दिल्ली मेट्रो की ‘मजेंटा’ बनेगी सबसे लंबी लाइन: इंद्रप्रस्थ-इंद्रलोक कॉरिडोर जुड़ते ही 89 किमी का होगा सफर, 65 स्टेशन और 21 इंटरचेंज

नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो के फेज-4 और फेज-5 (ए) के तहत राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इंद्रप्रस्थ-इंद्रलोक कॉरिडोर को अब ग्रीन लाइन के बजाय मजेंटा लाइन में शामिल कर दिया गया है। इस बदलाव के साथ ही मजेंटा लाइन बॉटनिकल गार्डन (नोएडा) से इंद्रलोक तक विस्तारित होगी और इसकी कुल लंबाई 39.271 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 89 किलोमीटर हो जाएगी। इसके साथ ही यह दिल्ली मेट्रो का सबसे लंबा कॉरिडोर बन जाएगा। पिंक लाइन का रिकॉर्ड टूटेगा वर्तमान में दिल्ली मेट्रो की सबसे लंबी लाइन पिंक लाइन है, जिसकी लंबाई 59.242 किलोमीटर है और विस्तार के बाद यह लगभग 71.5 किलोमीटर हो जाएगी। हालांकि, मजेंटा लाइन के विस्तार के बाद यह रिकॉर्ड टूट जाएगा और राजधानी को एक नया, तकनीकी रूप से अत्याधुनिक और व्यापक नेटवर्क मिलेगा। ग्रीन लाइन से हटकर मजेंटा में शामिल करीब 11.9 किलोमीटर लंबा इंद्रप्रस्थ-इंद्रलोक कॉरिडोर पहले ग्रीन लाइन (कीर्ति नगर/इंद्रलोक से ब्रिगेडियर होशियार सिंह) के विस्तार के रूप में प्रस्तावित था। लेकिन दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने इसे अब मजेंटा लाइन (बॉटनिकल गार्डन से जनकपुरी पश्चिम) के विस्तार में शामिल कर लिया है। पहले मजेंटा लाइन को जनकपुरी पश्चिम से आरके आश्रम तक बढ़ाने की योजना थी। हाल ही में केंद्र सरकार ने फेज-5 (ए) के तहत आरके आश्रम से इंद्रप्रस्थ तक कॉरिडोर को मंजूरी दी है, ताकि सेंट्रल विस्टा क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके। इसी क्रम में इंद्रप्रस्थ-इंद्रलोक खंड को भी मजेंटा लाइन का हिस्सा बना दिया गया है। इंद्रलोक अब इस विस्तारित लाइन का टर्मिनल स्टेशन होगा। 65 स्टेशन, 40 भूमिगत परियोजना पूरी होने के बाद बॉटनिकल गार्डन से इंद्रलोक तक मजेंटा लाइन पर कुल 65 स्टेशन होंगे, जिनमें से 40 स्टेशन भूमिगत होंगे। यह दिल्ली मेट्रो का सबसे अधिक भूमिगत स्टेशनों वाला कॉरिडोर होगा। साथ ही, इस लाइन पर कुल 21 इंटरचेंज स्टेशन होंगे — जो इसे नेटवर्क का सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त कॉरिडोर बनाएंगे। इंटरचेंज का मजबूत नेटवर्क वर्तमान में मजेंटा लाइन पर कालकाजी मंदिर, बॉटनिकल गार्डन, जनकपुरी पश्चिम और हौज खास चार प्रमुख इंटरचेंज स्टेशन हैं। फेज-4 और फेज-5 (ए) के कार्य पूर्ण होने के बाद 17 नए इंटरचेंज स्टेशन जुड़ेंगे। नए इंटरचेंज स्टेशनों में शामिल हैं: कालिंदी कुंज, चिराग दिल्ली, टर्मिनल-1 आईजीआई एयरपोर्ट, पीरागढ़ी, पीतमपुरा (मधुबन चौक), हैदरपुर बादली मोड़, मजलिस पार्क, आजादपुर, पुलबंगश, नबी करीम, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, शिवाजी स्टेडियम, केंद्रीय सचिवालय, इंद्रप्रस्थ, दिल्ली गेट, नई दिल्ली और इंद्रलोक। इनमें केंद्रीय सचिवालय, आजादपुर, नई दिल्ली और इंद्रलोक ट्रिपल इंटरचेंज स्टेशन होंगे, जहां तीन-तीन लाइनों का संपर्क मिलेगा। यात्रा होगी आसान और तेज डीएमआरसी के प्रधान कार्यकारी निदेशक (कॉरपोरेट संचार) अनुज दयाल के अनुसार, मजेंटा लाइन के व्यापक इंटरचेंज नेटवर्क से यात्रियों की यात्रा दूरी और समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे प्रमुख कॉरिडोरों पर यातायात दबाव घटेगा और एनसीआर क्षेत्र में सुरक्षित, निर्बाध एवं कुशल सार्वजनिक परिवहन को मजबूती मिलेगी। पूरी तरह स्वचालित कॉरिडोर बॉटनिकल गार्डन से जनकपुरी पश्चिम तक मजेंटा लाइन पहले से ही ड्राइवरलेस (स्वचालित) है। फेज-4 और फेज-5 (ए) के विस्तार के बाद बॉटनिकल गार्डन से इंद्रलोक तक पूरा 89 किलोमीटर का कॉरिडोर स्वचालित हो जाएगा। यह तकनीकी दृष्टि से भी एक बड़ी उपलब्धि होगी। इंजीनियरिंग की मिसाल मजेंटा लाइन पहले से ही दो महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धियों के लिए जानी जाती है। हैदरपुर बादली मोड़ स्टेशन — लगभग 28.362 मीटर ऊंचाई के साथ यह दिल्ली मेट्रो का सबसे ऊंचा एलिवेटेड स्टेशन है। हौज खास स्टेशन — लगभग 29 मीटर गहराई के साथ यह सबसे गहरा भूमिगत स्टेशन है। राजधानी को मिलेगा नया ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर मजेंटा लाइन का यह विस्तार न केवल दिल्ली बल्कि पूरे एनसीआर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। सेंट्रल विस्टा से लेकर पश्चिमी और उत्तरी दिल्ली तथा नोएडा तक निर्बाध कनेक्टिविटी मिलने से रोजाना लाखों यात्रियों को सीधा लाभ होगा। दिल्ली मेट्रो का यह नया अध्याय राजधानी की रफ्तार को और तेज करने वाला है — जहां दूरी घटेगी, समय बचेगा और सफर होगा अधिक सुगम।

