एयरलाइन जैसा किराया, होटल जैसी सुविधा: 17 जनवरी को पटरी पर उतरेगी पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा में विश्वस्तरीय अनुभव देने जा रहा है। 17 जनवरी को देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लॉन्च की जाएगी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाएंगे। यह ट्रेन खास तौर पर रात की यात्रा को आरामदायक, तेज और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। ऑनलाइन बुकिंग, एयरलाइन जैसा किराया वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की टिकट बुकिंग पूरी तरह ऑनलाइन होगी। रेलवे सूत्रों के मुताबिक, इसका किराया लगभग 13 हजार रुपये तक हो सकता है, जो दूरी और श्रेणी के अनुसार तय किया जाएगा। किराया डायनामिक प्राइसिंग पर आधारित होगा, ठीक एयरलाइंस की तरह। नहीं मिलेगा RAC या वेटिंग टिकट इस ट्रेन की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन) और वेटिंग लिस्ट टिकट की सुविधा नहीं होगी। यानी केवल कन्फर्म टिकट पर ही यात्रा की अनुमति मिलेगी, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। रूट और यात्रा समय पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लंबी दूरी के हाई-डिमांड रूट पर चलाया जाएगा। माना जा रहा है कि यह ट्रेन प्रमुख महानगरों को जोड़ेगी और पारंपरिक राजधानी व दुरंतो ट्रेनों की तुलना में कम समय में यात्रा पूरी करेगी। रेलवे जल्द ही आधिकारिक रूट की घोषणा करेगा। आधुनिक स्लीपर कोच की सुविधाएं वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में यात्रियों को मिलेंगी कई अत्याधुनिक सुविधाएं— * आरामदायक एसी स्लीपर बर्थ * हर कोच में ऑटोमैटिक दरवाजे और CCTV कैमरे * पढ़ने की लाइट, मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट * बेहतर सस्पेंशन सिस्टम से झटकों से मुक्त यात्रा * स्वच्छ और आधुनिक बायो-वैक्यूम टॉयलेट महिलाओं, दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोटा रेलवे ने इस ट्रेन में महिलाओं, दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष कोटा तय किया है, ताकि इन वर्गों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिल सके। रेलवे के लिए बड़ा कदम वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ लंबी दूरी की यात्रा का अनुभव बदलेगा, बल्कि रेल को हवाई यात्रा का एक मजबूत विकल्प भी मिलेगा। 17 जनवरी को लॉन्च होने जा रही वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, किराया भले ही प्रीमियम हो, लेकिन सुविधाओं, समय की बचत और आराम के मामले में यह भारतीय रेल यात्रियों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।

अंतरिक्ष में ‘अन्वेषा’ की उड़ान, लेकिन PSLV मिशन में आई तकनीकी अड़चन — PS3 स्टेज पर खराबी से इसरो की चुनौती बढ़ी

