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हजारों यात्रियों की परेशानी पर DGCA सख्त, IndiGo पर ₹22.20 करोड़ का भारी जुर्माना

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo को दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द करने के मामले में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। नियामक ने यात्रियों को हुई व्यापक असुविधा और संचालन में गंभीर चूक को लेकर IndiGo पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। DGCA की ओर से की गई विस्तृत जांच में सामने आया कि दिसंबर 2025 के दौरान IndiGo ने 2500 से अधिक उड़ानें रद्द कीं, जिससे हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति केवल मौसम या बाहरी कारणों की वजह से नहीं बनी, बल्कि इसके पीछे एयरलाइन की खराब संचालन व्यवस्था, आंतरिक समन्वय की कमी और गंभीर प्रबंधन लापरवाही भी जिम्मेदार रही। नियामक का कहना है कि IndiGo समय रहते न तो पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था कर पाई और न ही यात्रियों को सही व स्पष्ट जानकारी दी गई। इससे यात्रियों को घंटों एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा, कई लोगों की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई और अनेक यात्रियों को होटल व अन्य सुविधाओं के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ा। DGCA ने अपने आदेश में कहा है कि किसी भी एयरलाइन से यह अपेक्षा की जाती है कि वह परिचालन संबंधी जोखिमों का पहले से आकलन करे और आपात स्थिति में यात्रियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे। IndiGo इस कसौटी पर विफल रही, इसलिए उस पर यह आर्थिक दंड लगाया गया है। सूत्रों के अनुसार, DGCA ने IndiGo को भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए ऑपरेशनल सिस्टम सुधारने, स्टाफ प्लानिंग मजबूत करने और यात्रियों से संवाद बेहतर करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि आगे किसी भी तरह की लापरवाही सामने आने पर और सख्त कार्रवाई की जा सकती है। यह जुर्माना न सिर्फ IndiGo के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, बल्कि पूरे विमानन क्षेत्र के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बिहार की धरती पर इतिहास रचा गया: पूर्वी चंपारण में स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग ‘सहस्त्रलिंगम’

पूर्वी चंपारण (बिहार)। बिहार ने एक बार फिर धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर अपनी वैश्विक पहचान दर्ज कराई है। पूर्वी चंपारण जिले में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में 17 जनवरी को दुनिया का सबसे बड़ा 33 फीट ऊंचा अखंड शिवलिंग ‘सहस्त्रलिंगम’ विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया। इस ऐतिहासिक स्थापना के साथ ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस विशेष रिपोर्ट में पढ़िए—यह शिवलिंग क्या है, इसे कहां और क्यों स्थापित किया गया, इसकी विशेषताएं क्या हैं और इससे जुड़े सभी अहम सवालों के जवाब।  क्या है ‘सहस्त्रलिंगम’? ‘सहस्त्रलिंगम’ का अर्थ है—हजारों शिवलिंगों से युक्त एक विशाल शिवलिंग। इस अखंड शिवलिंग की सतह पर भगवान शिव के हजारों सूक्ष्म स्वरूप अंकित हैं, जो इसे अद्वितीय बनाते हैं। यह शिवलिंग एक ही पत्थर से तराशा गया है, इसलिए इसे ‘अखंड’ कहा जा रहा है। कहां स्थापित हुआ है यह शिवलिंग? यह शिवलिंग बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है। यह वही स्थल है, जहां भविष्य में दुनिया का सबसे बड़ा रामायण मंदिर निर्माणाधीन है। शिवलिंग की ऊंचाई और विशेषताएं क्या हैं? * ऊंचाई: 33 फीट * स्वरूप: अखंड (एक ही पत्थर से निर्मित) * डिजाइन: शिवलिंग पर हजारों छोटे शिवलिंगों की नक्काशी * पहचान: दुनिया का सबसे ऊंचा अखंड शिवलिंग धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, 33 फीट की ऊंचाई भगवान शिव के 33 कोटि देवताओं से जुड़े आध्यात्मिक प्रतीक को भी दर्शाती है। स्थापना कब और कैसे हुई? 17 जनवरी को वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के बीच शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साधु-संत, धार्मिक विद्वान और श्रद्धालु उपस्थित रहे। इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है? यह शिवलिंग न केवल आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि— * बिहार को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर मजबूत स्थान दिलाएगा * विराट रामायण मंदिर परियोजना को नई पहचान देगा * रोजगार और स्थानीय विकास को बढ़ावा देगा धार्मिक मान्यता है कि सहस्त्रलिंगम के दर्शन से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। क्या यह आम श्रद्धालुओं के लिए खुला है? जी हां, शिवलिंग स्थापना के बाद अब श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन कर सकते हैं। आने वाले समय में यहां विशेष पर्वों पर भव्य आयोजन और शिवरात्रि जैसे महापर्वों पर विशाल धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बिहार के लिए क्यों है यह ऐतिहासिक? अब तक बिहार को बौद्ध और जैन तीर्थों के लिए जाना जाता था, लेकिन सहस्त्रलिंगम की स्थापना के बाद यह राज्य शैव परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। यह उपलब्धि न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक गर्व का विषय भी है। पूर्वी चंपारण में स्थापित ‘सहस्त्रलिंगम’ न सिर्फ एक धार्मिक संरचना है, बल्कि यह बिहार की आध्यात्मिक विरासत, शिल्पकला और आस्था का भव्य प्रतीक बनकर उभरा है। आने वाले वर्षों में यह स्थल देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के शिवभक्तों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने की पूरी संभावना रखता है।

