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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के ताबड़तोड़ बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने ग्रेटर नोएडा स्थित यथार्थ अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह पिछले कुछ समय से लिवर कैंसर के चौथे स्टेज से जूझ रहे थे और तबीयत बिगड़ने के बाद वेंटिलेटर पर थे। पिता की गंभीर हालत की खबर मिलते ही रिंकू सिंह टी-20 विश्वकप के बीच टीम का साथ छोड़कर अस्पताल पहुंचे थे।

संघर्षों से भरा रहा परिवार का सफर

रिंकू सिंह की सफलता के पीछे उनके पिता खानचंद सिंह का त्याग और संघर्ष सबसे बड़ी ताकत रहा। वह घर-घर जाकर गैस सिलेंडर बांटने का काम करते थे। बेहद सीमित आय में परिवार का पालन-पोषण करना आसान नहीं था। खानचंद सिंह की मासिक कमाई मात्र सात से आठ हजार रुपये के बीच थी। परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था।

रिंकू का बचपन दो कमरों के छोटे से घर में बीता। हालात ऐसे थे कि उन्हें झाड़ू-पोछा तक का काम करना पड़ा। एक समय ऐसा भी आया जब उनके बड़े भाई ने उनकी नौकरी एक सफाई कर्मचारी के रूप में लगवा दी, लेकिन रिंकू वहां सिर्फ एक दिन ही काम कर पाए। उन्होंने ठान लिया कि अब वह क्रिकेट में ही अपना भविष्य बनाएंगे।

पिता से मिली डांट, फिर बना सबसे बड़ा सहारा

रिंकू सिंह ने एक इंटरव्यू में बताया था कि साल 2012 में क्रिकेट खेलने को लेकर उन्हें पिता से डांट और मार भी खानी पड़ी थी। शुरुआत में खानचंद सिंह बेटे के क्रिकेट करियर के फैसले के खिलाफ थे। लेकिन उसी साल रिंकू ने एक टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन कर इनाम में एक बाइक जीती।

इसके बाद पिता का नजरिया बदला और उन्होंने बेटे का पूरा साथ दिया। यही बाइक बाद में खानचंद सिंह के काम आई, जिससे वह घर-घर सिलेंडर पहुंचाने लगे।

 कर्ज, मेहनत और फिर किस्मत का खुलना

परिवार की जिम्मेदारियों के चलते एक समय खानचंद सिंह करीब पांच लाख रुपये के कर्ज में डूब गए थे। रिंकू के भाई ऑटो चलाकर घर चलाने में मदद करते थे, जबकि एक भाई कोचिंग संस्थान में काम करता है। उनकी बहन यूट्यूब पर वीडियो बनाती हैं।

क्रिकेट खेलते समय रिंकू को जो डेली अलाउंस मिलता था, उसमें से भी वह बचत किया करते थे। संघर्षों के बीच उनकी किस्मत तब बदली जब Kolkata Knight Riders ने उन्हें आईपीएल में 55 लाख रुपये में खरीदा।

इसके बाद Gujarat Titans के खिलाफ एक मैच में उन्होंने पांच गेंदों पर लगातार पांच छक्के जड़कर सनसनी मचा दी। इस पारी ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। बाद में कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें 13 करोड़ रुपये में रिटेन किया।

पिता को समर्पित सफलता

कामयाबी मिलने के बाद रिंकू सिंह ने अपने परिवार के सपनों को साकार किया। उन्होंने करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये में एक भव्य घर बनवाकर पिता को उपहार में दिया। साथ ही करीब साढ़े तीन लाख रुपये की कावासाकी बाइक भी उन्हें भेंट की।

कुछ महीने पहले खानचंद सिंह को लिवर कैंसर का पता चला था। तब से उनका इलाज चल रहा था, लेकिन आखिरकार वह जिंदगी की जंग हार गए।

रिंकू सिंह की कहानी संघर्ष, मेहनत और पारिवारिक त्याग की मिसाल है। पिता के निधन से जहां परिवार गहरे शोक में है, वहीं देशभर के क्रिकेट प्रेमी भी इस दुख की घड़ी में रिंकू सिंह के साथ खड़े हैं।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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