श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रविवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के तहत अत्याधुनिक निगरानी उपग्रह ‘अन्वेषा’ का सफल प्रक्षेपण किया। यह उपग्रह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित एक गोपनीय हाइपरस्पेक्ट्रल निगरानी सैटेलाइट है, जिसका उपयोग रणनीतिक निगरानी और सुरक्षा संबंधी जरूरतों के लिए किया जाएगा। हालांकि, मिशन के दौरान PS3 (तीसरे चरण) में तकनीकी खराबी दर्ज की गई, जिसने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी। क्या है ‘अन्वेषा’ की खासियत ‘अन्वेषा’ हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक से लैस है, जो धरती की सतह से निकलने वाले विभिन्न स्पेक्ट्रल सिग्नल्स का विश्लेषण कर सटीक जानकारी प्रदान करती है। इससे सीमावर्ती इलाकों की निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और आपदा प्रबंधन जैसे अहम क्षेत्रों में मदद मिलने की उम्मीद है। रक्षा क्षेत्र में इसे एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि माना जा रहा है। 15 सह-उपग्रह भी भेजे गए कक्षा में इस मिशन के तहत ‘अन्वेषा’ के साथ 15 सह-उपग्रह (को-पैसेंजर सैटेलाइट्स) भी अंतरिक्ष में भेजे गए। ये उपग्रह विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स द्वारा विकसित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य संचार, पृथ्वी अवलोकन और प्रायोगिक अनुसंधान है। इससे भारत के स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। PS3 स्टेज पर तकनीकी खराबी मिशन के दौरान रॉकेट के तीसरे चरण यानी PS3 स्टेज में तकनीकी समस्या सामने आई। इसरो ने प्रारंभिक बयान में कहा कि खराबी की विस्तृत जांच की जा रही है और सभी टेलीमेट्री डेटा का विश्लेषण किया जाएगा। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि समस्या का असर मिशन के समग्र उद्देश्यों पर कितना पड़ा है। इसरो का बयान इसरो अधिकारियों के मुताबिक, प्रक्षेपण प्रक्रिया के अधिकांश चरण निर्धारित योजना के अनुसार पूरे हुए। एजेंसी ने कहा कि वह पारदर्शिता के साथ तकनीकी पहलुओं की समीक्षा करेगी और भविष्य के मिशनों में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। आगे की राह हाल के वर्षों में PSLV भारत का सबसे भरोसेमंद प्रक्षेपण यान रहा है। ऐसे में इस तकनीकी अड़चन को एक सीख के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसरो की मजबूत इंजीनियरिंग क्षमता और अनुभव के चलते इस समस्या का समाधान जल्द ही निकाल लिया जाएगा। कुल मिलाकर, ‘अन्वेषा’ का प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष और रक्षा क्षमताओं में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है, भले ही इस मिशन ने वैज्ञानिकों के सामने नई तकनीकी चुनौतियां भी खड़ी कर दी हों।

इतिहास के घाव कुरेदकर देश को बांटने की कोशिश” — अजीत डोभाल के बयान पर महबूबा मुफ्ती का तीखा हमला

नई दिल्ली/श्रीनगर: पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के हालिया बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि “सदियों पुरानी घटनाओं का बदला लेने” जैसे बयान न सिर्फ खतरनाक हैं, बल्कि देश के युवाओं को गुमराह कर उन्हें अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ उकसाने का काम भी करते हैं। महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि इस तरह की भाषा एक खास सांप्रदायिक विचारधारा को बढ़ावा देती है, जिससे समाज में नफरत और ध्रुवीकरण गहराता है। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य की सोच जरूरी है, न कि अतीत के विवादों को फिर से हवा देना। युवाओं को गलत दिशा में धकेला जा रहा’ पीडीपी प्रमुख ने कहा कि आज का युवा रोजगार, शिक्षा और विकास की उम्मीद करता है, लेकिन ऐसे बयान उन्हें नफरत और बदले की राजनीति की ओर धकेल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर नेतृत्व स्तर पर जिम्मेदार भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया, तो इसके गंभीर सामाजिक परिणाम हो सकते हैं। ‘संविधान और भाईचारे की भावना पर हमला’ महबूबा मुफ्ती ने यह भी कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता और संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष मूल्यों में है। सदियों पुराने घटनाक्रमों का हवाला देकर बदले की भावना पैदा करना संविधान की आत्मा और देश की एकता—दोनों के खिलाफ है। केंद्र सरकार से अपील उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह विभाजनकारी बयानबाजी से दूरी बनाए और देश में सौहार्द, संवाद और विश्वास बहाली पर ध्यान दे। मुफ्ती ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मतलब सिर्फ बाहरी खतरों से निपटना नहीं, बल्कि देश के भीतर शांति और सामाजिक समरसता को मजबूत करना भी है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है, वहीं सत्तापक्ष की ओर से अब तक इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

सीरिया में ISIS पर अमेरिका की बड़ी कार्रवाई: ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ से आतंकी ठिकानों पर करारा प्रहार

