार सिंह ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच बड़ी हो, लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो गांव की गलियों से निकलकर भी वैश्विक मंच तक पहुंचा जा सकता है। सारण जिले के पानापुर प्रखंड अंतर्गत गंडक दियारा क्षेत्र के पकड़ी नरोत्तम गांव के सतजोड़ा बाजार निवासी नीरज कुमार सिंह आज न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं। एक साधारण ग्रामीण परिवार में जन्मे नीरज, पिता प्रमोद सिंह और माता गीता देवी के सपूत हैं। बचपन से ही उन्होंने शिक्षा को अपने जीवन का सबसे मजबूत आधार माना। उनका दृढ़ विश्वास रहा है कि शिक्षा समाज को बदलने का सबसे सशक्त माध्यम है, और इसी सोच ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। अमेरिका में भारत की दमदार मौजूदगी हाल ही में नीरज कुमार सिंह ने अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी स्थित मैरियट मार्क्विस होटल में आयोजित SSWR 2026 वार्षिक सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में दुनिया भर से शिक्षा, सामाजिक कार्य, शोध और नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान सामाजिक विकास, नई वैश्विक चुनौतियों और शोध आधारित समाधानों पर गहन चर्चा हुई, जिसमें नीरज के विचारों को विशेष सराहना मिली। उनकी प्रस्तुति ने यह दिखाया कि भारत का युवा वैश्विक विमर्श में कितनी मजबूती से अपनी बात रख सकता है। 12 देशों में सामाजिक और शैक्षणिक नेतृत्व नीरज कुमार सिंह अब तक 12 देशों में, जिनमें 10 दक्षिण एशियाई देश शामिल हैं, शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं का नेतृत्व कर चुके हैं। उनका मुख्य फोकस शिक्षा की समान पहुंच, युवाओं का सशक्तिकरण और नीति स्तर पर बदलाव लाना रहा है। उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, एमआईटी, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो और CSWE 2025 जैसे विश्व के प्रतिष्ठित मंचों पर अपने शोध, अनुभव और जमीनी कार्यों को साझा किया है। शैक्षणिक सफर भी उतना ही प्रेरणादायक नीरज का शैक्षणिक जीवन उनकी संघर्षगाथा का अहम हिस्सा है। बी.एससी. के बाद उन्होंने राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान से सामाजिक कार्य में मास्टर डिग्री प्राप्त की। इसके पश्चात टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई से डिप्लोमा किया। आगे चलकर उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया (Penn GSE), अमेरिका से इंटरनेशनल एजुकेशनल डेवलपमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की, जहां उन्होंने शिक्षा नीति, समानता और वैश्विक शिक्षा पर गहन अध्ययन किया। संयुक्त राष्ट्र से लेकर जमीनी स्तर तक योगदान नीरज कुमार सिंह ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में यूथ डेलीगेट के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का मान बढ़ाया। वर्तमान में वे ‘द सोशल वर्क नेबरहुड’, यूएसए में मेंटोर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे नई पीढ़ी के सामाजिक कार्यकर्ताओं को दिशा और मार्गदर्शन दे रहे हैं। अब तक वे 100 से अधिक परियोजनाओं और 50 से ज्यादा NGO, सरकारी विभागों व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं। कोविड काल में भी निभाई अहम भूमिका कोविड-19 महामारी के दौरान नीरज कुमार सिंह ने USAID की MRITE परियोजना के तहत उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके प्रयासों से 25 लाख से अधिक लोगों तक टीकाकरण से जुड़ी सहायता पहुंचाई गई, जो उनके सामाजिक सरोकार और जिम्मेदारी को दर्शाता है। युवाओं के लिए संदेश नीरज कुमार सिंह की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि शिक्षा, मेहनत और समाज के प्रति समर्पण साथ हो, तो सफलता की कोई सीमा नहीं होती। गंडक दियारा के छोटे से गांव से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचने वाले नीरज आज सचमुच बिहार का लाल और भारत की शान बन चुके हैं।
