पटना: बिहार में महिलाओं और खासकर बेटियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बिहार में लगभग हर दिन बहन-बेटियों के साथ अत्याचार और यौन उत्पीड़न की खबरें सामने आ रही हैं, तब सरकार आखिर कब जागेगी? रोहिणी आचार्य ने कहा कि अपराध के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन सरकार की ओर से ठोस और प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती। उन्होंने आरोप लगाया कि बेटियों की सुरक्षा को लेकर किए गए तमाम दावे केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। “जब घर से बाहर निकलते ही डर का माहौल हो, तब विकास और सुशासन की बातें खोखली लगती हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने आगे कहा कि बिहार में महिला सुरक्षा को लेकर सख्त कानून और तेज़ न्याय प्रक्रिया की जरूरत है। दोषियों को तुरंत सजा मिले, तभी अपराधियों में डर पैदा होगा। रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन पर राजनीतिक दबाव और लापरवाही के चलते अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। राजद नेता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सीधे सवाल किया कि आखिर कब तक बिहार की बेटियां असुरक्षा के साए में जीने को मजबूर रहेंगी? उन्होंने मांग की कि सरकार महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे, संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और पीड़ितों को त्वरित न्याय व सहायता सुनिश्चित की जाए। रोहिणी आचार्य के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है, वहीं आने वाले दिनों में महिला सुरक्षा का मुद्दा बिहार की राजनीति में और भी प्रमुखता से उभरता दिख रहा है।
WhatsApp का ‘Primary Controls’ फीचर: बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए पैरेंट्स को मिलेगी बड़ी ताकत
डिजिटल दौर में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा माता-पिता के लिए सबसे बड़ी चिंता बनती जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए WhatsApp एक नया और अहम फीचर लाने की तैयारी में है, जिसका नाम Primary Controls रखा गया है। इस फीचर के जरिए माता-पिता अपने बच्चों के लिए एक Secondary WhatsApp Account बना सकेंगे, जिसमें चैटिंग और संपर्क को लेकर जरूरी पाबंदियां होंगी। फीचर ट्रैकर WABetaInfo की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया सिस्टम खासतौर पर उन बच्चों के लिए डिजाइन किया गया है जो WhatsApp की न्यूनतम उम्र की शर्त पूरी नहीं करते या जिनके लिए सीमित एक्सेस जरूरी समझा जाता है। माता-पिता के कंट्रोल में होगा बच्चों का WhatsApp Primary Controls फीचर के तहत पैरेंट्स अपने मुख्य WhatsApp अकाउंट से बच्चों का सेकेंडरी अकाउंट सेटअप कर पाएंगे। इसका मतलब यह है कि बच्चे का अकाउंट पूरी तरह माता-पिता की निगरानी में रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस सेकेंडरी अकाउंट में बच्चे सिर्फ सेव किए गए कॉन्टैक्ट्स से ही चैट कर सकेंगे। इससे अनजान लोगों, ऑनलाइन फ्रॉड और गलत इरादों वाले यूज़र्स से संपर्क का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा। गलत कंटेंट से मिलेगी सुरक्षा आज के समय में बच्चों का अनचाहे और आपत्तिजनक कंटेंट के संपर्क में आ जाना आम बात हो गई है। WhatsApp का यह नया फीचर बच्चों को ऐसे कंटेंट से दूर रखने में मदद करेगा। सीमित चैट एक्सेस की वजह से माता-पिता यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि बच्चा सिर्फ भरोसेमंद लोगों से ही बातचीत कर रहा है। प्राइवेसी से कोई समझौता नहीं इस फीचर की सबसे खास बात यह है कि WhatsApp की end-to-end encryption पॉलिसी पहले की तरह बरकरार रहेगी। यानी बच्चों के मैसेज और कॉल पूरी तरह सुरक्षित और प्राइवेट रहेंगे। WhatsApp ने साफ किया है कि सिक्योरिटी और प्राइवेसी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कब तक आएगा यह फीचर? फिलहाल यह फीचर डेवलपमेंट स्टेज में है और टेस्टिंग के बाद इसे यूज़र्स के लिए रोल-आउट किया जा सकता है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में यह फीचर उन माता-पिता के लिए राहत लेकर आएगा जो बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी को लेकर चिंतित रहते हैं। WhatsApp का Primary Controls फीचर बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल माहौल बनाने की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय कदम माना जा रहा है, जिससे पैरेंट्स को कंट्रोल भी मिलेगा और बच्चों की प्राइवेसी भी बनी रहेगी।