न्यूज डेस्क | अंतरराष्ट्रीय: अमेरिका ने सीरिया में सक्रिय आतंकी संगठन ISIS के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया है, जिसे ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ नाम दिया गया है। इस ऑपरेशन के तहत अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सहयोगी बलों के साथ मिलकर ISIS के कई ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में आतंकी नेटवर्क को कमजोर करना और भविष्य में होने वाले हमलों को रोकना है। क्या है ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक? ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ एक उच्च-स्तरीय, सटीक सैन्य अभियान बताया जा रहा है, जिसमें आधुनिक निगरानी प्रणालियों, ड्रोन और लक्षित हवाई हमलों का इस्तेमाल किया गया। ‘हॉकआई’ नाम इस बात की ओर इशारा करता है कि ऑपरेशन में खुफिया निगरानी और रियल-टाइम इंटेलिजेंस की अहम भूमिका रही, ताकि केवल आतंकी ठिकानों को ही निशाना बनाया जा सके। सेंटकॉम की भूमिका अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि यह अभियान सहयोगी बलों के समन्वय से अंजाम दिया गया। ऑपरेशन के दौरान ISIS के ठिकानों, हथियार डिपो और संभावित कमांड सेंटर्स को लक्ष्य बनाया गया। सेंटकॉम का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयां क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। क्यों जरूरी थी यह कार्रवाई? हाल के महीनों में ISIS के बचे-खुचे नेटवर्क द्वारा फिर से संगठित होने की आशंका जताई जा रही थी। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, आतंकी संगठन सीमावर्ती इलाकों में अपनी गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ के जरिए अमेरिका ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। क्षेत्रीय असर और आगे की रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऑपरेशन से ISIS की operational क्षमता को झटका लगा है, हालांकि पूरी तरह खतरा खत्म होना अभी बाकी है। अमेरिका और उसके सहयोगी आने वाले समय में भी निगरानी और आवश्यक कार्रवाई जारी रखने के संकेत दे चुके हैं। ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ अमेरिका की आतंकवाद विरोधी रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। सीरिया में ISIS के खिलाफ यह कार्रवाई न सिर्फ सैन्य दबाव बढ़ाती है, बल्कि वैश्विक मंच पर यह संदेश भी देती है कि आतंक के खिलाफ अभियान लगातार और निर्णायक रूप से जारी रहेगा।

सोमनाथ में शिवभक्ति और स्वाभिमान का संगम: डमरू की गूंज के बीच शौर्य यात्रा में शामिल हुए पीएम मोदी

सोमनाथ (गुजरात): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर हैं। दौरे के दूसरे दिन उन्होंने विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत निकाली गई भव्य शौर्य यात्रा में हिस्सा लिया। इस अवसर पर पूरा सोमनाथ क्षेत्र हर-हर महादेव और डमरू की गूंज से गूंज उठा। दोनों हाथों में डमरू थामे शिव भक्तों का विशाल हुजूम प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए उमड़ पड़ा। शौर्य यात्रा में पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-नगाड़ों और धार्मिक नारों के बीच ऐतिहासिक और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी ने यात्रा के दौरान शिवभक्तों का अभिवादन किया और सोमनाथ की ऐतिहासिक विरासत को नमन किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की आस्था, साहस और स्वाभिमान का प्रतीक है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि बार-बार आक्रमणों और विनाश के बावजूद सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत की सांस्कृतिक चेतना और अदम्य साहस का उदाहरण है। उन्होंने इसे नए भारत की आत्मा से जोड़ते हुए कहा कि देश अपनी परंपराओं और विरासत पर गर्व के साथ आगे बढ़ रहा है। इस मौके पर गुजरात के मुख्यमंत्री, राज्यपाल, संत-महात्मा, साधु-संत और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, जबकि प्रशासन ने पूरे आयोजन को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की थीं। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के जरिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश की शांति, समृद्धि और विकास की कामना की। सोमनाथ में आयोजित यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने देशभर में सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत किया।

