AI की रफ्तार पड़ेगी आम जेब पर भारी! स्मार्टफोन, टीवी और लैपटॉप हो सकते हैं महंगे

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता दायरा जहां तकनीक की दुनिया में क्रांति ला रहा है, वहीं अब इसका असर आम लोगों की जेब पर भी साफ दिखने लगा है। इंडस्ट्री से आ रही ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, AI से जुड़े डेटा सेंटर्स और सर्वर्स में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की डिमांड तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा नतीजा यह हुआ है कि कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की सप्लाई घटती जा रही है, जिससे आने वाले समय में स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और लैपटॉप की कीमतों में इजाफा तय माना जा रहा है।  7 से 10 फीसदी तक बढ़ सकती हैं कीमतें रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यदि मेमोरी चिप्स की सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई, तो इस साल इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतों में 7 से 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मेमोरी चिप्स की लागत बढ़ने से कंपनियों का प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ रहा है, जिसका बोझ आखिरकार उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा। AI बना वजह, कंज्यूमर चिप्स पीछे AI टेक्नोलॉजी के तेजी से विस्तार के कारण डेटा सेंटर्स और सर्वर्स के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और सर्वर-ग्रेड DRAM की मांग लगातार बढ़ रही है। चिप बनाने वाली कंपनियां अब ज्यादा मुनाफे वाले इन प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही हैं। नतीजतन, स्मार्टफोन, टीवी और लैपटॉप में इस्तेमाल होने वाली कंज्यूमर-ग्रेड मेमोरी चिप्स का प्रोडक्शन घट गया है। 300% से 400% तक उछलीं मेमोरी चिप्स की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले कुछ समय से मेमोरी चिप्स की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। कुछ मामलों में इनकी कीमतें 300% से 400% तक बढ़ चुकी हैं। इसका सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर पड़ा है, जिससे कंपनियों के पास अपने प्रोडक्ट्स महंगे करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। बदल सकता है टीवी खरीदने का ट्रेंड टीवी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए एक्सपर्ट्स का मानना है कि उपभोक्ता अब 65 इंच जैसे बड़े स्क्रीन वाले मॉडल्स से दूरी बना सकते हैं। आने वाले समय में 55 इंच या उससे छोटे साइज के टीवी की डिमांड बढ़ सकती है। यानी, बड़े स्क्रीन टीवी का मौजूदा ट्रेंड धीरे-धीरे बदलने के संकेत दे रहा है। छोटे ब्रांड्स पर ज्यादा असर बड़े टेक ब्रांड्स मेमोरी चिप्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिससे सप्लायर्स पर दबाव और बढ़ जाता है। इसका नुकसान छोटे ब्रांड्स को उठाना पड़ता है, जिनके लिए चिप्स की उपलब्धता और भी मुश्किल हो जाती है। इसका असर पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार पर पड़ सकता है और प्रतिस्पर्धा असंतुलित हो सकती है। कुल मिलाकर, AI की तेज़ तरक्की जहां तकनीकी भविष्य को नया आकार दे रही है, वहीं इसका आर्थिक असर अब आम उपभोक्ताओं तक पहुंचता दिख रहा है। आने वाले महीनों में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अपनी जेब पर पड़ने वाले इस असर के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।

