नई दिल्ली।राजधानी दिल्ली में नए साल की शुरुआत कड़ाके की ठंड, घने कोहरे और गंभीर वायु प्रदूषण के साथ हुई है। मौसम विभाग ने 2 से 5 जनवरी तक शीत लहर की चेतावनी जारी की है, जबकि घने कोहरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। मौसम और प्रदूषण की इस दोहरी मार ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के प्रभाव से न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। कई इलाकों में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे चला गया है, जिससे सुबह और रात के समय तेज ठिठुरन महसूस की जा रही है। दिन में धूप निकलने के बावजूद सर्द हवाओं के कारण ठंड का असर बना हुआ है। घने कोहरे के कारण दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में दृश्यता बेहद कम रही। सुबह के समय कुछ इलाकों में विजिबिलिटी 50 से 100 मीटर तक सिमट गई, जिससे सड़क यातायात प्रभावित हुआ। वाहन चालकों को धीमी गति से चलना पड़ा, वहीं रेल और हवाई सेवाओं पर भी कोहरे का असर देखा गया। ठंड के साथ-साथ राजधानी की वायु गुणवत्ता भी गंभीर स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 370 से ऊपर दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। आनंद विहार, अशोक विहार, वजीरपुर और रोहिणी जैसे इलाकों में AQI और भी अधिक रिकॉर्ड किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि कम हवा की रफ्तार और कोहरे के कारण प्रदूषण फैलने के बजाय वातावरण में ही फंसा हुआ है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों पर पड़ सकता है। डॉक्टरों ने ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभाग और मौसम विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे सुबह और देर शाम अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें, गर्म कपड़े पहनें और जरूरत पड़ने पर मास्क का इस्तेमाल करें। कोहरे के दौरान वाहन चलाते समय फॉग लाइट का प्रयोग करने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की भी सलाह दी गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले कुछ दिनों तक ठंड, कोहरा और खराब वायु गुणवत्ता से राहत मिलने की संभावना कम है। ऐसे में राजधानीवासियों को सतर्क रहने और एहतियात बरतने की जरूरत है।
ईरान की सड़कों पर गुस्सा: आर्थिक तबाही से उठी सत्ता परिवर्तन की लहर
ईरान इस समय अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक से गुजर रहा है। कभी सीमित आर्थिक असंतोष के रूप में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब खुले तौर पर सरकार बदलने की मांग में तब्दील हो चुके हैं। सड़कों पर उतरते लोग सिर्फ महंगाई और बेरोजगारी का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि पूरे शासन तंत्र पर सवाल उठा रहे हैं। आर्थिक संकट की जड़ में क्या है? ईरानी अर्थव्यवस्था लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, युद्ध के दबाव और आंतरिक नीतिगत कमजोरियों से जूझ रही है। हालात तब और बिगड़ गए जब देश की मुद्रा रियाल ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 14.2 लाख रियाल तक पहुंच गई, जिसने आम लोगों की क्रय शक्ति लगभग खत्म कर दी। रियाल की गिरावट का सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा— ♦खाने-पीने की चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती चली गईं ♦आयात-निर्यात और व्यापार लगभग ठप पड़ गया ♦ छोटे दुकानदार और व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए बाजार बंद, सड़कों पर विरोध आर्थिक बदहाली के खिलाफ विरोध की शुरुआत कुछ हफ्ते पहले हुई, जब तेहरान के ग्रैंड बाजार और मोबाइल फोन बाजार के दुकानदारों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया। दुकानों के शटर गिरते ही यह साफ हो गया कि असंतोष सिर्फ आम जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापारिक वर्ग भी सरकार से नाराज है। धीरे-धीरे यह आंदोलन बाजारों से निकलकर सड़कों तक पहुंच गया। कई शहरों में लोग नारे लगाते हुए दिखाई दिए, जिनमें अब महंगाई के साथ-साथ शासन परिवर्तन की मांग भी खुलकर सुनाई देने लगी। आर्थिक नाराजगी से राजनीतिक चुनौती तकविशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान में यह कोई पहला विरोध प्रदर्शन नहीं है, लेकिन इस बार का