बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन: BNP की ऐतिहासिक वापसी, दो दशक बाद फिर बनेगी सरकार

ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) ने महत्वपूर्ण आम चुनावों में स्पष्ट बहुमत हासिल कर करीब 20 वर्षों बाद सत्ता में वापसी का रास्ता साफ कर लिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, BNP और उसके सहयोगियों (BNP+) ने 211 सीटों पर जीत दर्ज की है। गुरुवार देर रात तक चली मतगणना के बाद तस्वीर लगभग साफ हो गई कि देश की अगली सरकार BNP के नेतृत्व में बनेगी। अवामी लीग की अनुपस्थिति में बदला राजनीतिक समीकरण अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद बनी अंतरिम सरकार ने इन चुनावों का आयोजन कराया। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग इस चुनावी मुकाबले में शामिल नहीं थी, जिससे राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए। इस बार का चुनाव मुख्य रूप से BNP और उसके पूर्व सहयोगी जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधा मुकाबला बन गया। हालांकि जमात-ए-इस्लामी और अन्य कट्टरपंथी दलों को अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिल सका। खालिदा जिया की विरासत और BNP की वापसी BNP की यह जीत पार्टी की दिवंगत नेता और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया की राजनीतिक विरासत की बड़ी पुनर्स्थापना मानी जा रही है। करीब दो दशकों तक सत्ता से दूर रहने के बाद BNP ने संगठनात्मक मजबूती और विपक्षी एकजुटता के सहारे यह सफलता हासिल की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अवामी लीग की गैर-मौजूदगी ने चुनाव को द्विध्रुवीय बना दिया, जिससे BNP को स्पष्ट बढ़त लेने का अवसर मिला। मतदाताओं का संदेश: स्थिरता और बदलाव की चाह इन चुनावों को बांग्लादेश में स्थिरता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंतरिम सरकार के कार्यकाल के बाद हुए इस मतदान में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों के अनुसार, जनता ने आर्थिक चुनौतियों, राजनीतिक अस्थिरता और शासन के मुद्दों पर स्पष्ट जनादेश दिया है। कट्टरपंथी ताकतों को सीमित समर्थन मिलना इस बात का संकेत है कि मतदाता मध्यमार्गी और मुख्यधारा की राजनीति को प्राथमिकता देना चाहते हैं। BNP के सामने अब कई अहम चुनौतियां होंगी—  राजनीतिक स्थिरता कायम रखना अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संतुलित करना आर्थिक सुधारों को गति देना  विपक्षी दलों के साथ संवाद स्थापित करना दो दशक बाद सत्ता में लौट रही BNP के लिए यह अवसर भी है और परीक्षा भी। आने वाले दिनों में नई सरकार की नीतियां यह तय करेंगी कि बांग्लादेश किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

ईशान–हार्दिक की दमदार पारी, इरास्मस की चुनौती के बावजूद भारत की 93 रन से बड़ी जीत