पीरागढ़ी रहस्य: कार में मिले तीन शव, ‘बाबा’ की मौजूदगी से उलझी जांच

नई दिल्ली। दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके में कार के अंदर दो पुरुष और एक महिला के शव मिलने से सनसनी फैल गई है। इस कथित सामूहिक आत्महत्या मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस ने अब एक ऐसे व्यक्ति की पहचान कर ली है, जो घटना से ठीक पहले मृतकों के साथ कार में बैठा था। सीसीटीवी फुटेज में यह व्यक्ति ‘बाबा’ के वेश में नजर आ रहा है, जिसे पुलिस इस रहस्यमय मामले की अहम कड़ी मान रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में साफ तौर पर देखा गया है कि यह ‘बाबा’ घटना वाले दिन मृतकों से मिला था और कुछ समय तक उसी कार में मौजूद रहा। फिलहाल पुलिस उसकी भूमिका की गहनता से जांच कर रही है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि फोरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस को रविवार अपराह्न करीब 3:50 बजे पुलिस नियंत्रण कक्ष में एक कॉल प्राप्त हुई, जिसमें सूचना दी गई कि पीरागढ़ी फ्लाईओवर के पास एक कार खड़ी है, जिसके दरवाजे बंद हैं और अंदर बैठे लोग किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां कार के अंदर तीनों लोग मृत पाए गए। जांच में सामने आया है कि पुलिस को सूचना मिलने से पहले कार करीब 50 मिनट तक उसी स्थान पर खड़ी थी। मृतकों की पहचान बापरोला निवासी रणधीर (76 वर्ष), शिव नरेश सिंह (47 वर्ष) और जहांगीरपुरी निवासी लक्ष्मी देवी (40 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, तीनों मूल रूप से बिहार के निवासी थे। प्रारंभिक जांच में संकेत मिल रहे हैं कि यह मामला आत्महत्या का हो सकता है। आशंका जताई जा रही है कि तीनों ने जहर मिला शीतल पेय पीकर जान दी। हालांकि पुलिस इस निष्कर्ष पर अभी पूरी तरह नहीं पहुंची है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ‘बाबा’ के वेश में दिखाई दे रहे व्यक्ति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसने मृतकों से क्यों मुलाकात की, कार में कितनी देर बैठा और क्या वह किसी साजिश या उकसावे से जुड़ा हुआ था। फिलहाल, पीरागढ़ी की यह घटना कई सवाल खड़े कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के नतीजों के बाद इस रहस्य से पर्दा उठ सकेगा और सच सामने आएगा।

फार्मर रजिस्ट्री में सुस्ती पर जिलाधिकारी सख्त, अंचल से प्रखंड तक बढ़ाई गई निगरानी

छपरा, 10 फरवरी। जिले में फार्मर रजिस्ट्री कार्य की धीमी प्रगति को लेकर जिलाधिकारी श्री वैभव श्रीवास्तव ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने अंचलवार फार्मर रजिस्ट्री की स्थिति का गहन मूल्यांकन किया और अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर असंतोष व्यक्त किया। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने एक-एक अंचल की प्रगति रिपोर्ट देखी और स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन भी कर्मियों का लॉगिन आईडी फार्मर रजिस्ट्री के लिए बनाया गया है, वे सभी फील्ड में सक्रिय रहते हुए शत-प्रतिशत रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के नाम से जमाबंदी कायम है, उनका फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य रूप से किया जाए। जिलाधिकारी ने बताया कि सभी अंचलों में जमाबंदी की सूची उपलब्ध है। इस सूची को संबंधित कर्मियों को उपलब्ध कराकर रैयत किसानों से एक-एक कर संपर्क किया जाए और फार्मर रजिस्ट्री पूरी कराई जाए। उन्होंने सभी अंचलाधिकारियों को फील्ड में उतरकर इस कार्य का सतत अनुश्रवण करने का निर्देश दिया। कृषि विभाग की भूमिका को रेखांकित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि विभाग के सभी पदाधिकारी एवं कर्मी लगातार फील्ड में रहकर फार्मर रजिस्ट्री की गहन मॉनिटरिंग करें। इसके साथ ही कृषि विभाग और जीविका के माध्यम से किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के लिए प्रोत्साहित करने के प्रयासों में भी तेजी लाने को कहा गया। उन्होंने सभी प्रखंडों के वरीय प्रभारी पदाधिकारियों को अपने-अपने प्रखंडों में फार्मर रजिस्ट्री कार्य की प्रगति की नियमित अंतराल पर समीक्षा और मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। वहीं जिला कृषि पदाधिकारी को प्रत्येक दो घंटे पर कार्य प्रगति की रिपोर्ट जिला प्रशासन को साझा करने को कहा गया। बैठक में अपर समाहर्त्ता, सभी प्रखंडों के वरीय प्रभारी पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी, सहायक निदेशक उद्यान, सभी अनुमंडल कृषि पदाधिकारी उपस्थित थे। जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी भी बैठक से जुड़े। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि फार्मर रजिस्ट्री सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिससे किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा। ऐसे में इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डीएम ने खुद दवा खाकर दिया भरोसा, सारण में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान का भव्य आग़ाज़

