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भारत-यूरोप के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर मुहर: 90% टैरिफ खत्म

सस्ती होगी वाइन-बीयर से लेकर खुलेगा भारतीय निर्यात का महाद्वार नई दिल्ली/गोवा: करीब दो दशकों के इंतज़ार, लंबी कूटनीतिक बातचीत और कई दौर की अड़चनों के बाद आखिरकार भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लग गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच यह बहुप्रतीक्षित समझौता साइन हुआ है, जिसे आर्थिक जानकार ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बता रहे हैं। इस डील के तहत यूरोपीय यूनियन से आने वाले करीब 90 फीसदी उत्पादों पर टैरिफ या तो पूरी तरह खत्म कर दिया गया है या फिर चरणबद्ध तरीके से काफी कम किया जाएगा। इसका सीधा असर आम उपभोक्ता से लेकर उद्योग जगत तक देखने को मिलेगा। क्या है इस ऐतिहासिक डील की सबसे बड़ी खासियत? भारत-EU ट्रेड डील दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक समझौतों में से एक मानी जा रही है। पीएम मोदी के मुताबिक, यह समझौता ग्लोबल GDP के करीब 25 फीसदी और वैश्विक व्यापार के लगभग एक-तिहाई हिस्से को कवर करता है। यानी भारत और यूरोप के बीच कारोबार न सिर्फ तेज़ होगा, बल्कि दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे के लिए और ज्यादा अहम बन जाएंगी। आम आदमी को क्या मिलेगा फायदा? इस डील का असर सीधे आपकी जेब पर भी पड़ेगा— यूरोप से आने वाली बीयर और वाइन सस्ती होंगी, क्योंकि इन पर लगने वाला भारी-भरकम टैरिफ घटा दिया गया है। लग्ज़री प्रोडक्ट्स, हाई-एंड मशीनरी और टेक्नोलॉजी से जुड़े कई सामान अब पहले से कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं। प्रतिस्पर्धा बढ़ने से घरेलू बाजार में क्वालिटी बेहतर होने की उम्मीद है। भारतीय उद्योग के लिए खुले नए दरवाज़े इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत के कई प्रमुख सेक्टरों को बड़ा बूस्ट मिलने वाला है— टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स जेम्स और ज्वेलरी लेदर और फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर इन सेक्टरों को यूरोपीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी, जहां अब तक सख्त नियम और ऊंचे टैरिफ बड़ी चुनौती थे। India Energy Week से पीएम मोदी का संदेश गोवा में आयोजित India Energy Week के दौरान पीएम मोदी ने वर्चुअल संबोधन में इस डील को भारत की वैश्विक आर्थिक ताकत का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा— भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन रहा है। भारत पेट्रोलियम उत्पादों के टॉप-5 एक्सपोर्टर्स में शामिल है। आज भारत 150 से ज्यादा देशों को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात कर रहा है। पीएम मोदी के मुताबिक, यह डील भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ रणनीति को ग्लोबल प्लेटफॉर्म देगी। यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी, सप्लाई चेन की मजबूती और जियो-पॉलिटिकल संतुलन में भी इसकी अहम भूमिका होगी। खासकर ऐसे समय में जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितताओं और वैश्विक तनावों से गुजर रही है भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट न सिर्फ एक आर्थिक समझौता है, बल्कि यह भारत की वैश्विक पहचान को और मजबूत करने वाला कदम है। सस्ती विदेशी चीज़ें, मज़बूत निर्यात, नए रोज़गार और उद्योगों को रफ्तार—इस डील से फायदा हर स्तर पर दिखेगा। यही वजह है कि इसे सही मायनों में ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है।

UGC के नए नियमों पर बढ़ता बवाल: सड़कों से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, शिक्षा मंत्री ने दिया भरोसा