पावरप्ले में रिकॉर्डतोड़ शुरुआत, आखिरी ओवरों में नामीबिया की वापसी; अब 15 फरवरी को पाकिस्तान से महामुकाबला नई दिल्ली। टी-20 विश्व कप के रोमांचक मुकाबले में भारतीय टीम ने नामीबिया को 93 रन से हराकर टूर्नामेंट में अपनी चौथी 200+ स्कोर वाली जीत दर्ज की। हालांकि शुरुआत जिस अंदाज़ में हुई थी, उससे लग रहा था कि भारत श्रीलंका के 260 रन के विश्व रिकॉर्ड को भी चुनौती दे सकता है, लेकिन अंतिम ओवरों में नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस की शानदार गेंदबाजी ने भारत को 209/9 के स्कोर पर रोक दिया। अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में टॉस जीतकर नामीबिया ने पहले गेंदबाजी का फैसला किया। भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआती ओवरों में ही आक्रामक तेवर दिखाते हुए दर्शकों को रोमांचित कर दिया। पावरप्ले में तूफानी आगाज़ ईशान किशन और संजू सैमसन ने पहले ही ओवर से आक्रमण शुरू कर दिया। संजू ने सिर्फ 8 गेंदों में 22 रन बनाकर तेज शुरुआत दी, हालांकि वे दूसरे ओवर में आउट हो गए। इसके बाद ईशान किशन और तिलक वर्मा ने नामीबिया के गेंदबाजों पर चौकों-छक्कों की बरसात कर दी। दोनों ने मिलकर पावरप्ले के छह ओवरों में 86 रन जोड़ डाले — जो टी-20 विश्व कप इतिहास में छह ओवर में तीसरा सबसे बड़ा स्कोर है। स्टेडियम में मौजूद दर्शक हर शॉट पर झूम उठे। 20 गेंदों में ईशान की फिफ्टी ईशान किशन ने सिर्फ 20 गेंदों में अर्धशतक जड़कर टी-20 विश्व कप में भारतीय बल्लेबाज द्वारा संयुक्त चौथा सबसे तेज पचासा पूरा किया। उन्होंने 23 गेंदों में 61 रन बनाए। सातवें ओवर में ही भारत ने 100 रन का आंकड़ा पार कर लिया था। लेकिन आठवें ओवर में ईशान के आउट होते ही भारत की रफ्तार पर ब्रेक लग गया। तिलक वर्मा (25) और कप्तान सूर्य (13) भी जल्द पवेलियन लौट गए, जिससे नामीबिया ने मैच में वापसी की। हार्दिक–दुबे की साझेदारी से संभली पारी मध्यक्रम में जब विकेट गिर रहे थे, तब हार्दिक पांड्या ने जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने 24 गेंदों में अर्धशतक पूरा करते हुए 52 रन बनाए। शिवम दुबे (23) के साथ पांचवें विकेट के लिए 81 रन की अहम साझेदारी की। हालांकि पांड्या के आउट होते ही भारत का निचला क्रम बिखर गया। अंतिम चार ओवरों में टीम केवल 23 रन ही जोड़ सकी और पांच विकेट गंवा बैठी। रिंकू सिंह (1), अर्शदीप सिंह (2) और वरुण चक्रवर्ती (1*) ज्यादा योगदान नहीं दे सके। भारत निर्धारित 20 ओवर में 9 विकेट पर 209 रन ही बना पाया। इरास्मस की कप्तानी पारी नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस ने गेंद से कमाल करते हुए भारतीय लोअर ऑर्डर को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने अपने चार ओवर में मात्र 20 रन देकर 4 बड़े विकेट चटकाए — ईशान किशन, तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या और अक्षर पटेल। टी-20 विश्व कप में चार विकेट लेने वाले वे चौथे कप्तान बने। उनकी चतुराई भरी गेंदबाजी और लाइन-लेंथ ने भारत को संभावित बड़े स्कोर से रोक दिया। नामीबिया 116 पर ढेर 209 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए नामीबिया की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और 18.2 ओवर में 116 रन पर सिमट गई। भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर मुकाबले को एकतरफा बना दिया। भारत ने यह मैच 93 रन से जीतकर अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत कर ली। अब महामुकाबले की बारी इस जीत के साथ भारत का आत्मविश्वास ऊंचा है, लेकिन असली परीक्षा 15 फरवरी को कोलंबो में पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले महामुकाबले में होगी। क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें अब इस हाई-वोल्टेज मैच पर टिक गई हैं। भारत ने भले ही यह मुकाबला बड़े अंतर से जीत लिया हो, लेकिन अंतिम ओवरों में रन गति का धीमा पड़ना टीम के लिए चिंता का विषय रहेगा। आने वाले बड़े मुकाबलों में भारत को अपनी इस कमजोरी को दूर करना होगा।

हर दूसरा भारतीय अभिभावक चिंतित: इंटरनेट पर गलत कंटेंट और साइबर बुलिंग से बच्चों का बचपन खतरे में