BPSC में आवेदन का बदला नियम: अब OTR और प्रोफाइल क्रिएशन अनिवार्य, जानें पूरी प्रक्रिया स्टेप-बाय-स्टेप

पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा बदलाव किया है। अब आयोग की किसी भी भर्ती परीक्षा में आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों के लिए OTR (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) और प्रोफाइल क्रिएशन अनिवार्य कर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन दोनों प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना कोई भी उम्मीदवार किसी परीक्षा के लिए ऑनलाइन फॉर्म नहीं भर सकेगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अभ्यर्थियों के डेटा को सुरक्षित रखना और आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाना है, ताकि एक बार दर्ज की गई जानकारी भविष्य में दोबारा भरने की आवश्यकता न पड़े। क्या है OTR (वन टाइम रजिस्ट्रेशन)? OTR के माध्यम से अभ्यर्थी की मूल और आवश्यक जानकारी आयोग के ऑनलाइन पोर्टल पर सुरक्षित कर ली जाती है। इसके बाद उम्मीदवार BPSC की विभिन्न परीक्षाओं के लिए उसी प्रोफाइल से आवेदन कर सकते हैं। यदि कोई अभ्यर्थी पहली बार BPSC परीक्षा के लिए आवेदन कर रहा है, तो उसे पूरी प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी करनी होगी: 1. OTR (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) 2. प्रोफाइल क्रिएशन 3. नया आवेदन (New Application) आइए जानते हैं इन सभी चरणों की विस्तृत प्रक्रिया। चरण 1: OTR रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया  स्टेप 1: वेबसाइट पर जाएं सबसे पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट [https://bpsc.bihar.gov.in](https://bpsc.bihar.gov.in) पर जाएं। होम पेज पर उपलब्ध ऑनलाइन अप्लीकेशन विंडो पर क्लिक करें। यह आपको [https://bpsconline.bihar.gov.in](https://bpsconline.bihar.gov.in)पर ले जाएगा। यहां लॉगिन सेक्शन में जाकर New Registration पर क्लिक करें। स्टेप 2: ईमेल व मोबाइल वेरीफिकेशन वैध ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर दर्ज करें। *Send OTP पर क्लिक करें। प्राप्त OTP दर्ज कर Verify करें। स्टेप 3: पासवर्ड सेट करें एक मजबूत पासवर्ड बनाएं। पासवर्ड कन्फर्म करें।  Submit पर क्लिक करें। अब आपका अकाउंट सफलतापूर्वक बन जाएगा। स्टेप 4: बेसिक डिटेल्स भरें ध्यान दें: यह जानकारी 10वीं की मार्कशीट से पूरी तरह मेल खानी चाहिए।) पूरा नाम माता का नाम पिता का नाम जन्म तिथि लिंग (पुरुष/महिला/थर्ड जेंडर) हर फील्ड भरने के बाद Verify*बटन दबाएं। महत्वपूर्ण नोट: स्टेप-4 में भरी गई जानकारी भविष्य में बदली नहीं जा सकेगी। इसलिए पूरी सावधानी बरतें। स्टेप 5: पहचान पत्र व अन्य विवरण आधार / पैन कार्ड / ड्राइविंग लाइसेंस में से एक चुनें। आईडी नंबर दर्ज करें। इसके बाद भरें: 10वीं उत्तीर्ण वर्ष, रोल नंबर और बोर्ड 12वीं एवं ITI उत्तीर्ण वर्ष  ब्लड ग्रुप पसंदीदा खेल खिलाड़ी का नाम सभी जानकारी जांचने के बाद I Agree पर क्लिक करें और Register करें। इस प्रकार OTR प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और इसकी सूचना आपके ईमेल पर भेज दी जाएगी। चरण 2: प्रोफाइल क्रिएशन OTR पूरा होने के बाद अभ्यर्थी  [https://bpsconline.bihar.gov.in/candidate/login](https://bpsconline.bihar.gov.in/candidate/login) पर