नई दिल्ली: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) के नए नोटिफिकेशन को लेकर देशभर में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। नियमों के खिलाफ छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों का विरोध अब सड़कों पर दिखने लगा है। कई राज्यों में धरना-प्रदर्शन तेज हो चुके हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने पहली बार इस पूरे मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बातचीत में अभ्यार्थियों और शिक्षकों को आश्वासन देते हुए कहा कि किसी के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव या उत्पीड़न नहीं होगा और कानून का दुरुपयोग किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। “संविधान के दायरे में ही होंगे सभी फैसले” – धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैं बहुत विनम्रता से सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी के साथ उत्पीड़न या भेदभाव नहीं होगा। चाहे वह UGC हो, राज्य सरकार हो या केंद्र सरकार—कोई भी कानून का गलत इस्तेमाल नहीं करेगा। जो भी कदम उठाए जाएंगे, वे पूरी तरह संविधान के दायरे में होंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों और शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी समुदाय के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। संस्थानों में सुरक्षित माहौल देने की बात UGC के नए नियमों के तहत यह भी प्रावधान किया गया है कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित और भेदभाव-मुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जाएगा। यदि कोई संस्थान नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नियम तोड़ने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द की जा सकती है गंभीर मामलों में फंडिंग पर रोक भी लगाई जा सकती है UGC का कहना है कि ये कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए उठाए गए हैं। नियम 3(सी) पर सबसे ज्यादा आपत्ति नोटिफिकेशन के नियम 3(सी) को लेकर सबसे अधिक विवाद खड़ा हुआ है। आरोप है कि इस प्रावधान के जरिए अनारक्षित वर्ग के अभ्यार्थियों और शिक्षकों के साथ जाति आधारित भेदभाव को बढ़ावा मिल सकता है। इसी मुद्दे को लेकर कई सामाजिक संगठनों और व्यक्तियों ने कड़ा विरोध जताया है। UGC के इस नोटिफिकेशन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियम संविधान में दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं। अब देश की सर्वोच्च अदालत इस मामले पर क्या रुख अपनाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। जहां एक ओर सरकार और UGC नियमों को लेकर सफाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि जब तक नियमों में संशोधन नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार संवाद के जरिए समाधान निकालती है या मामला और तूल पकड़ता है।

UGC के नए नियमों पर मचा सियासी और शैक्षणिक घमासान, सरकार बोली— “भ्रम नहीं, सुधार है”

नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। छात्र संगठनों से लेकर शिक्षाविदों और राजनीतिक दलों तक, हर मंच पर इन नियमों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कहीं इसे शिक्षा के केंद्रीकरण की कोशिश बताया जा रहा है तो कहीं इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला करार दिया जा रहा है। इसी बीच केंद्र सरकार ने साफ किया है कि UGC के नए नियमों को लेकर फैलाई जा रही आशंकाएं और आरोप पूरी तरह भ्रामक हैं और किसी भी सूरत में इनका दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, नए नियमों का मकसद उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण बनाना है, न कि किसी संस्था या विचारधारा पर नियंत्रण स्थापित करना। सरकार का कहना है कि कुछ वर्ग जानबूझकर नियमों की अधूरी जानकारी के आधार पर डर और भ्रम का माहौल बना रहे हैं। क्या हैं नए UGC नियम? UGC द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रशासन, नियुक्ति प्रक्रिया, शैक्षणिक मानकों और जवाबदेही से जुड़े कई प्रावधान शामिल हैं। इनमें शिक्षकों की नियुक्ति, पाठ्यक्रम की गुणवत्ता, शोध कार्यों की निगरानी और संस्थानों के प्रदर्शन के आकलन को लेकर स्पष्ट मानक तय किए गए हैं। सरकारी पक्ष का तर्क है कि ये नियम वैश्विक मानकों के अनुरूप हैं और भारतीय उच्च शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक अहम कदम हैं। विरोध की वजह क्या? विरोध करने वालों का कहना है कि नए नियमों से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कमजोर होगी और केंद्र का हस्तक्षेप बढ़ेगा। कुछ शिक्षाविदों और छात्र संगठनों को आशंका है कि इससे नियुक्तियों और शैक्षणिक निर्णयों में स्वतंत्रता सीमित हो सकती है। हालांकि सरकार इन आशंकाओं को सिरे से खारिज कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “UGC केवल एक नियामक संस्था है। उसका काम मानक तय करना है, न कि रोज़मर्रा के शैक्षणिक फैसलों में दखल देना।” सरकार का स्पष्ट संदेश सरकारी सूत्रों ने दो टूक कहा है कि नियमों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति, संस्था या विचारधारा के खिलाफ नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी दुरुपयोग की शिकायत सामने आती है तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि भ्रम दूर करने के लिए शिक्षाविदों, विश्वविद्यालयों और छात्र प्रतिनिधियों के साथ संवाद बढ़ाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि UGC नियमों को लेकर संवाद और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि सरकार अपने दावों के अनुरूप इन्हें लागू करती है और सभी हितधारकों को विश्वास में लेती है, तो यह सुधार भारतीय उच्च शिक्षा के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। फिलहाल, UGC के नए नियम शिक्षा जगत के केंद्र में हैं—जहां एक ओर आशंकाओं का शोर है, वहीं दूसरी ओर सरकार इन्हें सुधार की दिशा में एक मजबूत कदम बता रही है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह घमासान किसी बड़े बदलाव की भूमिका है या सिर्फ गलतफहमियों का नतीजा।

निलंबन के विरोध में सड़कों पर उतरे PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री, बोले– “यह सुनियोजित साजिश है”

बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। अपने निलंबन के विरोध में अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को बरेली जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरना देकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अपने निलंबन को “सुनियोजित साजिश” करार देते हुए कहा कि उन्हें जानबूझकर मानसिक और प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। धरने के दौरान अलंकार अग्निहोत्री ने जिलाधिकारी से यह मांग की कि उन फोन कॉल्स की जानकारी सार्वजनिक की जाए, जिनमें कथित तौर पर पंडितों और सनातन परंपराओं के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया। उनका कहना था कि जब उन्होंने इस मुद्दे को उठाया, तभी से उनके खिलाफ कार्रवाई की पटकथा लिखी जाने लगी। UGC विवाद से जुड़ा है मामला गौरतलब है कि अलंकार अग्निहोत्री ने हाल ही में UGC नियमों और प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के कथित अपमान को लेकर सार्वजनिक रूप से इस्तीफा दिया था। उनका यह कदम सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया था। इसके कुछ ही समय बाद राज्य सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। “मुझे सच बोलने की सजा दी गई”, धरने के दौरान अग्निहोत्री ने कहा, “मैंने संविधान और सनातन मूल्यों की बात की। इसके बदले मुझे निलंबन दे दिया गया। यह कार्रवाई निष्पक्ष नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें प्रशासनिक दबाव में रखने और कार्यालय में “बंधक” बनाने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न की गईं। प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार वहीं, जिला प्रशासन ने अलंकार अग्निहोत्री के बंधक बनाए जाने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले में सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत अपनाई गई हैं और किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या अवैध कार्रवाई नहीं की गई। जांच मंडलायुक्त को सौंपी गई राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच मंडलायुक्त को सौंप दी है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा इस पूरे घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एक ओर इसे अधिकारी की व्यक्तिगत असहमति और अनुशासन का मामला बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर समर्थक इसे “विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता” से जोड़कर देख रहे हैं। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि अलंकार अग्निहोत्री का निलंबन प्रशासनिक कार्रवाई था या फिर, जैसा वे दावा कर रहे हैं, एक सुनियोजित साजिश।

अभिनेत्री से सांसद तक मिमी चक्रवर्ती: बोंगांव कार्यक्रम में कथित सार्वजनिक उत्पीड़न का आरोप, आयोजक के खिलाफ पुलिस में शिकायत

नई दिल्ली: 25 से अधिक हिट बंगाली फिल्मों में काम कर चुकीं मशहूर अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की पूर्व सांसद मिमी चक्रवर्ती एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका फिल्मी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कथित उत्पीड़न का मामला है। मिमी चक्रवर्ती ने उत्तर 24 परगना जिले के बोंगांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कार्यक्रम आयोजक के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। जानकारी के मुताबिक, मिमी चक्रवर्ती ने ईमेल के माध्यम से बोंगांव पुलिस स्टेशन में शिकायत भेजी है। शिकायत में उन्होंने बताया कि रविवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्हें असहज और अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा। यह कार्यक्रम नया गोपालगंज युवक संघ क्लब द्वारा आयोजित किया गया था। अभिनेत्री ने क्लब के पदाधिकारी तन्मय शास्त्री के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और संबंधित पक्षों से पूछताछ की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। मिमी चक्रवर्ती बंगाली सिनेमा की बड़ी और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार हैं। वे न सिर्फ बड़े पर्दे पर, बल्कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय हैं। हाल ही में उनकी हॉरर फिल्म ‘भानूप्रिया भूटर होटल’ रिलीज हुई है, जो अमेजन प्राइम वीडियो पर उपलब्ध है। इस फिल्म में हॉरर, कॉमेडी और रोमांस का दिलचस्प मिश्रण देखने को मिलता है, जिसे दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इसके अलावा, मिमी की आगामी फिल्म ‘क्वीन्स’ भी चर्चा में है। फिल्म का पोस्टर हाल ही में जारी किया गया है, जिसमें मिमी के हाथ में बंदूक दिखाई दे रही है—जो उनके सशक्त और अलग अवतार की ओर इशारा करता है। हालांकि फिल्म की रिलीज डेट और ट्रेलर को लेकर फिलहाल ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। राजनीति से दूरी, लेकिन विवादों से नाता  फिल्मों के साथ-साथ मिमी चक्रवर्ती राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा चुकी हैं। उन्होंने साल 2019 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर पश्चिम बंगाल की जादवपुर सीट से जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में उन्होंने भाजपा उम्मीदवार अनुपम हाजरा को हराया था। हालांकि, साल 2024 में मिमी ने अचानक राजनीति से दूरी बनाते हुए टीएमसी से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि “मैं राजनीति के लिए नहीं बनी हूं।” मिमी का नाम इससे पहले अवैध सट्टेबाजी ऐप से जुड़े एक मामले में भी सामने आ चुका है। साल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें पूछताछ के लिए समन भेजा था। जांच में उनके नाम का जिक्र कथित तौर पर विज्ञापनों और कुछ वित्तीय लेन-देन के संदर्भ में आया था, जिस पर एजेंसियां जांच कर रही थीं। फिल्मी दुनिया, राजनीति और अब कानूनी विवाद—मिमी चक्रवर्ती का सफर लगातार सुर्खियों में रहा है। बोंगांव कार्यक्रम से जुड़ा यह नया मामला न सिर्फ उनके प्रशंसकों, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजरें पुलिस जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

राष्ट्रपति भवन के ‘एट होम’ में गमछा विवाद: राहुल गांधी के बिना पटका दिखने पर सियासी घमासान, BJP ने साधा निशाना

नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित पारंपरिक ‘एट होम’ कार्यक्रम इस बार राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। कार्यक्रम की थीम नॉर्थ ईस्ट रखी गई थी, जिसके तहत अतिथियों से असमिया गमछा (पटका) पहनने का आग्रह किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेशी मेहमानों और अधिकांश नेताओं ने इस सांस्कृतिक प्रतीक को सम्मानपूर्वक धारण किया। लेकिन लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी बिना गमछा के नजर आए, जिसके बाद सियासत गरमा गई। नॉर्थ ईस्ट थीम और विशेष अनुरोध सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि समेत कई केंद्रीय मंत्री और विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। नॉर्थ ईस्ट की संस्कृति को सम्मान देने के उद्देश्य से सभी से असमिया गमछा पहनने का अनुरोध किया गया था। बताया गया कि राष्ट्रपति ने स्वयं इस पर विशेष आग्रह भी किया था। BJP का हमला, असम सीएम ने जताई नाराज़गी राहुल गांधी के बिना गमछा दिखने की तस्वीरें सामने आते ही भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि समय बदल सकता है, लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेता का रवैया अफसोसजनक रूप से अपरिवर्तित है। उन्होंने इसे पूर्वोत्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति असंवेदनशील और अपमानजनक कृत्य बताया। हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से लेकर विदेशी गणमान्य व्यक्तियों तक सभी ने सम्मान और गर्व के साथ पटका पहना, लेकिन राहुल गांधी अलग-थलग नजर आए। उन्होंने राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग भी की। कांग्रेस का पलटवार भाजपा के आरोपों के जवाब में कांग्रेस नेताओं ने भी मोर्चा संभाला। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद अन्य नेताओं की तस्वीरें साझा कीं, जिनमें कुछ लोग बिना गमछा के नजर आ रहे थे। कांग्रेस का कहना है कि मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है और इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। राजनीतिक संदेश बनाम सांस्कृतिक सम्मान यह विवाद ऐसे समय उठा है जब नॉर्थ ईस्ट की संस्कृति और पहचान को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान देने की कोशिशें तेज हैं। गमछा, जो असम और पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है, इस कार्यक्रम का अहम हिस्सा था। ऐसे में राहुल गांधी का बिना पटका दिखना राजनीतिक संदेश माना जा रहा है या महज एक चूक—इस पर बहस जारी है।