नई दिल्ली। डिजिटल दौर में इंटरनेट ने जहां बच्चों के लिए ज्ञान और मनोरंजन के अनगिनत दरवाजे खोले हैं, वहीं इसके बढ़ते दुष्प्रभाव अब अभिभावकों के लिए चिंता का कारण बनते जा रहे हैं। हाल ही में लोकल सर्कल्स द्वारा किए गए एक सर्वे में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि देश के 300 से अधिक शहरों में हर दूसरा अभिभावक मानता है कि उनके बच्चों ने इंटरनेट पर या तो अनुचित कंटेंट देखा है या वे साइबर बुलिंग का शिकार हुए हैं। यह स्थिति न केवल सामाजिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी गंभीर संकेत दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट पर अनियंत्रित और असुरक्षित एक्सपोजर बच्चों के व्यक्तित्व और व्यवहार पर गहरा असर डाल सकता है। कम उम्र में गलत कंटेंट का असर बच्चों का दिमाग अत्यंत संवेदनशील होता है। जब वे अपनी उम्र से पहले हिंसक, अश्लील या अनुचित सामग्री देखते हैं, तो उनका मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। कई बार वे वास्तविक और काल्पनिक दुनिया के बीच अंतर नहीं कर पाते, जिससे उनके सोचने और समझने की क्षमता पर असर पड़ता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि हिंसक वीडियो गेम्स और कंटेंट बच्चों में संवेदनहीनता बढ़ा सकते हैं। बार-बार ऐसे दृश्य देखने से उनके भीतर हिंसा को सामान्य मानने की प्रवृत्ति विकसित हो सकती है। व्यवहार में बढ़ती आक्रामकता सर्वे में यह भी सामने आया है कि कई अभिभावकों ने बच्चों के व्यवहार में पहले की तुलना में अधिक गुस्सा और चिड़चिड़ापन देखा है। इंटरनेट पर मौजूद हिंसक गेम्स और वीडियो बच्चों के मस्तिष्क पर ऐसा प्रभाव डाल सकते हैं कि वे छोटी-छोटी बातों पर प्रतिक्रिया देने लगते हैं।  बात-बात पर गुस्सा करना माता-पिता की बात न मानना स्कूल में अनुशासनहीन व्यवहार भावनाओं पर नियंत्रण में कमी ये संकेत बताते हैं कि डिजिटल एक्सपोजर का असर वास्तविक जीवन में दिखाई देने लगा है। साइबर बुलिंग: अदृश्य लेकिन गहरा घाव साइबर बुलिंग आज के समय की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक बन चुकी है। सोशल मीडिया, गेमिंग प्लेटफॉर्म या मैसेजिंग ऐप्स के जरिए बच्चों को अपमानित करना, धमकाना या उनका मजाक उड़ाना आम होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में बच्चे अक्सर खुद को दोषी मानने लगते हैं। वे डरते हैं कि अगर उन्होंने किसी को बताया तो स्थिति और बिगड़ जाएगी। परिणामस्वरूप वे चुपचाप मानसिक पीड़ा सहते रहते हैं। सामाजिक अलगाव और आत्मविश्वास में गिरावट ऑनलाइन ट्रोलिंग या बुलिंग का शिकार होने वाले बच्चे धीरे-धीरे सामाजिक गतिविधियों से दूर होने लगते हैं। दोस्तों से मिलना-जुलना कम कर देना  परिवार से दूरी बनाना कमरे में अकेले समय बिताना  स्कूल जाने से बचना हीन भावना और आत्मविश्वास की कमी उनके व्यक्तित्व विकास को प्रभावित करती है। लंबे समय में यह सामाजिक अलगाव गंभीर मानसिक समस्याओं का रूप ले सकता है। मानसिक तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन का खतरा ऑनलाइन धमकी या गलत कंटेंट के निरंतर संपर्क में रहने से बच्चों में मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं— नींद न आना भूख में कमी पढ़ाई में ध्यान न लगना अचानक मूड बदलना अत्यधिक चुप्पी या रोना यदि समय रहते इन संकेतों को नहीं पहचाना गया तो बच्चे एंग्जायटी या डिप्रेशन की ओर बढ़ सकते हैं। अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनौती से निपटने के लिए केवल तकनीकी उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि संवाद और समझ भी जरूरी है। बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करें उनके ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें पैरेंटल कंट्रोल और सुरक्षित ब्राउजिंग टूल्स का इस्तेमाल करें बच्चों को डिजिटल एटीकेट और ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जागरूक करें किसी भी असामान्य व्यवहार पर तुरंत ध्यान दें इंटरनेट आधुनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, लेकिन बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल माहौल सुनिश्चित करना समय की मांग है। सर्वे के आंकड़े यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में बच्चों का मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। अभिभावकों, शिक्षकों और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक बच्चों के विकास का साधन बने, बाधा नहीं।

“वादों से मुकरना पड़ा भारी: राजपाल यादव की जमानत पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, 16 फरवरी को अगली सुनवाई”