जाएं। ईमेल और पासवर्ड से लॉगिन करें। व्यक्तिगत जानकारी, स्थायी व वर्तमान पता, शैक्षणिक योग्यता, कार्य अनुभव आदि विवरण भरें। पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करें। अंत में प्रोफाइल को Lockकरें। यदि OTR के बाद प्रोफाइल टैब में कोई गलती रह जाती है, तो अभ्यर्थी प्रोफाइल को अनलॉक कर जानकारी अपडेट कर सकते हैं। महत्वपूर्ण निर्देश  एक से अधिक OTR रजिस्ट्रेशन की अनुमति नहीं है। गलत जानकारी देने पर भविष्य में आवेदन निरस्त किया जा सकता है। OTR और प्रोफाइल क्रिएशन के दौरान पूरी सावधानी बरतें। नई व्यवस्था का उद्देश्य आयोग का मानना है कि इस प्रणाली से आवेदन प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनेगी। साथ ही, हर बार फॉर्म भरने में समय की बचत होगी और डेटा की विश्वसनीयता भी सुनिश्चित होगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और समय रहते OTR व प्रोफाइल क्रिएशन की प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि भविष्य की भर्तियों में आवेदन करते समय किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ को मिली नई पहचान, खड़ा होना अनिवार्य; गृह मंत्रालय ने जारी की विस्तृत गाइडलाइंस

नई दिल्ली। राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर केंद्र सरकार ने नियमों में अहम बदलाव करते हुए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अब इसे भी राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ की तरह सरकारी कार्यक्रमों में बजाया और गाया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, ‘वंदे मातरम्’ के गायन या वादन के दौरान उपस्थित सभी श्रोताओं को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा। नई व्यवस्था के तहत जब ‘वंदे मातरम्’ को बैंड द्वारा बजाया जाएगा, तो उससे पहले ढोल की थाप (ड्रम रोल) दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि वहां मौजूद लोगों को पहले से जानकारी मिल सके कि राष्ट्र गीत बजाया जाने वाला है। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि पहले से कोई अन्य स्पष्ट संकेत मौजूद हो—जैसे राष्ट्र गीत से पहले बिगुल (फैनफेयर) बजाया जाना—तो ऐसी स्थिति में ड्रम रोल आवश्यक नहीं होगा। गृह मंत्रालय के निर्देशों में यह भी कहा गया है कि यदि किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ दोनों को एक साथ गाया या बजाया जाना हो, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद राष्ट्र गान ‘जन गण मन’ का वादन किया जाएगा। सरकार ने यह भी तय किया है कि आधिकारिक अवसरों पर ‘वंदे मातरम्’ का छह अंतरों वाला पूर्ण संस्करण, जिसकी अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है, बजाया या गाया जाएगा। यह व्यवस्था कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में लागू होगी। इनमें तिरंगा फहराने के अवसर, सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन पर, उनके भाषणों और देश के नाम संबोधन से पहले व बाद में, साथ ही राज्यपालों के आगमन और उनके संबोधन से पहले व बाद में ‘वंदे मातरम्’ के गायन या वादन का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इन नए निर्देशों से राष्ट्र गीत के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ेगी तथा राष्ट्रीय भावनाओं को और मजबूती मिलेगी।