क्रिकेट जगत में हड़कंप: बांग्लादेश ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 से नाम वापस ले लिया — भारत में खेलना अस्वीकार
ढाका/नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में एक ऐतिहासिक और विवादित क्षण तब देखने को मिला जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने ICC टी-20 वर्ल्ड कप 2026 से अपना नाम वापस ले लिया। यह निर्णय भारत में होने वाले टूर्नामेंट के अपने मैचों को खेलने से इनकार करने के बाद आया है, जिससे क्रिकेट की प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में बड़ा भूचाल आ गया है। विवाद की शुरुआत और ICC का रुख 22 जनवरी तक चल रहे गतिरोध का मूल कारण था बांग्लादेश का भारत में मैच खेलने से इंकार। BCB ने यह मांग की थी कि उनके सभी मैच भारत से श्रीलंका में शिफ्ट किए जाएं, लेकिन ICC ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया और मूल शेड्यूल को बरकरार रखने का निर्णय किया। ICC ने कहा कि विस्तृत सुरक्षा आकलन और स्वतंत्र जांच ने यह पुष्टि की है कि भारत में किसी भी प्रकार का “विश्वसनीय खतरा” मौजूद नहीं है और इसलिए मैचों का स्थान बदलना संभव नहीं है। ICC ने बांग्लादेश को 24 घंटे का “अंतिम निर्णय” देने की भी मांग की थी — या तो टीम भारत में खेलने के लिए राज़ी हो, या फिर उसे टूर्नामेंट से बाहर होना पड़े। बांग्लादेश की प्रतिक्रिया BCB ने प्रेस रिलीज़ में कहा कि वे भारत में विश्व कप खेलने से मना करते हैं और उनका फैसला “क्रिकेट के भविष्य की चिंता” पर आधारित है। बांग्लादेश का मानना है कि क्रिकेट की लोकप्रियता को यह निर्णय झटका देगा और लगभग 20 करोड़ लोगों को खेल से अलग रखेगा।” BCB ने दावा किया कि ICC ने हर स्थिति पर भारत के पक्ष में निर्णय लिया, और मामला कोई “एकल क्रिकेट मुद्दा” नहीं है, बल्कि यह व्यापक निर्णय-निर्माण असंतुलन का प्रतीक है। BCB अध्यक्ष ने कहा: “हम वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं और ICC से बातचीत जारी रखेंगे, लेकिन भारत में खेलना स्वीकार नहीं करेंगे। हमें क्रिकेट के भविष्य की चिंता है और हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।” बांग्लादेश सरकार और बोर्ड ने मुख्य रूप से सुरक्षा और राजनैतिक तनाव को कारण बताया। इस विवाद के बीच बंग्लादेश के प्रमुख खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान के IPL से हटाए जाने का मामला भी सामने आया, जिससे दोनों देशों के बीच क्रिकेट-राजनीति की जटिलता बढ़ी। बांग्लादेश ने ICC के फैसलों को पक्षपातपूर्ण बताया, और कहा कि ऐसा निर्णय खेल की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के खिलाफ है। ICC ने लगातार कहा कि कोई भी सुरक्षा खतरा नहीं पाया गया है और आयोजक देशों (भारत/श्रीलंका) ने आवश्यक सुरक्षा आश्वासन दिए हैं। ICC का मानना है कि शेड्यूल में बदलाव व्यावहारिक रूप से असंभव है और भविष्य के टूर्नामेंट्स के लिए खराब मिसाल कायम कर सकता है। ICC ने स्पष्ट किया है कि यदि बांग्लादेश की टीम भारत में खेलने से इनकार करती है, तो उसे टूर्नामेंट से हटा दिया जाएगा, और उसकी जगह स्कॉटलैंड जैसी अन्य टीम को शामिल किया जा सकता है, जिससे 2026 टी-20 विश्व कप का आकार बदल सकता है। इस फैसले का क्रिकेट-अर्थव्यवस्था, खिलाड़ियों के करियर और द्विपक्षीय क्रिकेट रिश्तों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। बांग्लादेश के खिलाड़ी मैच फीस और बोनस से वंचित हो सकते हैं जबकि बोर्ड भी ICC के भविष्य के फैसलों में अलग तरीके से प्रभावित हो सकता है।
‘बॉर्डर 2’ पर सनी देओल की हुंकार, खाड़ी देशों में मचा सियासी तूफान—पाकिस्तान कनेक्शन बनी बैन की वजह?
