वाराणसी मंडल में सघन टिकट जांच अभियान, 91 बिना टिकट यात्री पकड़े गए, ₹24,965 का जुर्माना वसूला गया

वाराणसी, 05 फरवरी 2025। मंडल रेल प्रबंधक श्री आशीष जैन के निर्देशन तथा वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री शेख रहमान के नेतृत्व में वाराणसी मंडल द्वारा विभिन्न रेलखंडों पर लगातार सघन टिकट जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार, 05 फरवरी 2025 को गोरखपुर कैंट–थावे–छपरा कचहरी रेलखंड पर व्यापक स्तर पर टिकट जांच की गई। इस विशेष अभियान के तहत कप्तानगंज, पड़रौना, थावे एवं छपरा कचहरी स्टेशनों को आधार बनाकर किलाबंदी के साथ टिकट जांच की गई। जांच के दौरान छपरा–थावे सवारी गाड़ी (75103), थावे–नकहा जंगल सवारी गाड़ी (75105), गोहाटी–जम्मूतवी अमरनाथ एक्सप्रेस (15653), मथुरा–छपरा एक्सप्रेस (15110) सहित कई मेल एवं सवारी गाड़ियों में यात्रियों के टिकटों की गहनता से जांच की गई। इस अभियान का नेतृत्व मुख्य वाणिज्य निरीक्षक/थावे श्री विशाल सिंह एवं मुख्य वाणिज्य निरीक्षक कप्तानगंज श्री महेन्द्र शुक्ला ने किया। टीम में मुख्य टिकट निरीक्षक श्री मोहम्मज सईद अख्तर, टिकट निरीक्षक राजेश सिंह, अमित कुमार, श्रीमती प्रतिमा कुमारी, ममता कुमारी और संतोष कुमार सहित कुल 08 टिकट जांच कर्मचारी शामिल थे। अभियान को प्रभावी बनाने में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। छपरा, सीवान, थावे, कप्तानगंज, तमकुही रोड, पीपराइच, पड़रौना सहित अन्य स्टेशनों एवं ट्रेनों में की गई इस सघन जांच के दौरान बिना टिकट या अनियमित टिकट पर यात्रा कर रहे कुल 91 यात्रियों को पकड़ा गया। इन यात्रियों से रेल राजस्व के रूप में ₹24,965 (चौबीस हजार नौ सौ पैंसठ रुपये) का जुर्माना वसूल किया गया, जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। अभियान के दौरान संबंधित स्टेशनों के टिकट काउंटरों पर टिकट लेने के लिए यात्रियों की लंबी कतारें भी देखी गईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि टिकट जांच से यात्रियों में नियमों के पालन को लेकर जागरूकता बढ़ी है। इस अवसर पर वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री शेख रहमान ने आम यात्रियों से अपील की कि वे अपनी यात्रा के दौरान रेल नियमों का पालन करें, उचित और वैध यात्रा टिकट लेकर ही सफर करें तथा ट्रेनों और स्टेशनों पर स्वच्छता बनाए रखने में रेलवे का सहयोग करें।

संसद में टला बड़ा सियासी हादसा? पीएम मोदी के न आने के पीछे की असली वजह का खुलासा

नई दिल्ली। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण न हो पाना अब एक गंभीर सियासी बहस का मुद्दा बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का बयान सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। स्पीकर ओम बिरला ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का आग्रह किया था, क्योंकि उस समय परिस्थितियां सामान्य नहीं थीं। बिरला के मुताबिक, यदि प्रधानमंत्री उस वक्त सदन में आते, तो कोई अप्रत्याशित और गंभीर घटना घट सकती थी। स्पीकर का बयान और बढ़ता विवाद ओम बिरला के इस बयान के बाद विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं कि आखिर ऐसी कौन-सी स्थिति थी, जिसमें देश के प्रधानमंत्री का संसद में बोलना सुरक्षित नहीं माना गया। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि यह फैसला सदन की गरिमा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाना उनकी जिम्मेदारी है और किसी भी तरह की अव्यवस्था या टकराव से बचना सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। ऐसे में उन्होंने हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री को सदन में उपस्थित न होने की सलाह दी। विपक्ष का हमला इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार संसद में जवाब देने से बच रही है और प्रधानमंत्री का भाषण न होना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। उनका कहना है कि यदि हालात इतने खराब थे, तो सरकार को देश को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। राजनीतिक संदेश भी पढ़े जा रहे हैं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ सुरक्षा या अव्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा राजनीतिक संदेश भी छिपा हो सकता है। संसद के भीतर बढ़ते तनाव और तीखी बहसों के बीच यह फैसला आने वाले दिनों में सियासी चर्चा का बड़ा मुद्दा बना रहेगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और स्पीकर इस पूरे घटनाक्रम पर आगे क्या स्पष्टीकरण देते हैं और क्या प्रधानमंत्री भविष्य में इस मुद्दे पर संसद के भीतर या बाहर कोई बयान देते हैं। फिलहाल इतना तय है कि पीएम मोदी के संसद में न आने का कारण अब सिर्फ एक प्रक्रिया संबंधी फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक सवाल बन चुका है।