नई दिल्ली, गुरुवार। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की जमानत याचिका पर गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत का रुख सख्त नजर आया। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कहा कि अभिनेता को जेल इसलिए जाना पड़ा क्योंकि उन्होंने अदालत के समक्ष किए गए अपने वादों को पूरा नहीं किया। यह याचिका परिवार में विवाह समारोह के आधार पर अंतरिम जमानत की मांग को लेकर दायर की गई थी। हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी की कि राजपाल यादव ने पूर्व में कई मौकों पर भुगतान करने और अपने दायित्वों को निभाने का आश्वासन दिया था, लेकिन वे ऐसा करने में विफल रहे। “दो दर्जन से अधिक मौके दिए गए” अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि कम से कम दो दर्जन अवसरों पर राजपाल यादव ने अदालत में बयान दिया कि वे अपने वादे को पूरा करेंगे और संबंधित भुगतान करेंगे। इसके बावजूद, उन्होंने न तो तय समयसीमा का पालन किया और न ही अदालत के निर्देशों का समुचित अनुपालन किया। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, “आपके मुवक्किल जेल इसलिए गए क्योंकि उन्होंने अपना वादा पूरा नहीं किया।” अदालत की इस टिप्पणी से स्पष्ट संकेत मिला कि न्यायालय इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि अभिनेता ने पहले पारित आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने इस तथ्य का भी उल्लेख किया और कहा कि मामले से जुड़े कई पहलुओं की जानकारी फाइल देखने के दौरान सामने आई है। अदालत ने शिकायतकर्ता पक्ष को निर्देश दिया कि वह अपना जवाब दाखिल करे। कोर्ट ने कहा, “जब मैं फाइल देख रहा था, तो बहुत सी ऐसी बातें थीं जिनके बारे में हमें पता भी नहीं था। आपको जवाब फाइल करना होगा। हम सोमवार को इस मामले में सुनवाई करेंगे।” बचाव पक्ष की दलील राजपाल यादव की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने अभिनेता से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फिलहाल संपर्क स्थापित नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि जमानत आवेदन दाखिल कर दिया गया है और यदि अदालत चाहे तो दूसरी ओर से जवाब मांगा जा सकता है। वकील ने आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक वे अदालत के समक्ष कुछ ठोस प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे। 16 फरवरी को अगली सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 16 फरवरी के लिए निर्धारित की है। इस दौरान अदालत शिकायतकर्ता के जवाब और बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले तथ्यों पर विचार करेगी। फिलहाल, अदालत की कड़ी टिप्पणियों ने अभिनेता की जमानत याचिका पर अनिश्चितता के बादल और गहरा दिए हैं। अब सभी की निगाहें 16 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि क्या राजपाल यादव को अंतरिम राहत मिलती है या उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना करते हुए आगे भी हिरासत में रहना पड़ेगा।

20 करोड़ की मानहानि याचिका से गरमाया कपूर परिवार का विवाद: संपत्ति संग्राम अब अदालत की चौखट पर