डेस्क रिपोर्ट | एंटरटेनमेंट: बॉलीवुड और सियासत का टकराव कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब पर्दे पर देशभक्ति का ज्वार उमड़ता है और पाकिस्तान की भूमिका सवालों के घेरे में आती है, तो उसकी गूंज भारत से बाहर भी सुनाई देती है। कुछ ऐसा ही माहौल इस वक्त सनी देओल स्टारर ‘बॉर्डर 2’ को लेकर बनता दिख रहा है। चर्चा है कि खाड़ी (गल्फ) देशों में इस बहुप्रतीक्षित फिल्म की रिलीज पर बैन लगाया जा सकता है, जिससे फिल्म इंडस्ट्री में हलचल तेज हो गई है। सनी की दहाड़ और सरहद की कहानी ‘बॉर्डर’ भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में रही है, जिसने देशभक्ति को सिर्फ संवाद नहीं, बल्कि भावना बना दिया। सनी देओल की गूंजती आवाज़, सीमा पर तैनात जवानों का साहस और पाकिस्तान की आक्रामक नीति—इन सबने मिलकर पहली ‘बॉर्डर’ को कल्ट क्लासिक बना दिया था। अब ‘बॉर्डर 2’ उसी विरासत को आगे बढ़ाने का दावा कर रही है। बताया जा रहा है कि फिल्म में एक बार फिर भारत-पाकिस्तान तनाव, सैन्य कार्रवाई और ऐतिहासिक घटनाओं की झलक दिखाई गई है—जो कुछ देशों को नागवार गुजर रही है। गल्फ देशों की नाराज़गी क्यों? खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय दर्शक रहते हैं और हिंदी फिल्मों का वहां अच्छा बाज़ार है। लेकिन जैसे ही किसी फिल्म में पाकिस्तान की आलोचना या उसकी “पोल-खोल” होती है, कुछ देशों में सेंसर सख्त हो जाता है। सूत्रों के मुताबिक, ‘बॉर्डर 2’ में पाकिस्तान को आक्रामक और नकारात्मक रूप में दिखाया गया है, जिसे लेकर आपत्ति जताई जा रही है। इसी कारण फिल्म की रिलीज पर रोक या भारी कट्स की संभावना पर चर्चा शुरू हो गई है। यह पहली बार नहीं है जब किसी देशभक्ति फिल्म को विदेशों में विरोध का सामना करना पड़ रहा हो। इससे पहले भी कई हिंदी फिल्मों को गल्फ देशों में या तो बैन किया गया या फिर बड़े बदलावों के बाद रिलीज की अनुमति मिली। फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव क्रिएटिव फ्रीडम बनाम सियासी संवेदनशीलता का है, जहां निर्माता सच्चाई और राष्ट्रभाव दिखाना चाहते हैं, जबकि कुछ देश कूटनीतिक संतुलन साधने में लगे रहते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ बैन की खबरें हैं, वहीं भारत में फिल्म को लेकर उत्साह और भी बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर “सनी की दहाड़” और “बॉर्डर 2 देशभक्ति का तूफान” जैसे ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं। फैंस का मानना है कि अगर फिल्म पर कहीं रोक लगती है, तो यह उसकी लोकप्रियता को और बढ़ाएगी।
भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला वसंत पंचमी पर एक ही परिसर में पूजा और नमाज़
धार (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला परिसर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और संतुलन साधने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने वसंत पंचमी के अवसर पर धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए हिंदू और मुस्लिम—दोनों समुदायों को पूजा और नमाज़ की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, हिंदू श्रद्धालु सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां वाग्देवी (सरस्वती) की पूजा कर सकेंगे, जबकि मुस्लिम समुदाय निर्धारित समय पर नमाज़ अदा करेगा। इस फैसले को धार्मिक सौहार्द और संवैधानिक संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वसंत पंचमी पर एक ही परिसर में पूजा और नमाज़ विवाद चला आ रहा है। हिंदू पक्ष इसे राजा भोज द्वारा स्थापित सरस्वती मंदिर मानता है, वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह एक ऐतिहासिक मस्जिद (कमाल मौला मस्जिद) है। वर्षों से यह परिसर न्यायिक और प्रशासनिक निगरानी में रहा है, जहां अलग-अलग दिनों में पूजा और नमाज़ की अनुमति दी जाती रही है। वसंत पंचमी का विशेष महत्व वसंत पंचमी को मां सरस्वती की आराधना का प्रमुख पर्व माना जाता है। इसी कारण हिंदू पक्ष की ओर से लंबे समय से मांग की जा रही थी कि इस दिन पूजा पर कोई प्रतिबंध न हो। सुप्रीम कोर्ट ने इस धार्मिक भावना को स्वीकार करते हुए पूरे दिन पूजा की अनुमति दी है। प्रशासन को सख्त निर्देश कोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने, सीसीटीवी निगरानी, और पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो। दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया हिंदू संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे आस्था की जीत बताया। वहीं मुस्लिम पक्षने भी कोर्ट के आदेश को मानते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है
