बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। अपने निलंबन के विरोध में अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को बरेली जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरना देकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अपने निलंबन को “सुनियोजित साजिश” करार देते हुए कहा कि उन्हें जानबूझकर मानसिक और प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

धरने के दौरान अलंकार अग्निहोत्री ने जिलाधिकारी से यह मांग की कि उन फोन कॉल्स की जानकारी सार्वजनिक की जाए, जिनमें कथित तौर पर पंडितों और सनातन परंपराओं के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना था कि जब उन्होंने इस मुद्दे को उठाया, तभी से उनके खिलाफ कार्रवाई की पटकथा लिखी जाने लगी।

UGC विवाद से जुड़ा है मामला

गौरतलब है कि अलंकार अग्निहोत्री ने हाल ही में UGC नियमों और प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के कथित अपमान को लेकर सार्वजनिक रूप से इस्तीफा दिया था। उनका यह कदम सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया था। इसके कुछ ही समय बाद राज्य सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

“मुझे सच बोलने की सजा दी गई”, धरने के दौरान अग्निहोत्री ने कहा,

“मैंने संविधान और सनातन मूल्यों की बात की। इसके बदले मुझे निलंबन दे दिया गया। यह कार्रवाई निष्पक्ष नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें प्रशासनिक दबाव में रखने और कार्यालय में “बंधक” बनाने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न की गईं।

प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार

वहीं, जिला प्रशासन ने अलंकार अग्निहोत्री के बंधक बनाए जाने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले में सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत अपनाई गई हैं और किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या अवैध कार्रवाई नहीं की गई।

जांच मंडलायुक्त को सौंपी गई

राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच मंडलायुक्त को सौंप दी है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एक ओर इसे अधिकारी की व्यक्तिगत असहमति और अनुशासन का मामला बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर समर्थक इसे “विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता” से जोड़कर देख रहे हैं।

अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि अलंकार अग्निहोत्री का निलंबन प्रशासनिक कार्रवाई था या फिर, जैसा वे दावा कर रहे हैं, एक सुनियोजित साजिश।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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