जींद।भारतीय रेलवे के हरित परिवहन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद पहुंच चुकी है और इसके जींद–सोनीपत रूट पर इसी महीने से संचालन की तैयारी है। यह अत्याधुनिक ट्रेन चेन्नई में निर्मित की गई है, जो 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम है। खास बात यह है कि यह ट्रेन बिना शोर और बिना प्रदूषण के चलेगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिलेगी। पर्यावरण के अनुकूल तकनीक हाइड्रोजन ट्रेन में पारंपरिक डीज़ल या बिजली के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया गया है। इस तकनीक में ऊर्जा उत्पादन के दौरान कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है और केवल जलवाष्प (वॉटर वेपर) निकलती है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह ट्रेन पर्यावरणीय प्रभाव को काफी हद तक कम करेगी और भविष्य में ग्रीन ट्रांसपोर्ट का मजबूत विकल्प बनेगी। यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं यह ट्रेन एक साथ 2638 यात्रियों को सफर कराने की क्षमता रखती है। इसमें आधुनिक कोच, बेहतर वेंटिलेशन, आरामदायक सीटें और उन्नत सुरक्षा मानक शामिल किए गए हैं। कम शोर के कारण यात्रियों को शांत और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। जींद–सोनीपत रूट पर होगा ट्रायल और संचालन रेलवे सूत्रों के मुताबिक, जींद–सोनीपत सेक्शन को हाइड्रोजन ट्रेन के लिए चुना गया है, जहां पहले चरण में ट्रायल रन किए जाएंगे। ट्रायल सफल रहने पर नियमित संचालन शुरू किया जाएगा। यह रूट उत्तर भारत में हरित रेलवे परियोजना का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा चेन्नई में निर्मित इस ट्रेन को मेक इन इंडिया पहल के तहत विकसित किया गया है। इससे देश में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में ऐसी ट्रेनों के निर्माण की राह आसान होगी। रेलवे का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अन्य चुनिंदा रूटों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का विस्तार करना है। भविष्य की रेल यात्रा की झलक विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें भारतीय रेलवे के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती हैं। बढ़ती ईंधन लागत और पर्यावरणीय चिंताओं के बीच यह तकनीक टिकाऊ और किफायती समाधान के रूप में उभर रही है।
ट्रंप के सनसनीखेज दावे से अंतरराष्ट्रीय हलचल: ‘मादुरो गिरफ्तार’ कहने पर वेनेजुएला ने मांगा ‘प्रूफ ऑफ लाइफ’
काराकस/वॉशिंगटन। वेनेजुएला की राजधानी काराकस में हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने दावा किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर अमेरिकी हमले की भी पुष्टि करने का दावा किया। ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद वेनेजुएला सरकार ने कड़ा ऐतराज जताया और इसे “झूठा, भड़काऊ और असत्यापित” बताया। काराकस में जारी आधिकारिक बयान में सरकार ने अमेरिकी पक्ष से मादुरो के “प्रूफ ऑफ लाइफ” यानी उनके जीवित और सुरक्षित होने के प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग की है। वेनेजुएला का कहना है कि इस तरह के दावे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश हैं। धमाकों के बाद बढ़ा तनाव काराकस में धमाकों की पुष्टि स्थानीय अधिकारियों ने की है, हालांकि हताहतों और नुकसान के सटीक आंकड़ों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियों ने शहर के कई इलाकों में अलर्ट बढ़ा दिया है और संवेदनशील ठिकानों की कड़ी निगरानी की जा रही है। वेनेजुएला का खंडन वेनेजुएला के उपराष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि राष्ट्रपति मादुरो देश में ही हैं और सरकार सामान्य रूप से काम कर रही है। अधिकारियों ने ट्रंप के दावे को “राजनीतिक प्रचार” बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें। अमेरिकी दावे पर सवाल अमेरिकी प्रशासन की ओर से अभी तक ट्रंप के दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज, तस्वीर या वीडियो जारी नहीं किया गया है। इसी कारण वेनेजुएला ने ‘प्रूफ ऑफ लाइफ’ की मांग को दोहराया है। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि बिना ठोस सबूतों के ऐसे बयान वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया लैटिन अमेरिका के कई देशों और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े सूत्रों ने संयम बरतने और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की सलाह दी है। कुछ देशों ने काराकस में अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श भी जारी किए हैं। आगे क्या? स्थिति तेजी से बदल रही है। एक ओर अमेरिका के दावे हैं, तो दूसरी ओर वेनेजुएला का सख्त खंडन। आने वाले घंटों में अगर किसी पक्ष की ओर से ठोस सबूत या आधिकारिक घोषणा सामने आती है, तो क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें काराकस और वॉशिंगटन पर टिकी हुई हैं।
बिहार के बुजुर्गों को बड़ी राहत: अब घर बैठे मिलेगी इलाज की सुविधा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की नई योजना की घोषणा
पटना। बिहार सरकार ने राज्य के बुजुर्ग नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए उनके लिए घर पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की नई योजना की घोषणा की है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान करते हुए कहा कि अब बुजुर्गों को इलाज के लिए बार-बार अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह योजना सरकार के ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम का अहम हिस्सा होगी। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया है कि इस योजना को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द लागू किया जाए। योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को उनके घर पर ही बुनियादी और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि समय पर इलाज संभव हो सके और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार आए। घर पर मिलेंगी ये स्वास्थ्य सेवाएं सरकार की इस योजना के तहत बुजुर्गों को निम्नलिखित सुविधाएं घर पर ही प्रदान की जाएंगी— * प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की सेवा * पैथोलॉजी जांच (खून, शुगर, अन्य जरूरी टेस्ट) * ब्लड प्रेशर (BP) और ईसीजी जांच * फिजियोथेरेपी की सुविधा * अचानक तबीयत बिगड़ने की स्थिति में आपातकालीन सहायता * ग्रामीण इलाकों पर विशेष फोकस सरकार का विशेष जोर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों पर रहेगा, जहां बुजुर्गों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को इस योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि सेवाएं समय पर और प्रभावी ढंग से मिल सकें। मुख्यमंत्री का बयान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा,“बुजुर्ग हमारे समाज की धरोहर हैं। उनकी देखभाल सरकार की जिम्मेदारी है। यह योजना बुजुर्गों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” स्वास्थ्य विभाग करेगा निगरानी स्वास्थ्य विभाग को योजना की निगरानी और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित समीक्षा भी की जाएगी। सरकार की इस पहल से बिहार के लाखों बुजुर्गों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है और यह योजना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
KKR को बड़ा झटका! मुस्तफिजुर रहमान पर BCCI की रोक, शाहरुख खान की टीम की रणनीति बदली
डिजिटल डेस्क: कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को आईपीएल सीज़न से पहले बड़ा झटका लगा है। बांग्लादेश के स्टार तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, BCCI ने KKR को मुस्तफिजुर को टीम से बाहर रखने का निर्देश दिया है, जिससे फ्रेंचाइजी की योजनाओं पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। क्या है पूरा मामला? सूत्रों के अनुसार, BCCI ने विदेशी खिलाड़ियों की उपलब्धता और नियमों से जुड़े कारणों के चलते कोलकाता नाइट राइडर्स को मुस्तफिजुर रहमान को टीम में शामिल न करने की सलाह/निर्देश दिया है। हालांकि इस पर अब तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरखाने इसे लगभग तय माना जा रहा है। KKR को क्यों लगा बड़ा झटका? मुस्तफिजुर रहमान को KKR ने 9.20 करोड़ रुपये की बड़ी रकम देकर खरीदा था। उनकी कटर और डेथ ओवरों