AI की रफ्तार पड़ेगी आम जेब पर भारी! स्मार्टफोन, टीवी और लैपटॉप हो सकते हैं महंगे

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता दायरा जहां तकनीक की दुनिया में क्रांति ला रहा है, वहीं अब इसका असर आम लोगों की जेब पर भी साफ दिखने लगा है। इंडस्ट्री से आ रही ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, AI से जुड़े डेटा सेंटर्स और सर्वर्स में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की डिमांड तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा नतीजा यह हुआ है कि कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की सप्लाई घटती जा रही है, जिससे आने वाले समय में स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और लैपटॉप की कीमतों में इजाफा तय माना जा रहा है।  7 से 10 फीसदी तक बढ़ सकती हैं कीमतें रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यदि मेमोरी चिप्स की सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई, तो इस साल इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतों में 7 से 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मेमोरी चिप्स की लागत बढ़ने से कंपनियों का प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ रहा है, जिसका बोझ आखिरकार उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा। AI बना वजह, कंज्यूमर चिप्स पीछे AI टेक्नोलॉजी के तेजी से विस्तार के कारण डेटा सेंटर्स और सर्वर्स के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और सर्वर-ग्रेड DRAM की मांग लगातार बढ़ रही है। चिप बनाने वाली कंपनियां अब ज्यादा मुनाफे वाले इन प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही हैं। नतीजतन, स्मार्टफोन, टीवी और लैपटॉप में इस्तेमाल होने वाली कंज्यूमर-ग्रेड मेमोरी चिप्स का प्रोडक्शन घट गया है। 300% से 400% तक उछलीं मेमोरी चिप्स की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले कुछ समय से मेमोरी चिप्स की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। कुछ मामलों में इनकी कीमतें 300% से 400% तक बढ़ चुकी हैं। इसका सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर पड़ा है, जिससे कंपनियों के पास अपने प्रोडक्ट्स महंगे करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। बदल सकता है टीवी खरीदने का ट्रेंड टीवी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए एक्सपर्ट्स का मानना है कि उपभोक्ता अब 65 इंच जैसे बड़े स्क्रीन वाले मॉडल्स से दूरी बना सकते हैं। आने वाले समय में 55 इंच या उससे छोटे साइज के टीवी की डिमांड बढ़ सकती है। यानी, बड़े स्क्रीन टीवी का मौजूदा ट्रेंड धीरे-धीरे बदलने के संकेत दे रहा है। छोटे ब्रांड्स पर ज्यादा असर बड़े टेक ब्रांड्स मेमोरी चिप्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिससे सप्लायर्स पर दबाव और बढ़ जाता है। इसका नुकसान छोटे ब्रांड्स को उठाना पड़ता है, जिनके लिए चिप्स की उपलब्धता और भी मुश्किल हो जाती है। इसका असर पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार पर पड़ सकता है और प्रतिस्पर्धा असंतुलित हो सकती है। कुल मिलाकर, AI की तेज़ तरक्की जहां तकनीकी भविष्य को नया आकार दे रही है, वहीं इसका आर्थिक असर अब आम उपभोक्ताओं तक पहुंचता दिख रहा है। आने वाले महीनों में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अपनी जेब पर पड़ने वाले इस असर के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।

