टेक्नोलॉजी आधारित क्रिटिकल केयर को नई दिशा, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के लिए 100% NQAS प्रमाणन का लक्ष्य

नई दिल्ली। देश की स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक के साथ सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री J. P. Nadda ने यशोदा मेडिसिटी में एआई-सक्षम (AI-Enabled) ई-आईसीयू कमांड सेंटर का उद्घाटन किया। इस अत्याधुनिक केंद्र का उद्देश्य गंभीर मरीजों को रियल-टाइम मॉनिटरिंग, त्वरित हस्तक्षेप और सटीक निदान की सुविधा उपलब्ध कराना है।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य सेवाएं भविष्य की आवश्यकता ही नहीं, बल्कि वर्तमान की अनिवार्यता बन चुकी हैं। एआई-सक्षम ई-आईसीयू के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टर दूरस्थ स्थानों से भी मरीजों की निगरानी कर सकेंगे, जिससे आपात स्थितियों में तुरंत निर्णय लिया जा सकेगा और मृत्यु दर में कमी लाई जा सकेगी।

एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाएं: समय पर उपचार और सटीक निदान

श्री नड्डा ने कहा कि एआई तकनीक गंभीर देखभाल (क्रिटिकल केयर) में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। इसके माध्यम से:

  • मरीजों की 24×7 रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी
  • डेटा आधारित निर्णय से उपचार अधिक सटीक होगा
  • जटिल मामलों में विशेषज्ञों की तुरंत सलाह उपलब्ध होगी
  • ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के अस्पतालों को भी बड़े मेडिकल नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा

उन्होंने बताया कि तकनीक का यह एकीकरण “रोगी-केंद्रित और परिणाम-उन्मुख” स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में बड़ा कदम है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का विस्तार: 1.81 लाख से अधिक संचालन में

केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि देशभर में अब तक 1.81 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हो चुके हैं। इनमें से 50,000 से अधिक केंद्रों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत प्रमाणित किया जा चुका है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों में सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को 100% NQAS प्रमाणन दिलाना है, ताकि देश के हर नागरिक को गुणवत्ता युक्त प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध हो सके।

SAHI पोर्टल और BODH पहल: स्वास्थ्य क्षेत्र में नैतिक एआई को बढ़ावा

स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के जिम्मेदार और प्रमाणित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने SAHI पोर्टल और BODH पहल की शुरुआत की है। इन पहलों का उद्देश्य है:

  • स्वास्थ्य सेवाओं में एआई टूल्स का वैध और नैतिक उपयोग
  • डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना
  • प्रमाणित और वैज्ञानिक रूप से सत्यापित एआई समाधानों को बढ़ावा देना

श्री नड्डा ने कहा कि भारत एआई-आधारित हेल्थ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है।अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि Ayushman Bharat Yojana के अंतर्गत कैंसर की पहचान के 90 दिनों के भीतर उपचार शुरू करने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि आयुष्मान भारत योजना देश के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को समयबद्ध और सुलभ स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने में प्रभावी साबित हो रही है।

यशोदा मेडिसिटी में स्थापित एआई-सक्षम ई-आईसीयू कमांड सेंटर को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में “डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन” का प्रतीक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मॉडल को अन्य राज्यों और निजी-सरकारी अस्पतालों में भी लागू किया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि “स्वस्थ भारत” का संकल्प केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने से नहीं, बल्कि गुणवत्ता, तकनीक और सुलभता को एक साथ जोड़ने से पूरा होगा।

देश में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और गुणवत्ता सुधार की दिशा में यह पहल एक मजबूत और दूरदर्शी कदम मानी जा रही है।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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