नई दिल्ली, 28 अगस्त : भाजपा सांसद संबित पात्रा ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा और उन्हें ‘कांग्रेस का नया मणिशंकर अय्यर’ बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ बार-बार अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल विपक्ष के ‘अहंकार और राजनीतिक हताशा’ को दर्शाता है।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर वार करते हुए भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने याद दिलाया कि कैसे पूर्व कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने वर्षों पहले प्रधानमंत्री मोदी का अपमान करके विवाद खड़ा किया था।

उन्होंने कहा, “राहुल गांधी, मणिशंकर अय्यर और संजय राउत में कोई फर्क नहीं है। इंडी गठबंधन के कुछ नेताओं में एक कॉम्पिटिशन चल रहा है। राहुल गांधी खुद कांग्रेस पार्टी के नए मणिशंकर अय्यर बन गए हैं। कांग्रेस पार्टी के मणिशंकर अय्यर युग की समाप्ति के पश्चात कोई मणिशंकर अय्यर की आवश्यकता थी, उस रिक्त स्थान को भरने का काम खुद राहुल गांधी ने कर दिया।”

भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस के एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी पर कहा, “बिहार में एक यात्रा चल रही है। लोकतंत्र में एक मर्यादा होती है, सुषमा जी ने एक बार सदन में कहा था कि हम शत्रु नहीं हैं, विचारधारा के आधार पर विरोधी हैं। आज भाषा की मर्यादा तार-तार हो रही है। आज जब ऐसी भाषा का प्रयोग किया गया है, उसके लिए आज उस पार्टी को शर्मसार होना चाहिए, जो पार्टी कभी अपने आपको भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ती है। जो पार्टी अपने आप को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ती थी, वो गांधी जी की पार्टी थी। लेकिन, आज जो पार्टी अपने आप को तथाकथित रूप से स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ती है, मगर वो आज गाली वाली पार्टी बन गई है। ये महात्मा गांधी जी की पार्टी नहीं, बल्कि तथाकथित नकली गांधी परिवार की पार्टी है। जिनमें कूट-कूट के अहंकार भरा हुआ है। जिनको लगता है कि भारतवर्ष इन्हीं का है।”

उन्होंने आगे कहा कि बिहार की जनता इस प्रकार की भाषा को देख रही है, उसे परख रही है और इसका जवाब भी देगी। इस भाषा का कोई जनक है, तो वो हैं राहुल गांधी। दरभंगा की रैली के मंच से जिस प्रकार प्रधानमंत्री मोदी के लिए कहा गया, उससे ठीक पूर्व लगभग 5-7 दिन से राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी को ‘तू’ कहकर संबोधित कर रहे हैं। पीएम मोदी 140 करोड़ जनता के प्रधानमंत्री हैं, खिसियानी बिल्ली कितना भी खंभा नोच ले। याद रखिए मर्यादा एक ऐसा विषय है, जिसे भारतवर्ष पसंद करता है और भारतवर्ष अमर्यादित भाषा को पसंद नहीं करता है।”

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