प्रिया कपूर ने ननद मंदिरा और पॉडकास्ट होस्ट पर लगाया सामाजिक अपमान का आरोप, फैमिली ट्रस्ट को लेकर रानी कपूर की याचिका से मामला और उलझा नई दिल्ली। हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहा कपूर परिवार का विवाद अब कानूनी मोर्चे पर और तेज हो गया है। दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर ने अपनी ननद मंदिरा के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर करते हुए 20 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। इस मामले में एक पॉडकास्ट होस्ट को भी प्रतिवादी बनाया गया है। प्रिया कपूर ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर दीवानी मुकदमे में दावा किया है कि मंदिरा द्वारा एक पॉडकास्ट में दिए गए कथित बयानों से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है। उनका कहना है कि इन बयानों के कारण उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमान और मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा। आपराधिक और दीवानी—दोनों मोर्चों पर लड़ाई सूत्रों के अनुसार, पटियाला हाउस कोर्ट में दायर आपराधिक शिकायत में मंदिरा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। वहीं हाईकोर्ट में दायर सिविल सूट में 20 करोड़ रुपये के हर्जाने के साथ-साथ अदालत से निषेधाज्ञा (इंजंक्शन) जारी करने की अपील की गई है। प्रिया कपूर ने अदालत से अनुरोध किया है कि मंदिरा और संबंधित पॉडकास्ट होस्ट को उनके खिलाफ कथित मानहानिकारक सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण से रोका जाए। साथ ही, डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मौजूदा कंटेंट हटाने का भी निर्देश देने की मांग की गई है। संपत्ति विवाद की पृष्ठभूमि संजय कपूर की संपत्ति को लेकर पहले से ही कई कानूनी विवाद चल रहे हैं। प्रिया कपूर और संजय कपूर की दूसरी पत्नी, अभिनेत्री करिश्मा कपूर, के बीच संपत्ति को लेकर कानूनी संघर्ष पहले से चर्चा में है। ऐसे में यह नया मानहानि मामला विवाद को और जटिल बना रहा है। फैमिली ट्रस्ट पर भी सवाल इस पूरे प्रकरण में एक और मोड़ तब आया जब संजय कपूर की मां रानी कपूर ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने नाम पर बनाए गए फैमिली ट्रस्ट को रद्द करने की मांग की। रानी कपूर ने आरोप लगाया है कि यह ट्रस्ट उनकी जानकारी और सहमति के बिना बनाया गया था और इसके जरिए संपत्तियों का अवैध हस्तांतरण किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि दस्तावेजों पर उनसे बिना उचित जानकारी दिए हस्ताक्षर कराए गए और उन्हें उन संपत्तियों से बाहर कर दिया गया जिन पर उनका वैध अधिकार था। कानूनी लड़ाई लंबी होने के संकेत कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अब बहुस्तरीय हो चुका है—जहां एक ओर आपराधिक मानहानि का प्रश्न है, वहीं दूसरी ओर संपत्ति के स्वामित्व, ट्रस्ट की वैधता और पारिवारिक अधिकारों से जुड़े गंभीर आरोप भी हैं। अदालत में सुनवाई की अगली तारीखों पर सभी पक्षों के जवाब और साक्ष्य इस बहुचर्चित विवाद की दिशा तय करेंगे। फिलहाल, कपूर परिवार का यह आंतरिक विवाद सार्वजनिक मंच पर आ चुका है और आने वाले समय में इसके कई कानूनी और सामाजिक आयाम सामने आ सकते हैं।

KGBV में एनीमिया जांच महाशिविर: दो हज़ार से अधिक किशोरियों की स्वास्थ्य जांच

छपरा, 12 फ़रवरी। राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सारण जिले में बेटियों के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। गड़खा प्रखंड के भैंसमारा गांव स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) में विशेष एनीमिया जांच एवं समग्र स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें दो हज़ार से अधिक किशोरियों और महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोरियों में बढ़ती एनीमिया की समस्या के प्रति जागरूकता फैलाना, समय पर जांच सुनिश्चित करना तथा आवश्यक उपचार और पोषण संबंधी सलाह उपलब्ध कराना था। “हर बेटी का स्वस्थ और आत्मनिर्भर होना हमारा लक्ष्य” – डीएमसी जिला महिला सशक्तिकरण केंद्र (डीएचईडब्ल्यू) सारण की जिला मिशन समन्वयक निभा कुमारी ने शिविर को संबोधित करते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य हर बेटी को स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाना है। शरीर में खून की कमी, पोषण की आवश्यकता और संतुलित खान-पान बेहद जरूरी है। किशोरावस्था जीवन का महत्वपूर्ण चरण होता है। यदि इस समय बेटियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाए तो वे शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।” उन्होंने बताया कि एनीमिया जैसी समस्या को सही समय पर पहचान और संतुलित आहार के माध्यम से काफी हद तक दूर किया जा सकता है। जागरूकता और नियमित जांच इस दिशा में सबसे प्रभावी कदम हैं। नियमित स्वास्थ्य शिविर की आवश्यकता पर जोर कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की वार्डन करिश्मा कुमारी ने कहा कि ऐसे स्वास्थ्य शिविर केवल विशेष अवसरों पर ही नहीं, बल्कि नियमित अंतराल पर आयोजित होने चाहिए। उन्होंने कहा,“समय-समय पर स्वास्थ्य जांच होने से किसी भी बीमारी का प्रारंभिक अवस्था में ही पता चल सकता है। इससे छात्राओं को समय पर उपचार मिल पाता है और उनकी पढ़ाई तथा विकास पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।” मेडिकल टीम द्वारा समग्र जांच जिला कार्यक्रम पदाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित इस शिविर में गड़खा स्वास्थ्य केंद्र की मेडिकल टीम ने छात्राओं की रक्त जांच के साथ-साथ सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण भी किया। शिविर के दौरान: हीमोग्लोबिन स्तर की जांच की गई आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां वितरित की गईं पोषण और संतुलित आहार संबंधी परामर्श दिया गया आवश्यक दवाइयों का वितरण किया गया इस अभियान के अंतर्गत लगभग 2000 से अधिक छात्राओं एवं महिलाओं की एनीमिया जांच की गई, जो जिले में महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय पहल मानी जा रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त भागीदारी कार्यक्रम में शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। इस अवसर पर DGC डॉ. कुमारी मेनका, डीएचईडब्ल्यू के वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ सत्येंद्र कुमार, लैंगिक विशेषज्ञ सुजाता श्री, चिकित्सक डॉ. विकास कुमार, डॉ. सुजीत कुमार, एएनएम एवं विद्यालय की शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। सभी विशेषज्ञों ने छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, संतुलित आहार लेने और नियमित स्वास्थ्य जांच कराने के लिए प्रेरित किया। सशक्त महिला, सशक्त समाज राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित यह शिविर केवल एक स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम नहीं, बल्कि बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुआ। जब बेटियां स्वस्थ होंगी, तभी वे शिक्षा, आत्मनिर्भरता और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी। सारण जिले की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि यदि प्रशासन, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग मिलकर कार्य करें, तो महिला सशक्तिकरण के लक्ष्य को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सकता है।