पीरागढ़ी रहस्य: कार में मिले तीन शव, ‘बाबा’ की मौजूदगी से उलझी जांच

नई दिल्ली। दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके में कार के अंदर दो पुरुष और एक महिला के शव मिलने से सनसनी फैल गई है। इस कथित सामूहिक आत्महत्या मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस ने अब एक ऐसे व्यक्ति की पहचान कर ली है, जो घटना से ठीक पहले मृतकों के साथ कार में बैठा था। सीसीटीवी फुटेज में यह व्यक्ति ‘बाबा’ के वेश में नजर आ रहा है, जिसे पुलिस इस रहस्यमय मामले की अहम कड़ी मान रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में साफ तौर पर देखा गया है कि यह ‘बाबा’ घटना वाले दिन मृतकों से मिला था और कुछ समय तक उसी कार में मौजूद रहा। फिलहाल पुलिस उसकी भूमिका की गहनता से जांच कर रही है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि फोरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस को रविवार अपराह्न करीब 3:50 बजे पुलिस नियंत्रण कक्ष में एक कॉल प्राप्त हुई, जिसमें सूचना दी गई कि पीरागढ़ी फ्लाईओवर के पास एक कार खड़ी है, जिसके दरवाजे बंद हैं और अंदर बैठे लोग किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां कार के अंदर तीनों लोग मृत पाए गए। जांच में सामने आया है कि पुलिस को सूचना मिलने से पहले कार करीब 50 मिनट तक उसी स्थान पर खड़ी थी। मृतकों की पहचान बापरोला निवासी रणधीर (76 वर्ष), शिव नरेश सिंह (47 वर्ष) और जहांगीरपुरी निवासी लक्ष्मी देवी (40 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, तीनों मूल रूप से बिहार के निवासी थे। प्रारंभिक जांच में संकेत मिल रहे हैं कि यह मामला आत्महत्या का हो सकता है। आशंका जताई जा रही है कि तीनों ने जहर मिला शीतल पेय पीकर जान दी। हालांकि पुलिस इस निष्कर्ष पर अभी पूरी तरह नहीं पहुंची है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ‘बाबा’ के वेश में दिखाई दे रहे व्यक्ति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसने मृतकों से क्यों मुलाकात की, कार में कितनी देर बैठा और क्या वह किसी साजिश या उकसावे से जुड़ा हुआ था। फिलहाल, पीरागढ़ी की यह घटना कई सवाल खड़े कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के नतीजों के बाद इस रहस्य से पर्दा उठ सकेगा और सच सामने आएगा।

फार्मर रजिस्ट्री में सुस्ती पर जिलाधिकारी सख्त, अंचल से प्रखंड तक बढ़ाई गई निगरानी

छपरा, 10 फरवरी। जिले में फार्मर रजिस्ट्री कार्य की धीमी प्रगति को लेकर जिलाधिकारी श्री वैभव श्रीवास्तव ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने अंचलवार फार्मर रजिस्ट्री की स्थिति का गहन मूल्यांकन किया और अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर असंतोष व्यक्त किया। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने एक-एक अंचल की प्रगति रिपोर्ट देखी और स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन भी कर्मियों का लॉगिन आईडी फार्मर रजिस्ट्री के लिए बनाया गया है, वे सभी फील्ड में सक्रिय रहते हुए शत-प्रतिशत रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के नाम से जमाबंदी कायम है, उनका फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से किया जाए। जिलाधिकारी ने बताया कि सभी अंचलों में जमाबंदी की सूची उपलब्ध है। इस सूची को संबंधित कर्मियों को उपलब्ध कराकर रैयत किसानों से एक-एक कर संपर्क किया जाए और फार्मर रजिस्ट्री पूरी कराई जाए। उन्होंने सभी अंचलाधिकारियों को फील्ड में उतरकर इस कार्य का सतत अनुश्रवण करने का निर्देश दिया। कृषि विभाग की भूमिका को रेखांकित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि विभाग के सभी पदाधिकारी एवं कर्मी लगातार फील्ड में रहकर फार्मर रजिस्ट्री की गहन मॉनिटरिंग करें। इसके साथ ही कृषि विभाग और जीविका के माध्यम से किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के लिए प्रोत्साहित करने के प्रयासों में भी तेजी लाने को कहा गया। उन्होंने सभी प्रखंडों के वरीय प्रभारी पदाधिकारियों को अपने-अपने प्रखंडों में फार्मर रजिस्ट्री कार्य की प्रगति की नियमित अंतराल पर समीक्षा और मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। वहीं जिला कृषि पदाधिकारी को प्रत्येक दो घंटे पर कार्य प्रगति की रिपोर्ट जिला प्रशासन को साझा करने को कहा गया। बैठक में अपर समाहर्त्ता, सभी प्रखंडों के वरीय प्रभारी पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी, सहायक निदेशक उद्यान, सभी अनुमंडल कृषि पदाधिकारी उपस्थित थे। जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी भी बैठक से जुड़े। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि फार्मर रजिस्ट्री सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिससे किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा। ऐसे में इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डीएम ने खुद दवा खाकर दिया भरोसा, सारण में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान का भव्य आग़ाज़