40.46 लाख लाभार्थियों को घर-घर खिलाई जाएगी फाइलेरिया से बचाव की दवा, 27 फरवरी तक चलेगा विशेष अभियान छपरा। सारण जिले में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की शुरुआत इस बार एक सशक्त और भरोसेमंद संदेश के साथ की गई। अभियान के उद्घाटन अवसर पर स्वास्थ्यकर्मी द्वारा दवा देने से पहले जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की लंबाई (हाइट) मापी गई और सभी निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए जिलाधिकारी ने स्वयं फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन किया। यह दृश्य आम जनता के लिए यह संदेश देने वाला था कि यह अभियान पूरी तरह सुरक्षित है और नियम प्रशासन व आम नागरिक—दोनों के लिए समान हैं। यह विशेष अभियान 10 फरवरी से 27 फरवरी तक जिले में संचालित किया जाएगा। इसके तहत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पात्र लाभार्थियों को अपने सामने फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाएंगी। जिलाधिकारी ने कहा कि अभियान की सफलता के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है और दवा सेवन की प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जा रहा है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे स्वास्थ्यकर्मियों के सामने ही दवा का सेवन करें और अपने परिवार को फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखें। 40.46 लाख लाभार्थी होंगे कवर, तीन तरह की दवाएं खिलाई जाएंगी जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि इस अभियान के तहत जिले में 40 लाख 46 हजार 610 लाभार्थियों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाई जाएगी। आशा कार्यकर्ता 4 दिनों तक घर-घर जाकर दवा खिलाएंगी, जबकि अंतिम तीन दिनों में बूथ लगाकर दवा सेवन कराया जाएगा। अभियान के दौरान लाभार्थियों को अल्बेंडाजोल, डीईसी और आइवरमेक्टिन—तीन प्रकार की दवाएं दी जाएंगी। इसके लिए जिले में 2198 टीमें, 4396 आशा कार्यकर्ता (ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर) और 217 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। कुल 9 लाख 52 हजार 143 घरों को इस अभियान के तहत लक्षित किया गया है। अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए 11 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष बूथ लगाकर स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने लक्षित लाभार्थियों को दवा का सेवन कराएंगे। जागरूकता रथ से गांव-गांव पहुंचेगा संदेश जन-जागरूकता को मजबूत करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने 20 जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये रथ जिले के सभी प्रखंडों में गांव-गांव जाकर ऑडियो संदेशों के माध्यम से फाइलेरिया से बचाव और दवा सेवन के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करेंगे। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी, डीपीएम अरविन्द कुमार, डीएमओ डॉ. भूपेंद्र कुमार, डीएस डॉ. आर.एन. तिवारी, डीपीसी रमेशचंद्र कुमार, डीसीएम ब्रजेंद्र कुमार, जिला वेक्टर जनित रोग सलाहकार सुधीर कुमार, अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद, वीडीसीओ मिनाक्षी, वीडीसीओ सुमन कुमारी, पिरामल फाउंडेशन एवं सीफार के प्रतिनिधि समेत कई अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित : सिविल सर्जन सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हैं। उच्च रक्तचाप, शुगर, गठिया या अन्य सामान्य बीमारियों से पीड़ित लोगों को भी ये दवाएं अवश्य लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि दवा सेवन के बाद यदि हल्का बुखार, चक्कर या मितली जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह घबराने की बात नहीं है—बल्कि यह संकेत है कि शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवी नष्ट हो रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक प्रखंड में रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात की गई है। खाली पेट दवा नहीं, कुछ वर्ग अभियान से बाहर यह अभियान लहलादपुर प्रखंड को छोड़कर जिले के सभी प्रखंडों में संचालित किया जाएगा। दवाओं का वितरण नहीं किया जाएगा, बल्कि स्वास्थ्यकर्मी लाभार्थियों को अपने सामने दवा का सेवन कराएंगे। दवा खाली पेट नहीं खानी है। 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और अत्यंत गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति इस अभियान से बाहर रखे गए हैं। फाइलेरिया (हाथीपांव रोग) मच्छरों के काटने से फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो शरीर के लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लगातार 5 वर्षों तक फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कर लेता है, तो उसे जीवनभर इस बीमारी से बचाव मिल सकता है।

छपरा में जिला स्तरीय नियोजन मेला 2026: 39 काउंटरों पर 4375 पदों के लिए आवेदन, दो दिव्यांग युवकों को पहली बार मिला रोजगार