लैंड फॉर जॉब मामले में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ीं, तेजस्वी–तेज प्रताप समेत 46 पर आरोप तय

नई दिल्ली/पटना। लैंड फॉर जॉब घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव समेत कुल 46 आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं। वहीं, सबूतों के अभाव में 52 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। अदालत के इस फैसले से मामला एक बार फिर सियासी और कानूनी सुर्खियों में आ गया है। क्या है लैंड फॉर जॉब मामला? यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि ये जमीनें बेहद कम कीमत पर या नाममात्र के सौदों में लालू परिवार से जुड़े लोगों के नाम कराई गईं। जांच के दौरान कई रजिस्ट्री दस्तावेज, बैंक लेन-देन और बयान अदालत के समक्ष पेश किए गए, जिनके आधार पर आरोप तय किए गए हैं। अदालत का फैसला अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त हैं। * 46 आरोपियों पर आरोप तय: इनमें तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव सहित परिवार से जुड़े अन्य लोग और कथित लाभार्थी शामिल हैं। * 52 आरोपियों को बरी: अदालत ने माना कि इनके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें मुकदमे से मुक्त किया जाता है। राजनीतिक हलचल तेज फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्ष ने इसे “भ्रष्टाचार के खिलाफ न्याय की जीत” बताया, जबकि राजद नेताओं ने कहा कि वे अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे और सच सामने आएगा। तेजस्वी यादव के करीबी सूत्रों का कहना है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और अंतिम फैसले में उन्हें न्याय मिलेगा। आगे की प्रक्रिया अब आरोप तय होने के बाद मामले में नियमित सुनवाई शुरू होगी। अभियोजन पक्ष गवाहों और दस्तावेजों के जरिए अपने आरोप साबित करने की कोशिश करेगा, जबकि बचाव पक्ष आरोपों को निराधार बताकर चुनौती देगा। कानूनी जानकारों के अनुसार, यह मुकदमा लंबा चल सकता है और इसके राजनीतिक असर बिहार की आने वाली सियासी रणनीतियों पर भी दिख सकते हैं। नज़र आगे की सुनवाई पर लैंड फॉर जॉब केस अब निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है। अदालत में पेश होने वाली गवाही और सबूत यह तय करेंगे कि यह मामला लालू परिवार के लिए कितना भारी पड़ता है या फिर उन्हें राहत मिलती है। फिलहाल, आरोप तय होने से उनकी कानूनी चुनौतियां और बढ़ गई हैं।

ईरान में उबाल: महंगाई और बदहाली के खिलाफ सड़कों पर जनता, 42 की मौत; सरकार ने इंटरनेट-फोन सेवाएं कीं ठप

ईरान एक बार फिर व्यापक जनाक्रोश की चपेट में है। देश के कई बड़े शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन उग्र रूप ले चुके हैं। बढ़ती महंगाई, गिरती मुद्रा और लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था से त्रस्त लोग सड़कों पर उतर आए हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि अब तक कम से कम 42 लोगों की मौत की खबर है, जबकि सैकड़ों घायल बताए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कई इलाकों में हिंसक झड़पें हुईं। हालात को काबू में करने के लिए सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए इंटरनेट सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन कॉल पूरी तरह बंद कर दी हैं। इससे देश के भीतर और बाहर सूचना का प्रवाह लगभग थम गया है, और वैश्विक समुदाय को ज़मीनी हालात की सीमित जानकारी ही मिल पा रही है। क्यों भड़का गुस्सा? ईरान की जनता लंबे समय से आर्थिक संकट का सामना कर रही है। * महंगाई चरम पर: रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। * कमजोर अर्थव्यवस्था: मुद्रा की गिरती कीमत और बेरोजगारी ने युवाओं में निराशा बढ़ाई है। * सरकारी नीतियों पर सवाल: प्रदर्शनकारी सरकार की आर्थिक नीतियों और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर खुलकर नाराज़गी जता रहे हैं। कई शहरों में “रोटी, काम और आज़ादी” जैसे नारे गूंजते सुने गए, जो यह दर्शाते हैं कि विरोध सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक असंतोष का भी प्रतीक बन चुका है। सुरक्षा बलों की सख्ती सरकार ने हालात बिगड़ने के बाद सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है। कई इलाकों में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। चश्मदीदों के मुताबिक, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और अन्य सख्त उपायों का इस्तेमाल किया गया। इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद किए जाने से सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें सामने आना लगभग बंद हो गया है। जानकारों का मानना है कि यह कदम विरोध प्रदर्शनों के समन्वय और अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करने के लिए उठाया गया है। अंतरराष्ट्रीय चिंता ईरान में हालात पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। मानवाधिकार संगठनों ने मौतों और संचार बंदी पर चिंता जताई है। कई देशों ने संयम बरतने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील की है। आगे क्या? विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आर्थिक हालात में जल्द सुधार और संवाद की पहल नहीं हुई, तो यह आंदोलन और तेज हो सकता है। फिलहाल ईरान एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां सरकार और जनता के बीच टकराव का समाधान बातचीत से होगा या सख्ती से—यह आने वाले दिनों में तय होगा।