“बीजेपी पेशेवर राजनीति करती है, विपक्ष को भी खुद को मजबूत करना होगा” — ओडिशा दौरे पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान

भुवनेश्वर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा आज की राजनीति में “पेशेवर तरीके” से काम कर रही है, जबकि विपक्षी दलों को अभी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर भाजपा को हराना है तो अन्य राजनीतिक दलों को भी अपनी रणनीति, संगठन और जनसंपर्क को मजबूत करना होगा। ओडिशा दौरे पर पहुंचे अखिलेश यादव ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भाजपा सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि लगातार जमीन पर काम करती है। उन्होंने कहा, “बीजेपी की राजनीति प्रोफेशनल है। विपक्षी दलों को भी समय के साथ खुद को अपडेट करना होगा, तभी लोकतंत्र मजबूत रहेगा।” पीडीए को मजबूत करने पर जोर अखिलेश यादव ने ओडिशा में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) गठबंधन को मजबूत करने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पीडीए ही सामाजिक न्याय की असली ताकत है और यही वर्ग महंगाई, बेरोजगारी और असमानता से सबसे ज्यादा प्रभावित है। उन्होंने कहा, “अगर हम पीडीए को एकजुट कर पाते हैं, तो भाजपा की राजनीति को चुनौती दी जा सकती है। ओडिशा सहित पूरे देश में सामाजिक न्याय की राजनीति को और धार देने की जरूरत है।”  नवीन पटनायक से मुलाकात अपने दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) प्रमुख नवीन पटनायक से भी मुलाकात की। इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। हालांकि बैठक के बाद किसी संभावित गठबंधन पर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया गया, लेकिन दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय राजनीति और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।  भाजपा पर परोक्ष हमला अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए भाजपा पर आरोप लगाया कि वह सरकारी संसाधनों और एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीति के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्षी दलों का मजबूत और संगठित होना जरूरी है। आगामी राजनीति के संकेत राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान सिर्फ ओडिशा तक सीमित नहीं है, बल्कि 2029 के आम चुनावों से पहले विपक्ष को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा है। पीडीए की बात कर उन्होंने साफ संकेत दे दिया है कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय की राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। कुल मिलाकर, अखिलेश यादव का यह बयान विपक्षी राजनीति को नए सिरे से सोचने और रणनीति बदलने का संदेश देता है, जिसमें भाजपा की “पेशेवर राजनीति” का मुकाबला करने की बात खुलकर कही गई है।

बीएमसी चुनाव में महायुति की बड़ी जीत, भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी; एमएनएस का प्रदर्शन निराशाजनक