गणतंत्र दिवस पर सीएम रेखा गुप्ता का विज़न: संविधान से विकास तक, 11 महीनों की उपलब्धियों का खुला लेखा-जोखा

नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का संबोधन न सिर्फ़ भावनात्मक रहा, बल्कि सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का स्पष्ट रोडमैप भी पेश करता दिखा। अपने भाषण में उन्होंने एक ओर भारत के संविधान निर्माताओं को नमन किया, तो दूसरी ओर दिल्ली सरकार के 11 महीनों के कामकाज का विस्तृत ब्यौरा जनता के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान सभा के सभी सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने कहा कि यह वर्ष ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक अवसर है। साथ ही, RSS की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर उन्होंने डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को भी स्मरण किया। दिल्ली के गौरवशाली इतिहास की चर्चा करते हुए सीएम गुप्ता ने कहा, “दिल्ली भारत की आत्मा का प्रतिबिंब है। जिन्होंने इसे लूटने की कोशिश की, वे इतिहास में गुम हो गए, लेकिन दिल्ली हर बार पहले से ज्यादा मजबूत और समृद्ध बनकर उभरी है।” उन्होंने आगे कहा कि जब उनकी सरकार ने 11 महीने पहले दिल्ली की बागडोर संभाली, तब व्यवस्थाओं में जमी धूल और वर्षों की रुकावटें सबसे बड़ी चुनौती थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को आधार बनाकर सरकार ने फैसले लिए, जिनका उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव लाना है। 11 महीनों में सरकार की प्रमुख उपलब्धियां और घोषणाएं अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने जनकल्याण से जुड़ी कई अहम योजनाओं और आंकड़ों को विस्तार से रखा: 50 अटल कैंटीन शुरू की गईं, जहां मात्र 5 रुपये में भोजन उपलब्ध है। रोज़ाना करीब 50,000 लोग इसका लाभ ले रहे हैं। दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना पहले दिन से लागू की गई, जिससे अब तक से 6.5 लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। 300 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर शुरू किए गए। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 4,000 नए डॉक्टरों और पेरामेडिक्स की भर्तियों की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। शिक्षा और युवा सशक्तिकरण शिक्षा के लिए बजट का 21% हिस्सा निर्धारित किया गया। स्कूल फीस बढ़ोतरी पर रोक के लिए सरकार कानूनी बिल लेकर आई है। 1,300 करोड़ रुपये की लागत से नरेला में एजुकेशन हब का निर्माण किया जा रहा है। खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन दिल्ली सरकार देश में खिलाड़ियों को सबसे अधिक प्रोत्साहन राशि देने वाली सरकार बन गई है। ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने पर 7 करोड़, रजत पर 5 करोड़ और कांस्य पदक पर 3 करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई। इन्फ्रास्ट्रक्चर और परिवहन दिल्ली का कैपिटल एक्सपेंडिचर 30,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया। अगले 3 वर्षों में 11,000 ई-बसें सड़कों पर उतारी जाएंगी। दिल्ली के सभी ISBT का कायाकल्प किया जाएगा। दिल्ली मेट्रो का बजट बढ़ाकर 5,000 करोड़ रुपये कर दिया गया। सामाजिक समावेशन और सुरक्षा महिलाओं के साथ-साथ अब ट्रांसजेंडर समुदाय को भी फ्री बस यात्रा के लिए ‘पिंक बस कार्ड’ दिया जाएगा। राजधानी की सुरक्षा के लिए 10,000 नए CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। तिहाड़ जेल को शिफ्ट करने की योजना पर सरकार काम कर रही है। ग्रामीण और झुग्गी विकास दिल्ली के गांवों के विकास के लिए 1,700 करोड़ रुपये खर्च किए गए। झुग्गी बस्तियों के विकास के लिए 700 करोड़ रुपये का प्रावधान। राजधानी में 10 नई गौशालाओं के निर्माण का कार्य जारी है। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली को एक आधुनिक, सुरक्षित और समावेशी राजधानी बनाना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में दिल्ली विकास, संवेदनशील शासन और सामाजिक संतुलन का आदर्श मॉडल बनेगी।