सुबह की बारिश ने दिल्ली-NCR में बढ़ाई ठिठुरन, पहाड़ों से मैदान तक बदला मौसम का मिजाज; यूपी-उत्तराखंड में भी असर

नई दिल्ली।दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। तड़के से कई इलाकों में हल्की बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट आई और ठंड का एहसास और बढ़ गया। बारिश के साथ चली ठंडी हवाओं ने लोगों को अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा लेने पर मजबूर कर दिया। सड़कों पर सुबह के समय नमी और फिसलन देखी गई, जिससे दफ्तर जाने वालों को थोड़ी परेशानी भी हुई। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर भारत के कई हिस्सों में बादल छाए हुए हैं। दिल्ली में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम तापमान में भी गिरावट आने की संभावना जताई गई है। सुबह-शाम ठंड के साथ दिन में हल्की धूप निकलने के आसार बने हुए हैं, लेकिन ठंडी हवाओं के चलते ठिठुरन बनी रह सकती है यूपी में कैसा रहेगा मौसम उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में भी मौसम बदला-बदला नजर आ रहा है। नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा और आसपास के इलाकों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हुई है। इससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 घंटों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। कोहरे की संभावना भी बनी हुई है, खासकर रात और सुबह के समय। उत्तराखंड में ठंड और बढ़ेगी उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में ठंड का प्रकोप और तेज हो गया है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी की भी खबरें मिल रही हैं। देहरादून, नैनीताल और मसूरी जैसे इलाकों में तापमान गिरा है, जबकि पहाड़ों पर ठंडी हवाओं ने सर्दी बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। अन्य राज्यों में भी असर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। कई जगहों पर बादल छाए हैं और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। इससे रबी फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद है, लेकिन ठंड बढ़ने से जनजीवन प्रभावित हो सकता है। आगे कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत में ठंड बनी रह सकती है। सुबह-शाम कोहरा, ठंडी हवाएं और कहीं-कहीं हल्की बारिश के आसार हैं। लोगों को ठंड से बचाव के लिए सतर्क रहने और मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

ईमेल से बम की धमकी ने बढ़ाई चिंता: बिहार से पंजाब तक जिला अदालतों में हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