छपरा, 09 फ़रवरी | स्थानीय संवाददाता: हिमालय राज,  युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में अवर प्रादेशिक नियोजनालय, छपरा (सारण) द्वारा शहर के राजेंद्र स्टेडियम में एक दिवसीय जिला स्तरीय नियोजन मेला 2026 का आयोजन किया गया। मेले में बड़ी संख्या में युवक-युवतियों ने भाग लिया और रोजगार के अवसरों को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। इस नियोजन मेले में कुल 39 काउंटर लगाए गए, जिनके माध्यम से 4375 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए। मेले में बाहरी राज्यों की एजेंसियों की भागीदारी अपेक्षाकृत अधिक रही। विशेष रूप से भागलपुर, पुणे, चेन्नई और मुंबई से आई लेबर नेट कंपनी ने सर्वाधिक 1500 पदों के लिए आवेदन प्राप्त किए। वहीं, सारण जिले के अनुमंडल मुख्यालय मढ़ौरा स्थित वेबटेक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सबसे कम, मात्र 05 पदों के लिए आवेदन लिया गया।  दिव्यांग युवकों के लिए मेला बना उम्मीद की किरण इस रोजगार मेले की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि इसमें दो दिव्यांग युवकों को पहली बार रोजगार का अवसर मिला। जलालपुर प्रखंड के गंभरिया गांव निवासी दिव्यांग अरविंद कुमार तथा सोनपुर से आए दिव्यांग अरविंद को मेले के दौरान ही नौकरी प्रदान की गई। दोनों को मार्केटिंग क्षेत्र में कार्य करने का अवसर मिला है। इस संबंध में उत्कर्ष मार्केटिंग के प्रतिनिधि उमेश सिंह ने बताया कि चयनित युवकों को प्रारंभिक रूप से 90 से 120 दिनों तक फील्ड में मार्केटिंग का कार्य करना होगा। इसके उपरांत उन्हें कार्यालय में बैठकर कार्य करने का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब रोजगार मेला के माध्यम से दो दिव्यांग युवकों को उनकी योग्यता के अनुरूप काम दिया गया है। युवाओं में दिखा उत्साह मेले में शामिल युवाओं ने इसे रोजगार की दिशा में एक सकारात्मक पहल बताया। बड़ी संख्या में युवाओं ने विभिन्न कंपनियों और एजेंसियों के काउंटरों पर जाकर आवेदन किया और साक्षात्कार प्रक्रिया में हिस्सा लिया। आयोजन से यह स्पष्ट हुआ कि ऐसे नियोजन मेले न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने का माध्यम बनते हैं, बल्कि दिव्यांगजनों के लिए भी नए अवसरों के द्वार खोलते हैं। कुल मिलाकर, जिला स्तरीय नियोजन मेला 2026 छपरा के युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाओं को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन साबित हुआ।

टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत-पाकिस्तान महामुकाबला तय, कोलंबो में 15 फरवरी को होगा हाई-वोल्टेज मैच

डिजिटल डेस्क : लंबे सियासी और कूटनीतिक ड्रामे के बाद आखिरकार क्रिकेट फैंस के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित मुकाबला अब तय कार्यक्रम के अनुसार खेला जाएगा। यह हाई-वोल्टेज मैच 15 फरवरी 2026 को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित होगा। इस अहम फैसले पर मुहर रविवार को लाहौर में हुई आईसीसी, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की त्रिपक्षीय बैठक के बाद लगी। प्रतिष्ठित क्रिकेट वेबसाइट क्रिकबज के मुताबिक भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर सहमति बन चुकी है और इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द की जाएगी। पाकिस्तानी मीडिया ने भी इस खबर की पुष्टि कर दी है, जिससे फैंस की उत्सुकता और बढ़ गई है। भारत से खेलने पर राजी हुआ पाकिस्तान दरअसल, 1 फरवरी को पाकिस्तानी सरकार ने अपनी टीम को भारत के खिलाफ खेलने से रोक दिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने स्थिति को संभालने के लिए 8 फरवरी को अपनी डेलिगेशन टीम लाहौर भेजी। इस अहम बैठक में पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी, आईसीसी उपाध्यक्ष इमरान ख्वाजा और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम शामिल हुए। बैठक के दौरान पाकिस्तान ने आईसीसी के सामने कुछ शर्तें रखीं, लेकिन आईसीसी ने सभी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद बातचीत का रास्ता खुला रहा और अंततः भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर सहमति बन गई। बीसीबी अध्यक्ष की अहम भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम की भूमिका अहम मानी जा रही है। उन्होंने पाकिस्तान से औपचारिक रूप से अनुरोध किया कि टी-20 विश्व कप 2026 में भारत के खिलाफ ग्रुप का पहला मुकाबला 15 फरवरी को श्रीलंका में खेला जाए। क्रिकबज के अनुसार अमीनुल इस्लाम ने कहा, “लाहौर यात्रा और हमारी चर्चाओं के बाद मैं पाकिस्तान से अनुरोध करता हूं कि पूरे क्रिकेट पारिस्थितिकी तंत्र के हित में 15 फरवरी को भारत के खिलाफ आईसीसी टी-20 विश्व कप का मैच खेले।” आईसीसी का बयान और बांग्लादेश को राहत आईसीसी ने अपनी आधिकारिक प्रेस रिलीज में यह भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा मामले को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर किसी भी तरह का वित्तीय, खेल संबंधी या प्रशासनिक दंड नहीं लगाया जाएगा। पाकिस्तान ने बांग्लादेश से जुड़े कुछ मुद्दे आईसीसी के सामने उठाए थे, लेकिन परिषद ने बीसीबी को पूरी तरह क्लीन चिट दे दी है। इसके साथ ही यह भी तय हुआ है कि बांग्लादेश, आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप 2031 से पहले आईसीसी के किसी बड़े आयोजन की मेजबानी करेगा। भारत-पाकिस्तान मुकाबला हमेशा से क्रिकेट का सबसे बड़ा आकर्षण रहा है। कोलंबो में होने वाला यह मैच न सिर्फ ग्रुप स्टेज का सबसे अहम मुकाबला होगा, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें भी इसी पर टिकी होंगी। अब सबकी नजरें आधिकारिक घोषणा और टिकटों पर टिकी हैं—क्योंकि क्रिकेट का सबसे बड़ा ‘महामुकाबला’ एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है।

