भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे अधिकारियों-कर्मचारियों की प्रोन्नति पर ब्रेक, एफआईआर या चार्जशीट वालों के लिए निगरानी स्वच्छता अनिवार्य
पटना। बिहार सरकार ने प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रोन्नति (प्रमोशन) केवल वरिष्ठता या पद रिक्त होने के आधार पर नहीं होगी, बल्कि उनके पूरे सेवा रिकॉर्ड और आचरण की गहन जांच के बाद ही फैसला लिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन कर्मियों पर एफआईआर दर्ज है या आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल हो चुका है, उनकी प्रोन्नति से पहले निगरानी स्वच्छता (Vigilance Clearance) लेना अनिवार्य होगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने और ईमानदार अफसरों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है। इसके तहत राज्य सरकार साल में दो बार अधिकारियों-कर्मचारियों की विशेष सूची तैयार करेगी, जिसमें उनके खिलाफ लंबित मामलों, जांच की स्थिति और विभागीय कार्रवाई का पूरा ब्यौरा शामिल होगा।
नई व्यवस्था के तहत प्रोन्नति पर विचार करते समय अधिकारियों के—
- सेवा रिकॉर्ड और गोपनीय चरित्र प्रविष्टि (ACR/APAR)
- किसी भी प्रकार की एफआईआर या चार्जशीट की स्थिति
- निगरानी, आर्थिक अपराध इकाई या अन्य जांच एजेंसियों में लंबित मामले
- विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी।
निगरानी स्वच्छता होगी अनिवार्य
यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी का नाम किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या अनियमितता से जुड़े मामले में आता है, तो उसे निगरानी स्वच्छता प्रमाण पत्र के बिना प्रमोशन नहीं दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संवेदनशील और उच्च पदों पर केवल स्वच्छ छवि वाले अफसर ही नियुक्त हों।
ईमानदार अफसरों को मिलेगा फायदा
सरकार का मानना है कि इस फैसले से जहां एक ओर भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों पर दबाव बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का मनोबल भी मजबूत होगा। प्रशासनिक हलकों में इसे गवर्नेंस सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से प्रोन्नति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और राजनीतिक या बाहरी दबाव में गलत फैसलों पर रोक लगेगी। हालांकि, कुछ संगठनों ने आशंका जताई है कि लंबित मामलों के कारण कई अधिकारियों की प्रोन्नति अटक सकती है, लेकिन सरकार का तर्क है कि न्यायपूर्ण और साफ-सुथरी व्यवस्था के लिए यह जरूरी है।