फर्क साफ है। पहले जहां प्रदर्शनकारी वेतन, सब्सिडी और कीमतों में राहत की मांग कर रहे थे, अब नारे सीधे तौर पर सरकारी नीतियों और नेतृत्व को निशाना बना रहे हैं। युद्ध जैसी परिस्थितियां, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का बोझ और सख्त सरकारी नियंत्रण—इन सबने मिलकर जनता के धैर्य की सीमा तोड़ दी है। सरकार की सख्ती और बढ़ता तनाव सरकार ने इन प्रदर्शनों को काबू में करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की खबरें भी सामने आ रही हैं। हालांकि, दमन की नीति ने हालात को शांत करने के बजाय कई जगह और भड़का दिया है। आगे क्या? ईरान के लिए यह सिर्फ आर्थिक संकट नहीं, बल्कि राजनीतिक स्थिरता की बड़ी परीक्षा बन चुका है। अगर महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा संकट पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल, ईरान की सड़कों पर गूंज रहा जनाक्रोश यह संकेत दे रहा है कि देश में हालात सामान्य नहीं हैं—और आने वाले दिन सरकार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
नया साल 2026: श्रद्धा और भक्ति में डूबा दिल्ली-एनसीआर, मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब
नई दिल्ली। नव वर्ष 2026 की पहली सुबह दिल्ली-एनसीआर में आस्था, श्रद्धा और विश्वास के रंग में रंगी नजर आई। कड़ाके की ठंड के बावजूद राजधानी दिल्ली सहित नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर पहुंचे और नए साल की शुरुआत सुख, शांति और समृद्धि की कामना के साथ की। नए साल के पहले दिन सुबह से ही प्रमुख मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। दिल्ली के प्रसिद्ध झंडेवाला देवी मंदिर में विशेष रौनक रही, जहां तड़के से ही श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचने लगे। मंदिर परिसर “जय माता दी” के जयकारों से गूंजता रहा। सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए पुलिस तथा मंदिर प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे। इसके अलावा हनुमान मंदिर (कनॉट प्लेस), लक्ष्मी नारायण मंदिर (बिड़ला मंदिर) छतरपुर मंदिर, काली बाड़ी मंदिर और इस्कॉन मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने पूजा-अर्चना कर अपने परिवार और समाज के लिए खुशहाली की प्रार्थना की। एनसीआर के शहरों में भी दिखी आस्था की झलक नोएडा के सेक्टर-62 स्थित मंदिरों, गुरुग्राम के शीतला माता मंदिर और फरीदाबाद के प्रमुख धार्मिक स्थलों में भी नव वर्ष पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। कई मंदिरों में विशेष आरती, हवन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं का कहना था कि नए साल की शुरुआत भगवान के दर्शन से करने से पूरे वर्ष सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। एक भक्त ने कहा, “हर साल हम नए साल की शुरुआत मंदिर जाकर करते हैं, ताकि पूरा साल शांति और सफलता से भरा रहे।” सुरक्षा और व्यवस्था चाक-चौबंद भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। मंदिरों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा, वहीं यातायात को सुचारु रखने के लिए विशेष ट्रैफिक व्यवस्था की गई। कुल मिलाकर, नव वर्ष 2026 की शुरुआत दिल्ली-एनसीआर में उत्सव और आस्था के अनूठे संगम के साथ हुई, जहां लोगों ने भक्ति के साथ नए साल का स्वागत किया और बेहतर भविष्य की कामना की।
स्विट्जरलैंड के लग्जरी स्की रिजॉर्ट में भीषण धमाका, नए साल के जश्न पर मातम
40 लोगों की मौत की आशंका, कारण अज्ञात; पुलिस और एजेंसियों की जांच तेज नई दिल्ली,डिजिटल डेस्क : स्विट्जरलैंड के एक प्रसिद्ध और लग्जरी स्की रिजॉर्ट में नए साल के पहले दिन हुए जोरदार धमाके से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। इस भयावह घटना में अब तक करीब 40 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। धमाके के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और पर्यटकों में दहशत फैल गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह धमाका उस समय हुआ जब बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और विदेशी पर्यटक नए साल का जश्न मना रहे थे। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई, जिससे आसपास के इलाकों में भी लोग सहम गए। घटना के तुरंत बाद आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट किया गया और राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस के मुताबिक, धमाके के कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इसे लेकर किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि यह हादसा था या किसी अन्य वजह से हुआ। सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से मामले की जांच कर रही हैं। फोरेंसिक टीमें भी मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने में लगी हुई हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है। इसी वजह से मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर रिजॉर्ट और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा कड़ी कर दी है और पर्यटकों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगाई गई है। स्विस सरकार ने घटना पर गहरा शोक जताते हुए कहा है कि सच्चाई सामने लाने के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की जाएगी। वहीं, कई देशों ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर जानकारी जुटानी शुरू कर दी है, क्योंकि इस रिजॉर्ट में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक मौजूद रहते हैं। नए साल की खुशियों के बीच हुई इस दर्दनाक घटना ने पूरे यूरोप को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करने की अपील की है। जांच पूरी होने के बाद ही धमाके के पीछे की असली वजह साफ हो पाएगी।
रेल यात्रा में नया अध्याय: देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का एलान, गुवाहाटी–कोलकाता रूट पर जनवरी में होगी शुरुआत
नई दिल्ली/गुवाहाटी: भारतीय रेलवे देश की रेल व्यवस्था को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। देश को जल्द ही पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मिलने वाली है। यह हाईटेक और सेमी-हाई स्पीड ट्रेन गुवाहाटी से कोलकाता के बीच चलेगी। रेलवे सूत्रों के अनुसार, इसका शुभारंभ नए साल 2026 में 17 या 18 जनवरी को किए जाने की संभावना है। इस ऐतिहासिक ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखा सकते हैं। लंबी दूरी की रात्री यात्रा होगी आसान तक वंदे भारत ट्रेनों को केवल चेयर कार और एग्जीक्यूटिव क्लास में दिन के समय चलाया जा रहा था। लेकिन स्लीपर वर्जन के आने से रात में लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। खासकर पूर्वी भारत और उत्तर-पूर्वी राज्यों के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन बेहद उपयोगी साबित होगी। आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी ट्रेन वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को यात्रियों के आराम, सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसमें कई अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी, जैसे— ♦पूरी तरह वातानुकूलित स्लीपर और थ्री-एसी कोच ♦चौड़ी और आरामदायक बर्थ ♦ आधुनिक और स्वच्छ बायो-टॉयलेट ♦ऑटोमैटिक दरवाजे और स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम ♦मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट ♦सीसीटीवी कैमरे और उन्नत सुरक्षा व्यवस्था ♦ कम कंपन और शोर के लिए विशेष सस्पेंशन सिस्टम रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह ट्रेन यात्रियों को होटल जैसी आरामदायक यात्रा का अनुभव देगी। यात्रा समय में होगी कमी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की रफ्तार पारंपरिक स्लीपर और एक्सप्रेस ट्रेनों से अधिक होगी। सीमित स्टॉपेज और तेज गति के कारण गुवाहाटी से कोलकाता के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों, छात्रों और पर्यटकों—सभी को समय और ऊर्जा की बचत होगी। किराए को लेकर क्या है अनुमान हालांकि रेलवे की ओर से अभी आधिकारिक किराया सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन शुरुआती संकेतों के अनुसार इसका किराया राजधानी और दुरंतो ट्रेनों के बराबर या थोड़ा अधिक हो सकता है। किराया कोच कैटेगरी के अनुसार तय किया जाएगा, ताकि प्रीमियम सुविधा के साथ यात्रियों को संतुलित विकल्प मिल सके। उत्तर-पूर्व के विकास को मिलेगी रफ्तार इस ट्रेन के शुरू होने से उत्तर-पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, यह