भारत माला परियोजना में तेजी के निर्देश: डीएम वैभव श्रीवास्तव ने बाकरपुर-मानिकपुर खंड का किया स्थलीय निरीक्षण

छपरा, 12 फरवरी 2026। सारण जिले में चल रही महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के बाकरपुर-मानिकपुर खंड की प्रगति की समीक्षा हेतु जिलाधिकारी श्री वैभव श्रीवास्तव ने गुरुवार को स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्य की गति, भू-अर्जन की स्थिति एवं मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया का विस्तृत जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी ने बताया कि भवन प्रमंडल को जुलाई 2025 में परियोजना के मार्ग रेखन (एलाइनमेंट) में आ रही 30 संरचनाओं का मूल्यांकन करने का निर्देश दिया गया था। किंतु अब तक मूल्यांकन प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किए जाने पर उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि एक सप्ताह के भीतर हर हाल में मूल्यांकन प्रतिवेदन समर्पित किया जाए, ताकि परियोजना में अनावश्यक विलंब न हो। भू-अर्जन और मुआवजा भुगतान में तेजी लाने के निर्देश गोविन्दचक मौजा में शेष 204 हितबद्ध रैयतों के भू-अर्जन से संबंधित मुआवजा भुगतान को लेकर जिलाधिकारी ने विशेष कैंप लगाकर प्लॉटवार मापी कराने तथा ऑफलाइन एलपीसी निर्गत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कल से लगातार कैंप कर प्रक्रिया को पूर्ण किया जाए। डीएम ने एनएचएआई के अमीन, भू-अर्जन अमीन तथा अंचल अमीन को संयुक्त रूप से डोर-टू-डोर जाकर रैयतों को नोटिस तामिला कराने और आवश्यक कागजात एवं अभिश्रव प्राप्त करने का स्पष्ट निर्देश दिया। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी एवं त्वरित ढंग से पूर्ण कर यथाशीघ्र मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर दिया। गोविन्दचक में निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ करने का निर्देश निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने एनएचएआई को गोविन्दचक क्षेत्र में अविलंब निर्माण कार्य प्रारंभ कराने का निर्देश दिया। वहीं दरियापुर अंचल में भी शेष रैयतों के भुगतान को लेकर अंचलाधिकारी को मापी, नोटिस तामिला और अभिश्रव संग्रह की प्रक्रिया तेज करने को कहा गया। दीघा सेतु संपर्क पथ पर बनेगा डायवर्शन प्लान परियोजना के अंतर्गत दीघा सेतु पुल संपर्क पथ के तीन पिलरों के समीप स्थित संरचनाओं को हटाकर संपर्क मार्ग तैयार किया जाना है। इसके लिए यातायात को अस्थायी रूप से डायवर्ट करना आवश्यक होगा। जिलाधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को विस्तृत ट्रैफिक प्लान तैयार कर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि लगभग एक किलोमीटर के डायवर्शन के दौरान दीघा पुल पर यातायात व्यवस्था सुचारु एवं सुरक्षित रूप से संचालित की जा सके। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारतमाला परियोजना क्षेत्र के विकास और बेहतर संपर्क सुविधा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अतः सभी संबंधित विभाग समन्वय बनाकर कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करें, ताकि आमजन को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

