नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच चल रहा टकराव अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े तक पहुँच चुका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका पर आज शीर्ष अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने एक असामान्य लेकिन राजनीतिक रूप से अहम कदम उठाते हुए खुद अपना पक्ष रखने की अनुमति मांगी।

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने अदालत से कहा कि “हमें इंसाफ नहीं मिल रहा है। पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के नाम पर राज्य की चुनावी व्यवस्था में दख़ल दिया जा रहा है और यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए ख़तरा बन सकता है।

क्या है मामला?

चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की गहन समीक्षा बताया जा रहा है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार का आरोप है कि इस प्रक्रिया के ज़रिए वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा सकती है, जिससे आगामी चुनावों पर असर पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल किसी अंतरिम आदेश से परहेज़ किया, लेकिन याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए अगली तारीख 9 फरवरी तय कर दी है। अदालत ने संकेत दिए कि अगली सुनवाई में चुनाव आयोग से भी विस्तृत जवाब माँगा जा सकता है।

राजनीतिक मायने

यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक निहितार्थ भी रखता है। विपक्ष का कहना है कि केंद्र की संस्थाओं का इस्तेमाल गैर-भाजपा शासित राज्यों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जबकि चुनाव आयोग इन आरोपों को पहले ही खारिज करता रहा है।

अब सबकी निगाहें 9 फरवरी पर टिकी हैं, जब यह तय हो सकता है कि SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है और क्या पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह विवाद नया मोड़ लेता है।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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