ईशान–सूर्या का तूफान,टीम इंडिया ने 209 रन चेज कर सीरीज में बनाई 2-0 की अजेय बढ़त
रायपुर: रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए भारत बनाम न्यूजीलैंड टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले में टीम इंडिया ने दमदार प्रदर्शन करते हुए मेहमान टीम को 7 विकेट से मात दी और पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की मजबूत बढ़त हासिल कर ली। 209 रनों जैसे बड़े लक्ष्य को भारतीय बल्लेबाजों ने जिस सहजता से हासिल किया, उसने मैच को एकतरफा बना दिया। न्यूजीलैंड की ठोस शुरुआत, 208 रन तक पहुंची कीवी टीम टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड की शुरुआत शानदार रही। ओपनर्स डेवन कॉन्वे और टिम साइफर्ट ने पावरप्ले में आक्रामक अंदाज में रन बटोरे और भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया। इसके बाद युवा ऑलराउंडर रचिन रवींद्र ने 26 गेंदों में 44 रनों की बेहतरीन पारी खेलकर रन गति को बनाए रखा। मध्य और अंतिम ओवरों में कप्तान मिचेल सैंटनर ने जिम्मेदारी संभाली और 27 गेंदों पर नाबाद 47 रन जड़ते हुए टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाया। ग्लेन फिलिप्स (19 रन) और डैरिल मिचेल (18 रन) ने भी उपयोगी योगदान दिया। निर्धारित 20 ओवरों में न्यूजीलैंड ने 6 विकेट पर 208 रन बनाए। गेंदबाजी में कुलदीप चमके, अर्शदीप रहे महंगे भारतीय गेंदबाजों की बात करें तो कुलदीप यादव सबसे सफल रहे और उन्होंने 2 अहम विकेट झटके। हर्षित राणा, हार्दिक पंड्या, वरुण चक्रवर्ती और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली। हालांकि, अर्शदीप सिंह का दिन अच्छा नहीं रहा और उन्होंने अपने 4 ओवर में बिना विकेट लिए 53 रन लुटा दिए। लक्ष्य का पीछा: ईशान–सूर्यकुमार का धमाकेदार शो 209 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। ईशान किशन और सूर्यकुमार यादव ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों की एक न चलने दी। ईशान ने जहां ताकत और टाइमिंग का शानदार मिश्रण दिखाया, वहीं सूर्यकुमार यादव ने अपने खास अंदाज में 360 डिग्री शॉट्स से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। दोनों बल्लेबाजों की ताबड़तोड़ पारियों ने रन चेज को बेहद आसान बना दिया। भारतीय टीम ने जरूरी रन रेट को कभी बढ़ने नहीं दिया और 7 विकेट शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया। सीरीज पर मजबूत पकड़ इस जीत के साथ टीम इंडिया ने न सिर्फ मुकाबला अपने नाम किया, बल्कि सीरीज में 2-0 की बढ़त लेकर न्यूजीलैंड पर दबाव भी बढ़ा दिया है। घरेलू परिस्थितियों में भारतीय टीम का आत्मविश्वास चरम पर नजर आ रहा है, जबकि कीवी टीम को अगले मैचों में वापसी के लिए रणनीति पर नए सिरे से काम करना होगा। रायपुर की इस जीत ने साफ कर दिया कि मौजूदा फॉर्म में भारतीय टी20 टीम किसी भी बड़े लक्ष्य को आसानी से हासिल करने की क्षमता रखती है।
बिहार में प्रमोशन पर सख्ती: अब अफसरों का पूरा रिकॉर्ड खंगालेगी सरकार, साल में दो बार बनेगी निगरानी सूची
भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे अधिकारियों-कर्मचारियों की प्रोन्नति पर ब्रेक, एफआईआर या चार्जशीट वालों के लिए निगरानी स्वच्छता अनिवार्य पटना। बिहार सरकार ने प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रोन्नति (प्रमोशन) केवल वरिष्ठता या पद रिक्त होने के आधार पर नहीं होगी, बल्कि उनके पूरे सेवा रिकॉर्ड और आचरण की गहन जांच के बाद ही फैसला लिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन कर्मियों पर एफआईआर दर्ज है या आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल हो चुका है, उनकी प्रोन्नति से पहले निगरानी स्वच्छता (Vigilance Clearance) लेना अनिवार्य होगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने और ईमानदार अफसरों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है। इसके तहत राज्य सरकार साल में दो बार अधिकारियों-कर्मचारियों की विशेष सूची तैयार करेगी, जिसमें उनके खिलाफ लंबित