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नई दिल्ली। भारतीय लोकतंत्र के केंद्र में जनसेवा को सर्वोपरि रखने के संकल्प के साथ आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का लोकार्पण किया। इस अवसर को देश की प्रशासनिक संस्कृति में परिवर्तन और सेवा-आधारित शासन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।

11 वर्षों की सेवा-भावना का प्रतीक

‘सेवा तीर्थ’ केवल एक भवन नहीं, बल्कि पिछले 11 वर्षों से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में संचालित सेवा-भाव से प्रेरित शासन की सोच का मूर्त रूप है। इस परिसर को आधुनिक प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया गया है, ताकि निर्णय-प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और जन-केंद्रित हो सके।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह परिसर “सरकार की शक्ति का नहीं, बल्कि सेवा के संकल्प का प्रतीक” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यहां से लिए जाने वाले हर निर्णय का केंद्रबिंदु देश के 140 करोड़ नागरिक होंगे।

औपनिवेशिक सोच से जनसेवा की ओर

नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक ब्रिटिश काल में प्रशासनिक नियंत्रण और हुकूमत की सोच के तहत निर्मित किए गए थे। प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में कहा कि स्वतंत्र भारत अब उसी स्थान से सेवा और कर्तव्य की नई संस्कृति को आगे बढ़ा रहा है।

इसी क्रम में निर्मित कर्तव्य भवन और ‘सेवा तीर्थ’ जैसे आधुनिक परिसरों को जनता की आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप डिजाइन किया गया है। ये इमारतें शासन की मानसिकता में आए बदलाव—हुकूमत से सेवा की ओर—को दर्शाती हैं।

विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

सरकार का मानना है कि ‘सेवा तीर्थ’ से प्रशासनिक कार्यों में समन्वय, तकनीकी दक्षता और निर्णय लेने की गति में सुधार होगा। इसका सीधा लाभ आम नागरिकों तक योजनाओं और जन-कल्याणकारी कार्यक्रमों की बेहतर पहुँच के रूप में दिखाई देगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह परिसर विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मील का पत्थर सिद्ध होगा। यहां से लिए गए फैसले किसी विशेष वर्ग या सत्ता के केंद्रित दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि समग्र राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर होंगे।

 “अमृत भावना” के साथ समर्पण

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि अमृत काल की भावना के साथ ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ को देश की जनता को समर्पित किया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की सच्ची शक्ति—जनता की अपेक्षाओं और विश्वास—को समर्पित बताया।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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