नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री आज दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर इज़राइल रवाना हो रहे हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। पिछले कुछ वर्षों में भारत-इज़राइल संबंधों ने रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय विस्तार देखा है प्रधानमंत्री अपनी इस यात्रा के दौरान बेंजामिन नेतन्याहू के साथ व्यापक वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और सशक्त बनाने, क्षेत्रीय सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों और निवेश को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत और इज़राइल के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही मजबूत है, वहीं कृषि में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ मॉडल और जल संरक्षण तकनीकों में इज़राइल का अनुभव भारत के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस यात्रा से हाई-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवाचार के क्षेत्रों में नए समझौते सामने आ सकते हैं। प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान इसहाक हर्ज़ोग से भी मुलाकात करेंगे। यह भेंट दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय राजनीतिक संवाद को और मजबूती देगी। माना जा रहा है कि लोकतांत्रिक मूल्यों, वैश्विक चुनौतियों और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा केनेस्सेट को प्रधानमंत्री का संबोधन। इज़राइल की संसद को संबोधित करना भारत-इज़राइल के मजबूत संसदीय और लोकतांत्रिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। यह संबोधन दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और पारदर्शी शासन व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाएगा। प्रधानमंत्री इज़राइल में बसे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे। यह समुदाय व्यापार, शिक्षा, तकनीक और हीरा उद्योग जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। भारतीय डायस्पोरा ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक सेतु का कार्य किया है। इस संवाद को भारत-इज़राइल मित्रता की जन-आधारित मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।