मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब भरी आंखों और दृढ़ संकल्प के साथ सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस शपथ के साथ ही वह महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बन गईं। लोकभवन में आयोजित गरिमामय समारोह में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण के दौरान सुनेत्रा पवार की आंखों में भावनाएं साफ झलक रही थीं। यह सिर्फ एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि दशकों के राजनीतिक संघर्ष, सामाजिक प्रतिबद्धता और महिलाओं के बढ़ते नेतृत्व का प्रतीक क्षण था। समारोह में सत्ता और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता, प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
महिला नेतृत्व को मिला नया आयाम
सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री बनना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे महाराष्ट्र की राजनीति में महिला सशक्तिकरण की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। अब तक राज्य की सत्ता में महिलाओं की भागीदारी सीमित रही है, ऐसे में यह नियुक्ति आने वाले समय में नई राजनीतिक धारा तय कर सकती है।
अनुभव और विश्वास का मेल
राजनीतिक हलकों में सुनेत्रा पवार को एक संतुलित, शांत और जमीनी मुद्दों से जुड़ी नेता के रूप में जाना जाता है। सामाजिक कार्यों से लेकर संगठनात्मक जिम्मेदारियों तक, उनका अनुभव अब राज्य के शीर्ष नेतृत्व में दिखाई देगा। माना जा रहा है कि वह प्रशासनिक फैसलों में समन्वय और संवेदनशीलता को प्राथमिकता देंगी।
शपथ के बाद पहला संदेश
शपथ लेने के बाद सुनेत्रा पवार ने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जवाबदेही भी है। उन्होंने राज्य की जनता का विश्वास बनाए रखने, महिलाओं, किसानों और युवाओं के हित में काम करने का संकल्प दोहराया।
राजनीति में दूरगामी असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल सत्ता संतुलन को मजबूत करेगा, बल्कि आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी असर डालेगा। खासतौर पर महिला मतदाताओं और युवा वर्ग में इसका सकारात्मक संदेश जाएगा।
कुल मिलाकर, सुनेत्रा पवार की यह शपथ महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में एक भावुक और निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज हो गई है—जहां सत्ता के गलियारों में पहली बार महिला नेतृत्व ने उपमुख्यमंत्री पद पर दस्तक दी।