मार्च 1, 2026। ईरान के 86-साल के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अब इस दुनिया में नहीं रहे। ईरानी सरकारी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई और मिसाइल हमलों के दौरान उन्होंने तेहरान में अपने कार्यालय/कमान केंद्र पर हुए हमले में मौत पाई। इस हमले को संयुक्त रूप से यूएस-इजरायल अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है जिसमें वरिष्ठ राजनैतिक और सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाया गया था।
ईरानी राज्य टेलीविजन और सरकारी एजेंसियों ने खामेनेई की मौत की पुष्टि करते हुए 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियाँ भी घोषित की हैं। बताया गया है कि उनके साथ परिवार के कुछ सदस्य भी हमले में मारे गए।
हमले का परिदृश्य और प्रतिक्रिया
- संयुक्त अमेरिकी-इजरायली मिसाइल और हवाई हमलों को सबसे बड़े अभियान के रूप में पेश किया गया, जिसका उद्देश्य ईरान के सैन्य और नेतृत्व ढांचे को कमजोर करना था।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई की मौत की घोषणा करते हुए इसे “इतिहास के सबसे खतरनाक नेताओं में से एक” के अंत के रूप में वर्णित किया और ईरानियों से मौजूदा शासन को बदलने का आह्वान किया।
- इजरायली प्रधानमंत्री ने भी इस अभियान की पुष्टि की और कहा कि खामेनेई के ठिकानों पर भारी नुकसान हुआ है।
खामेनेई का जीवन और सत्ता में सफर
अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल, 1939 को ईरान के मशहद शहर में एक साधारण मौलवी परिवार में हुआ था। उन्होंने बेहद कम उम्र से धार्मिक शिक्षा शुरू की और कुम में अध्ययन के दौरान ही मौलवी बन गए। यहां उनकी मुलाकात इस्लामी क्रांति के मुख्य नेताओं में से एक अयातुल्ला रुहुल्लाह खुमैनी से हुई, जिन्होंने उनके विचारों और राजनीतिक उभरने को गहरा प्रभाव दिया। धीरे-धीरे वे खुमैनी के सबसे भरोसेमंद शागिर्दों में शामिल हुए।
खामेनेई ने ईरान-इराक युद्ध, सरकार के निर्देशन और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति जैसे महत्वपूर्ण चरणों को संभाला। 1989 में, अयातुल्ला रुहुल्लाह खुमैनी के μετά उनके निधन के बाद वह ईरान के सुप्रीम लीडर बने, और करीब 36 साल तक इस पद पर रहे — अपनी मृत्यु तक ईरान की राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक शक्ति के शीर्ष पर।
प्रभाव और आगे क्या?
उनकी मौत के साथ ही ईरान में अगले नेतृत्व को लेकर राजनीतिक अस्थिरता और शक्ति संघर्ष की संभावना बढ़ गई है, क्योंकि सुप्रीम लीडर का पद ‘विलायत-ए-फकीह’ — मुख्य धार्मिक विद्वान की भूमिका — पर आधारित है। किसी एक स्पष्ट उत्तराधिकारी की घोषणा अभी तक नहीं हुई है, जिससे रूस, चीन और क्षेत्र के अन्य देशों के साथ संबंधों और मध्य-पूर्व की राजनीतिक स्थिति पर अनिश्चितता बनी हुई है।
यह घटना मध्य-पूर्व में तनाव को और बढ़ा सकती है, जिसके व्यापक प्रभाव वैश्विक तेल बाजार, कूटनीति, सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय मामलों में अभी उभर रहे हैं।