छपरा में गूंजा मजदूर एकता का स्वर: CITU के आह्वान पर अखिल भारतीय हड़ताल, 500 से अधिक कर्मी सड़कों पर उतरे

छपरा, 12 फरवरी। केंद्र सरकार की कथित मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में बुधवार को CITU के आह्वान पर अखिल भारतीय हड़ताल का व्यापक असर छपरा में भी देखने को मिला। विभिन्न ट्रेड यूनियनों के साथ BSSRU (बिहार स्टेट सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स यूनियन) के लगभग 500 सदस्य हड़ताल में शामिल हुए और शहर में एकजुटता का प्रदर्शन किया। हड़ताली कर्मियों ने शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए एक विशाल रैली निकाली, जो अंततः दवा मंडी पहुंचकर सभा में तब्दील हो गई। रैली के दौरान श्रमिकों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। सभा को संबोधित करते हुए CPM के जिला सचिव कामरेड बटेश्वर महतो ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां श्रमिक वर्ग के हितों के खिलाफ हैं और उद्योगपतियों के दबाव में श्रम कानूनों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई श्रम संहिताओं के जरिए श्रमिकों के अधिकारों का हनन हो रहा है। वहीं, CITU के जिला सचिव कामरेड मृत्युंजय ओझा ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चारों श्रम संहिताएं मजदूरों के हितों के प्रतिकूल हैं और इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने इन श्रम संहिताओं को उद्योगपतियों के हित में बताया और श्रमिक एकता को और मजबूत करने का आह्वान किया। BSSRU के जिलाध्यक्ष रमन कुमार सिंह ने हड़ताल में शामिल सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि FMRAI के आह्वान पर आयोजित इस अखिल भारतीय हड़ताल को छपरा में व्यापक समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि श्रमिक वर्ग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट है और आगे भी संघर्ष जारी रहेगा। हड़ताल की प्रमुख मांगें हड़ताल के दौरान श्रमिक संगठनों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाईं— चारों श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए। सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉइज एक्ट, 1976 को बहाल किया जाए। सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों के कार्य की वैधानिक नियमावली लागू की जाए। सेल्स के आधार पर कर्मचारियों का उत्पीड़न और छंटनी बंद की जाए। ट्रैकिंग और निगरानी के माध्यम से निजता के अधिकार का हनन बंद किया जाए। कार्यक्रम के अंत में नेताओं ने दावा किया कि छपरा में आयोजित यह हड़ताल पूर्णतः सफल रही और इससे मजदूर एकता का मजबूत संदेश गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

राहुल गांधी पर कार्रवाई की तलवार? बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दी विशेषाधिकार हनन की नोटिस

इंडिया-US ट्रेड डील और बजट पर उठाए सवालों के बाद बढ़ा विवाद, लोकसभा नियम 380 के तहत की गई शिकायत नई दिल्ली: लोकसभा में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया भाषण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की संसदीय सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर लोकसभा सचिवालय में नोटिस दाखिल किया है। यह नोटिस उस वक्त दिया गया है जब राहुल गांधी ने सदन में इंडिया-यूएस ट्रेड डील और केंद्र सरकार के यूनियन बजट पर सवाल उठाए थे। बीजेपी सांसद ने अपने नोटिस में आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने बिना ठोस तथ्यों के गंभीर आरोप लगाए और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है। नोटिस लोकसभा की कार्यसूची एवं नियमावली के तहत Rule 380 के अंतर्गत दिया गया है, जिसके तहत अध्यक्ष को यह अधिकार होता है कि वे किसी भी आपत्तिजनक या असंसदीय टिप्पणी को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दे सकते हैं। मार्शल आर्ट वाली टिप्पणी से बढ़ा विवाद लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने राजनीति की तुलना मार्शल आर्ट से करते हुए कहा था कि जैसे खेल में “ग्रिप” और “चोक” होती है, उसी तरह राजनीति में भी नियंत्रण और दबाव की रणनीतियां होती हैं। उनके इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तत्काल आपत्ति जताई और इसे अनुचित करार दिया। बीजेपी का कहना है कि इस प्रकार की तुलना और शब्दों का चयन सदन की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। वहीं कांग्रेस का पक्ष है कि राहुल गांधी ने रूपक (metaphor) के माध्यम से अपनी बात रखी थी और इसमें कोई असंसदीय आशय नहीं था। रिकॉर्ड से हटाने की मांग निशिकांत दुबे द्वारा दायर नोटिस में मांग की गई है कि राहुल गांधी के भाषण के उन हिस्सों को रिकॉर्ड से हटाया जाए, जिनमें कथित रूप से असंसदीय शब्दों और तथ्यों से परे आरोपों का इस्तेमाल किया गया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि ऐसे वक्तव्य सदन की परंपराओं और गरिमा के खिलाफ हैं। यदि विशेषाधिकार हनन का मामला आगे बढ़ता है, तो यह राहुल गांधी के लिए राजनीतिक और संसदीय दोनों स्तरों पर चुनौती बन सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष के विवेक पर निर्भर करेगा। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब संसद में बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस चल रही है। इंडिया-यूएस ट्रेड डील और आर्थिक नीतियों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार विपक्ष पर भ्रामक आरोप लगाने का आरोप लगा रही है। अब निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में आगे कोई औपचारिक कार्रवाई होती है या विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है। (समाचार विश्लेषण जारी…)