प्रकाशन से पहले ही विवाद में घिरी जनरल नरवणे की आत्मकथा, ‘Four Stars of Destiny’ लीक मामले में दिल्ली पुलिस ने दर्ज किया केस

नई दिल्ली। देश के पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की बहुप्रतीक्षित और अब तक अप्रकाशित आत्मकथा ‘Four Stars of Destiny’ के ऑनलाइन लीक होने से सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़ा बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली पुलिस ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, यह आत्मकथा अभी आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई थी और इसके कुछ हिस्से सोशल मीडिया व अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गए। खास बात यह है कि किताब में वर्ष 2020 के गलवान घाटी संघर्ष, भारत-चीन सैन्य टकराव, और पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बने हालात से जुड़े कई संवेदनशील विवरण शामिल बताए जा रहे हैं। रक्षा मंत्रालय की मंजूरी थी लंबित जानकारी के अनुसार, आत्मकथा के प्रकाशन से पहले इसे रक्षा मंत्रालय की पूर्व स्वीकृति मिलना आवश्यक था, जो अभी लंबित थी। ऐसे में पुस्तक का लीक होना न केवल कॉपीराइट कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल खड़े करता है। कौन है लीक का जिम्मेदार? दिल्ली पुलिस की साइबर और इंटेलिजेंस यूनिट यह पता लगाने में जुटी है कि यह सामग्री किसने और किस माध्यम से सार्वजनिक की। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि कहीं यह लीक जानबूझकर तो नहीं किया गया, ताकि भारत-चीन संबंधों या सैन्य रणनीति को लेकर गलत संदेश फैलाया जा सके। सेना और सुरक्षा हलकों में हलचल सेना से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि किसी भी पूर्व सेनाध्यक्ष की आत्मकथा में रणनीतिक निर्णयों और सैन्य अभियानों का उल्लेख बेहद संवेदनशील माना जाता है। बिना मंजूरी ऐसे दस्तावेजों का सार्वजनिक होना सुरक्षा प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है। जनरल नरवणे का कार्यकाल और पुस्तक का महत्व जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारतीय थलसेना प्रमुख के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल के दौरान भारत ने न केवल गलवान जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना किया, बल्कि चीन के साथ सैन्य व कूटनीतिक स्तर पर कई अहम निर्णय भी लिए। ऐसे में उनकी आत्मकथा को सैन्य इतिहास के एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में देखा जा रहा था। फिलहाल, दिल्ली पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस लीक से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

अब ईपीएफ निकासी होगी झटपट: अप्रैल में लॉन्च होगा EPFO 3.0 मोबाइल ऐप, UPI से सीधे खाते में आएंगे पैसे