40.46 लाख लाभार्थियों को घर-घर खिलाई जाएगी फाइलेरिया से बचाव की दवा, 27 फरवरी तक चलेगा विशेष अभियान छपरा। सारण जिले में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की शुरुआत इस बार एक सशक्त और भरोसेमंद संदेश के साथ की गई। अभियान के उद्घाटन अवसर पर स्वास्थ्यकर्मी द्वारा दवा देने से पहले जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की लंबाई (हाइट) मापी गई और सभी निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए जिलाधिकारी ने स्वयं फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन किया। यह दृश्य आम जनता के लिए यह संदेश देने वाला था कि यह अभियान पूरी तरह सुरक्षित है और नियम प्रशासन व आम नागरिक—दोनों के लिए समान हैं। यह विशेष अभियान 10 फरवरी से 27 फरवरी तक जिले में संचालित किया जाएगा। इसके तहत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पात्र लाभार्थियों को अपने सामने फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाएंगी। जिलाधिकारी ने कहा कि अभियान की सफलता के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है और दवा सेवन की प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जा रहा है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे स्वास्थ्यकर्मियों के सामने ही दवा का सेवन करें और अपने परिवार को फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखें। 40.46 लाख लाभार्थी होंगे कवर, तीन तरह की दवाएं खिलाई जाएंगी जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि इस अभियान के तहत जिले में 40 लाख 46 हजार 610 लाभार्थियों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाई जाएगी। आशा कार्यकर्ता 4 दिनों तक घर-घर जाकर दवा खिलाएंगी, जबकि अंतिम तीन दिनों में बूथ लगाकर दवा सेवन कराया जाएगा। अभियान के दौरान लाभार्थियों को अल्बेंडाजोल, डीईसी और आइवरमेक्टिन—तीन प्रकार की दवाएं दी जाएंगी। इसके लिए जिले में 2198 टीमें, 4396 आशा कार्यकर्ता (ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर) और 217 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। कुल 9 लाख 52 हजार 143 घरों को इस अभियान के तहत लक्षित किया गया है। अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए 11 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष बूथ लगाकर स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने लक्षित लाभार्थियों को दवा का सेवन कराएंगे। जागरूकता रथ से गांव-गांव पहुंचेगा संदेश जन-जागरूकता को मजबूत करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने 20 जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये रथ जिले के सभी प्रखंडों में गांव-गांव जाकर ऑडियो संदेशों के माध्यम से फाइलेरिया से बचाव और दवा सेवन के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करेंगे। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी, डीपीएम अरविन्द कुमार, डीएमओ डॉ. भूपेंद्र कुमार, डीएस डॉ. आर.एन. तिवारी, डीपीसी रमेशचंद्र कुमार, डीसीएम ब्रजेंद्र कुमार, जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार सुधीर कुमार, अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद, वीडीसीओ मिनाक्षी, वीडीसीओ सुमन कुमारी, पिरामल फाउंडेशन एवं सीफार के प्रतिनिधि समेत कई अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित : सिविल सर्जन सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हैं। उच्च रक्तचाप, शुगर, गठिया या अन्य सामान्य बीमारियों से पीड़ित लोगों को भी ये दवाएं अवश्य लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि दवा सेवन के बाद यदि हल्का बुखार, चक्कर या मितली जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह घबराने की बात नहीं है—बल्कि यह संकेत है कि शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवी नष्ट हो रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक प्रखंड में रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात की गई है। खाली पेट दवा नहीं, कुछ वर्ग अभियान से बाहर यह अभियान लहलादपुर प्रखंड को छोड़कर जिले के सभी प्रखंडों में संचालित किया जाएगा। दवाओं का वितरण नहीं किया जाएगा, बल्कि स्वास्थ्यकर्मी लाभार्थियों को अपने सामने दवा का सेवन कराएंगे। दवा खाली पेट नहीं खानी है। 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और अत्यंत गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति इस अभियान से बाहर रखे गए हैं। फाइलेरिया (हाथीपांव रोग) मच्छरों के काटने से फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो शरीर के लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लगातार 5 वर्षों तक फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कर लेता है, तो उसे जीवनभर इस बीमारी से बचाव मिल सकता है।

छपरा में जिला स्तरीय नियोजन मेला 2026: 39 काउंटरों पर 4375 पदों के लिए आवेदन, दो दिव्यांग युवकों को पहली बार मिला रोजगार