एक रात में इतिहास रच गया: कैसे एलन मस्क फिर बने दुनिया के सबसे अमीर इंसान

विशेष रिपोर्ट : दुनिया के कारोबारी इतिहास में कुछ रातें ऐसी होती हैं जो सब कुछ बदल देती हैं। ऐसी ही एक रात ने एलन मस्क को एक बार फिर दुनिया का सबसे अमीर आदमी बना दिया। एक बड़े कॉर्पोरेट विलय (Merger) ने न सिर्फ टेक इंडस्ट्री को हिला दिया, बल्कि मस्क की निजी संपत्ति में 84 अरब डॉलर का ज़बरदस्त उछाल ला दिया। 1.25 ट्रिलियन डॉलर की कंपनी, और बढ़ती दौलत इस ऐतिहासिक विलय के बाद संबंधित कंपनी की कुल वैल्यू 1.25 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। जैसे ही बाज़ार खुला, शेयरों में तेज़ उछाल देखने को मिला और उसका सीधा फायदा एलन मस्क को हुआ, जिनकी बड़ी हिस्सेदारी इस कंपनी में पहले से मौजूद थी। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बढ़त सामान्य नहीं थी—बल्कि यह अब तक के सबसे बड़े एक-दिवसीय वेल्थ जंप्स में से एक मानी जा रही है। एक रात में 84 अरब डॉलर कैसे जुड़े? एलन मस्क की संपत्ति का बड़ा हिस्सा नकद नहीं, बल्कि शेयरों और इक्विटी में है। जैसे ही विलय की खबर पब्लिक हुई— शेयर कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आया  निवेशकों का भरोसा कई गुना बढ़ा मार्केट कैप में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज हुई नतीजा? मस्क की नेटवर्थ में एक ही रात में 84 अरब डॉलर का इज़ाफा। अरबपतियों की रेस में फिर नंबर वन इस उछाल के साथ ही एलन मस्क ने दुनिया के अन्य दिग्गज अरबपतियों को पीछे छोड़ दिया। कुछ समय से टॉप पोज़िशन पर बदलाव देखा जा रहा था, लेकिन इस डील ने मस्क को फिर से पहले पायदान पर पहुंचा दिया। टेक इंडस्ट्री में मस्क का दबदबा एलन मस्क सिर्फ एक बिज़नेसमैन नहीं, बल्कि टेक और इनोवेशन की दुनिया में ट्रेंडसेटर माने जाते हैं। इलेक्ट्रिक कार, स्पेस टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया—हर क्षेत्र में उनकी मौजूदगी निवेशकों को आकर्षित करती है। यही वजह है कि किसी भी बड़े फैसले या विलय का असर सीधे उनके नेटवर्थ पर पड़ता है। क्या यह दौलत टिकेगी? बाज़ार विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी बड़ी वेल्थ का बने रहना बाज़ार की स्थिरता, कंपनी के प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति पर निर्भर करेगा। हालांकि, एलन मस्क का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि वह जोखिम लेते हैं—और अक्सर इतिहास रचते हैं। एक विलय, एक रात, और 84 अरब डॉलर की छलांग—एलन मस्क ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आधुनिक दौर में दौलत सिर्फ पैसे से नहीं, बल्कि विजन, टेक्नोलॉजी और बाज़ार के भरोसे से बनती है।

राजधानी की सुरक्षा पर बड़ा सवाल: 15 दिनों में 800 से ज़्यादा लोग लापता, केजरीवाल का भाजपा पर तीखा हमला