डिजिटल डेस्क: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों खाताधारकों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। ऑनलाइन सेवाओं को और सरल, तेज़ व यूज़र-फ्रेंडली बनाने की दिशा में EPFO अब एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। EPFO 3.0 के तहत जल्द ही कर्मचारी अपने ईपीएफ खाते से यूपीआई (UPI) के जरिए तत्काल राशि निकाल सकेंगे। इसके लिए अप्रैल 2026 में EPFO का नया मोबाइल एप लॉन्च किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस नए मोबाइल एप के जरिए कर्मचारी भविष्य निधि खाते से सीधे अपने बैंक खाते में यूपीआई के माध्यम से रकम ट्रांसफर कर सकेंगे। यानी अब लंबी प्रक्रिया, इंतजार और बार-बार आवेदन करने की झंझट से मुक्ति मिलने वाली है। ट्रायल सफल, अप्रैल में लॉन्च की तैयारी श्रम मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि मोबाइल ऐप और यूपीआई आधारित निकासी सुविधा का ट्रायल शुरू हो चुका है। फिलहाल 100 से अधिक डमी ईपीएफ खातों पर इसका परीक्षण किया जा रहा है। ट्रायल के नतीजे सकारात्मक रहे हैं और अप्रैल में इसे देशभर में लॉन्च करने की तैयारी है। कितनी रकम निकलेगी? जानिए नियम हालांकि, यूपीआई के जरिए निकासी पर कुछ सीमाएं तय होंगी। लेबर कोड के नए नियमों के तहत ईपीएफ खाते की न्यूनतम 25 प्रतिशत राशि को फ्रीज किया जाएगा। इसके बाद बची हुई राशि में से खाताधारक अपनी आवश्यकता के अनुसार यूपीआई के माध्यम से तत्काल निकासी कर सकेंगे। सिर्फ निकासी ही नहीं, ये सुविधाएं भी मिलेंगी नए मोबाइल एप के जरिए खाताधारक: ईपीएफ पासबुक बैलेंस देख सकेंगे क्लेम स्टेटस ट्रैक कर सकेंगे प्रोफाइल व केवाईसी अपडेट कर सकेंगे अन्य EPFO सेवाओं का लाभ एक ही प्लेटफॉर्म पर उठा सकेंगे हालांकि, यूएएन पोर्टल और उमंग ऐप की मौजूदा सेवाएं भी पहले की तरह उपलब्ध रहेंगी। नया ऐप केवल एक अतिरिक्त और तेज़ विकल्प होगा। अभी कैसी है निकासी प्रक्रिया? वर्तमान में ईपीएफ खाताधारकों को राशि निकालने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है, जिसमें कई बार लंबा समय लग जाता है। हालांकि ऑटो-सेटलमेंट मोड के तहत दावा दाखिल होने के तीन दिनों के भीतर भुगतान हो जाता है। हाल ही में EPFO ने ऑटो-सेटलमेंट की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी है। हर साल 5 करोड़ से ज्यादा दावे मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, EPFO हर साल 5 करोड़ से अधिक दावों का निपटान और भुगतान करता है। ऐसे में यूपीआई आधारित तत्काल निकासी सुविधा लागू होने से न सिर्फ कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि EPFO की कार्यप्रणाली भी और अधिक डिजिटल व पारदर्शी बनेगी। कुल मिलाकर, EPFO 3.0 के साथ भविष्य निधि से जुड़ी सेवाएं अब पहले से कहीं ज्यादा तेज़, आसान और आधुनिक होने जा रही हैं। कर्मचारियों के लिए यह बदलाव डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और मजबूत कदम माना जा रहा है।

भटनी–कुसम्ही खंड का DRM ने किया विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण, गुड्स शेड व स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर जोर