मामलों, जांच की स्थिति और विभागीय कार्रवाई का पूरा ब्यौरा शामिल होगा। नई व्यवस्था के तहत प्रोन्नति पर विचार करते समय अधिकारियों के— सेवा रिकॉर्ड और गोपनीय चरित्र प्रविष्टि (ACR/APAR) किसी भी प्रकार की एफआईआर या चार्जशीट की स्थिति निगरानी, आर्थिक अपराध इकाई या अन्य जांच एजेंसियों में लंबित मामले विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। निगरानी स्वच्छता होगी अनिवार्य यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी का नाम किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या अनियमितता से जुड़े मामले में आता है, तो उसे निगरानी स्वच्छता प्रमाण पत्र के बिना प्रमोशन नहीं दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संवेदनशील और उच्च पदों पर केवल स्वच्छ छवि वाले अफसर ही नियुक्त हों। ईमानदार अफसरों को मिलेगा फायदा सरकार का मानना है कि इस फैसले से जहां एक ओर भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों पर दबाव बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का मनोबल भी मजबूत होगा। प्रशासनिक हलकों में इसे गवर्नेंस सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से प्रोन्नति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और राजनीतिक या बाहरी दबाव में गलत फैसलों पर रोक लगेगी। हालांकि, कुछ संगठनों ने आशंका जताई है कि लंबित मामलों के कारण कई अधिकारियों की प्रोन्नति अटक सकती है, लेकिन सरकार का तर्क है कि न्यायपूर्ण और साफ-सुथरी व्यवस्था के लिए यह जरूरी है।
‘DMK की विदाई तय, भ्रष्टाचार का खेल खत्म’ — मदुरंथकम से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान
चेन्नई/मदुरंथकम। तमिलनाडु की सियासत में हलचल तेज़ हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेन्नई दौरे के दौरान मदुरंथकम में आयोजित एनडीए (NDA) की विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) सरकार पर तीखा हमला बोला। आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों को लेकर पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि “डीएमके सरकार की विदाई का काउंटडाउन शुरू हो चुका है।” प्रधानमंत्री ने मंच से भ्रष्टाचार, माफिया राज और बढ़ते अपराध को लेकर डीएमके सरकार को घेरते हुए कहा कि तमिलनाडु की जनता अब बदलाव का मन बना चुकी है और राज्य को विकास की नई दिशा देने के लिए एनडीए तैयार है। ‘डीएमके मतलब भ्रष्टाचार, वंशवाद और माफिया’ अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि डीएमके सरकार ने तमिलनाडु को लूट का अड्डा बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया, डीएमके का मतलब है — भ्रष्टाचार, वंशवाद और माफिया राज। सरकारी योजनाओं में घोटाले, नौकरियों में दलाली और कानून-व्यवस्था की बदहाली ने आम जनता का भरोसा तोड़ दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि राज्य में गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है, जबकि केंद्र सरकार बिना किसी भेदभाव के तमिलनाडु के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। तमिलनाडु के विकास में केंद्र की भूमिका गिनाई प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की योजनाओं और निवेश का ज़िक्र करते हुए कहा कि तमिलनाडु में इंफ्रास्ट्रक्चर, नेशनल हाईवे, रेलवे प्रोजेक्ट, बंदरगाह विकास, और मेक इन इंडिया के तहत बड़े निवेश किए गए हैं। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार का लक्ष्य तमिलनाडु को ‘विकसित भारत’ की यात्रा में अग्रणी राज्य बनाना है, लेकिन इसके लिए राज्य में ईमानदार और विकासशील सरकार जरूरी है। ‘ तमिल संस्कृति और भाषा का पूरा सम्मान’ डीएमके द्वारा अक्सर उठाए जाने वाले भाषा और संस्कृति के मुद्दे पर भी पीएम मोदी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, भाजपा और एनडीए तमिल भाषा, संस्कृति और विरासत का पूरा सम्मान करती है। तमिल दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है और हमें इस पर गर्व है। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि डीएमके संस्कृति के नाम पर केवल राजनीति करती है, जबकि ज़मीनी स्तर पर जनता की समस्याओं का समाधान नहीं करती। पीएम मोदी के भाषण के दौरान सभा स्थल पर भारी उत्साह देखने को मिला। “मोदी-मोदी” और “एनडीए जिंदाबाद” के नारों से मदुरंथकम गूंज उठा। एनडीए नेताओं का मानना है कि यह रैली तमिलनाडु की राजनीति में टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। पीएम मोदी के इस आक्रामक भाषण के बाद यह साफ संकेत मिल गया है कि एनडीए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में डीएमके को सीधे चुनौती देने के मूड में है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, प्रधानमंत्री का यह दौरा राज्य में चुनावी रणनीति को धार देने और मतदाताओं को निर्णायक संदेश देने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
