आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 का संकेत: अमेरिका से व्यापार समझौता बन सकता है भारत की ग्रोथ का गेमचेंजर

नई दिल्ली। संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने साफ शब्दों में संकेत दिया है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक कारक अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते का पूरा होना हो सकता है। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था व्यापार युद्धों, ऊंचे टैरिफ और अनिश्चित नीतियों से जूझ रही है, भारत-अमेरिका के बीच संभावित समझौता देश के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। वैश्विक अनिश्चितता में भारत को राहत की उम्मीद सर्वेक्षण के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताएं इसी वर्ष निष्कर्ष तक पहुंच सकती हैं। इससे वैश्विक व्यापार में व्याप्त अनिश्चितता कुछ हद तक कम होगी और भारतीय निर्यात, निवेश तथा कारोबारी भरोसे को मजबूती मिलेगी। सर्वेक्षण मानता है कि यह समझौता ऐसे दौर में भारत के लिए ढाल का काम करेगा, जब दुनिया के कई बड़े देश संरक्षणवादी नीतियों की ओर बढ़ रहे हैं। एफटीए की दिशा में तेज कदम आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी रेखांकित किया गया है कि भारत ने हाल के वर्षों में मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की दिशा में सक्रियता बढ़ाई है। न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौते इसी रणनीति का हिस्सा हैं। सरकार का मानना है कि इन समझौतों से भारतीय उद्योगों को नए बाजार मिलेंगे और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत होगी। ‘समायोजन का वर्ष’ होगा अगला वित्त वर्ष सर्वेक्षण ने अगले वित्त वर्ष को “समायोजन का वर्ष” बताया है। इसका अर्थ है कि अब तक लागू किए गए नियमों और सुधारों का असर जमीन पर दिखने लगेगा। कंपनियां और उपभोक्ता नई नीतियों के अनुरूप खुद को ढालेंगे, जिससे घरेलू मांग और निवेश पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। सर्वेक्षण यह भी संकेत देता है कि सरकार सुधारों को लागू करने की रफ्तार बनाए रखने के मूड में है। महंगाई और सीपीआई पर सतर्क नजर आर्थिक सर्वेक्षण में मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के नए आधार वर्ष का भी जिक्र किया गया है। इसके चलते महंगाई के आकलन में कुछ बदलाव आ सकते हैं, जिस पर सतर्क नजर रखने की जरूरत बताई गई है। सरकार और नीति-निर्माताओं के लिए यह संकेत है कि आंकड़ों की व्याख्या करते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी होगी। 7% के करीब पहुंची विकास क्षमता सर्वेक्षण का आकलन है कि बीते वर्षों में किए गए संरचनात्मक और नीतिगत सुधारों के संयुक्त प्रभाव से भारत की मध्यम अवधि की विकास क्षमता लगभग 7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मजबूत घरेलू मांग, निवेश में स्थिरता और आंतरिक अर्थव्यवस्था की मजबूती विकास को लेकर सकारात्मक माहौल बनाए हुए हैं। इन्हीं आधारों पर वित्त वर्ष 2027 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। आत्मविश्वास के साथ सतर्कता का संदेश कुल मिलाकर आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 यह संदेश देता है कि भारत को अपनी आर्थिक दिशा को लेकर आत्मविश्वास रखना चाहिए, लेकिन वैश्विक जोखिमों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सुधारों की निरंतरता, घरेलू मजबूती और अमेरिका जैसे प्रमुख साझेदार के साथ संभावित व्यापार समझौते के सहारे भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर, संतुलित और टिकाऊ विकास की राह पर आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।