कर्तव्य पथ पर गर्व, शक्ति और संस्कृति का विराट संगम: 77वें गणतंत्र दिवस पर भारत की सैन्य क्षमता और सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन

नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ एक बार फिर भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रनिर्माण की भावना का साक्षी बना। परेड का समापन एक रोमांचक और गर्व से भर देने वाले दृश्य के साथ हुआ, जब भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों ने सटीक फ्लाईपास्ट कर आकाश को गर्जना से भर दिया। अपाचे और ध्रुव हेलीकॉप्टरों की उड़ान तथा भीष्म और अर्जुन जैसे अत्याधुनिक युद्धक टैंकों की मौजूदगी ने देश की रक्षा तैयारियों और आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। परेड में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसने भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, रणनीतिक कौशल और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाया। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों की झांकियों ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विकास यात्रा को जीवंत रूप में सामने रखा। पश्चिम बंगाल की झांकी ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर को ऐतिहासिक गरिमा के साथ प्रस्तुत किया। झांकी में बंकिम चंद्र चटर्जी और उनकी अमर रचना ‘वंदे मातरम्’ को केंद्र में रखा गया, जो 77वें गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य गीत की थीम का आधार रही। यह झांकी देशभक्ति की उस भावना को पुनर्जीवित करती दिखी, जिसने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। मणिपुर की झांकी ने राज्य की पारंपरिक कृषि संस्कृति से लेकर वैश्विक बाजारों तक के सफर को रेखांकित किया। इसमें दिखाया गया कि कैसे स्थानीय किसान अब अपने कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा रहे हैं, जिससे आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना साकार होती नजर आती है। वहीं गुजरात की झांकी ने स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रगान की भूमिका को उजागर किया तथा उन क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता की पुकार को देश की सीमाओं से परे विश्व तक पहुंचाया। मध्य प्रदेश की झांकी में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की गौरवशाली विरासत को भव्यता के साथ प्रस्तुत किया गया। झांकी में उनकी प्रतिमा के साथ महेश्वर घाट की प्रसिद्ध स्थापत्य कला और सांस्कृतिक धरोहर के दृश्य दर्शाए गए, जो सुशासन, सेवा और सांस्कृतिक संरक्षण के उनके योगदान को स्मरण कराते हैं। परेड में विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की टुकड़ियों का अनुशासित मार्च पास्ट भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) दल का नेतृत्व सब-इंस्पेक्टर करण सिंह ने किया। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) दल का नेतृत्व असिस्टेंट कमांडेंट सिमरन बाला और असिस्टेंट कमांडेंट सुरभि रवि ने संभाला। इसके बाद बैंड मास्टर एएसआई देवेंद्र सिंह के नेतृत्व में इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) और असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस अनंत धनराज सिंह के नेतृत्व में दिल्ली पुलिस दल ने कदमताल किया। सीमा सुरक्षा बल (BSF) का प्रसिद्ध ऊंट दल डिप्टी कमांडेंट महेंद्र पाल सिंह राठौर की कमान में शान से मार्च करता नजर आया। तीनों सेनाओं की वेटरन्स झांकी ने ‘संग्राम से राष्ट्रनिर्माण तक’ थीम के माध्यम से देश के दिग्गज सैनिकों की प्रेरक यात्रा को दर्शाया। झांकी का अग्र भाग संग्राम का प्रतीक था, जिसमें एक 3D गोलाकार दीवार पर युद्ध मशीनों और संघर्ष के निर्णायक क्षणों को दर्शाया गया। दीवार के शीर्ष पर स्थापित प्रतीकात्मक अमर जवान ज्योति शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करती दिखी। ट्रेलर भाग में राष्ट्रनिर्माण की झलक थी, जिसमें दिखाया गया कि कैसे सेवानिवृत्त सैनिक आज भी विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रसेवा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोप से आए मुख्य अतिथि कर्तव्य पथ पर उपस्थित रहे। पूरी परेड ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि भारत न केवल सैन्य रूप से सशक्त है, बल्कि सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प में अडिग भी है।