खाद खरीद में बड़ा बदलाव: डिजिटल फार्मर आईडी से होगी बिक्री, सब्सिडी पर कसेगा शिकंजा
नई दिल्ली | केंद्र सरकार खाद बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी, आसान और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। इसके तहत सरकार डिजिटल फार्मर आईडी (Farmer ID) को खाद खरीद से जोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह वही डिजिटल पहचान है, जिसका उपयोग किसान पीएम किसान सम्मान निधि योजना में पंजीकरण के लिए करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में खाद की खरीद के लिए किसान की डिजिटल आईडी अनिवार्य की जा सकती है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी सब्सिडी का लाभ वास्तविक और पात्र किसानों तक ही पहुंचे। क्या है डिजिटल फार्मर आईडी? डिजिटल फार्मर आईडी किसानों की एक यूनिक पहचान होगी, जिसमें उनकी जमीन, फसल, बोवाई पैटर्न और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी दर्ज रहेगी। सरकार तेजी से देशभर में किसानों की यह आईडी बनाने पर काम कर रही है। कुछ राज्यों में पहले ही पीएम किसान योजना का लाभ लेने के लिए किसान आईडी जरूरी कर दी गई है। अब इसी आईडी को खाद बिक्री से जोड़ने की योजना है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरुआत सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस योजना को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। इसके जरिए यह परखा जाएगा कि डिजिटल आईडी के माध्यम से खाद वितरण कितना प्रभावी और पारदर्शी बन सकता है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से: फर्जी खरीद पर रोक लगेगी कालाबाजारी कम होगी जरूरत से ज्यादा खाद उठाव पर नियंत्रण होगा यूरिया सब्सिडी का बढ़ता बोझ खाद सुधार की इस कवायद के पीछे एक बड़ी वजह तेजी से बढ़ती फर्टिलाइजर सब्सिडी भी है। वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए सरकार ने खाद सब्सिडी पर ₹1.68 ट्रिलियन खर्च का अनुमान लगाया है, लेकिन यह आंकड़ा बढ़कर ₹1.91 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। इसका मुख्य कारण है: यूरिया की रिकॉर्ड खपत बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतें घरेलू मांग में लगातार इजाफा यूरिया की रिकॉर्ड खपत आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच यूरिया की खपत 31.15 मिलियन टन तक पहुंच चुकी है। यह 2024 की इसी अवधि की तुलना में करीब 4 प्रतिशत ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल फार्मर आईडी के जरिए सरकार यह ट्रैक कर सकेगी कि किस किसान को कितनी खाद की वास्तविक जरूरत है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले समय में: सभी खाद बिक्री केंद्रों पर Farmer ID अनिवार्य हो सकती है सब्सिडी सीधे किसान प्रोफाइल से जुड़ सकती है कृषि योजनाओं में पारदर्शिता और नियंत्रण बढ़ेगा सरकार का यह कदम न सिर्फ सब्सिडी के बोझ को संतुलित करने में मदद कर सकता है, बल्कि खेती को डेटा-आधारित और आधुनिक बनाने की दिशा में भी अहम साबित हो सकता है।
भोजशाला में इतिहास का दिन: 10 साल बाद एक ही दिन पूजा-नमाज, सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम
धार (मध्य प्रदेश), विशेष रिपोर्ट |मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में वसंत पंचमी के अवसर पर शुक्रवार को एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। लगभग 10 वर्षों के अंतराल के बाद पहली बार एक ही दिन मां वाग्देवी की पूजा और मुस्लिम समुदाय की नमाज शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। यह सब सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के तहत संभव हो सका। सुबह तड़के सूर्योदय के साथ ही भोजशाला परिसर में हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा मां वाग्देवी का विधिवत पूजन शुरू हुआ। ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। वहीं प्रशासन ने मुस्लिम समुदाय के लिए नमाज अदा करने हेतु अलग स्थान निर्धारित किया, जिससे दोनों समुदाय अपने-अपने धार्मिक अनुष्ठान बिना किसी टकराव के कर सकें। संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किए। पूरे धार जिले में करीब 8000 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं। भोजशाला परिसर और उसके आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से पल-पल की निगरानी की जा रही है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी विशेष नजर रखी जा रही है ताकि अफवाहों और भड़काऊ संदेशों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। भोजशाला में पूजा और नमाज का एक ही दिन आयोजन न सिर्फ कानूनी आदेशों का पालन है, बल्कि यह धार्मिक सह-अस्तित्व और आपसी सौहार्द की एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में भी देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर जिम्मेदारी निभाएं, तो ऐसे संवेदनशील मुद्दों को भी शांति से सुलझाया जा सकता है। भोजशाला का यह दिन इतिहास के पन्नों में संतुलन, संयम और संविधान की जीत के रूप में दर्ज होता दिख रहा है।
डिजिटल इंडिया की ओर बड़ा कदम: 2027 की जनगणना पूरी तरह ऑनलाइन, 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा पहला चरण
नई दिल्ली। भारत सरकार ने देश की अगली जनगणना को लेकर ऐतिहासिक फैसला लेते हुए डिजिटल जनगणना–2027 का विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है। गुरुवार को केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, जनगणना का पहला चरण (हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेंसस)1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। इस चरण में देशभर के प्रत्येक घर से *ल33 अहम सवाल पूछे जाएंगे, जो पूरी तरह डिजिटल माध्यम से दर्ज किए जाएंगे। यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप, टैबलेट और सुरक्षित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए आंकड़े जुटाए जाएंगे। पहला चरण: घर और सुविधाओं की होगी पूरी गणना जनगणना का पहला चरण हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन कहलाता है। इसमें नागरिकों की व्यक्तिगत पहचान नहीं, बल्कि घर, आवासीय स्थिति और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी। इन 33 सवालों में मुख्य रूप से शामिल होंगे— घर पक्का है या कच्चा मकान का उपयोग (रिहायशी/व्यावसायिक) घर में कितने कमरे हैं पीने के पानी की सुविधा शौचालय और नालियों की स्थिति बिजली, एलपीजी, इंटरनेट की उपलब्धता वाहन, टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर जैसी सुविधाएं सरकार का उद्देश्य इन सवालों के जरिए देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और जीवन स्तर की वास्तविक तस्वीर सामने लाना है। डिजिटल जनगणना से क्या बदलेगा? इस बार की जनगणना कई मायनों में खास मानी जा रही है पेपरलेस प्रक्रिया: कागज़ी फॉर्म की जगह डिजिटल एंट्री तेज़ और सटीक डेटा: रियल-टाइम अपलोड से गलती की संभावना कम डेटा सुरक्षा: एन्क्रिप्टेड सिस्टम, जानकारी पूरी तरह गोपनीय स्वयं-गणना का विकल्प: नागरिक चाहें तो खुद भी ऑनलाइन जानकारी भर सकेंगे सरकार का दावा है कि इससे न केवल समय और लागत बचेगी, बल्कि नीतिगत फैसलों के लिए अधिक भरोसेमंद आंकड़े उपलब्ध होंगे। दूसरा चरण: जनसंख्या गणना 2027 में पहले चरण के बाद दूसरा और सबसे अहम चरण वर्ष 2027 में होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक जानकारी दर्ज की जाएगी। इसी चरण को वास्तविक जनसंख्या जनगणना माना जाता है। इस डेटा का उपयोग— संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन सरकारी योजनाओं की रूपरेखा आरक्षण और सामाजिक नीतियों शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार नीति जैसे बड़े फैसलों में किया जाएगा। 10 साल बाद हो रही है जनगणना गौरतलब है कि भारत में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टल गई थी। ऐसे में 2027 की जनगणना 16 साल बाद देश की जनसंख्या और सामाजिक संरचना का अद्यतन चित्र पेश करेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जनगणना में दी गई हर जानकारी कानूनी रूप से गोपनीय रहेगी और इसका इस्तेमाल केवल सांख्यिकीय व नीतिगत उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
