अयोध्या। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संभावित अयोध्या दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर साधु-संतों तक बहस तेज हो गई है। इसी बीच ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के एक बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर राहुल गांधी अयोध्या पहुंचते भी हैं, तो उन्हें राम मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे हिंदू नहीं हैं।
दरअसल, हाल के दिनों में यह चर्चा जोरों पर है कि राहुल गांधी राम मंदिर दर्शन के लिए अयोध्या जा सकते हैं। जैसे ही यह खबर सामने आई, वैसे ही धार्मिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ संतों ने इसे व्यक्तिगत आस्था का विषय बताया, तो वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे धार्मिक पहचान से जोड़ते हुए कड़ा रुख अपनाया।
शंकराचार्य का बयान
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम मंदिर हिंदू आस्था का केंद्र है और इसमें प्रवेश के लिए व्यक्ति का हिंदू होना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी स्वयं को हिंदू मानने की स्पष्ट घोषणा नहीं करते, ऐसे में उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। शंकराचार्य का कहना है कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं, बल्कि धार्मिक मर्यादा और परंपरा का है।
राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया
शंकराचार्य के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि राहुल गांधी का मंदिर जाना उनकी निजी आस्था का विषय है और किसी को भी उनकी धार्मिक पहचान पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। वहीं, विरोधी दल इसे कांग्रेस की “सॉफ्ट हिंदुत्व” राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं।
अयोध्या की पवित्रता और सियासत
अयोध्या लंबे समय से धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहसों का केंद्र रही है। राम मंदिर निर्माण के बाद यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है। ऐसे में किसी बड़े राजनीतिक नेता की यात्रा और उस पर दिए गए बयान स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाते हैं।
फिलहाल राहुल गांधी की अयोध्या यात्रा को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन उससे पहले ही शंकराचार्य का यह बयान देशभर में नई बहस छेड़ चुका है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और धर्म के बीच खींचतान किस दिशा में जाती है।