मुंबई।मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के 227 वार्डों के चुनाव परिणाम पूरी तरह घोषित हो चुके हैं। देश की सबसे अमीर नगर निकाय के इस चुनाव में भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के गठबंधन महायुति ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए सत्ता की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिया है। गठबंधन ने कुल 118 वार्डों में जीत दर्ज की, जो बहुमत के आंकड़े 114 से कहीं अधिक है। चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। यह बीएमसी चुनावों के इतिहास में भाजपा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पार्टी ने शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ और संगठनात्मक मजबूती का स्पष्ट प्रदर्शन किया है। वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी गठबंधन सहयोगी के रूप में अहम योगदान दिया। विपक्ष को करारा झटका इन चुनावों में विपक्षी दलों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। लंबे समय से बीएमसी पर वर्चस्व रखने वाली उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना का प्रदर्शन कमजोर रहा, जबकि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) भी प्रभावी चुनौती पेश करने में नाकाम रहीं। सबसे चौंकाने वाला परिणाम राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) को लेकर सामने आया। एमएनएस न सिर्फ सीमित सीटों पर सिमट गई, बल्कि उसका प्रदर्शन एआईएमआईएम (असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी) से भी पीछे रहा। यह नतीजा मुंबई की राजनीति में बदलते समीकरणों और मतदाताओं की प्राथमिकताओं में आए बदलाव को दर्शाता है। शहरी विकास बना प्रमुख मुद्दा विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में बुनियादी सुविधाएं, सड़कें, जल निकासी, साफ-सफाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे मतदाताओं के लिए निर्णायक रहे। महायुति ने अपने प्रचार में विकास, स्थिर प्रशासन और “डबल इंजन सरकार” के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसका सीधा लाभ गठबंधन को मिला। स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब बीएमसी में महायुति का महापौर बनना लगभग तय माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मुंबई के प्रशासन और विकास कार्यों को लेकर नई नीतियों और तेज फैसलों की शुरुआत होगी। कुल मिलाकर, बीएमसी चुनाव परिणामों ने न सिर्फ मुंबई बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी नए संकेत दे दिए हैं, जहां सत्ताधारी गठबंधन मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है और विपक्ष को आत्ममंथन की जरूरत महसूस हो रही है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का दमदार Q3 प्रदर्शन: मुनाफा 18,645 करोड़ रुपये, कुल आय 2.65 लाख करोड़ रुपये

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में 18,645 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है, जबकि कुल आय 2.65 लाख करोड़ रुपये रही। नतीजों से यह साफ है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात के बावजूद रिलायंस के प्रमुख बिज़नेस सेगमेंट्स ने स्थिर और मजबूत प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA 6.1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 50,932 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस बढ़ोतरी में डिजिटल सर्विसेज़ और ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) सेगमेंट की अहम भूमिका रही। इन दोनों क्षेत्रों में बेहतर कमाई ने अपस्ट्रीम ऑयल और गैस बिज़नेस की कमजोरी के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया। डिजिटल बिज़नेस की बात करें तो रिलायंस जियो और इससे जुड़ी सेवाओं में लगातार बढ़ती ग्राहक संख्या और डेटा खपत ने आय को मजबूती दी। वहीं, O2C सेगमेंट में परिचालन दक्षता और बेहतर मार्जिन ने EBITDA को सपोर्ट किया। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कंपनी के अपस्ट्रीम बिज़नेस पर देखने को मिला, लेकिन विविध बिज़नेस मॉडल के चलते इसका कुल नतीजों पर सीमित प्रभाव पड़ा। कुल मिलाकर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के Q3 नतीजे यह दर्शाते हैं कि कंपनी का फोकस डिजिटल, रिटेल और O2C जैसे मजबूत स्तंभों पर बना हुआ है, जो कठिन बाजार परिस्थितियों में भी उसे स्थिर ग्रोथ की राह पर बनाए हुए हैं।

“राम मंदिर को लेकर संत-महंतों की सियासत तेज, राहुल गांधी की अयोध्या यात्रा पर शंकराचार्य का तीखा बयान”

