सर्वाइकल कैंसर आज के समय में महिलाओं की सेहत से जुड़ी एक गंभीर और संवेदनशील समस्या बन चुका है। भारत में हर साल बड़ी संख्या में महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आती हैं। इसी बीच आम महिलाओं के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या कई बार गर्भवती होना (बार-बार प्रेग्नेंसी) सर्वाइकल कैंसर के खतरे को बढ़ाता है?

इस विषय पर समाज में कई तरह की बातें और भ्रम फैले हुए हैं। आइए डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय के आधार पर इस मुद्दे को विस्तार से समझते हैं।

सर्वाइकल कैंसर क्या है?

सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स (Cervix) में होने वाला कैंसर है। यह बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआत में इसके लक्षण बहुत मामूली होते हैं, जिस कारण कई बार महिलाएं समय पर इसे पहचान नहीं पातीं।

डॉक्टरों के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण है ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण। यह एक आम वायरस है, जो यौन संपर्क के जरिए फैलता है। ज्यादातर मामलों में शरीर की इम्युनिटी इसे खत्म कर देती है, लेकिन अगर यह वायरस लंबे समय तक शरीर में बना रहे तो कैंसर का रूप ले सकता है।

क्या बार-बार प्रेग्नेंसी से बढ़ता है सर्वाइकल कैंसर का खतरा?

विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार प्रेग्नेंसी होना सीधे तौर पर सर्वाइकल कैंसर की वजह नहीं है, लेकिन इससे जुड़े कुछ कारक इस खतरे को बढ़ा सकते हैं।

डॉक्टर बताते हैं कि:

  • कई बार गर्भधारण करने से सर्विक्स पर बार-बार खिंचाव और चोट जैसी स्थिति बनती है।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो HPV वायरस को सक्रिय बना सकते हैं।
  • जिन महिलाओं को पहले से HPV संक्रमण है, उनमें ज्यादा बार प्रेग्नेंसी होने पर सर्वाइकल कैंसर का जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर महिला जो कई बार मां बनती है, उसे सर्वाइकल कैंसर होगा—यह बिल्कुल सही नहीं है।

डॉक्टरों की राय क्या कहती है?

गायनेकोलॉजिस्ट्स और ऑन्कोलॉजिस्ट्स के मुताबिक:

  • सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण HPV संक्रमण है, न कि प्रेग्नेंसी की संख्या।
  • कम उम्र में शादी और जल्दी गर्भधारण
  • असुरक्षित यौन संबंध
  • बार-बार बच्चों का जन्म
  • धूम्रपान और तंबाकू का सेवन

* लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल

 ये सभी फैक्टर मिलकर खतरे को बढ़ा सकते हैं।

डॉक्टरों का साफ कहना है कि सही जानकारी और समय पर जांच से इस बीमारी को रोका जा सकता है।

सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण

इस बीमारी की पहचान समय पर हो जाए तो इलाज आसान हो जाता है। इसके कुछ शुरुआती लक्षण इस प्रकार हैं:

  • पीरियड्स के दौरान या बाद में असामान्य ब्लीडिंग
  • यौन संबंध के बाद खून आना
  • पेट या कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द
  • असामान्य और बदबूदार वेजाइनल डिस्चार्ज

इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

बचाव के लिए क्या करें?

डॉक्टर महिलाओं को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं:

HPV वैक्सीनेशन: यह वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से बचाव में बेहद कारगर मानी जाती है, खासकर कम उम्र की लड़कियों के लिए।

नियमित जांच : 25 साल की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित रूप से पैप स्मीयर टेस्ट या HPV टेस्ट कराना चाहिए।

सुरक्षित यौन संबंध

सुरक्षित संबंध अपनाने से HPV संक्रमण का खतरा कम होता है।

स्वस्थ जीवनशैली

धूम्रपान से बचें, संतुलित आहार लें और इम्युनिटी मजबूत रखें।बार-बार प्रेग्नेंसी होना अपने आप में सर्वाइकल कैंसर का सीधा कारण नहीं है, लेकिन अगर इसके साथ HPV संक्रमण और अन्य जोखिम कारक जुड़े हों, तो खतरा बढ़ सकता है। सही समय पर जांच, जागरूकता और सावधानी अपनाकर इस गंभीर बीमारी से बचाव पूरी तरह संभव है।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *