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भारत-कनाडा संबंधों को नई रफ्तार देने पहुंचे पीएम मार्क कार्नी, चार दिवसीय दौरे में रणनीतिक साझेदारी पर होगा फोकस

नई दिल्ली/मुंबई। प्रधानमंत्री Narendra Modi के निमंत्रण पर कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney 2 मार्च तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। प्रधानमंत्री कार्नी शुक्रवार को अपनी पत्नी के साथ विशेष विमान से मुंबई पहुंचे। यह उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने उनके चार दिवसीय दौरे का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्नी नई दिल्ली और मुंबई में विभिन्न उच्चस्तरीय बैठकों और कार्यक्रमों में भाग लेंगे। उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी प्रस्तावित है, जिसमें व्यापार, निवेश, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने पर जोर यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारत और कनाडा दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच हाल के समय में उत्पन्न मतभेदों को पीछे छोड़ते हुए आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में यह दौरा अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री कार्नी की यह यात्रा आपसी विश्वास बहाली और दीर्घकालिक सहयोग की रूपरेखा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उद्योग जगत से संवाद पर विशेष ध्यान अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री कार्नी भारतीय और कनाडाई सीईओ, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, वित्तीय विशेषज्ञों, स्टार्टअप इनोवेटर्स, शिक्षाविदों तथा भारत में सक्रिय कनाडाई पेंशन फंड्स के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य व्यापारिक अवसरों का विस्तार, निवेश को बढ़ावा देना और प्रौद्योगिकी व नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करना है। कनाडा के पेंशन फंड्स पहले से ही भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान निवेश को और प्रोत्साहन देने तथा नई परियोजनाओं पर चर्चा होने की संभावना है। शिक्षा, ऊर्जा और तकनीक पर सहयोग सूत्रों के अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में छात्र आदान-प्रदान, अनुसंधान सहयोग और स्किल डेवलपमेंट को लेकर भी चर्चा होगी। स्वच्छ ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर साझा पहल को आगे बढ़ाने पर भी दोनों देशों के बीच सहमति बन सकती है।