अयोध्या। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संभावित अयोध्या दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर साधु-संतों तक बहस तेज हो गई है। इसी बीच ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के एक बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर राहुल गांधी अयोध्या पहुंचते भी हैं, तो उन्हें राम मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे हिंदू नहीं हैं। दरअसल, हाल के दिनों में यह चर्चा जोरों पर है कि राहुल गांधी राम मंदिर दर्शन के लिए अयोध्या जा सकते हैं। जैसे ही यह खबर सामने आई, वैसे ही धार्मिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ संतों ने इसे व्यक्तिगत आस्था का विषय बताया, तो वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे धार्मिक पहचान से जोड़ते हुए कड़ा रुख अपनाया। शंकराचार्य का बयान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम मंदिर हिंदू आस्था का केंद्र है और इसमें प्रवेश के लिए व्यक्ति का हिंदू होना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी स्वयं को हिंदू मानने की स्पष्ट घोषणा नहीं करते, ऐसे में उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। शंकराचार्य का कहना है कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं, बल्कि धार्मिक मर्यादा और परंपरा का है। राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया शंकराचार्य के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि राहुल गांधी का मंदिर जाना उनकी निजी आस्था का विषय है और किसी को भी उनकी धार्मिक पहचान पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। वहीं, विरोधी दल इसे कांग्रेस की “सॉफ्ट हिंदुत्व” राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। अयोध्या की पवित्रता और सियासत अयोध्या लंबे समय से धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहसों का केंद्र रही है। राम मंदिर निर्माण के बाद यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है। ऐसे में किसी बड़े राजनीतिक नेता की यात्रा और उस पर दिए गए बयान स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाते हैं। फिलहाल राहुल गांधी की अयोध्या यात्रा को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन उससे पहले ही शंकराचार्य का यह बयान देशभर में नई बहस छेड़ चुका है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और धर्म के बीच खींचतान किस दिशा में जाती है।

देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मकर संक्रांति का पर्व, गोरखपुर में सीएम योगी ने चढ़ाई खिचड़ी, संगम-घाटों पर श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

न्यूज डेस्क: देशभर में आज मकर संक्रांति का पावन पर्व पूरे श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही इस महापर्व की शुरुआत हुई, जिसे लेकर उत्तर भारत सहित कई राज्यों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और स्नान का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर महायोगी गुरु गोरखनाथ को परंपरागत रूप से खिचड़ी अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने लोकमंगल और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व सामाजिक समरसता, सेवा और सनातन परंपराओं का प्रतीक है। वहीं प्रयागराज के पावन संगम तट पर तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। घना कोहरा और कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगाते नजर आए। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। काशी नगरी वाराणसी के गंगा घाटों पर भी मकर संक्रांति का विशेष उल्लास देखने को मिला। दशाश्वमेध, अस्सी और अन्य प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान-पुण्य किया। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हुई और हर-हर महादेव के जयकारों से घाट गूंज उठे। उल्लेखनीय है कि मकर संक्रांति को दान, स्नान और सूर्य उपासना का महापर्व माना जाता है। इस दिन खिचड़ी, तिल, गुड़ और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन आस्था और संस्कृति का भाव हर जगह समान रूप से दिखाई दे रहा है।

बीसीबी बनाम खिलाड़ी: निदेशक के बयान से भड़के बांग्लादेशी क्रिकेटर्स, T20 वर्ल्ड कप के बहिष्कार की चेतावनी

ढाका। बांग्लादेश क्रिकेट में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के निदेशक नजमुल इस्लाम के एक विवादित बयान ने राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों को नाराज़ कर दिया है। खिलाड़ियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि नजमुल इस्लाम अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वे न केवल आगामी T20 वर्ल्ड कप बल्कि सभी तरह के क्रिकेट का बहिष्कार करेंगे। दरअसल, हाल ही में बीसीबी निदेशक नजमुल इस्लाम ने सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता और प्रोफेशनलिज़्म पर सवाल उठाए थे। उनके इस बयान को खिलाड़ियों ने अपमानजनक और मनोबल तोड़ने वाला बताया। बयान सामने आते ही ड्रेसिंग रूम में असंतोष फैल गया और सीनियर खिलाड़ियों ने एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाया। बीसीबी ने झाड़ा पल्ला विवाद बढ़ने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर नजमुल इस्लाम की टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि निदेशक के व्यक्तिगत विचार बीसीबी की आधिकारिक सोच का प्रतिनिधित्व नहीं करते। हालांकि, बोर्ड की इस सफाई से खिलाड़ी संतुष्ट नजर नहीं आए। खिलाड़ियों की दो टूक चेतावनी राष्ट्रीय खिलाड़ियों का कहना है कि केवल बयान से दूरी बनाना काफी नहीं है। उनका आरोप है कि नजमुल इस्लाम लगातार खिलाड़ियों को निशाना बनाते रहे हैं और इससे टीम का माहौल खराब हुआ है। खिलाड़ियों ने साफ कहा है कि जब तक निदेशक इस्तीफा नहीं देते, वे किसी भी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय मैच में हिस्सा नहीं लेंगे। T20 वर्ल्ड कप पर संकट इस विवाद का सीधा असर आगामी T20 वर्ल्ड कप पर पड़ सकता है। यदि खिलाड़ियों ने अपना फैसला नहीं बदला तो बांग्लादेश की भागीदारी ही खतरे में पड़ सकती है। क्रिकेट प्रशंसक और पूर्व खिलाड़ी भी इस विवाद पर नजर बनाए हुए हैं और जल्द समाधान की उम्मीद जता रहे हैं। क्या निकलेगा समाधान? फिलहाल, बीसीबी के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बन गई है। एक तरफ खिलाड़ियों की एकजुटता है, तो दूसरी ओर बोर्ड की साख और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बोर्ड इस संकट से कैसे निपटता है और क्या बांग्लादेशी क्रिकेट समय रहते इस विवाद से बाहर निकल पाता है। खेल जगत में इस घटनाक्रम को बांग्लादेश क्रिकेट के इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक टकरावों में से एक माना जा रहा है।