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली की कानून-व्यवस्था एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गई है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। केजरीवाल के अनुसार, जनवरी महीने के शुरुआती मात्र 15 दिनों में दिल्ली से 807 लोग लापता हो गए, जिनमें सबसे बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की बताई जा रही है। अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि दिल्ली की कानून-व्यवस्था “पूरी तरह चरमरा चुकी है” और मौजूदा हालात में आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र की भाजपा सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। “दिल्ली की कानून व्यवस्था ICU में है” — AAP का आरोप आम आदमी पार्टी ने एक बयान में कहा कि दिल्ली की कानून व्यवस्था इस समय आईसीयू में पहुंच चुकी है। पार्टी का आरोप है कि राजधानी में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार और पुलिस व्यवस्था हालात को संभालने में नाकाम साबित हो रही है। केजरीवाल ने कहा, “जब राजधानी में 15 दिनों में सैकड़ों लोग गायब हो रहे हों और उनमें महिलाएं व बच्चे शामिल हों, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है। यह साफ दिखाता है कि दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है।” महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर गहराता संकट AAP नेताओं का कहना है कि लापता लोगों में महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक होना, दिल्ली की सामाजिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। पार्टी ने सवाल उठाया कि आखिर राजधानी में महिलाएं और बच्चे सुरक्षित क्यों नहीं हैं और लापता मामलों में त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। भाजपा पर राजनीतिक हमला तेज इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर सीधा राजनीतिक हमला बोला है। AAP का कहना है कि दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन है, इसलिए कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी भाजपा की बनती है। पार्टी ने मांग की है कि सरकार इन मामलों पर जवाबदेही तय करे और लापता लोगों की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाए। इस बयान के बाद राजधानी की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक गूंज सकता है। अब देखना होगा कि भाजपा और दिल्ली पुलिस इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और लापता लोगों के मामलों में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

छपरा में जलजमाव पर प्रशासन सख्त, डीएम ने खनुआ नाला व शहर के ड्रेनेज सिस्टम का किया व्यापक निरीक्षण

छपरा । छपरा शहर में जलनिकासी की गंभीर समस्या को लेकर जिला प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। जिलाधिकारी सारण श्री वैभव श्रीवास्तव ने आज दिनांक 04 फरवरी 2026 को छपरा नगर निगम और सदर प्रखंड अंतर्गत खनुआ नाला समेत शहर के सभी छोटे-बड़े नालों और उनके आउटलेट का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में नगर आयुक्त, छपरा नगर निगम, वरीय परियोजना अभियंता बुडको एवं उनकी टीम, सहायक अभियंता पथ प्रमंडल छपरा, अंचलाधिकारी सदर तथा अमीन शामिल रहे। निरीक्षण के दौरान डीएम ने नालों की स्थिति, अतिक्रमण, जल प्रवाह और निर्माण कार्यों की प्रगति का बारीकी से जायजा लिया। निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी ने उप समाहर्ता भूमि सुधार सदर एवं अंचलाधिकारी सदर को साढ़ा ढाला ओवरब्रिज के नीचे से जटही पोखरा, वहां से दूधिया पोखरा होते हुए तेल नदी तक तथा दूधिया पोखरा से बग्घी नाला तक नक्शे में दर्शाए गए सभी छोटे-बड़े नालों की विधिवत मापी कराने का निर्देश दिया। डीएम ने स्पष्ट किया कि मापी के बाद 15 दिनों के भीतर पिलर या अन्य स्थायी सामग्री से मार्किंग अनिवार्य रूप से कराई जाए, ताकि भविष्य में अतिक्रमण की कोई गुंजाइश न रहे। डीएम ने वरीय परियोजना अभियंता, बुडको को छपरा नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत पटेल छात्रावास से आईडीएस पब्लिक स्कूल तक शेष 200 मीटर खनुआ नाला निर्माण कार्य एक सप्ताह के अंदर शुरू करने का सख्त निर्देश दिया। इसके साथ ही खनुआ नाला से जुड़ने वाले सभी प्राथमिक नालों के जंक्शन पॉइंट पर स्क्रीन लगाने और जंक्शन चैंबर निर्माण का आदेश दिया गया, ताकि प्लास्टिक और ठोस कचरा मुख्य नाले में प्रवेश न कर सके। शहर की दीर्घकालिक समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त, छपरा नगर निगम को पूरे शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए मास्टर ड्रेनेज प्लान तैयार करने हेतु नगर विकास एवं आवास विभाग से परामर्शी (कंसल्टेंट) की नियुक्ति के लिए विभाग को अनुरोध पत्र भेजने का निर्देश दिया। वहीं कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल छपरा को नगर निगम क्षेत्र में उनके द्वारा निर्मित सभी कलवर्ट की मरम्मति हेतु अविलंब प्राक्कलन (एस्टिमेट) तैयार करने का आदेश दिया गया, ताकि बरसात से पहले आवश्यक सुधार कार्य पूरे किए जा सकें। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट जल प्रबंधन को लेकर निदेशक, डीआरडीए एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी सदर को SLWM योजना के तहत दूधिया पोखरा में Waste Water Stabilisation Pond स्थापित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही दूधिया पोखरा से तेल नदी तक नाला निर्माण के लिए मनरेगा, पंचायत समिति एवं जिला परिषद से छोटी-छोटी योजनाएं लेकर आबादी वाले क्षेत्रों में कवर नाला और शेष हिस्सों में खुला नाला निर्माण कराने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने को कहा गया। निरीक्षण के दौरान डीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जलनिकासी व्यवस्था में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और तय समय-सीमा में सभी निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। जिला प्रशासन का यह कदम छपरा शहर को जलजमाव की समस्या से राहत दिलाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सारण में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई, 76 लाख से अधिक का जुर्माना; 3 ट्रक और 5 ट्रैक्टर जब्त