छपरा, 09 फ़रवरी | स्थानीय संवाददाता: हिमालय राज,  युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में अवर प्रादेशिक नियोजनालय, छपरा (सारण) द्वारा शहर के राजेंद्र स्टेडियम में एक दिवसीय जिला स्तरीय नियोजन मेला 2026 का आयोजन किया गया। मेले में बड़ी संख्या में युवक-युवतियों ने भाग लिया और रोजगार के अवसरों को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। इस नियोजन मेले में कुल 39 काउंटर लगाए गए, जिनके माध्यम से 4375 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए। मेले में बाहरी राज्यों की एजेंसियों की भागीदारी अपेक्षाकृत अधिक रही। विशेष रूप से भागलपुर, पुणे, चेन्नई और मुंबई से आई लेबर नेट कंपनी ने सर्वाधिक 1500 पदों के लिए आवेदन प्राप्त किए। वहीं, सारण जिले के अनुमंडल मुख्यालय मढ़ौरा स्थित वेबटेक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सबसे कम, मात्र 05 पदों के लिए आवेदन लिया गया।  दिव्यांग युवकों के लिए मेला बना उम्मीद की किरण इस रोजगार मेले की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि इसमें दो दिव्यांग युवकों को पहली बार रोजगार का अवसर मिला। जलालपुर प्रखंड के गंभरिया गांव निवासी दिव्यांग अरविंद कुमार तथा सोनपुर से आए दिव्यांग अरविंद को मेले के दौरान ही नौकरी प्रदान की गई। दोनों को मार्केटिंग क्षेत्र में कार्य करने का अवसर मिला है। इस संबंध में उत्कर्ष मार्केटिंग के प्रतिनिधि उमेश सिंह ने बताया कि चयनित युवकों को प्रारंभिक रूप से 90 से 120 दिनों तक फील्ड में मार्केटिंग का कार्य करना होगा। इसके उपरांत उन्हें कार्यालय में बैठकर कार्य करने का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब रोजगार मेला के माध्यम से दो दिव्यांग युवकों को उनकी योग्यता के अनुरूप काम दिया गया है। युवाओं में दिखा उत्साह मेले में शामिल युवाओं ने इसे रोजगार की दिशा में एक सकारात्मक पहल बताया। बड़ी संख्या में युवाओं ने विभिन्न कंपनियों और एजेंसियों के काउंटरों पर जाकर आवेदन किया और साक्षात्कार प्रक्रिया में हिस्सा लिया। आयोजन से यह स्पष्ट हुआ कि ऐसे नियोजन मेले न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने का माध्यम बनते हैं, बल्कि दिव्यांगजनों के लिए भी नए अवसरों के द्वार खोलते हैं। कुल मिलाकर, जिला स्तरीय नियोजन मेला 2026 छपरा के युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाओं को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन साबित हुआ।

टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत-पाकिस्तान महामुकाबला तय, कोलंबो में 15 फरवरी को होगा हाई-वोल्टेज मैच