वाराणसी, 09 फरवरी 2026। पूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी मंडल में माल यातायात को सुदृढ़ करने की दिशा में तेज़ी से काम हो रहा है। इसी क्रम में मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री आशीष जैन ने मंडल पर मॉल यातायात को बढ़ावा देने की कार्ययोजना के तहत मॉल टर्मिनलों की क्षमता वृद्धि एवं गुड्स शेडों के आधुनिकीकरण से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा के लिए भटनी–कुसम्ही रेल खंड का विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान DRM ने कुसम्ही रेलवे स्टेशन एवं कोल गुड्स शेड, सरदार नगर स्टेशन एवं गुड्स शेड, तथा चौरीचौरा, गौरीबाजार, बैतालपुर और नूनखार रेलवे स्टेशनों का गहन अवलोकन किया। उन्होंने माल ढुलाई से संबंधित व्यवस्थाओं, सुरक्षा मानकों और यात्री सुविधाओं की स्थिति का सूक्ष्म मूल्यांकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यों में गति लाने और निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कुसम्ही स्टेशन व कोल गुड्स शेड पर फोकस कुसम्ही कोल गुड्स शेड के निरीक्षण के दौरान DRM ने लोडिंग–अनलोडिंग व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधों और आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने अनाधिकृत प्रवेश पर रोक, सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने, निष्प्रयोज्य विद्युत पोल व स्लीपर हटाने, तथा परिचालनिक सुगमता के लिए गुड्स शेड में ट्रैक्शन (OHE) लाइन नंबर 5 और 6 की विद्युत आपूर्ति को अलग-अलग करने के निर्देश दिए। कुसम्ही स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के निरीक्षण के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, प्लेटफार्मों की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया। DRM ने स्टेशन भवन पर लगे CCTV कैमरों के ऊपर हाईलोजन लैंप लगाने, तथा रिक्त कमरों में एक कक्ष लोको पायलट व गार्ड के विश्रामालय और एक कक्ष में ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) स्थापित करने का निर्देश दिया। सरदार नगर: सुरक्षा और विद्युत व्यवस्था पर जोर सरदार नगर स्टेशन एवं गुड्स साइडिंग के निरीक्षण में DRM ने माल ढुलाई, साइडिंग की सुरक्षा और सुविधाओं के उन्नयन की समीक्षा की। उन्होंने **गुड्स शेड की सुरक्षा पुख्ता करने, विद्युत प्रकाश बढ़ाने और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्टेशन निरीक्षण के दौरान परिचालनिक व्यवस्था, स्टेशन पैनल, संरक्षा उपकरण, स्टेशन भवन और सर्कुलेटिंग एरिया की गहन जांच की गई। DRM ने प्लेटफार्म संख्या-01 पर रखे निष्प्रयोज्य सामान को हटाने, प्लेटफार्म संख्या-02 की इलेक्ट्रिकल वायरिंग दुरुस्त करने, तथा स्टेशन परिसर की हाई-मास्ट लाइट बदलने के निर्देश दिए। अन्य स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की समीक्षा चौरीचौरा, गौरीबाजार, बैतालपुर और नूनखार स्टेशनों पर DRM ने परिचालनिक व्यवस्था, स्टेशन पैनल, संरक्षा उपकरण, बर्थिंग ट्रैक, पॉइंट्स ज़ोन, स्टेशन भवन, सर्कुलेटिंग एरिया तथा यात्री सुविधाओं—जैसे सुरक्षा, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, फूड स्टॉल, वाटर बूथ, प्लेटफार्मों की स्थिति और पैदल उपरिगामी पुल के निकास—का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने प्लेटफार्म सतह दुरुस्त करने , साफ-सफाई और रख-रखाव में सुधार, तथा परिचालन में संरक्षा नियमों के कड़ाई से अनुपालन के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान DRM ने केंद्रीकृत स्टेशन पैनल और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से कार्यप्रणाली की जानकारी भी ली। इस अवसर पर वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (समन्वय) श्री विकास कुमार सिंह, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री शेख रहमान, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक श्री बलेंद्र पाल, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर श्री यशवीर सिंह, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी श्री एम. रमेश कुमार, वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर (परिचालन) श्री धर्मेंद्र यादव, मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर (गोरखपुर) श्री अमित मणि त्रिपाठी सहित वरिष्ठ पर्यवेक्षक और स्टेशन कर्मचारी उपस्थित रहे। निरीक्षण के माध्यम से मंडल में माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने, सुरक्षा को सुदृढ़ करने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

“गौ-वंश वध से वेतन–वैराग्य तक: योगी सरकार की नीतियों पर शंकराचार्य जी का तीखा प्रतिवाद, काशी में शास्त्रार्थ की घोषणा”

