नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित पारंपरिक ‘एट होम’ कार्यक्रम इस बार राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। कार्यक्रम की थीम नॉर्थ ईस्ट रखी गई थी, जिसके तहत अतिथियों से असमिया गमछा (पटका) पहनने का आग्रह किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेशी मेहमानों और अधिकांश नेताओं ने इस सांस्कृतिक प्रतीक को सम्मानपूर्वक धारण किया। लेकिन लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी बिना गमछा के नजर आए, जिसके बाद सियासत गरमा गई। नॉर्थ ईस्ट थीम और विशेष अनुरोध सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि समेत कई केंद्रीय मंत्री और विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। नॉर्थ ईस्ट की संस्कृति को सम्मान देने के उद्देश्य से सभी से असमिया गमछा पहनने का अनुरोध किया गया था। बताया गया कि राष्ट्रपति ने स्वयं इस पर विशेष आग्रह भी किया था। BJP का हमला, असम सीएम ने जताई नाराज़गी राहुल गांधी के बिना गमछा दिखने की तस्वीरें सामने आते ही भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि समय बदल सकता है, लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेता का रवैया अफसोसजनक रूप से अपरिवर्तित है। उन्होंने इसे पूर्वोत्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति असंवेदनशील और अपमानजनक कृत्य बताया। हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से लेकर विदेशी गणमान्य व्यक्तियों तक सभी ने सम्मान और गर्व के साथ पटका पहना, लेकिन राहुल गांधी अलग-थलग नजर आए। उन्होंने राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग भी की। कांग्रेस का पलटवार भाजपा के आरोपों के जवाब में कांग्रेस नेताओं ने भी मोर्चा संभाला। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद अन्य नेताओं की तस्वीरें साझा कीं, जिनमें कुछ लोग बिना गमछा के नजर आ रहे थे। कांग्रेस का कहना है कि मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है और इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। राजनीतिक संदेश बनाम सांस्कृतिक सम्मान यह विवाद ऐसे समय उठा है जब नॉर्थ ईस्ट की संस्कृति और पहचान को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान देने की कोशिशें तेज हैं। गमछा, जो असम और पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है, इस कार्यक्रम का अहम हिस्सा था। ऐसे में राहुल गांधी का बिना पटका दिखना राजनीतिक संदेश माना जा रहा है या महज एक चूक—इस पर बहस जारी है।