दही-चूड़ा भोज में सियासी तंज: तेजस्वी की गैरमौजूदगी पर तेज प्रताप बोले—‘जयचंदों से घिरे हैं’

पटना। मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज एक बार फिर राजनीतिक बयानबाज़ी का मंच बन गया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेज प्रताप यादव के भोज में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई। इस मौके पर तेज प्रताप यादव ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी “जयचंदों से घिरे हुए हैं”, इसलिए कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाए। तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने तेजस्वी यादव का रात 9 बजे तक इंतजार किया, लेकिन वह नहीं आए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ लोग हैं जो उन्हें घेरकर गलत सलाह दे रहे हैं और वही उनकी अनुपस्थिति का कारण हो सकते हैं। तेज प्रताप के इस बयान को पार्टी के अंदरूनी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। भोज के दौरान तेज प्रताप यादव ने अपने पिता और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि “हमारी पार्टी असली है, तभी मेरे पिताजी खुद मुझे आशीर्वाद देने आए।” लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी को उन्होंने अपने पक्ष में एक मजबूत संकेत बताया और कहा कि परिवार और पार्टी के मूल सिद्धांत उनके साथ हैं। तेज प्रताप ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष पार्टी और विचारधारा के लिए है, किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं। हालांकि, तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी और उस पर आया यह बयान राजद की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ले आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मकर संक्रांति जैसे सामाजिक अवसर पर दिए गए इस तरह के बयान केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि सियासी संदेश भी देते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच यह दूरी केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहती है या पार्टी की राजनीति पर इसका असर और गहराता है।

ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण, भारतीय नागरिकों को तुरंत सतर्क रहने की चेतावनी

विदेश मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी, गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील नई दिल्ली/तेहरान: ईरान में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत सरकार ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों (PIO) के लिए अहम एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं, ऐसे में सभी भारतीय नागरिक अत्यधिक सतर्कता बरतें और अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। एडवाइजरी में क्या कहा गया है? विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, “ईरान में रह रहे सभी भारतीय नागरिक और PIO अत्यधिक सावधानी बरतें। किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शन, रैलियों या भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें। स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।” इसके साथ ही गैर-जरूरी यात्रा से बचने और जहां संभव हो सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि भारतीय दूतावास के संपर्क में लगातार बने रहें। ईरान में कैसे हैं हालात? ईरान में हालात तेजी से गंभीर होते जा रहे हैं। विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में हिंसा और अस्थिरता के चलते अब तक हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। बताया जा रहा है कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस देश में आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अमेरिकी हमले की आशंका से बढ़ी चिंता इस बीच ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों की खबरों ने हालात को और ज्यादा विस्फोटक बना दिया है। ऐसे में विदेशी नागरिकों, खासकर भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारतीय दूतावास की अपील ईरान में मौजूद भारतीय दूतावास ने भी भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत दूतावास से संपर्क करें, अपनी जानकारी अपडेट रखें और अफवाहों से दूर रहें। ईरान में मौजूदा हालात को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह सतर्क है। विदेश मंत्रालय की यह एडवाइजरी साफ संकेत देती है कि स्थिति गंभीर बनी हुई है और किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है। भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे संयम, सतर्कता और सरकारी निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।