नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले केंद्र सरकार ने पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा कर देशभर के उन अनाम नायकों को सम्मानित किया है, जिन्होंने सीमित संसाधनों, व्यक्तिगत संघर्षों और सामाजिक बाधाओं के बावजूद समाज सेवा को अपना जीवन बना लिया। इस वर्ष के पद्मश्री पुरस्कार विशेष रूप से उन लोगों को समर्पित हैं, जो लंबे समय से स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, कला-संस्कृति और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हैं।

सरकारी घोषणा के अनुसार, इस बार पद्मश्री पुरस्कार पाने वालों में पिछड़े वर्ग, दलित, आदिवासी और दूरदराज के इलाकों से आने वाले बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल हैं, जिनका योगदान भले ही सुर्खियों से दूर रहा हो, लेकिन उनका प्रभाव समाज की जड़ों तक पहुंचा है। सूत्रों के मुताबिक, लगभग 45 लोगों को ‘अनसंग हीरोज’ (Unsung Heroes) कैटेगरी में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।

इन विभूतियों को मिलेगा पद्मश्री सम्मान

केंद्र सरकार की ओर से जारी सूची के अनुसार अंके गौड़ा, आर्मिडा फर्नांडीज, भगवानदास रायकर, भिकल्या लाडक्या ढिंडा, बृज लाल भट्ट, बुधरी ताठी, चरण हेम्ब्रम, चिरंजीलाल यादव और धार्मिकलाल चुन्नीलाल पंड्या को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ कुमारसामी थंगराज, जम्मू-कश्मीर के डॉ पद्म गुरमेत, तमिलनाडु के डॉ पुन्नियामूर्ति नटेसन, उत्तर प्रदेश के डॉ श्याम सुंदर, राजस्थान के गफरुद्दीन मेवारती, हैली वार, इंदरजीत सिंह सिद्धू, के पजानिवेल, मध्य प्रदेश के कैलाश चंद्र पंत और हरियाणा के खेमराज सुंदरियाल को भी पद्मश्री देने का ऐलान किया गया है।

कला, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र से सम्मान

इसके अतिरिक्त कोल्लक्कयिल देवकी अम्मा, महेंद्र कुमार मिश्रा, मीर हाजीभाई कसमभाई, मोहन नागर, नरेश चंद्र देव वर्मा, निलेश मंडलेवाला, नूरुद्दीन अहमद, ओथुवर थिरुथानी, पोकिला लेखथेपी, आर कृष्णन और आरएस गोडबोले को भी पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

समर्पण और संघर्ष की मिसाल

पद्मश्री पुरस्कार पाने वालों की सूची में रघुपत सिंह, रघुवीर खेडकर, राजस्थानपति कलियप्पा गौंडर, रामा रेड्डी मामिडी, एसजी सुशीलम्मा, सांग्युसांग एस पोंगेनर, शफी शौक, श्रीरंग देवाबा लाड, सिमांचल पात्रो और सुरेश हनागावडी केएआर जैसे नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में समाज के लिए मिसाल कायम की है।

इस वर्ष के पद्म पुरस्कार 2026 यह संदेश देते हैं कि राष्ट्र केवल बड़े मंचों पर दिखने वाले चेहरों से नहीं बनता, बल्कि उन हजारों निस्वार्थ कर्मयोगियों से बनता है, जो चुपचाप समाज को बेहतर बनाने में जुटे रहते हैं। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ऐसे लोगों को सम्मान देकर सरकार ने उनके योगदान को राष्ट्रीय पहचान देने का काम किया है।

Rajnish Pandey
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