नई दिल्ली/मुंबई। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron का भारत दौरा इस बार कई मायनों में खास माना जा रहा है। यह यात्रा प्रधानमंत्री Narendra Modi के आमंत्रण पर भारत द्वारा आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने के लिए हो रही है। राष्ट्रपति मैक्रों का यह भारत का चौथा दौरा है, जबकि मुंबई में यह उनका पहला आधिकारिक दौरा है।
एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भारत की बढ़ती भूमिका के बीच यह शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। ऐसे में फ्रांस के राष्ट्रपति की भागीदारी को भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।
पहले भी कई अहम मौकों पर आए मैक्रों
राष्ट्रपति मैक्रों इससे पहले मार्च 2018 में पहली बार भारत आए थे। उस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण समझौते हुए थे। इसके बाद वे सितंबर 2023 में भारत की अध्यक्षता में आयोजित G20 Summit में शामिल हुए थे, जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।
जनवरी 2024 में मैक्रों ने एक बार फिर भारत का दौरा किया था और Republic Day समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की थी। इस अवसर पर भारत-फ्रांस संबंधों की गहराई और रणनीतिक महत्व को विशेष रूप से रेखांकित किया गया था।
इस बार का दौरा खास तौर पर एआई इम्पैक्ट समिट के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। माना जा रहा है कि भारत और फ्रांस के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सुरक्षा, डेटा गवर्नेंस और स्टार्टअप इकोसिस्टम में सहयोग को लेकर नई घोषणाएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-फ्रांस साझेदारी अब पारंपरिक रक्षा सहयोग से आगे बढ़कर तकनीकी और नवाचार आधारित सहयोग की ओर तेजी से अग्रसर है। मुंबई में राष्ट्रपति मैक्रों की मौजूदगी से व्यापार और निवेश संबंधों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
इस दौरे को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास, साझा वैश्विक दृष्टिकोण और भविष्य की तकनीकों में साझेदारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।