सुबह की बारिश ने बदला दिल्ली-NCR का मिज़ाज तेज हवाओं और ओलों के अलर्ट के बीच तापमान में आई गिरावट
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार की सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। तड़के हुई हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाओं ने ठंडक बढ़ा दी, जिससे लोगों को पिछले कुछ दिनों से जारी हल्की गर्माहट से राहत मिली। बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई और सुबह-सुबह सड़कों पर ठंडक का अहसास साफ नजर आया। मौसम विभाग (IMD) ने 23 जनवरी को लेकर दिल्ली-एनसीआर के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, आज दिनभर रुक-रुक कर बारिश हो सकती है, साथ ही गरज-चमक, ओलावृष्टि और 40 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। अगले 3 घंटे अहम मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले तीन घंटे खासे संवेदनशील हो सकते हैं। इस दौरान अचानक तेज आंधी चलने, पेड़ गिरने और खुले इलाकों में नुकसान की आशंका जताई गई है। लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। बारिश और तेज हवाओं के असर से अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। सुबह और शाम के समय ठंड और बढ़ने के आसार हैं, जिससे सर्द कपड़ों की जरूरत फिर से महसूस की जा रही है। बारिश के कारण कई इलाकों में ट्रैफिक की रफ्तार धीमी रही। दफ्तर जाने वाले लोगों को जगह-जगह जाम का सामना करना पड़ा। वहीं, तेज हवाओं की वजह से कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की भी आशंका जताई जा रही है।
बिहार की सियासत में सुरक्षा का पुनर्गठन: तेजस्वी यादव की Z से Y+ हुई सुरक्षा, कई नेताओं की कैटेगरी बदली
पटना। बिहार में नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा Z श्रेणी से घटाकर Y+ कर दी गई है। इसके साथ ही राज्य में विभिन्न दलों के कई वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव हुआ है—कुछ को Z श्रेणी प्रदान की गई है, जबकि कुछ नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। यह निर्णय राज्य की सुरक्षा समीक्षा समिति की ताज़ा रिपोर्ट और मौजूदा खतरे के आकलन के आधार पर लिया गया बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, नेताओं की सुरक्षा समय-समय पर खतरे के आकलन (Threat Perception) के अनुसार तय की जाती है। हालिया समीक्षा में: राजनीतिक गतिविधियों की प्रकृति सार्वजनिक कार्यक्रमों की संख्या खुफिया इनपुट बीते समय की घटनाओं जैसे मानकों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा श्रेणियों का पुनर्निर्धारण किया गया। तेजस्वी यादव की सुरक्षा में बदलाव तेजस्वी यादव की सुरक्षा को Z से Y+ किए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इसे रूटीन समीक्षा का हिस्सा बताया जा रहा है। Y+ श्रेणी में भी पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान होते हैं, जिनमें प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी और आवश्यक एस्कॉर्ट शामिल रहते हैं। इस फेरबदल में: बीजेपी और जेडीयू के कुछ वरिष्ठ नेताओं को Z श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। वहीं, कुछ ऐसे नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह हटाई गई है, जिनके लिए खतरे का स्तर न्यूनतम पाया गया। सरकार का कहना है कि सुरक्षा संसाधनों का तर्कसंगत और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सुरक्षा में कटौती और बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी*भी शुरू हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव से जोड़कर देख रहा है, जबकि सरकार इसे निष्पक्ष और पेशेवर प्रक्रिया का परिणाम बता रही है। राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि: सुरक्षा श्रेणी स्थायी नहीं होती। किसी भी समय नए इनपुट मिलने पर फिर से समीक्षा की जा सकती है। नेताओं की व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ-साथ जनहित और संसाधनों का संतुलन जरूरी है।