स्वैग, स्क्रीन और स्मार्टर ब्रेन की जंग: क्या Gen-Z वाकई पिछड़ रही है?

लाइफस्टाइल: साल 2025 के साथ ही दुनिया ने ‘बीटा जनरेशन’ का स्वागत कर लिया है, लेकिन बाज़ार, सोशल मीडिया और बहसों के केंद्र में आज भी ‘Gen-Z’ ही है। कॉलेज की कैंटीन से लेकर कॉर्पोरेट के क्यूबिकल्स तक अपनी पहचान बनाने में जुटी यह पीढ़ी अक्सर अपने बेबाक अंदाज़, डिजिटल समझ और अलग सोच के लिए जानी जाती है। लेकिन इस बार Gen-Z चर्चा में है, और वजह चौंकाने वाली है। एक हालिया अंतरराष्ट्रीय स्टडी ने इस कूल कही जाने वाली पीढ़ी की स्मार्टनेस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहली बार इतिहास में… इस शोध का दावा है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब बच्चे, बुद्धिमत्ता के पैमाने पर अपने माता-पिता से पीछे रह गए हैं। स्टडी के अनुसार, ‘जनरेशन Z’ (Gen-Z) अपने से पिछली पीढ़ी यानी मिलेनियल्स (Millennials) के मुकाबले औसतन कम स्मार्ट साबित हो रही है। इस रिपोर्ट को और गंभीर बनाता है न्यूरोसाइंटिस्ट और पूर्व शिक्षक डॉ. जेरेड कूनी होर्वाथ का बयान, जो उन्होंने अमेरिकी सीनेट के सामने दिया। डॉ. होर्वाथ के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह है — पढ़ाई में तकनीक और स्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल (EdTech Overuse) रिसर्च में क्या निकला सामने? स्टडी में Gen-Z से जुड़ी कुछ चिंताजनक बातें सामने आई हैं: ध्यान लगाने की क्षमता में गिरावट गणित और पढ़ने का कौशल कमजोर समस्या सुलझाने की क्षमता (Problem Solving Ability) में कमी यानी जानकारी तक पहुंच पहले से कहीं ज्यादा आसान है, लेकिन उसे समझने, जोड़ने और लागू करने की क्षमता कमजोर होती जा रही है। स्क्रीन बन रही है सबसे बड़ी दुश्मन? डॉ. होर्वाथ के अनुसार, आज की पीढ़ी का बड़ा हिस्सा अपना ज्यादातर समय मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप स्क्रीन के सामने बिताता है। हैरानी की बात यह है कि स्कूल-कॉलेज जाने के मौके पहले से ज्यादा मिलने के बावजूद, 2010 के बाद से सीखने की क्षमता में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। असल में, इंसानी दिमाग आमने-सामने बातचीत, गहराई से पढ़ने और लंबे फोकस के लिए विकसित हुआ है। इसके उलट, तेज़ी से स्क्रॉल करना छोटे-छोटे बुलेट पॉइंट्स में जानकारी लेना मल्टीटास्किंग के नाम पर ध्यान बांटना ये सब मिलकर दिमाग की गहरी समझ विकसित करने की प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं। डिजिटल पढ़ाई: सहायक या बाधा? स्टडी का साफ संकेत है कि डिजिटल एजुकेशन अपने आप में बुरी नहीं है, लेकिन उसका अत्यधिक और असंतुलित इस्तेमाल दिमागी विकास के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है। आसान शब्दों में कहें तो — स्क्रीन ने पढ़ाई को तेज़ जरूर किया है, लेकिन सोच को उथला भी बना दिया है। Gen-Z अभी भी युवा है, सीखने और बदलने की क्षमता रखती है। सवाल यह नहीं कि यह पीढ़ी कम स्मार्ट है या ज्यादा, सवाल यह है कि क्या हम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दिमाग को मजबूत करने के लिए कर रहे हैं, या सिर्फ समय काटने के लिए? क्योंकि आने वाली बीटा जनरेशन उसी रास्ते पर चलेगी, जो आज Gen-Z बना रही है।