नई दिल्ली | केंद्र सरकार खाद बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी, आसान और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। इसके तहत सरकार डिजिटल फार्मर आईडी (Farmer ID) को खाद खरीद से जोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह वही डिजिटल पहचान है, जिसका उपयोग किसान पीएम किसान सम्मान निधि योजना में पंजीकरण के लिए करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में खाद की खरीद के लिए किसान की डिजिटल आईडी अनिवार्य की जा सकती है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी सब्सिडी का लाभ वास्तविक और पात्र किसानों तक ही पहुंचे। क्या है डिजिटल फार्मर आईडी? डिजिटल फार्मर आईडी किसानों की एक यूनिक पहचान होगी, जिसमें उनकी जमीन, फसल, बोवाई पैटर्न और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी दर्ज रहेगी। सरकार तेजी से देशभर में किसानों की यह आईडी बनाने पर काम कर रही है। कुछ राज्यों में पहले ही पीएम किसान योजना का लाभ लेने के लिए किसान आईडी जरूरी कर दी गई है। अब इसी आईडी को खाद बिक्री से जोड़ने की योजना है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरुआत सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस योजना को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। इसके जरिए यह परखा जाएगा कि डिजिटल आईडी के माध्यम से खाद वितरण कितना प्रभावी और पारदर्शी बन सकता है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से: फर्जी खरीद पर रोक लगेगी कालाबाजारी कम होगी जरूरत से ज्यादा खाद उठाव पर नियंत्रण होगा यूरिया सब्सिडी का बढ़ता बोझ खाद सुधार की इस कवायद के पीछे एक बड़ी वजह तेजी से बढ़ती फर्टिलाइजर सब्सिडी भी है। वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए सरकार ने खाद सब्सिडी पर ₹1.68 ट्रिलियन खर्च का अनुमान लगाया है, लेकिन यह आंकड़ा बढ़कर ₹1.91 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। इसका मुख्य कारण है: यूरिया की रिकॉर्ड खपत बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतें घरेलू मांग में लगातार इजाफा यूरिया की रिकॉर्ड खपत आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच यूरिया की खपत 31.15 मिलियन टन तक पहुंच चुकी है। यह 2024 की इसी अवधि की तुलना में करीब 4 प्रतिशत ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल फार्मर आईडी के जरिए सरकार यह ट्रैक कर सकेगी कि किस किसान को कितनी खाद की वास्तविक जरूरत है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले समय में: सभी खाद बिक्री केंद्रों पर Farmer ID अनिवार्य हो सकती है सब्सिडी सीधे किसान प्रोफाइल से जुड़ सकती है कृषि योजनाओं में पारदर्शिता और नियंत्रण बढ़ेगा सरकार का यह कदम न सिर्फ सब्सिडी के बोझ को संतुलित करने में मदद कर सकता है, बल्कि खेती को डेटा-आधारित और आधुनिक बनाने की दिशा में भी अहम साबित हो सकता है।