न झगड़ा, न कोर्ट-कचहरी… क्या है ‘क्वाइट डिवोर्स’, जिसे लोग चुपचाप अपना रहे हैं?

डिजिटल डेस्क | लाइफस्टाइल : आजकल रिश्तों में एक नया शब्द सुनने को मिल रहा है—‘क्वाइट डिवोर्स’। इसमें न तलाक होता है, न कानूनी लड़ाई, लेकिन पति-पत्नी भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं। आसान शब्दों में कहें तो शादी कागज़ों में बनी रहती है, पर रिश्ता दिल से खत्म हो जाता है। क्या होता है क्वाइट डिवोर्स? क्वाइट डिवोर्स में पति-पत्नी कानूनी रूप से साथ रहते हैं, लेकिन उनके बीच पति-पत्नी जैसा रिश्ता नहीं रहता। वे साथ रह सकते हैं या अलग, पर भावनात्मक जुड़ाव खत्म हो जाता है। इसे लोग “चुपचाप अलग होना” भी कहते हैं। लोग इसे क्यों चुन रहे हैं? इसके पीछे कई वजहें हैं— तलाक की झंझट से बचने के लिए बच्चों पर असर न पड़े, इसलिए पैसों और प्रॉपर्टी की परेशानी से बचाव समाज और रिश्तेदारों के सवालों से दूरी * रोज़-रोज़ के झगड़ों से शांति पाने के लिए एक्सपर्ट क्या कहते हैं? रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह तरीका कुछ लोगों के लिए आसान लग सकता है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। अगर बातचीत और समझ खत्म हो जाए, तो यह स्थिति आगे चलकर अकेलापन और तनाव बढ़ा सकती है। इसके फायदे घर में झगड़े कम होते हैं बच्चों की पढ़ाई और दिनचर्या पर कम असर कोर्ट और वकील के खर्च से राहत नुकसान भी हैं रिश्ते में अपनापन खत्म हो जाता है मानसिक तनाव बढ़ सकता है बच्चे रिश्तों को लेकर उलझन में पड़ सकते हैं क्वाइट डिवोर्स उन लोगों का रास्ता बन रहा है, जो खुला तलाक नहीं चाहते। लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि खुलकर बात करना और सही सलाह लेना आज भी रिश्ते को समझने और संभालने का सबसे बेहतर तरीका है।