छपरा (सारण)। सारण जिले में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। जिला खनन पदाधिकारी सारण श्री सर्वेश कुमार संभव के नेतृत्व में दिनांक 2–3 फरवरी की मध्य रात्रि एवं 3 फरवरी को स्थानीय थाना के सहयोग से जिले के विभिन्न इलाकों में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान के तहत दरिहरा थाना क्षेत्र समेत कई स्थानों पर अवैध रूप से खनिज के खनन और परिवहन में लिप्त वाहनों को पकड़ा गया। जांच के दौरान बिना वैध ई-चालान, बिना खननसॉफ्ट रजिस्ट्रेशन और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के कई मामले सामने आए। कार्रवाई का विस्तृत विवरण 1. अवैध परिवहन पर शिकंजा दरिहरा थाना क्षेत्र में बिना वैध परिवहन चालान के बालू ले जा रहे 5 ट्रैक्टरों को जब्त किया गया। सभी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई। अधिरोपित दंड: 5.30 लाख रुपये 2. बिना ई-चालान 10 चक्का वाहन जब्त एक 10 चक्का वाहन बिना ई-चालान के खनिज परिवहन करते हुए पकड़ा गया। वाहन को जब्त कर प्राथमिकी दर्ज की गई। अधिरोपित दंड: 8.25 लाख रुपये 3. दरिहरा बालूघाट पर बड़ी कार्रवाई दरिहरा बालूघाट की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं— बिना खननसॉफ्ट रजिस्ट्रेशन (KS No.) के चालान निर्गत करते पाए गए 02 वाहन, दंड:2 लाख रुपये बालूघाट पर समुचित प्रकाश व्यवस्था नहीं पाई गई ,दंड:50 हजार रुपये जांच में लगभग 3000 CFT अवैध उजला बालू जब्त किया गया। साथ ही, ईसी (Environmental Clearance) क्षेत्र से बाहर एवं निर्धारित गहराई से अधिक खनन किए जाने की पुष्टि हुई। अधिरोपित दंड: 62.46 लाख रुपये कार्रवाई का सारांश प्राथमिकी दर्ज:01 जब्त वाहन:3 ट्रक, 5 ट्रैक्टर अवैध भंडारण: 3000 CFT उजला बालू कुल अधिरोपित दंड: 76.01 लाख रुपये प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन और खनिज माफियाओं के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। जिला खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है, वहीं आम लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है।

रिश्ता टूटा, बाल बदले: ब्रेकअप के बाद महिलाओं के हेयरकट में छुपी मन की कहानी

ब्रेकअप किसी भी इंसान के लिए भावनात्मक झटका होता है, लेकिन महिलाओं के मामले में अक्सर एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिलता है—वे अपने बाल कटवा लेती हैं। यह कदम देखने में भले ही फैशन या अचानक लिया गया फैसला लगे, लेकिन मनोविज्ञान की नजर से देखें तो इसके पीछे कई गहरे और अर्थपूर्ण कारण छिपे होते हैं। 1. कंट्रोल वापस पाने की कोशिश ब्रेकअप के बाद सबसे बड़ी भावना होती है—नियंत्रण खो देने की। रिश्ता टूटते ही ऐसा लगता है जैसे ज़िंदगी हाथ से फिसल गई हो। ऐसे में हेयरकट एक ऐसा फैसला होता है, जिस पर पूरा कंट्रोल महिला के हाथ में होता है। बाल कटवाना एक संकेत होता है: “मेरी ज़िंदगी पर अब भी मेरा अधिकार है।” 2. पुराने रिश्ते से जुड़ी यादों को काटना बाल सिर्फ बाल नहीं होते, वे यादों का हिस्सा भी बन जाते हैं—किसी की पसंद, किसी की तारीफ, किसी के साथ बिताए पल। जब रिश्ता खत्म होता है, तो बाल कटवाना प्रतीक बन जाता है उस अतीत से दूरी बनाने का। यह मानो खुद से कहा गया वाक्य हो—“अब आगे बढ़ना है।” 3. नई पहचान की तलाश रिश्ते में रहते हुए कई बार महिलाएं अपनी पहचान को “हम” में बदल लेती हैं। ब्रेकअप के बाद “मैं” को फिर से खोजने की जरूरत महसूस होती है। नया हेयरकट एक नई पहचान की शुरुआत करता है—नई सोच, नया आत्मविश्वास और नई ऊर्जा के साथ। 4. भावनात्मक दर्द को शारीरिक बदलाव में बदलना दर्द जब शब्दों में नहीं निकल पाता, तो वह किसी और रूप में बाहर आता है। बाल कटवाना उस भावनात्मक पीड़ा को एक दृश्य, महसूस करने योग्य बदलाव में बदल देता है। इससे मन हल्का होता है, जैसे दिल का बोझ थोड़ा कम हो गया हो। 5. खुद को दोबारा आकर्षक महसूस करने की चाह ब्रेकअप के बाद आत्मविश्वास अक्सर डगमगा जाता है। नया हेयरस्टाइल, आईने में खुद को नए अंदाज़ में देखना—यह सब आत्म-सम्मान को दोबारा मजबूत करने का तरीका होता है। यह खुद से कहा गया एक संदेश होता है: “मैं अब भी खूबसूरत हूं, मजबूत हूं।” 6. समाज और संस्कृति में जड़ें फिल्मों, कहानियों और पॉप कल्चर में भी ब्रेकअप के बाद हेयरकट को “रीबूट मोमेंट” की तरह दिखाया गया है। यह सांस्कृतिक रूप से भी महिलाओं के दिमाग में बैठा हुआ संकेत है कि बदलाव की शुरुआत यहीं से होती है। ब्रेकअप के बाद बाल कटवाना कोई सतही या हल्का फैसला नहीं होता। यह दर्द, आज़ादी, आत्म-खोज और नई शुरुआत का मिश्रण होता है। यह एक शांत लेकिन ताकतवर घोषणा होती है—“जो टूट गया, उसने मुझे खत्म नहीं किया।” नया हेयरकट सिर्फ लुक नहीं बदलता, कई बार वह ज़िंदगी का नजरिया ही बदल देता है।

मणिपुर: वाई. खेमचंद सिंह ने संभाली मुख्यमंत्री की कमान, नेमचा किपगेन बनीं उपमुख्यमंत्री

