नई दिल्ली, 18 जुलाई : लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने मंगलवार को कहा कि उनकी पार्टी अपनी ‘चिंताओं’ पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ सकारात्मक चर्चा के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल हुई है। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में राजग बिहार में सभी 40 सीटें जीतेगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा सहित पार्टी के अन्य नेताओं के साथ अपनी बातचीत का ब्योरा साझा करने से इनकार करते हुए पासवान ने कहा कि उन्होंने उनकी चिंताओं का सकारात्मक समाधान किया है।

यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए चिराग पासवान ने यह स्पष्ट किया कि वह हाजीपुर से चुनाव लड़ेंगे। वर्तमान में उनके चाचा और केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस इस संसदीय सीट का लोकसभा में प्रतिनिधित्व करते हैं। पारस ने भी इस सीट पर अपना दावा किया है।

चिराग पासवान का यह कहना कि भाजपा उनकी चिंताओं का समाधान कर रही है, महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी मुख्य मांग यह थी कि सत्तारूढ़ पार्टी 2019 की तरह ही सीट के बंटवारे की व्यवस्था पर कायम रहे जब उनके दिवंगत पिता रामविलास पासवान के नेतृत्व में अविभाजित लोजपा ने छह लोकसभा क्षेत्रों पर चुनाव लड़ा था और उन्हें राज्यसभा की एक सीट भी दी गई थी।

उन्होंने कहा, ”भाजपा नेताओं के साथ अपनी चर्चा के ब्यौरे के बारे में बोलना मेरे लिए गठबंधन धर्म के खिलाफ होगा। लेकिन हां, लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बारे में मेरी पार्टी की चिंताएं विचार-विमर्श का हिस्सा थीं और भाजपा ने उनका सकारात्मक रूप से समाधान किया है।”

पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी भाजपा नीत राजग का हिस्सा होगी। चिराग के पिता और दिवंगत दलित नेता रामविलास पासवान के नेतृत्व में अविभाजित लोजपा ने 2019 में छह लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा था और भाजपा के साथ सीट के बंटवारे के तहत उसे राज्यसभा की एक सीट भी मिली थी।

लोजपा में विभाजन के बाद बने दूसरे गुट राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग के चाचा और केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस हैं, जो केंद्र के सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा हैं।

इसके तुरंत बाद, पारस ने चिराग पासवान की टिप्पणी का मजाक उड़ाते हुए कहा कि चुनाव से इतना पहले सीट बंटवारे के मुद्दों पर चर्चा नहीं की जाती है। उन्होंने हाजीपुर सीट पर अपना दावा ठोका। उन्होंने कहा कि उनके बड़े भाई रामविलास पासवान ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी चुना था और उन्हें इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए कहा था।

पारस ने कहा कि दोनों दलों के बीच बातचीत के दौरान चिराग पासवान से कई बार मिले केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने परिवार में सुलह की वकालत करते हुए उनसे मुलाकात की थी। हालांकि, उन्होंने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया। उन्होंने भाजपा के प्रति अपनी वफादारी का भी दावा किया और कहा कि उन्हें इस बात से कोई समस्या नहीं है कि उनका भतीजा फिर से राजग में शामिल हो गया है।

भाजपा ने चिराग पासवान को तो साध लिया है लेकिन यह देखा जाना बाकी है कि वह पारस से कैसे निपटती है। चिराग पासवान से जब यह पूछा गया कि क्या वह केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल होंगे, तो उन्होंने कहा कि वह इस बारे में ज्यादा चिंतित नहीं हैं क्योंकि चुनाव वैसे भी केवल आठ महीने दूर हैं। उन्होंने कहा कि वैसे भी यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार है।

अपने चाचा के साथ सुलह की संभावना के बारे में पूछे जाने पर चिराग पासवान ने कहा कि पारस उनके लिए पिता की तरह हैं। हालांकि, इस दौरान वह पारस की सार्वजनिक ‘तीखी टिप्पणियों’ का उल्लेख करना नहीं भूले। पासवान ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी कड़ी आलोचना की।

जदयू नेता के फिर से भाजपा से हाथ मिलाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि शाह जैसे नेता पहले ही ऐसी किसी संभावना से इनकार कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि फिर भी अगर ऐसा कोई घटनाक्रम होता है तो उनकी पार्टी अपने रुख पर विचार करेगी।

Rajnish Pandey
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