नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात पर पड़ रहा है। ईरान पर हुए हमले के बाद शनिवार को भारत से संचालित 410 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गईं, जबकि रविवार को 444 और इंटरनेशनल फ्लाइट्स रद्द किए जाने की आशंका जताई जा रही है। बदलते हालात के बीच विमानन क्षेत्र में अनिश्चितता और यात्रियों की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।

DGCA की सख्त निगरानी

एविएशन रेगुलेटर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए निगरानी और तेज कर दी है। DGCA एयरलाइन कंपनियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है ताकि सुरक्षा मानकों और ऑपरेशनल प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जाएगा।

मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में लाखों भारतीय कामकाजी और व्यावसायिक कारणों से रहते हैं। एयरस्पेस बंद होने और उड़ानों के रद्द होने के कारण बड़ी संख्या में भारतीय यात्री दुबई, अबू धाबी और अन्य खाड़ी देशों के एयरपोर्ट पर फंस गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में यात्रियों को एयरपोर्ट लाउंज और टर्मिनलों में इंतजार करते देखा जा सकता है। कई लोगों ने टिकट रद्द होने, वैकल्पिक उड़ान न मिलने और होटल व्यवस्था की कमी को लेकर नाराज़गी भी जताई है।

एअर इंडिया ने घटाईं सेवाएं

बढ़ते तनाव को देखते हुए एअर इंडिया ने अपनी निर्धारित अंतरराष्ट्रीय सेवाओं में और कटौती करने का फैसला लिया है। एयरलाइन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी ट्रैवल एडवाइजरी में कहा है कि मिडिल ईस्ट क्षेत्र की अस्थिर स्थिति को देखते हुए सुरक्षा कारणों से कुछ मार्गों पर उड़ान संचालन अस्थायी रूप से स्थगित किया जा रहा है।

एयरलाइन ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट रवाना होने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की जांच कर लें। साथ ही, प्रभावित यात्रियों के लिए रीशेड्यूलिंग और रिफंड की सुविधा उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर व्यापक असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो इसका असर केवल भारत ही नहीं, बल्कि यूरोप और एशिया के बीच संचालित कई प्रमुख रूट्स पर भी पड़ सकता है। कई एयरलाइंस ने ईरानी एयरस्पेस से बचते हुए वैकल्पिक रूट अपनाए हैं, जिससे उड़ानों की अवधि और लागत दोनों बढ़ रही हैं।

सरकार और विमानन कंपनियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं। यदि क्षेत्र में स्थिति सामान्य होती है तो उड़ान सेवाएं धीरे-धीरे बहाल की जा सकती हैं, लेकिन फिलहाल यात्रियों को धैर्य और सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक तनाव का प्रभाव अब सीधे आम यात्रियों की जिंदगी पर भी पड़ने लगा है। आने वाले 24 से 48 घंटे इस संकट की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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