में प्रभावी गेंदबाजी टीम की बड़ी ताकत मानी जा रही थी। ऐसे में उनका बाहर होना टीम मैनेजमेंट के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। शाहरुख खान की टीम पर क्या होगा असर? मुस्तफिजुर के बाहर होने से KKR की गेंदबाजी रणनीति पर सीधा असर पड़ सकता है। खासकर अहम मुकाबलों से पहले टीम संतुलन बिगड़ने की आशंका है। डेथ ओवर्स में अनुभवी विदेशी गेंदबाज की कमी KKR को भारी पड़ सकती है। आगे क्या विकल्प? अब KKR को या तो किसी अन्य विदेशी तेज गेंदबाज को मौका देना होगा या भारतीय गेंदबाजों पर भरोसा बढ़ाना पड़ेगा। टीम मैनेजमेंट जल्द ही इस फैसले पर अंतिम रणनीति तय कर सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें BCCI और KKR की ओर से आने वाले आधिकारिक बयान पर टिकी हुई हैं, जो इस पूरे मामले पर स्थिति साफ करेगा।
“कोहरे से मिली राहत, रेल सेवाएं पटरी पर, कुछ हमसफर एक्सप्रेस अब भी घंटों लेट”
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उत्तर भारत में कोहरे की तीव्रता में कमी आने के साथ ही रेल यातायात में धीरे-धीरे सुधार नजर आने लगा है। बीते कुछ दिनों से कोहरे के कारण बुरी तरह प्रभावित रही ट्रेनों की समय-सारिणी अब पटरी पर लौटती दिख रही है। शनिवार को न केवल देरी से चलने वाली ट्रेनों की संख्या घटी, बल्कि विलंब की अवधि में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। हालांकि, इसके बावजूद कुछ लंबी दूरी की ट्रेनें अभी भी 30 से 45 घंटे तक की भारी देरी से चल रही हैं, जिससे यात्रियों की मुश्किलें बनी हुई हैं। देरी की अवधि में आई कमी रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जिन ट्रेनों में शुक्रवार तक 8 से 10 घंटे या उससे अधिक का विलंब था, उनमें से अधिकांश शनिवार को 2 से 6 घंटे की देरी से ही चल रही हैं। कोहरे की स्थिति बेहतर होने से दृश्यता में सुधार हुआ है, जिससे ट्रेनों की औसत गति बढ़ी है और संचालन में राहत मिली है। कुछ ट्रेनों की परेशानी अब भी बरकरार हालांकि, बरौनी हमसफर एक्सप्रेस और झेलम एक्सप्रेस जैसी कुछ ट्रेनें अब भी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। * शुक्रवार को दिल्ली पहुंचने वाली बरौनी हमसफर एक्सप्रेस करीब 30 घंटे की देरी से शनिवार को नई दिल्ली स्टेशन पहुंची। इसके चलते यह ट्रेन अपने अगले फेरे में भी 21 घंटे 40 मिनट की देरी से रवाना होगी। * वहीं, झेलम एक्सप्रेस अब भी 45 घंटे से अधिक की भारी देरी से चल रही है। शनिवार को देरी से चलने वाली प्रमुख ट्रेनें शनिवार को नई दिल्ली और अन्य प्रमुख स्टेशनों से रवाना होने वाली कुछ ट्रेनों की स्थिति इस प्रकार रही: * बरौनी हमसफर एक्सप्रेस (नई दिल्ली–बरौनी): शुक्रवार शाम 5.55 बजे चलने वाली ट्रेन शनिवार अपराह्न 3.35 बजे, यानी 21 घंटे 40 मिनट की देरी से रवाना हुई। * हजरत निजामुद्दीन–दुर्ग हमसफर एक्सप्रेस: करीब 1 घंटे की देरी। * दरभंगा हमसफर एक्सप्रेस: लगभग 8 घंटे विलंब। * सीएसएमटी मुंबई–अमृतसर एक्सप्रेस: करीब 10 घंटे की देरी। * अगरतला–अमृतसर त्रिपुरा सुंदरी एक्सप्रेस: लगभग साढ़े छह घंटे विलंब से संचालित। यात्रियों को राहत की उम्मीद रेलवे का कहना है कि यदि मौसम की स्थिति इसी तरह अनुकूल बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में ट्रेनों की समयबद्धता और बेहतर होने की उम्मीद है। फिलहाल, यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे स्टेशन जाने से पहले अपनी ट्रेन की लाइव रनिंग स्टेटस अवश्य जांच लें। कोहरे के कमजोर पड़ने से दिल्ली के रेल यातायात को राहत जरूर मिली है, लेकिन कुछ ट्रेनों की भारी देरी ने यात्रियों की परेशानी अभी पूरी तरह खत्म नहीं की है। मौसम साफ रहने पर आने वाले दिनों में हालात सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।
“बलूचिस्तान से भारत के समर्थन की खुली पुकार: मीर यार बलूच का जयशंकर को पत्र, पाकिस्तान-चीन गठजोड़ पर गंभीर आरोप”
