कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कथित ‘ग्रीन फाइल’ और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है। ईडी द्वारा राजनीतिक रणनीतिकार संस्था आई-पैक (I-PAC) पर की गई छापेमारी और इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हस्तक्षेप ने इस पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह कार्रवाई केवल जांच तक सीमित है या फिर इसके तार 2026 के विधानसभा चुनाव से जुड़े हुए हैं।
क्या है ‘ग्रीन फाइल’ विवाद
सूत्रों के मुताबिक, ‘ग्रीन फाइल’ उन दस्तावेजों और डिजिटल जानकारियों को कहा जा रहा है, जिनमें कथित तौर पर चुनावी रणनीति, फंडिंग और राजनीतिक अभियानों से जुड़ी अहम जानकारियां दर्ज हैं। ईडी का आरोप है कि कोयला तस्करी से जुड़े अवैध धन का एक हिस्सा आई-पैक तक पहुंचा और उसका इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों में किया गया।
आई-पैक पर ईडी की कार्रवाई
ईडी ने कोयला तस्करी मामले की जांच के सिलसिले में आई-पैक से जुड़े ठिकानों पर छापा मारा। जांच एजेंसी का दावा है कि उनके पास ऐसे सबूत हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि अवैध फंड को राजनीतिक सलाह और चुनावी प्रबंधन में लगाया गया। इसी कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुंचीं और ईडी की टीम से सवाल-जवाब किए।
ममता बनर्जी का पलटवार
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई को “राजनीतिक बदले की भावना” से प्रेरित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। ममता ने कहा कि बंगाल में लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर हमला किया जा रहा है।
भाजपा का आरोप
वहीं भाजपा ने ममता बनर्जी के हस्तक्षेप पर कड़ा एतराज जताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जांच एजेंसी को अपना काम करने से रोका गया और इससे साफ होता है कि सरकार कुछ छिपाना चाहती है। भाजपा ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा मिले, चाहे वे कितने भी बड़े पद पर क्यों न हों।
2026 चुनाव से कनेक्शन?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा विवाद 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल को प्रभावित कर सकता है। एक तरफ ममता बनर्जी इसे केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई के रूप में पेश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा इसे भ्रष्टाचार और अवैध फंडिंग का मामला बता रही है। ऐसे में ‘ग्रीन फाइल’ बंगाल की राजनीति में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकती है।
फिलहाल ईडी अपनी जांच पर कायम है और आने वाले दिनों में और पूछताछ व कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे जनसमर्थन जुटाने के अवसर के रूप में देख रही है। साफ है कि ‘ग्रीन फाइल’ विवाद ने बंगाल की राजनीति को एक बार फिर तीखे टकराव के रास्ते पर ला खड़ा किया है, जिसका असर 2026 के चुनावी रण में साफ नजर आ सकता है।