वाराणसी, 9 फरवरी 2026 : उत्तर प्रदेश में चल रहे 40 दिवसीय ‘उप्र राज्यमाता अभियान’ के 11वें दिन परमाराध्य उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’ ने प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर कड़ा प्रतिवाद दर्ज कराया। श्री विद्यामठ, काशी में आयोजित पत्रकारवार्ता में शंकराचार्य जी ने गौ-वंश वध, बढ़ते मांस उत्पादन, राजकीय संरक्षण में संचालित वधशालाओं और सत्ता-धर्म के अंतर्विरोधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। शंकराचार्य जी ने कहा कि वर्तमान सरकार स्वयं को “गौ-भक्त” बताती है, लेकिन सरकारी आंकड़े इस दावे की पोल खोलते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन की प्राथमिकता धर्म-रक्षा नहीं, बल्कि मांस-उद्योग को बढ़ावा देना बन गई है। इस दौरान उन्होंने आगामी 1 मार्च 2026 को काशी में ‘वेतन और वैराग्य’ विषय पर अखिल भारतीय स्तर के शास्त्रार्थ की घोषणा भी की, जिसे उन्होंने “शास्त्रीय मर्यादा की शुद्धि की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताया। सरकारी दावों पर सवाल, आंकड़ों के साथ घेरा पत्रकारवार्ता में शंकराचार्य जी ने कहा कि प्रदेश के पशुपालन मंत्री के माध्यम से यह स्वीकारोक्ति कराई गई कि सरकार गाय नहीं, बल्कि भैंस, बकरा और सुअर का वध कराती है। उन्होंने इसे हिन्दू समाज और गुरु गोरखनाथ की परंपरा के विपरीत बताया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष **2017 में प्रदेश में मांस उत्पादन जहां लगभग 7.5 लाख टन था, वहीं वर्तमान में यह बढ़कर 13 लाख टन से अधिक हो गया है। उनके अनुसार, कागजों पर वधशालाओं की संख्या भले घटी हो, लेकिन पशु-वध की गति और मात्रा में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। शंकराचार्य जी ने यह भी कहा कि जिन गतिविधियों को पहले अपराध माना जाता था, आज उन्हें “उद्योग” का दर्जा देकर 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी (5 करोड़ रुपये तक) दी जा रही है। उनका अनुमान है कि बीते नौ वर्षों में प्रदेश में 16 करोड़ से अधिक निरपराध जीवों, जिनमें लगभग 4 करोड़ भैंस-वंश शामिल हैं, का वध हुआ है। केन्द्रीय बजट और चुनावी चंदे पर भी निशाना उन्होंने केन्द्रीय बजट 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि मांस निर्यातकों को दी गई 3 प्रतिशत अतिरिक्त ड्यूटी-फ्री छूट यह दर्शाती है कि शासन की दिशा किस ओर है। साथ ही, उन्होंने बड़े मांस निर्यात समूहों से मिलने वाले चुनावी चंदे और उन्हें मिल रहे राजकीय संरक्षण पर भी सवाल उठाए। ‘वेतन बनाम वैराग्य’ का शास्त्रीय विमर्श शंकराचार्य जी ने शास्त्रीय संदर्भ देते हुए कहा कि सिद्ध सिद्धांत पद्धति के अनुसार संन्यासी के लिए ‘भृति’ (वेतन) विष तुल्य है। उन्होंने तर्क दिया कि जो व्यक्ति एक ओर संन्यासी-महंत की परंपरा से जुड़ा है और दूसरी ओर उसी राजकोष से वेतन व सुविधाएं ले रहा है, जो हिंसक राजस्व से भरा है—उसके लिए धर्म-रक्षा का दावा कैसे संभव है? इसी शास्त्रीय द्वंद्व के समाधान हेतु उन्होंने तीन चरणों के कार्यक्रम की घोषणा की— 19 फरवरी 2026: देशभर में स्वतंत्र विमर्श 1 मार्च 2026: काशी में अखिल भारतीय संत-विद्वद्गोष्ठी और ‘वेतन बनाम वैराग्य’ पर शास्त्रार्थ 11 मार्च 2026: लखनऊ में अभियान का अंतिम निष्कर्ष और आगामी “धर्म-शासनादेश” गोमाता को ‘राज्यमाता’ घोषित करने की मांग पत्रकारवार्ता के अंत में शंकराचार्य जी ने आशा जताई कि शेष दिनों में सरकार आत्म-चिंतन करेगी और गोमाता को ‘राज्यमाता’ घोषित कर पशु-वध और मांस-उद्योग से जुड़े इस “क्रूर कारोबार” पर रोक लगाएगी। धर्म, शासन और समाज के इस टकराव ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति और नीतियों पर व्यापक बहस को जन्म दे दिया है, जिसकी गूंज आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।