ट्रेन क्षेत्रीय विकास और राष्ट्रीय एकता को भी मजबूती देगी। रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत देश में ही तैयार की गई है। यह परियोजना भारतीय रेलवे की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और भविष्य की सोच को दर्शाती है। आने वाले समय में इसी तर्ज पर अन्य लंबी दूरी के रूट्स पर भी स्लीपर वंदे भारत ट्रेनों को शुरू किया जा सकता है। यात्रियों में उत्साह जैसे ही ट्रेन के रूट और संभावित तारीख की जानकारी सामने आई है, यात्रियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। लोग इसे रेल यात्रा का नया युग मान रहे हैं। कुल मिलाकर, पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का आगमन भारतीय रेलवे के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो आराम, रफ्तार और आधुनिकता का नया मानक स्थापित करेगा।
नए साल से पहले आम लोगों को बड़ी राहत, पूरे देश में एक समान होगा गैस टैरिफ; CNG और घरेलू PNG सस्ती
नई दिल्ली।नए साल की दस्तक से पहले आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर आई है। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) द्वारा पाइपलाइन टैरिफ में किए गए बड़े बदलाव का सीधा फायदा अब CNG और घरेलू PNG उपभोक्ताओं को मिलने लगा है। इस फैसले के बाद देशभर में गैस का टैरिफ एक समान कर दिया गया है, जिससे खासकर दूर-दराज और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। PNGRB के नए नियमों के तहत गैस ट्रांसपोर्टेशन चार्ज को सरल और समान बनाया गया है। पहले गैस की कीमतें दूरी और क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग होती थीं, जिससे कई राज्यों में CNG और PNG महंगी पड़ती थी। अब पूरे देश में एक समान कम दर लागू होने से यह असमानता खत्म हो जाएगी। कीमतों में कटौती की शुरुआत इस फैसले के तुरंत बाद सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनी थिंक गैस ने CNG और घरेलू PNG की कीमतों में कटौती की घोषणा कर दी है। कंपनी के मुताबिक, नए पाइपलाइन टैरिफ ढांचे से लागत घटी है, जिसका फायदा सीधे उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में अन्य बड़ी गैस कंपनियां भी कीमतों में कमी का ऐलान करेंगी। दूर-दराज के इलाकों को बड़ा फायदा नए टैरिफ सिस्टम का सबसे बड़ा लाभ उन क्षेत्रों को मिलेगा, जहां अब तक गैस महंगी मिलती थी। पूर्वोत्तर, पहाड़ी राज्यों और छोटे शहरों में रहने वाले उपभोक्ताओं को अब महानगरों के बराबर दरों पर CNG और घरेलू PNG मिल सकेगी। इससे न सिर्फ घरेलू बजट पर बोझ कम होगा, बल्कि स्वच्छ ईंधन को भी बढ़ावा मिलेगा। महंगाई के बीच राहत की सांस बढ़ती महंगाई के दौर में यह फैसला आम लोगों के लिए राहत लेकर आया है। CNG के सस्ते होने से टैक्सी, ऑटो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के किराए पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। वहीं घरेलू PNG की कीमत घटने से रसोई का खर्च कम होगा। नए साल का तोहफा सरकार और नियामक बोर्ड के इस कदम को नए साल से पहले उपभोक्ताओं के लिए एक बड़े तोहफे के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक समान टैरिफ व्यवस्था से गैस के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और देश में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में यह एक अहम कदम साबित होगा।
महाकाल दर्शन पर सियासी-धार्मिक घमासान: नुसरत भरूचा की पूजा पर फतवा, बयानबाज़ी तेज
उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा के दर्शन और पूजा-अर्चना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अभिनेत्री द्वारा महाकाल मंदिर में भस्म आरती में भाग लेने और जलाभिषेक करने के बाद कुछ धार्मिक संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसी कड़ी में बरेलवी मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने नुसरत के खिलाफ फतवा जारी कर दिया है, जिससे मामला और गरमा गया है। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपने बयान में कहा कि इस्लाम में मूर्ति पूजा ‘नाजायज’ है और किसी भी मुसलमान का इसमें शामिल होना शरीयत के खिलाफ माना जाता है। उन्होंने कहा कि नुसरत भरूचा का महाकाल मंदिर में पूजा करना इस्लामी शिक्षाओं का उल्लंघन है। मौलाना ने यहां तक कहा कि अभिनेत्री शरीयत की नजर में गुनहगार हैं। फतवे में यह भी कहा गया है कि नुसरत भरूचा को अल्लाह से तौबा करनी चाहिए और दोबारा कलमा पढ़ना चाहिए, ताकि वे इस्लाम के दायरे में वापस आ सकें। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। एक वर्ग मौलाना के बयान का समर्थन कर रहा है, तो वहीं बड़ी संख्या में लोग इसे व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं। उधर, महाकाल मंदिर में दर्शन को लेकर नुसरत भरूचा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, अभिनेत्री के समर्थकों का कहना है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां हर व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार पूजा करने की आज़ादी है। उनका तर्क है कि किसी धार्मिक स्थल पर दर्शन करना निजी विश्वास का मामला है और इसे किसी एक धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर धर्म, व्यक्तिगत आस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई बहस को जन्म दे दिया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या किसी सार्वजनिक हस्ती की निजी धार्मिक गतिविधियों पर इस तरह के फतवे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं। फिलहाल, महाकाल दर्शन का यह मामला धार्मिक और सामाजिक विमर्श के केंद्र में बना हुआ है।
पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर की बेटी की शादी, आर्मी हेडक्वार्टर में हुई निजी रस्म
रावलपिंडी।पाकिस्तान के सेना प्रमुख (COAS) जनरल आसिम मुनीर की बेटी महनूर की शादी 26 दिसंबर को उनके फर्स्ट कजिन अब्दुल रहमान के साथ संपन्न हुई। यह विवाह समारोह रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान आर्मी के जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में बेहद निजी और सीमित मेहमानों की मौजूदगी में आयोजित किया गया। सूत्रों के मुताबिक, विवाह समारोह को पूरी तरह से प्राइवेट रखा गया, जिसमें परिवार के करीबी सदस्य और चुनिंदा लोग ही शामिल हुए। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच रस्में पूरी की गईं। सार्वजनिक या राजनीतिक हस्तियों की व्यापक मौजूदगी की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि दूल्हा अब्दुल रहमान जनरल आसिम मुनीर के भाई के बेटे हैं, यानी यह शादी पारिवारिक रिश्तों के दायरे में हुई। पाकिस्तान में ऐसे विवाह सामाजिक रूप से स्वीकार्य माने जाते हैं और कई परिवारों में यह परंपरा रही है। हालांकि, इस विवाह को लेकर न तो इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) और न ही सेना की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी किया गया है। इसके बावजूद, यह खबर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां लोग सेना प्रमुख के पारिवारिक आयोजन को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। गौरतलब है कि जनरल आसिम मुनीर मौजूदा समय में पाकिस्तान की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके परिवार से जुड़ी किसी भी निजी घटना पर देश-विदेश की नजरें टिकी रहती हैं।
“बंगाल में घुसपैठ और कुशासन का अंत तय, दो-तिहाई बहुमत से बनेगी बीजेपी सरकार” — अमित शाह का ममता सरकार पर बड़ा हमला
कोलकाता। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को लेकर राज्य में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने घुसपैठ, गरीबी, भ्रष्टाचार और कुशासन जैसे मुद्दों को लेकर तृणमूल कांग्रेस सरकार को घेरा और दावा किया कि आने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) दो-तिहाई बहुमत के साथ राज्य में सरकार बनाएगी। अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल आज कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, जिनकी जड़ में राज्य की मौजूदा सरकार की नीतियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में अवैध घुसपैठ लगातार बढ़ रही है, जिससे राज्य की सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने पर खतरा पैदा हो गया है। गृह मंत्री ने कहा, “बंगाल की सीमाएं असुरक्षित हैं। घुसपैठ को लेकर ममता सरकार आंख मूंदे बैठी है, जबकि इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।” गरीबी और विकास के मुद्दे पर सरकार को घेरा प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने राज्य में फैली गरीबी और बेरोजगारी का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं को बंगाल सरकार ने राजनीतिक कारणों से सही तरीके से लागू नहीं किया, जिससे गरीब, किसान और मजदूर वर्ग को उनका पूरा लाभ नहीं मिल पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि “ममता सरकार ने केंद्र की योजनाओं पर अपना नाम चिपकाने की राजनीति की, लेकिन ज़मीनी स्तर पर जनता तक लाभ नहीं पहुंचाया।” कुशासन और भ्रष्टाचार के आरोप गृह मंत्री ने बंगाल सरकार पर कुशासन और भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है और अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। शिक्षक भर्ती घोटाले और अन्य मामलों का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि तृणमूल सरकार ने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। बीजेपी के वादे और चुनावी दावा अमित शाह ने भरोसा जताया कि बंगाल की जनता इस बार बदलाव के मूड में है। उन्होंने कहा, “आने वाले विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की जनता तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार और भय की राजनीति को खत्म करेगी। बीजेपी दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाएगी और राज्य में विकास, सुरक्षा और सुशासन का नया अध्याय शुरू होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की सरकार बनने पर राज्य में बिना भेदभाव के विकास होगा, सीमाओं की सुरक्षा मजबूत की जाएगी और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमित शाह का आक्रामक रुख यह साफ संकेत देता है कि आगामी विधानसभा चुनावों में बंगाल राजनीतिक रूप से बेहद गर्म रहने वाला है, जहां बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधी और कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी।
प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा ने सात साल की प्रेम कहानी के बाद अवीवा बेग से की सगाई
नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और उद्योगपति रॉबर्ट वाड्रा के परिवार में खुशियों का माहौल है। उनके बेटे रेहान वाड्रा ने अपनी लंबे समय से प्रेमिका अवीवा बेग से सगाई कर ली है। सात साल के रिश्ते के बाद दोनों ने अपने संबंधों को औपचारिक रूप देते हुए जीवन की नई शुरुआत की ओर कदम बढ़ाया है। सूत्रों के अनुसार, 25 वर्षीय रेहान वाड्रा ने हाल ही में अवीवा बेग को शादी का प्रस्ताव दिया, जिसे अवीवा ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। इस खास मौके पर दोनों परिवारों की सहमति और आशीर्वाद के साथ रिश्ते को आधिकारिक रूप से मंजूरी दी गई। सात साल की मजबूत लव स्टोरी रेहान और अवीवा की मुलाकात कई वर्ष पहले हुई थी। दोस्ती से शुरू हुआ यह रिश्ता समय के साथ प्यार और विश्वास में बदल गया। दोनों की रुचियां—खासतौर पर फोटोग्राफी और कला—ने उन्हें और करीब लाने का काम किया। निजी और पेशेवर जीवन में एक-दूसरे का साथ निभाते हुए दोनों ने अपने रिश्ते को मजबूती दी। सादगी भरा, निजी सगाई समारोह सगाई की रस्म को पूरी तरह पारिवारिक और निजी रखा गया। समारोह में केवल करीबी रिश्तेदार और चुनिंदा लोग ही शामिल हुए। इस दौरान रेहान ने अवीवा को अंगूठी पहनाई और दोनों ने इस खास पल को सादगी और आत्मीयता के साथ साझा किया। परिवार के सदस्यों ने नवयुगल को शुभकामनाएं दीं। अब शादी की तैयारियां शुरू सगाई के बाद अब दोनों परिवार शादी की तैयारियों में जुट गए हैं। सूत्रों की मानें तो शादी समारोह राजस्थान में आयोजित किया जा सकता है। हालांकि, शादी की तारीख को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जल्द ही तारीख सामने आने की संभावना है। कौन हैं रेहान वाड्रा और अवीवा बेग रेहान वाड्रा प्रियंका गांधी वाड्रा और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे हैं। उनका झुकाव राजनीति से अधिक कला और फोटोग्राफी की ओर रहा है। वे अपने फोटोग्राफी प्रोजेक्ट्स और कला प्रदर्शनियों के लिए जाने जाते हैं। अवीवा बेग दिल्ली स्थित फोटोग्राफर और क्रिएटिव प्रोफेशनल हैं। उन्होंने अपने रचनात्मक काम के दम पर कला जगत में अलग पहचान बनाई है। गांधी–वाड्रा परिवार में इस सगाई के साथ ही उत्सव और खुशियों का सिलसिला शुरू हो गया है, और अब सभी को इस शाही शादी के ऐलान का इंतजार है।