नई दिल्ली/क्वेटा: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान से भारत के समर्थन में एक तीखा और भावनात्मक संदेश सामने आया है। बलूचिस्तान के प्रमुख नेता मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक ओपन लेटर लिखकर पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने और बलूच जनता की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की अपील की है। पत्र में उन्होंने पाकिस्तान को “दमनकारी राज्य” बताते हुए उसके कथित अत्याचारों और पाकिस्तान-चीन के खतरनाक रणनीतिक गठजोड़ का विस्तार से जिक्र किया है। “हम भारत के साथ हैं” अपने पत्र में मीर यार बलूच ने स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि बलूच जनता भारत को अपना स्वाभाविक मित्र मानती है। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में दशकों से मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है—जबर्दस्ती गुमशुदगी, सैन्य कार्रवाई और संसाधनों की लूट आम बात बन चुकी है। पत्र में यह भी कहा गया कि “पाकिस्तान को उखाड़ फेंकने” की भावना बलूच समाज में इसलिए पनप रही है क्योंकि वहां लोकतांत्रिक अधिकारों और आत्मनिर्णय की मांग को लगातार दबाया जा रहा है। पाकिस्तान-चीन गठजोड़ पर आरोप मीर यार बलूच ने अपने पत्र में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना के नाम पर बलूचिस्तान की जमीन और संसाधनों का दोहन किया जा रहा है, जबकि स्थानीय लोगों को न तो पर्याप्त रोजगार मिला और न ही सुरक्षा। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि चीन भविष्य में पाकिस्तान में अपनी सेना की तैनाती कर सकता है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन और अधिक बिगड़ सकता है। उनके मुताबिक, यह गठजोड़ न केवल बलूचिस्तान बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए खतरा है। भारत से क्या अपेक्षा? पत्र में भारत से यह अपेक्षा जताई गई है कि वह: * बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाए, * संयुक्त राष्ट्र सहित वैश्विक संस्थाओं में बलूच आवाज़ को समर्थन दे, * और क्षेत्र में शांति व स्थिरता के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाए। कूटनीतिक हलकों में हलचल इस ओपन लेटर के सामने आने के बाद कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि भारत सरकार की ओर से इस पत्र पर आधिकारिक प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान मुद्दा पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील है और ऐसे बयानों से भारत-पाकिस्तान संबंधों में नई बहस छिड़ सकती है। गौरतलब है कि बलूचिस्तान लंबे समय से अस्थिरता और विद्रोह का केंद्र रहा है। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद यह क्षेत्र विकास और बुनियादी सुविधाओं में पीछे है। बलूच नेताओं का आरोप रहा है कि इस असंतोष की जड़ें राजनीतिक उपेक्षा और सैन्य दमन में हैं।
चौमूं हिंसा के बाद प्रशासन सख्त, उपद्रवियों पर कार्रवाई तेज; अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर
जयपुर।जयपुर जिले के चौमूं कस्बे में एक हफ्ते पहले हुई हिंसक घटना के बाद अब राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मस्जिद के बाहर रेलिंग लगाने को लेकर हुए विवाद ने जिस तरह झड़प और पथराव का रूप लिया था, उसके बाद आज प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हिंसा में शामिल आरोपियों के अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नगर परिषद और पुलिस की संयुक्त टीम ने सुबह से ही कार्रवाई शुरू की। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चिन्हित किए गए अवैध निर्माणों को हटाया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के तहत की जा रही है और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्या था चौमूं हिंसा का मामला बीते सप्ताह चौमूं में मस्जिद के बाहर रेलिंग लगाने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया था। देखते ही देखते यह विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों ओर से पथराव हुआ, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। हालात बिगड़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। सरकार का सख्त संदेश जिला प्रशासन का कहना है कि हिंसा फैलाने वालों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई उसी कड़ी का हिस्सा है। प्रशासन ने साफ कहा है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कार्रवाई के दौरान चौमूं और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस लगातार फ्लैग मार्च कर रही है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या तनाव की स्थिति से निपटा जा सके। