फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में बड़ा कदम: 10 से 27 फरवरी तक सर्वजन दवा सेवन अभियान, घर-घर पहुंच रहीं आशा कार्यकर्ता

छपरा, 13 फरवरी। जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के संकल्प के साथ स्वास्थ्य विभाग द्वारा 10 फरवरी से 27 फरवरी तक सर्वजन दवा सेवन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिला रही हैं, ताकि इस गंभीर और लाइलाज बीमारी की रोकथाम सुनिश्चित की जा सके। फाइलेरिया एक ऐसी बीमारी है, जो एक बार होने पर व्यक्ति को जीवनभर के लिए अपंग बना सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका इलाज संभव नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। इसी उद्देश्य से यह व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। दवा पूरी तरह सुरक्षित, हल्के लक्षण शुभ संकेत सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हैं। उन्होंने बताया कि दवा सेवन के बाद यदि किसी को हल्की उल्टी, चक्कर या असहजता महसूस होती है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह किसी खतरे का संकेत नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि दवा शरीर में मौजूद माइक्रो-फाइलेरिया परजीवियों पर असर कर रही है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि ऐसे लक्षण दिखने पर अफवाहों पर ध्यान न दें और आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रखंड स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम गठित की गई है, जो तुरंत उपचार उपलब्ध करा रही है। खाली पेट न लें दवा, कुछ वर्गों को छूट स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि फाइलेरिया रोधी दवा खाली पेट नहीं खानी है। साथ ही 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा अत्यंत गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जानी है। इन वर्गों को छोड़कर सभी पात्र नागरिकों से अपील की गई है कि वे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के सामने ही दवा का सेवन करें, जिससे अभियान की पारदर्शिता और सफलता सुनिश्चित हो सके। नगरा प्रखंड की घटना से स्पष्ट हुई तत्परता अभियान के दौरान हाल ही में नगरा प्रखंड में दवा सेवन के बाद तीन बच्चियों को घबराहट और उल्टी की शिकायत हुई थी। सूचना मिलते ही रैपिड रिस्पांस टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर तीनों बच्चियों का उपचार किया। उपचार के बाद वे पूरी तरह स्वस्थ हो गईं। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय और सजग है। सामूहिक भागीदारी से ही संभव है सफलता जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार ने कहा कि फाइलेरिया के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की सहभागिता आवश्यक है। यदि कुछ लोग दवा का सेवन नहीं करेंगे, तो संक्रमण की श्रृंखला बनी रहेगी। स्वास्थ्य विभाग ने पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे आगे आकर लोगों को जागरूक करें। गांव-गांव और टोला-टोला तक सही जानकारी पहुंचाकर ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है। जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब हर नागरिक जिम्मेदारी निभाते हुए दवा का सेवन करेगा और अफवाहों से दूर रहकर स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करेगा।