लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जनसंख्या संतुलन, घर वापसी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों और सामाजिक समरसता जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से अपने विचार रखे। उनके संबोधन में समाज की संरचना, कानून के पालन और सांस्कृतिक पहचान जैसे विषय प्रमुख रहे। “तीन बच्चे औसत न हों तो समाज संकट में” अपने वक्तव्य में भागवत ने जनसंख्या के मुद्दे पर वैज्ञानिकों का हवाला देते हुए कहा कि जिस समाज में औसतन तीन बच्चे नहीं होते, वह समाज भविष्य में कमजोर या समाप्त हो सकता है। उन्होंने इसे केवल संख्या का सवाल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक निरंतरता से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने संकेत दिया कि समाज को अपनी जनसंख्या संरचना पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए संतुलित और सशक्त सामाजिक ढांचा तैयार किया जा सके। “घर वापसी का काम तेज होना चाहिए” धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक जुड़ाव के विषय पर बोलते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि “घर वापसी का काम तेज होना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग हिंदू धर्म में लौटे हैं, उनका ध्यान रखना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी आवश्यक है। उनके अनुसार, यह केवल धार्मिक परिवर्तन का प्रश्न नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्स्थापन और सामाजिक समरसता का प्रयास है। UGC नियमों पर क्या बोले? विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से जुड़े विवादों पर भागवत ने स्पष्ट कहा कि “यूजीसी नियम किसी के खिलाफ नहीं है।” उन्होंने कानून के पालन पर जोर देते हुए कहा, “कानून सभी को मानना चाहिए। यदि कानून में कोई कमी है, तो उसे बदलने का लोकतांत्रिक तरीका मौजूद है।” इस बयान को शिक्षा जगत में चल रही बहसों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां विभिन्न पक्ष UGC के नए नियमों को लेकर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। अपने संबोधन के अंत में भागवत ने सामाजिक एकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जातियां समाज की विविधता का हिस्सा हैं, लेकिन वे झगड़े और विभाजन का कारण नहीं बननी चाहिए। उनके अनुसार, समाज की मजबूती आपसी सहयोग और समरसता से आती है, न कि टकराव से।