इंफाल। मणिपुर में सत्ता परिवर्तन के साथ नई सरकार का गठन हो गया है। वरिष्ठ भाजपा नेता वाई. खेमचंद सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि कुकी समुदाय की प्रमुख नेता नेमचा किपगेन को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। इस राजनीतिक घटनाक्रम को राज्य की स्थिरता और समावेशी प्रतिनिधित्व की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। शपथग्रहण समारोह में भाजपा के वरिष्ठ नेता, गठबंधन सहयोगी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य में विकास, कानून-व्यवस्था और सामुदायिक सौहार्द को प्राथमिकता देने का संदेश दिया गया। मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने अपने पहले संबोधन में कहा कि सरकार “संवाद, विश्वास और विकास” के रास्ते पर आगे बढ़ेगी और सभी समुदायों के हितों की रक्षा करेगी। उपमुख्यमंत्री बनीं नेमचा किपगेन की नियुक्ति को राजनीतिक संतुलन और सामाजिक समावेशन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उनके जिम्मे आदिवासी क्षेत्रों के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम विभागों पर विशेष ध्यान देने की बात कही जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती शांति बहाली, आर्थिक गतिविधियों को गति देना और प्रशासनिक भरोसा कायम करना होगी। आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल विस्तार और नीतिगत प्राथमिकताओं की घोषणा के साथ सरकार की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की सीधी दख़ल, कहा– “पश्चिम बंगाल को किया जा रहा है टारगेट”

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच चल रहा टकराव अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े तक पहुँच चुका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका पर आज शीर्ष अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने एक असामान्य लेकिन राजनीतिक रूप से अहम कदम उठाते हुए खुद अपना पक्ष रखने की अनुमति मांगी। सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने अदालत से कहा कि “हमें इंसाफ नहीं मिल रहा है। पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के नाम पर राज्य की चुनावी व्यवस्था में दख़ल दिया जा रहा है और यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए ख़तरा बन सकता है। क्या है मामला? चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की गहन समीक्षा बताया जा रहा है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार का आरोप है कि इस प्रक्रिया के ज़रिए वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा सकती है, जिससे आगामी चुनावों पर असर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल किसी अंतरिम आदेश से परहेज़ किया, लेकिन याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए अगली तारीख 9 फरवरी तय कर दी है। अदालत ने संकेत दिए कि अगली सुनवाई में चुनाव आयोग से भी विस्तृत जवाब माँगा जा सकता है। राजनीतिक मायने यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक निहितार्थ भी रखता है। विपक्ष का कहना है कि केंद्र की संस्थाओं का इस्तेमाल गैर-भाजपा शासित राज्यों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जबकि चुनाव आयोग इन आरोपों को पहले ही खारिज करता रहा है। अब सबकी निगाहें 9 फरवरी पर टिकी हैं, जब यह तय हो सकता है कि SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है और क्या पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह विवाद नया मोड़ लेता है।

गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की रहस्यमयी मौत, ऑनलाइन गेम कनेक्शन की जांच में जुटी पुलिस

गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश): गाजियाबाद के टीला मोड थाना क्षेत्र स्थित भारत सिटी सोसायटी में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां 9वीं मंजिल से गिरकर तीन सगी नाबालिग बहनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक बहनों की उम्र क्रमशः 16 वर्ष, 14 वर्ष और 12 वर्ष बताई जा रही है। घटना सोमवार देर रात करीब 2 बजे की है, जिसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, देर रात अचानक तेज आवाज सुनाई दी, जिसके बाद सोसायटी के नीचे लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक तीनों बहनों की मौत हो चुकी थी। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। ऑनलाइन गेम एंगल की जांच पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि तीनों बहनें एक ऑनलाइन टास्क-बेस्ड कोरियन लवर गेम खेला करती थीं। आशंका जताई जा रही है कि इस गेम का घटना से कोई संबंध हो सकता है, हालांकि पुलिस ने फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल फोन, चैट हिस्ट्री और ऑनलाइन गतिविधियों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी तरह का मानसिक दबाव, उकसावा या चुनौती इसमें शामिल थी या नहीं। घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का कहना है कि तीनों बहनें पढ़ाई में ठीक थीं और घर में किसी तरह के गंभीर विवाद की जानकारी उन्हें नहीं थी। ऐसे में सामूहिक खुदकुशी की वजह क्या रही, यह सवाल सभी को परेशान कर रहा है। टीला मोड थाना पुलिस के अनुसार, सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। आत्महत्या, दुर्घटना या किसी अन्य कारण—किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं किसी बाहरी व्यक्ति या ऑनलाइन ग्रुप का प्रभाव तो नहीं था। यह घटना एक बार फिर नाबालिग बच्चों में ऑनलाइन गेम्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता और अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के साथ उनसे खुलकर संवाद करना बेहद जरूरी है। फिलहाल, पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि सच्चाई सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।