टीबी मुक्त भारत: आयुष ने जन्मदिन पर चार मरीजों को लिया गोद, पौष्टिक आहार की दूसरी किस्त वितरित

छपरा, 28 फरवरी। सेवा और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए शहर के एसडीएस कॉलेज के 17 वर्षीय छात्र आयुष राज ने अपने जन्मदिन को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए टीबी मरीजों के बीच सहयोग का हाथ बढ़ाया। ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत आयुष ने चार क्षय रोगियों—सबिता कुंअर, केदारनाथ महतो, सरल राय और पिंकी कुमारी—को गोद लेकर उनके उपचार में सहयोग करने का संकल्प लिया था। इसी क्रम में शनिवार को गोद लिए गए मरीजों के बीच पौष्टिक आहार की दूसरी किस्त का वितरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. आरपी सिंह ने आयुष की पहल की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं की सकारात्मक भागीदारी से ही समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव है। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समाज के हर वर्ग की सहभागिता आवश्यक है। आयुष जैसे जागरूक और संवेदनशील युवा अन्य लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। यक्ष्मा विभाग के डीपीसी हिमांशु शेखर ने जानकारी देते हुए बताया कि टीबी मरीजों के लिए नियमित पोषण सहायता अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि उचित आहार से दवाओं का प्रभाव बेहतर होता है और मरीज जल्द स्वस्थ हो पाते हैं। उन्होंने आमजन, सामाजिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों से अपील की कि वे आगे आकर टीबी मरीजों को गोद लें और वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करने में सहयोग दें। एसटीएलएस कुमार अमित ने कहा कि आयुष की इस मानवीय पहल से मरीजों को केवल पोषण ही नहीं, बल्कि मानसिक संबल भी मिल रहा है। कम उम्र में सामाजिक जिम्मेदारी निभाकर आयुष ने यह साबित कर दिया है कि सेवा के लिए उम्र नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच और मजबूत इरादा जरूरी होता है। इस अवसर पर डीपीसी हिमांशु शेखर, डीपीएस मुकेश कुमार, एसटीएस मुकेश कुमार, एलटी संजेश कुमार, सहायक संजय कुमार एवं गुड़िया कुमारी, परिचारी सुनील कुमार, नरेश राय, कृष्ण राय सहित यक्ष्मा विभाग के कई अधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे। सभी की मौजूदगी में मरीजों को पौष्टिक आहार वितरित किया गया और उन्हें नियमित उपचार जारी रखने के लिए प्रेरित किया गया। आयुष की यह पहल न केवल समाज में जागरूकता का संदेश दे रही है, बल्कि यह भी दर्शा रही है कि यदि युवा पीढ़ी आगे आए तो ‘टीबी मुक्त भारत’ का सपना अवश्य साकार हो सकता है।