नई दिल्ली। भारत सरकार ने देश की अगली जनगणना को लेकर ऐतिहासिक फैसला लेते हुए डिजिटल जनगणना–2027 का विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है। गुरुवार को केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, जनगणना का पहला चरण (हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग सेंसस)1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। इस चरण में देशभर के प्रत्येक घर से *ल33 अहम सवाल पूछे जाएंगे, जो पूरी तरह डिजिटल माध्यम से दर्ज किए जाएंगे।
यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप, टैबलेट और सुरक्षित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए आंकड़े जुटाए जाएंगे।
पहला चरण: घर और सुविधाओं की होगी पूरी गणना
जनगणना का पहला चरण हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन कहलाता है। इसमें नागरिकों की व्यक्तिगत पहचान नहीं, बल्कि घर, आवासीय स्थिति और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी।
इन 33 सवालों में मुख्य रूप से शामिल होंगे—
- घर पक्का है या कच्चा
- मकान का उपयोग (रिहायशी/व्यावसायिक)
- घर में कितने कमरे हैं
- पीने के पानी की सुविधा
- शौचालय और नालियों की स्थिति
- बिजली, एलपीजी, इंटरनेट की उपलब्धता
- वाहन, टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर जैसी सुविधाएं
सरकार का उद्देश्य इन सवालों के जरिए देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और जीवन स्तर की वास्तविक तस्वीर सामने लाना है।
डिजिटल जनगणना से क्या बदलेगा?
इस बार की जनगणना कई मायनों में खास मानी जा रही है
- पेपरलेस प्रक्रिया: कागज़ी फॉर्म की जगह डिजिटल एंट्री
- तेज़ और सटीक डेटा: रियल-टाइम अपलोड से गलती की संभावना कम
- डेटा सुरक्षा: एन्क्रिप्टेड सिस्टम, जानकारी पूरी तरह गोपनीय
- स्वयं-गणना का विकल्प: नागरिक चाहें तो खुद भी ऑनलाइन जानकारी भर सकेंगे
सरकार का दावा है कि इससे न केवल समय और लागत बचेगी, बल्कि नीतिगत फैसलों के लिए अधिक भरोसेमंद आंकड़े उपलब्ध होंगे।
दूसरा चरण: जनसंख्या गणना 2027 में
पहले चरण के बाद दूसरा और सबसे अहम चरण वर्ष 2027 में होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक जानकारी दर्ज की जाएगी। इसी चरण को वास्तविक जनसंख्या जनगणना माना जाता है।
इस डेटा का उपयोग—
- संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन
- सरकारी योजनाओं की रूपरेखा
- आरक्षण और सामाजिक नीतियों
- शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार नीति जैसे बड़े फैसलों में किया जाएगा।
10 साल बाद हो रही है जनगणना
गौरतलब है कि भारत में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टल गई थी। ऐसे में 2027 की जनगणना 16 साल बाद देश की जनसंख्या और सामाजिक संरचना का अद्यतन चित्र पेश करेगी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जनगणना में दी गई हर जानकारी कानूनी रूप से गोपनीय रहेगी और इसका इस्तेमाल केवल सांख्यिकीय व नीतिगत उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।