दावोस से भारत के लिए बड़ा संकेत: ट्रंप बोले— ‘प्रधानमंत्री मोदी शानदार नेता, भारत के साथ जल्द होगी बड़ी ट्रेड डील’
दावोस। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की है। स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान मनी कंट्रोल को दिए गए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को और मज़बूत करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और दोनों देशों के बीच जल्द ही एक “अच्छी डील” होने की पूरी संभावना है। ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का ज़िक्र करते हुए कहा, “हम प्रधानमंत्री मोदी का बहुत सम्मान करते हैं। मोदी एक शानदार इंसान हैं और मेरे अच्छे दोस्त भी हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और अमेरिका भारत को एक अहम रणनीतिक और आर्थिक साझेदार मानता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिए कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े कुछ लंबित मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत चल रही है। ट्रंप के अनुसार, दोनों देश ऐसे समझौते पर काम कर रहे हैं जिससे न सिर्फ़ द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा, बल्कि निवेश, तकनीक और रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ट्रेड डील होती है, तो इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों, आईटी सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिल सकता है। वहीं अमेरिका के लिए भारत एक बड़ा उपभोक्ता बाज़ार और भरोसेमंद रणनीतिक सहयोगी बनकर उभरेगा। दावोस जैसे वैश्विक मंच से भारत के पक्ष में दिया गया ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यह संदेश साफ़ करता है कि अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्तों को केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता है। ट्रंप के इस बयान के बाद यह उम्मीद और मज़बूत हुई है कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंध और प्रगाढ़ होंगे। चाहे वह रक्षा सहयोग हो, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप या फिर व्यापार—दोनों देश वैश्विक मंच पर एक-दूसरे के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में आगे बढ़ते दिख रहे हैं। कुल मिलाकर, दावोस से ट्रंप का यह संदेश भारत के लिए राजनीतिक और आर्थिक—दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
तूफानी बल्लेबाज़ी से भारत का दमदार आग़ाज़, कीवियों को 48 रन से हराकर सीरीज़ में बढ़त
भारतीय क्रिकेट टीम ने पांच मैचों की टी20 सीरीज़ की शुरुआत शानदार जीत के साथ करते हुए न्यूज़ीलैंड को पहले ही मुकाबले में करारा झटका दिया। युवा जोश और अनुभवी ताक़त के बेहतरीन मेल ने इस मैच को पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। टॉस के बाद पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारत की शुरुआत आक्रामक रही। अभिषेक शर्मा ने एक बार फिर अपने बेखौफ अंदाज़ से दर्शकों का दिल जीत लिया। उन्होंने मात्र कुछ ही ओवरों में मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट्स खेलते हुए 84 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उनकी इस पारी ने भारतीय पारी को मज़बूत आधार दिया। मध्यक्रम में रिंकू सिंह ने अपनी पहचान के अनुरूप जिम्मेदारी और आक्रमण का शानदार संतुलन दिखाया। उन्होंने 44 रनों की तेज़ तर्रार पारी खेलते हुए कीवी गेंदबाज़ों की लय पूरी तरह बिगाड़ दी। वहीं कप्तान हार्दिक पांड्या ने भी 25 रनों का अहम योगदान देकर रन गति को आख़िरी ओवरों तक तेज़ बनाए रखा। इन सभी पारियों के दम पर भारत ने निर्धारित 20 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 238 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। 239 रनों के मुश्किल लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूज़ीलैंड की टीम शुरुआत से ही दबाव में नज़र आई। भारतीय गेंदबाज़ों ने सधी हुई लाइन-लेंथ और आक्रामक रणनीति के साथ कीवी बल्लेबाज़ों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। लगातार अंतराल पर विकेट गिरने से न्यूज़ीलैंड की पारी पटरी से उतरती चली गई। पूरी कोशिशों के बावजूद कीवी टीम 20 ओवरों में 7 विकेट खोकर केवल 190 रन ही बना सकी। अंततः भारत ने यह मुकाबला 48 रनों से अपने नाम कर लिया और पांच मैचों की सीरीज़ में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। यह जीत न सिर्फ स्कोरबोर्ड पर भारत की मजबूती दिखाती है, बल्कि टीम के युवा खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और गहराई को भी रेखांकित करती है। सीरीज़ की शुरुआत में मिली इस जीत से भारतीय खेमे का मनोबल ऊंचा है और आने वाले मुकाबलों में टीम इसी लय को बरकरार रखने के इरादे से मैदान में उतरेगी।