छपरा, 19 फरवरी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की ट्यूशन फीस के भुगतान को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शैक्षणिक सत्र 2019-20 से 2023-24 तक के लंबित ट्यूशन फीस क्लेम के भुगतान को स्वीकृति प्रदान की गई।

बैठक में कुल 50 निजी विद्यालयों द्वारा प्रस्तुत क्लेम की समीक्षा की गई। जिला एवं अनुमंडल के वरीय पदाधिकारियों द्वारा की गई विस्तृत जांच के बाद 48 विद्यालयों के दावे अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप सही पाए गए। इन विद्यालयों को ट्यूशन फीस भुगतान की स्वीकृति दे दी गई है।

हालांकि जांच के दौरान दो विद्यालयों में अनियमितता पाई गई। इन विद्यालयों द्वारा शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत नामांकित छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से ट्यूशन फीस के साथ-साथ पोषाक और पुस्तक की राशि भी वसूल की गई थी। नियमों के अनुसार अधिनियम के तहत नामांकित बच्चों को निःशुल्क पोषाक एवं पुस्तक उपलब्ध कराना विद्यालय की जिम्मेदारी है। ऐसे में इन दोनों विद्यालयों के क्लेम को अस्वीकृत कर दिया गया।

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत संबंधित निजी विद्यालय केवल ट्यूशन फीस का ही क्लेम कर सकते हैं। अन्य मदों में किसी भी प्रकार की राशि वसूलना नियमों के विरुद्ध है।

गौरतलब है कि इस अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें कमजोर वर्ग एवं अलाभकारी समूह के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों पर नामांकन हेतु अभिभावकों द्वारा ‘ज्ञानदीप’ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जाता है।

बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन ने सभी विद्यालयों को अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।

Rajnish Pandey
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