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छपरा में गूंजा मजदूर एकता का स्वर: CITU के आह्वान पर अखिल भारतीय हड़ताल, 500 से अधिक कर्मी सड़कों पर उतरे

छपरा, 12 फरवरी। केंद्र सरकार की कथित मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में बुधवार को CITU के आह्वान पर अखिल भारतीय हड़ताल का व्यापक असर छपरा में भी देखने को मिला। विभिन्न ट्रेड यूनियनों के साथ BSSRU (बिहार स्टेट सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स यूनियन) के लगभग 500 सदस्य हड़ताल में शामिल हुए और शहर में एकजुटता का प्रदर्शन किया। हड़ताली कर्मियों ने शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए एक विशाल रैली निकाली, जो अंततः दवा मंडी पहुंचकर सभा में तब्दील हो गई। रैली के दौरान श्रमिकों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। सभा को संबोधित करते हुए CPM के जिला सचिव कामरेड बटेश्वर महतो ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां श्रमिक वर्ग के हितों के खिलाफ हैं और उद्योगपतियों के दबाव में श्रम कानूनों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई श्रम संहिताओं के जरिए श्रमिकों के अधिकारों का हनन हो रहा है। वहीं, CITU के जिला सचिव कामरेड मृत्युंजय ओझा ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चारों श्रम संहिताएं मजदूरों के हितों के प्रतिकूल हैं और इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने इन श्रम संहिताओं को उद्योगपतियों के हित में बताया और श्रमिक एकता को और मजबूत करने का आह्वान किया। BSSRU के जिलाध्यक्ष रमन कुमार सिंह ने हड़ताल में शामिल सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि FMRAI के आह्वान पर आयोजित इस अखिल भारतीय हड़ताल को छपरा में व्यापक समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि श्रमिक वर्ग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट है और आगे भी संघर्ष जारी रहेगा। हड़ताल की प्रमुख मांगें हड़ताल के दौरान श्रमिक संगठनों ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें उठाईं— चारों श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए। सेल्स प्रमोशन एम्प्लॉइज एक्ट, 1976 को बहाल किया जाए। सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों के कार्य की वैधानिक नियमावली लागू की जाए। सेल्स के आधार पर कर्मचारियों का उत्पीड़न और छंटनी बंद की जाए। ट्रैकिंग और निगरानी के माध्यम से निजता के अधिकार का हनन बंद किया जाए। कार्यक्रम के अंत में नेताओं ने दावा किया कि छपरा में आयोजित यह हड़ताल पूर्णतः सफल रही और इससे मजदूर एकता का मजबूत संदेश गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।