न्यूज रिपोर्ट: देश के कई राज्यों में जिला अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद न्यायिक परिसरों में हड़कंप मच गया। यह धमकी ईमेल के जरिए भेजी गई, जिसके बाद बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और पंजाब समेत कई राज्यों की अदालतों में तत्काल सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, धमकी भरे ईमेल मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई। एहतियातन अदालत परिसरों को खाली कराया गया और वकीलों, कर्मचारियों तथा आम लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और फॉरेंसिक टीमें मौके पर पहुंचीं और पूरे परिसर की गहन तलाशी ली गई। अब तक कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं घंटों चली तलाशी के बाद किसी भी अदालत परिसर से कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री बरामद नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन सुरक्षा में किसी तरह की ढील नहीं दी जा रही। साइबर सेल जांच में जुटी ईमेल के जरिए दी गई धमकी को गंभीरता से लेते हुए साइबर सेल और खुफिया एजेंसियां जांच में जुट गई हैं। ईमेल के सोर्स, आईपी एड्रेस और संभावित नेटवर्क की तकनीकी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि धमकी किसने और कहां से भेजी। न्यायिक कामकाज पर असर इस घटना के चलते कई जगहों पर अदालतों का कामकाज अस्थायी रूप से प्रभावित रहा। कुछ अदालतों में सुनवाई स्थगित करनी पड़ी, जबकि कई स्थानों पर सीमित कार्य ही हो सका। वकील संगठनों ने भी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। प्रशासन की अपील प्रशासन ने आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू से मामले की जांच की जा रही है और दोषियों को जल्द ही चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। लगातार मिल रही ऐसी धमकियों ने देश की न्यायिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सभी संबंधित एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

रेलवे भर्ती घोटाला: फर्जी नौकरी के नाम पर करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग, ED ने चार राज्यों में 15 ठिकानों पर मारा छापा

न्यूज़ रिपोर्ट: रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में एक साथ 15 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक संगठित नेटवर्क के खिलाफ की गई है, जिसमें बेरोजगार युवाओं को रेलवे में नौकरी का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूली गई। कैसे हुआ घोटाले का खुलासा ईडी की जांच के मुताबिक, इस गिरोह ने रेलवे की विभिन्न भर्तियों का हवाला देकर अभ्यर्थियों से 5 से 15 लाख रुपये तक की रकम ली। आरोप है कि फर्जी नियुक्ति पत्र, जाली कॉल लेटर और नकली जॉइनिंग दस्तावेज तैयार किए गए। कई मामलों में उम्मीदवारों को कुछ समय के लिए काम पर लगवाने का नाटक भी किया गया, ताकि उन्हें भरोसे में लिया जा सके। यह मामला पहले स्थानीय पुलिस और सीबीआई की जांच में सामने आया था, जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग एंगल जुड़ने पर ईडी ने प्रवर्तन निदेशालय अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू की। छापेमारी में क्या मिला सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान ईडी को बड़ी मात्रा में नकद, संदिग्ध बैंक लेनदेन से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, फर्जी नियुक्ति पत्र, स्टांप और कई अहम रजिस्टर मिले हैं। जांच एजेंसी को ऐसे सबूत भी हाथ लगे हैं, जिनसे पता चलता है कि घोटाले की रकम को रियल एस्टेट, शेल कंपनियों और रिश्तेदारों के खातों के जरिए खपाया गया। चार राज्यों तक फैला नेटवर्क ईडी अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ किसी एक राज्य तक सीमित मामला नहीं है। बिहार और यूपी में जहां अभ्यर्थियों से सीधे पैसे लिए गए, वहीं गुजरात और तमिलनाडु में रकम को निवेश और लेनदेन के जरिए ठिकाने लगाने की भूमिका सामने आई है। इससे साफ है कि यह एक अंतरराज्यीय संगठित गिरोह है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल जैसे ही छापेमारी की खबर सामने आई, राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, जबकि एजेंसियों का कहना है कि जांच पूरी तरह सबूतों के आधार पर आगे बढ़ रही है और किसी को बख्शा नहीं जाएगा। आगे क्या ईडी अब जब्त दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच करेगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां संभव हैं। साथ ही, अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी तेज की जा सकती है। रेलवे में नौकरी के सपने दिखाकर बेरोजगार युवाओं को ठगने वाला यह घोटाला न सिर्फ आर्थिक अपराध है, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ किया गया गंभीर खिलवाड़ भी है। ईडी की इस कार्रवाई को ऐसे फर्जीवाड़ों पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ी पहल माना जा रहा है।