पटना। बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं। सत्तारूढ़ दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) के सूत्रों और वरिष्ठ नेताओं के बयानों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि होली के बाद इसी महीने निशांत की राजनीतिक एंट्री का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है। मंत्री श्रवण कुमार का बड़ा बयान राज्य सरकार में मंत्री और मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले श्रवण कुमार ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री लगभग तय हो चुकी है। उन्होंने समाचार एजेंसी (PTI) से कहा, “अब यह साफ हो गया है और फाइनल है कि निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में आएंगे। पार्टी अगले एक-दो दिन में इस संबंध में औपचारिक घोषणा कर सकती है।” श्रवण कुमार ने यह भी संकेत दिया कि निशांत कुमार को पार्टी में “बड़ी जिम्मेदारी” सौंपी जाएगी। हालांकि यह जिम्मेदारी क्या होगी, इस पर उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला जल्द लिया जाएगा। राज्यसभा की अटकलें भी तेज जब उनसे पूछा गया कि क्या निशांत कुमार को राज्यसभा भेजा जा सकता है, तो मंत्री ने कहा, “कुछ भी हो सकता है।” इस बयान के बाद सियासी गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं कि निशांत की एंट्री सीधे किसी महत्वपूर्ण पद या संवैधानिक जिम्मेदारी के साथ हो सकती है। कार्यकर्ताओं की पुरानी मांग JDU के कार्यकर्ता लंबे समय से निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में देखने की मांग कर रहे थे। पार्टी के अंदर यह धारणा बनती रही है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चर्चाओं के बीच संगठन को भविष्य के नेतृत्व की जरूरत है। ऐसे में निशांत का नाम स्वाभाविक रूप से सामने आता रहा है। हालांकि अब तक निशांत कुमार ने राजनीति से दूरी बनाए रखी थी और सार्वजनिक मंचों पर भी कम ही दिखाई देते थे। लेकिन हाल के महीनों में पार्टी के भीतर उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। क्या बनेगा नया राजनीतिक परिवार? अगर निशांत कुमार औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश करते हैं, तो नीतीश कुमार का परिवार भी बिहार के उन राजनीतिक परिवारों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनकी अगली पीढ़ी सत्ता और संगठन की कमान संभालने की तैयारी में है। यह कदम JDU के भविष्य और बिहार की राजनीति की दिशा दोनों के लिए अहम माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें JDU की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। होली के बाद सियासी रंग और गहरा होने की पूरी संभावना है।