आत्मविश्वास और सौंदर्य की नई परिभाषा बनी वोगस्टार इंडिया सीज़न-4

जोधपुर की डॉ. भूमिका बैनर्जी ने सेकंड रनर-अप बनकर रचा प्रेरणादायी इतिहास जोधपुर। महिलाओं के आत्मविश्वास, साहस और नई शुरुआत का उत्सव बनकर उभरा मिस एंड मिसेज़ वोगस्टार इंडिया सीज़न-4 इस वर्ष केवल एक फैशन शो या ब्यूटी पेजेंट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मंच महिलाओं की सोच, व्यक्तित्व और आत्मबल को नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बना। जयपुर के भव्य द पैलेस बाय पार्क ज्वेल्स में 16 से 18 जनवरी तक आयोजित इस प्रतिष्ठित आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सौंदर्य की परिभाषा उम्र या पारंपरिक मानकों से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, उद्देश्य और व्यक्तित्व से तय होती है। इस राष्ट्रीय स्तर के मंच पर जोधपुर की डॉ. भूमिका बैनर्जी ने बतौर मॉडल अपना शानदार डेब्यू किया और Mrs VogueStar India Season-4 (G2 कैटेगरी) में सेकंड रनर-अप का खिताब जीतकर न केवल शहर, बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया। उनके आत्मविश्वास से भरे रैंप वॉक, सहजता और गरिमामय प्रस्तुति ने निर्णायक मंडल के साथ-साथ दर्शकों को भी गहराई से प्रभावित किया। डॉ. भूमिका बैनर्जी की यह उपलब्धि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी, जो पारिवारिक, सामाजिक या पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को दोबारा जीने का साहस जुटाती हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सही मंच और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ हर महिला अपनी नई पहचान बना सकती है। कार्यक्रम की फाउंडर और डायरेक्टर कीर्ति चौधरी के नेतृत्व में आयोजित इस सीज़न में तीन श्रेणियां रखी गई थीं— मिस, मिसेज़ G1 और मिसेज़ G2। देश के विभिन्न राज्यों से आई प्रतिभागियों ने इन श्रेणियों में भाग लेकर मंच को विविधता, ऊर्जा और आत्मविश्वास से भर दिया। हर प्रतिभागी ने अपनी कहानी, संघर्ष और आत्मबल के जरिए मंच को जीवंत बना दिया। वोगस्टार इंडिया एक महिला-नेतृत्व वाला ऐसा मंच है, जो उम्र, पृष्ठभूमि या जीवन की परिस्थितियों की परवाह किए बिना महिलाओं को आगे बढ़ने और खुद को साबित करने का अवसर देता है। यह आयोजन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब महिलाओं को सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिलता है, तो वे केवल मॉडल ही नहीं बनतीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा और बदलाव की मिसाल भी बनती हैं। वोगस्टार इंडिया सीज़न-4 ने यह संदेश दिया कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती और आत्मविश्वास ही असली सौंदर्य है।

74वें इंडिया इंटरनेशनल गारमेंट फेयर का भव्य शुभारंभ, 2030 तक 40 अरब डॉलर निर्यात का लक्ष्य