तख्तापलट के बाद पहली बार बैलेट की बारी: बांग्लादेश में आम चुनाव शुरू, जमात-ए-इस्लामी और बीएनपी में सीधी टक्कर

ढाका, 12 फरवरी 2026। महीनों तक चली हिंसा, सड़कों पर उग्र प्रदर्शन और राजनीतिक अस्थिरता के दौर के बाद बांग्लादेश में आखिरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया ने फिर रफ्तार पकड़ी है। साल 2024 में हुए तख्तापलट और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत आने के बाद पैदा हुए सत्ता संकट के बीच गुरुवार को देशभर में आम चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया। सुबह से ही कई मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान कराने का दावा किया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सत्ता परिवर्तन की पृष्ठभूमि बांग्लादेश में 2024 का वर्ष राजनीतिक उथल-पुथल का साल रहा। व्यापक विरोध प्रदर्शनों और हिंसक झड़पों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा और वे भारत आ गईं। इसके बाद देश में अंतरिम व्यवस्था लागू की गई, जिसने चुनाव कराने का रास्ता साफ किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि बांग्लादेश की लोकतांत्रिक साख की परीक्षा भी है। जनता पिछले दो वर्षों की अस्थिरता, आर्थिक दबाव और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से उबरने के लिए एक स्थिर सरकार की तलाश में है। किसके बीच है मुख्य मुकाबला? इस बार चुनावी मैदान में सबसे प्रमुख टक्कर जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के बीच मानी जा रही है। जमात-ए-इस्लामी ने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है और वह खुद को बदलाव की ताकत के रूप में पेश कर रही है। वहीं बीएनपी आर्थिक सुधार, संस्थागत स्थिरता और लोकतांत्रिक मूल्यों की बहाली को अपना मुख्य एजेंडा बता रही है। हालांकि अन्य छोटे दल और स्वतंत्र उम्मीदवार भी मैदान में हैं, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि असली मुकाबला इन्हीं दो दलों के बीच सिमट सकता है। सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नजर पिछले अनुभवों को देखते हुए इस बार चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रखी गई है। राजधानी ढाका सहित कई संवेदनशील जिलों में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर भारत और दक्षिण एशियाई देशों की नजर भी इस चुनाव पर टिकी हुई है। बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता का असर क्षेत्रीय कूटनीति और व्यापार पर भी पड़ सकता है। मतदाताओं के बीच महंगाई, बेरोजगारी और सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या पहली बार मतदान कर रही है, जो बदलाव और पारदर्शिता की मांग कर रही है। एक स्थानीय मतदाता ने कहा, “हम हिंसा नहीं, विकास चाहते हैं। इस बार हम सोच-समझकर वोट दे रहे हैं।” मतदान शाम तक जारी रहेगा और शुरुआती रुझान देर रात तक आने की संभावना है। परिणाम चाहे जो भी हो, यह चुनाव बांग्लादेश के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। दो वर्षों की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद अब जनता की उंगली पर लगी स्याही यह तय करेगी कि देश किस दिशा में आगे बढ़ेगा—स्थिरता की ओर या फिर एक नए राजनीतिक संघर्ष की ओर।