डिजिटल डेस्क : लंबे सियासी और कूटनीतिक ड्रामे के बाद आखिरकार क्रिकेट फैंस के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित मुकाबला अब तय कार्यक्रम के अनुसार खेला जाएगा। यह हाई-वोल्टेज मैच 15 फरवरी 2026 को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित होगा। इस अहम फैसले पर मुहर रविवार को लाहौर में हुई आईसीसी, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की त्रिपक्षीय बैठक के बाद लगी। प्रतिष्ठित क्रिकेट वेबसाइट क्रिकबज के मुताबिक भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर सहमति बन चुकी है और इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द की जाएगी। पाकिस्तानी मीडिया ने भी इस खबर की पुष्टि कर दी है, जिससे फैंस की उत्सुकता और बढ़ गई है। भारत से खेलने पर राजी हुआ पाकिस्तान दरअसल, 1 फरवरी को पाकिस्तानी सरकार ने अपनी टीम को भारत के खिलाफ खेलने से रोक दिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने स्थिति को संभालने के लिए 8 फरवरी को अपनी डेलिगेशन टीम लाहौर भेजी। इस अहम बैठक में पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी, आईसीसी उपाध्यक्ष इमरान ख्वाजा और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम शामिल हुए। बैठक के दौरान पाकिस्तान ने आईसीसी के सामने कुछ शर्तें रखीं, लेकिन आईसीसी ने सभी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद बातचीत का रास्ता खुला रहा और अंततः भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर सहमति बन गई। बीसीबी अध्यक्ष की अहम भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम की भूमिका अहम मानी जा रही है। उन्होंने पाकिस्तान से औपचारिक रूप से अनुरोध किया कि टी-20 विश्व कप 2026 में भारत के खिलाफ ग्रुप का पहला मुकाबला 15 फरवरी को श्रीलंका में खेला जाए। क्रिकबज के अनुसार अमीनुल इस्लाम ने कहा, “लाहौर यात्रा और हमारी चर्चाओं के बाद मैं पाकिस्तान से अनुरोध करता हूं कि पूरे क्रिकेट पारिस्थितिकी तंत्र के हित में 15 फरवरी को भारत के खिलाफ आईसीसी टी-20 विश्व कप का मैच खेले।” आईसीसी का बयान और बांग्लादेश को राहत आईसीसी ने अपनी आधिकारिक प्रेस रिलीज में यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा मामले को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर किसी भी तरह का वित्तीय, खेल संबंधी या प्रशासनिक दंड नहीं लगाया जाएगा। पाकिस्तान ने बांग्लादेश से जुड़े कुछ मुद्दे आईसीसी के सामने उठाए थे, लेकिन परिषद ने बीसीबी को पूरी तरह क्लीन चिट दे दी है। इसके साथ ही यह भी तय हुआ है कि बांग्लादेश, आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप 2031 से पहले आईसीसी के किसी बड़े आयोजन की मेजबानी करेगा। भारत-पाकिस्तान मुकाबला हमेशा से क्रिकेट का सबसे बड़ा आकर्षण रहा है। कोलंबो में होने वाला यह मैच न सिर्फ ग्रुप स्टेज का सबसे अहम मुकाबला होगा, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें भी इसी पर टिकी होंगी। अब सबकी नजरें आधिकारिक घोषणा और टिकटों पर टिकी हैं—क्योंकि क्रिकेट का सबसे बड़ा ‘महामुकाबला’ एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है।

प्रकाशन से पहले ही विवाद में घिरी जनरल नरवणे की आत्मकथा, ‘Four Stars of Destiny’ लीक मामले में दिल्ली पुलिस ने दर्ज किया केस

नई दिल्ली। देश के पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की बहुप्रतीक्षित और अब तक अप्रकाशित आत्मकथा ‘Four Stars of Destiny’ के ऑनलाइन लीक होने से सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़ा बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली पुलिस ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, यह आत्मकथा अभी आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई थी और इसके कुछ हिस्से सोशल मीडिया व अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गए। खास बात यह है कि किताब में वर्ष 2020 के गलवान घाटी संघर्ष, भारत-चीन सैन्य टकराव, और पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बने हालात से जुड़े कई संवेदनशील विवरण शामिल बताए जा रहे हैं। रक्षा मंत्रालय की मंजूरी थी लंबित जानकारी के अनुसार, आत्मकथा के प्रकाशन से पहले इसे रक्षा मंत्रालय की पूर्व स्वीकृति मिलना आवश्यक था, जो अभी लंबित थी। ऐसे में पुस्तक का लीक होना न केवल कॉपीराइट कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल खड़े करता है। कौन है लीक का जिम्मेदार? दिल्ली पुलिस की साइबर और इंटेलिजेंस यूनिट यह पता लगाने में जुटी है कि यह सामग्री किसने और किस माध्यम से सार्वजनिक की। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि कहीं यह लीक जानबूझकर तो नहीं किया गया, ताकि भारत-चीन संबंधों या सैन्य रणनीति को लेकर गलत संदेश फैलाया जा सके। सेना और सुरक्षा हलकों में हलचल सेना से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि किसी भी पूर्व सेनाध्यक्ष की आत्मकथा में रणनीतिक निर्णयों और सैन्य अभियानों का उल्लेख बेहद संवेदनशील माना जाता है। बिना मंजूरी ऐसे दस्तावेजों का सार्वजनिक होना सुरक्षा प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है। जनरल नरवणे का कार्यकाल और पुस्तक का महत्व जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारतीय थलसेना प्रमुख के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल के दौरान भारत ने न केवल गलवान जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना किया, बल्कि चीन के साथ सैन्य व कूटनीतिक स्तर पर कई अहम निर्णय भी लिए। ऐसे में उनकी आत्मकथा को सैन्य इतिहास के एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में देखा जा रहा था। फिलहाल, दिल्ली पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस लीक से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।