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई अधिकारियों के मुताबिक, हिंसा में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी जांच चल रही है। यदि कहीं और अवैध निर्माण पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। चौमूं हिंसा के बाद प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को कानून व्यवस्था बनाए रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के तौर पर देखा जा रहा है।
उस्मान ख्वाजा का संन्यास का ऐलान, सिडनी टेस्ट होगा करियर का आखिरी मुकाबला
सिडनी/नई दिल्ली।ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के भरोसेमंद बल्लेबाज़ उस्मान ख्वाजा ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को विराम देने का ऐलान कर दिया है। ख्वाजा ने स्पष्ट किया कि सिडनी में खेला जाने वाला आगामी मैच उनके करियर का आखिरी मुकाबला होगा। उनके इस फैसले से क्रिकेट जगत में हलचल मच गई है और प्रशंसकों के बीच भावुक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अपने बयान में ख्वाजा ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक इस निर्णय पर विचार किया और अब उन्हें लगता है कि सम्मानजनक विदाई का यह सही समय है। उन्होंने टीम, प्रशंसकों और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का आभार जताते हुए कहा कि देश के लिए खेलना उनके जीवन का सबसे बड़ा गौरव रहा। ख्वाजा ने अपने करियर में धैर्यपूर्ण बल्लेबाज़ी, तकनीकी मजबूती और मुश्किल परिस्थितियों में जिम्मेदारी लेने के लिए खास पहचान बनाई। घरेलू मैदानों के साथ-साथ विदेशी दौरों पर भी उन्होंने अहम पारियां खेलीं और ऑस्ट्रेलियाई मध्यक्रम को स्थिरता दी। चयन के उतार-चढ़ाव के बावजूद उन्होंने दमदार वापसी की और टीम के भरोसेमंद खिलाड़ी बने रहे। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि ख्वाजा का संन्यास ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए एक युग के अंत जैसा है। उनके अनुभव और शांत स्वभाव ने ड्रेसिंग रूम में नेतृत्व की भूमिका निभाई। सिडनी में होने वाला आखिरी मैच न सिर्फ उनके करियर का समापन होगा, बल्कि प्रशंसकों के लिए भी एक भावुक पल साबित होने वाला है। टीम प्रबंधन और साथी खिलाड़ियों ने ख्वाजा के योगदान की सराहना की है। उम्मीद है कि सिडनी में विदाई मैच के दौरान स्टेडियम में उन्हें खास सम्मान मिलेगा और फैंस अपने चहेते बल्लेबाज़ को आखिरी बार मैदान पर खेलते देखेंगे। कुल मिलाकर, उस्मान ख्वाजा का संन्यास ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के इतिहास में एक अहम अध्याय के रूप में दर्ज होगा—एक ऐसा अध्याय, जो जुझारूपन, संयम और निरंतरता की मिसाल पेश करता है।
दिल्ली में ठंड, कोहरा और प्रदूषण का डबल अटैक: चार दिन शीत लहर का अलर्ट, AQI ‘बहुत खराब’ श्रेणी में
नई दिल्ली।राजधानी दिल्ली में नए साल की शुरुआत कड़ाके की ठंड, घने कोहरे और गंभीर वायु प्रदूषण के साथ हुई है। मौसम विभाग ने 2 से 5 जनवरी तक शीत लहर की चेतावनी जारी की है, जबकि घने कोहरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। मौसम और प्रदूषण की इस दोहरी मार ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के प्रभाव से न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। कई इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे चला गया है, जिससे सुबह और रात के समय तेज ठिठुरन महसूस की जा रही है। दिन में धूप निकलने के बावजूद सर्द हवाओं के कारण ठंड का असर बना हुआ है। घने कोहरे के कारण दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में दृश्यता बेहद कम रही। सुबह के समय कुछ इलाकों में विजिबिलिटी 50 से 100 मीटर तक सिमट गई, जिससे सड़क यातायात प्रभावित हुआ। वाहन चालकों को धीमी गति से चलना पड़ा, वहीं रेल और हवाई सेवाओं पर भी कोहरे का असर देखा गया। ठंड के साथ-साथ राजधानी की वायु गुणवत्ता भी गंभीर स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 370 से ऊपर दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। आनंद विहार, अशोक विहार, वजीरपुर और रोहिणी जैसे इलाकों में AQI और भी अधिक रिकॉर्ड किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि कम हवा की रफ्तार और कोहरे के कारण प्रदूषण फैलने के बजाय वातावरण में ही फंसा हुआ है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों पर पड़ सकता है। डॉक्टरों ने ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभाग और मौसम विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे सुबह और देर शाम अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें, गर्म कपड़े पहनें और जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करें। कोहरे के दौरान वाहन चलाते समय फॉग लाइट का प्रयोग करने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की भी सलाह दी गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले कुछ दिनों तक ठंड, कोहरा और खराब वायु गुणवत्ता से राहत मिलने की संभावना कम है। ऐसे में राजधानीवासियों को सतर्क रहने और एहतियात बरतने की जरूरत है।
ईरान की सड़कों पर गुस्सा: आर्थिक तबाही से उठी सत्ता परिवर्तन की लहर
ईरान इस समय अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक से गुजर रहा है। कभी सीमित आर्थिक असंतोष के रूप में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब खुले तौर पर सरकार बदलने की मांग में तब्दील हो चुके हैं। सड़कों पर उतरते लोग सिर्फ महंगाई और बेरोजगारी का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि पूरे शासन तंत्र पर सवाल उठा रहे हैं। आर्थिक संकट की जड़ में क्या है? ईरानी अर्थव्यवस्था लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, युद्ध के दबाव और आंतरिक नीतिगत कमजोरियों से जूझ रही है। हालात तब और बिगड़ गए जब देश की मुद्रा रियाल ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 14.2 लाख रियाल तक पहुंच गई, जिसने आम लोगों की क्रय शक्ति लगभग खत्म कर दी। रियाल की गिरावट का सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा— ♦खाने-पीने की चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती चली गईं ♦आयात-निर्यात और व्यापार लगभग ठप पड़ गया ♦ छोटे दुकानदार और व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए बाजार बंद, सड़कों पर विरोध आर्थिक बदहाली के खिलाफ विरोध की शुरुआत कुछ हफ्ते पहले हुई, जब तेहरान के ग्रैंड बाजार और मोबाइल फोन बाजार के दुकानदारों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया। दुकानों के शटर गिरते ही यह साफ हो गया कि असंतोष सिर्फ आम जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापारिक वर्ग भी सरकार से नाराज है। धीरे-धीरे यह आंदोलन बाजारों से निकलकर सड़कों तक पहुंच गया। कई शहरों में लोग नारे लगाते हुए दिखाई दिए, जिनमें अब महंगाई के साथ-साथ शासन परिवर्तन की मांग भी खुलकर सुनाई देने लगी। आर्थिक नाराजगी से राजनीतिक चुनौती तकविशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान में यह कोई पहला विरोध प्रदर्शन नहीं है, लेकिन इस बार का फर्क साफ है। पहले जहां प्रदर्शनकारी वेतन, सब्सिडी और कीमतों में राहत की मांग कर रहे थे, अब नारे सीधे तौर पर सरकारी नीतियों और नेतृत्व को निशाना बना रहे हैं। युद्ध जैसी परिस्थितियां, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का बोझ और सख्त सरकारी नियंत्रण—इन सबने मिलकर जनता के धैर्य की सीमा तोड़ दी है। सरकार की सख्ती और बढ़ता तनाव सरकार ने इन प्रदर्शनों को काबू में करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की खबरें भी सामने आ रही हैं। हालांकि, दमन की नीति ने हालात को शांत करने के बजाय कई जगह और भड़का दिया है। आगे क्या? ईरान के लिए यह सिर्फ आर्थिक संकट नहीं, बल्कि राजनीतिक स्थिरता की बड़ी परीक्षा बन चुका है। अगर महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा संकट पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल, ईरान की सड़कों पर गूंज रहा जनाक्रोश यह संकेत दे रहा है कि देश में हालात सामान्य नहीं हैं—और आने वाले दिन सरकार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।