नई दिल्ली/गुरुग्राम : केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने 23 जनवरी 2026 को यशोभूमि, द्वारका (नई दिल्ली) में इंडिया इंटरनेशनल गारमेंट फेयर (IIGF) के 74वें संस्करण का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए सैकड़ों प्रदर्शक, अंतरराष्ट्रीय खरीदार और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उद्घाटन समारोह में दीप प्रज्वलन, फेयर गाइड का विमोचन तथा मंत्री का संबोधन शामिल रहा। उद्घाटन के बाद मंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण भी किया। अपने संबोधन में केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल गारमेंट फेयर आज अंतरराष्ट्रीय परिधान खरीदारों के लिए एक भरोसेमंद और सशक्त वैश्विक मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि वे लगातार दूसरे वर्ष इस प्रतिष्ठित आयोजन का हिस्सा बने हैं। मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में भारतीय वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र ने अभूतपूर्व प्रगति की है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र का बाजार आकार 8.4 लाख करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर लगभग 16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। घरेलू बाजार भी 6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि महामारी के बाद भारत के वस्त्र निर्यात में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है और यह क्षेत्र रोजगार सृजन का एक प्रमुख माध्यम बन गया है। श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने वस्त्र उद्योग से जुड़े सभी प्रमुख अवरोधों को दूर किया है। QCO सुधार, RoDTEP और RoSCTL में वृद्धि, आयात शुल्क में अस्थायी कटौती, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर का समाधान जैसे कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने इन योजनाओं के माध्यम से उद्योग को अब तक 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का समर्थन दिया है। मंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का वस्त्र उद्योग मजबूती से आगे बढ़ रहा है। निर्यात विविधीकरण के तहत भारत ने 40 नए देशों में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अर्जेंटीना में 77%, मिस्र में 30%, पोलैंड और जापान में 20%, जबकि स्वीडन और फ्रांस में 10% की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत–यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौता शीघ्र ही संपन्न होने वाला है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा। मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत अब विदेशी मानकों पर निर्भर रहने के बजाय VisionNxt और IndiaSize जैसी स्वदेशी पहलों के माध्यम से अपने स्वयं के डिजाइन और साइज मानक विकसित कर रहा है। उन्होंने उद्योग से भारतीय मानकों को अपनाने की अपील की। इस अवसर पर AEPC (अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल) के चेयरमैन डॉ. ए. शक्तिवेल ने कहा कि IIGF का 74वां संस्करण भारत के प्रति वैश्विक विश्वास का प्रमाण है। इस संस्करण में 233 प्रदर्शक, 5,073 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैले हुए हैं और 1,120 से अधिक पंजीकृत अंतरराष्ट्रीय खरीदार भाग ले रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रदर्शक भारत की मजबूत विनिर्माण क्षमता को दर्शाते हैं। डॉ. शक्तिवेल ने बताया कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय रेडीमेड गारमेंट (RMG) उद्योग ने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है। अप्रैल से दिसंबर 2025-26 के दौरान भारत का परिधान निर्यात **11.58 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.4 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने सरकार के समक्ष उद्योग की कुछ प्रमुख मांगें भी रखीं, जिनमें अमेरिका के लिए फोकस मार्केट स्कीम, ब्याज समानीकरण योजना की सीमा बढ़ाना, 5% ब्याज सबवेंशन जैसी मांगें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इससे विशेष रूप से MSME निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी। डॉ. शक्तिवेल ने यह भी बताया कि इस संस्करण में यूएई, जापान, फ्रांस, इटली, रूस, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, कोरिया, स्पेन, मॉरीशस और इजराइल सहित कई देशों के प्रमुख ब्रांड और रिटेल चेन के खरीदार शामिल हुए हैं, जो भारत की डिजाइन, गुणवत्ता, अनुपालन और समयबद्ध डिलीवरी पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। भविष्य को लेकर आशावाद जताते हुए उन्होंने कहा कि भारत–EU FTA और प्रतिस्पर्धी देशों को मिलने वाली वरीयताओं में कमी से भारत को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि 2030 तक 40 अरब डॉलर के परिधान निर्यात लक्ष्य को भारत अवश्य हासिल करेगा। कार्यक्रम के अंत में IGFA के उपाध्यक्ष श्री राकेश वैद ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और इस सफल आयोजन के लिए सभी सहभागियों की सराहना की।